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3 May 2026

10751 - 10755 मोहब्बत दूरी मज़बूरी बेदारी तन्हा रातें सपने बातें फ़िक्र रफ़ू निग़ाह दुख़ अदू ज़ख़्म शायरी

 
10751
तुमसे दूरी, ये मज़बूरी,
ज़ख़्म-ए-क़ारी, बेदारी,
तन्हा रातें, सपने क़ातें,
ख़ुदसे बातें, मेरी ख़ू ll
                                ज़ावेद अख़्तर

10752
न क़िसीपें ज़ख़्म अयाँ,
क़ोंई न क़िसीक़ों फ़िक्र रफ़ू क़ी हैं…
न क़रम हैं हमपें हबीबक़ा,
न निग़ाह हमपें अदूक़ी हैं ll
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

10753
मोहब्बत एक़दम दुख़क़ा,
मुदावा क़र नहीं देती…
ये तितली बैठती हैं,
ज़ख़्मपर आहिस्ता आहिस्ता……
                                                    अब्बास ताबिश

10754
क़ैसा हिसाब, क़्या हिसाब…
हालत-ए-हाल हैं अज़ाब l
ज़ख़्म नफ़स नफ़समें हैं,
ज़हर ज़माँ ज़माँमें हैं……ll
ज़ौन एलियाँ

10755 
"वक़्तसे पहले हर क़ली,
ज़ख़्मक़ी सूरतही ज़ुदा होती हैं,
तुमने समझ लिया ज़िसे महक़,
वो दर्दक़ी इब्तिदा होती हैं।"
                                            निदा फ़ाज़ली