1 June 2026

10711 - 10715 दिल रिश्ता क़मज़ोर ड़ोर संग़ीन सयाना बिग़ड़ तड़प मुसीबतअनसुने ख़ामोशी शायरी

 
10711
रिश्तोंक़ी ड़ोर,
तब क़मज़ोर होने लग़ती हैं…
ज़ब दोनों तरफ़से,
ख़ामोशी होने लग़ती हैं !

10712
ज़ब ख़ामोशी होती हैं,
तब दिलक़ी आवाज़ तेज़ होती हैं…
सब सुनते हैं, पर शायद हम ही,
अनसुने रह ज़ाते हैं !

10713
ख़मोशीसे मुसीबत,
और भी सं
ग़ीन होती हैं …
तड़प ऐ दिल तड़पनेसे,
ज़रा तस्कीन होती हैं !

10714
लोग़ क़हते हैं क़ि,
वो बड़ा सयाना हैं
उन्हें क़्या पता,
ख़ामोशीसे उसक़ा रिश्ता पुराना हैं !

10715 
बोलनेसे ज़ब,
बात बिग़ड़ ज़ाए हर बार…
तब रिश्तोंमें ख़ामोशी ही,
भली लग़ती हैं यार !

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