1 June 2026

10891 - 10895 दिल रिश्ता क़मज़ोर ड़ोर सयाना बिग़ड़ तड़प अनसुने क़फ़न चेहरा यार दीदार ख़ामोशी शायरी

 
10891
रिश्तोंक़ी ड़ोर,
तब क़मज़ोर होने लग़ती हैं…
ज़ब दोनों तरफ़से,
ख़ामोशी होने लग़ती हैं !

10892
ज़ब ख़ामोशी होती हैं,
तब दिलक़ी आवाज़ तेज़ होती हैं…
सब सुनते हैं, पर शायद हम ही,
अनसुने रह ज़ाते हैं !

10893
क़फ़न उठा क़र ना दिख़ाना,
उसक़ो चेहरा मेरा,
क़्योंक़ि उसक़ो भी पता चले क़ि,
यारक़ा दीदार ना हो तो 
क़ितनी तड़प होती हैं ?
                                             अल्लामा इक़बाल

10894
लोग़ क़हते हैं क़ि,
वो बड़ा सयाना हैं
उन्हें क़्या पता,
ख़ामोशीसे उसक़ा रिश्ता पुराना हैं !

10895 
बोलनेसे ज़ब,
बात बिग़ड़ ज़ाए हर बार…
तब रिश्तोंमें ख़ामोशी ही,
भली लग़ती हैं यार !

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