23 June 2026

10986 - 10990 पाज़ेब घुँघरू झंक़ार प्यार सुख़न अक़ड़ लब फ़रामोश ग़म साबित लाज़वाब फ़िक़र फ़िक़्र शायरी

 
10986
वो मेरी फ़िक़्र तो क़रता हैं,
मग़र प्यार नहीं…
यानी पाज़ेबमें घुँघरू तो हैं, 
झंक़ार नहीं ll

10987
सुख़न यानी लबोंक़ा फ़न,
सुख़न-वर यानी इक़ पुर-फ़न l
सुख़न-वर ईज़द अच्छा था,
क़ि आदम या फ़िर अहरीमन ll
ज़ौन एलिया

10988
क़िसीने क़्या ख़ूब क़हा हैं...!
अक़ड़ तो सबमें होती हैं
झुक़ता वहीं हैं ज़िसे...
क़िसीक़ी फ़िक़र होती हैं ll

10989
क्यूँ ज़िया-क़ार बनूँ,
सूद-फ़रामोश रहूँ…
फ़िक़्र-ए-फ़र्दा न क़रूँ,
महव-ए-ग़म-ए-दोश रहूँ ll

                                   अल्लामा इक़बाल

10990
उसेभी मालूम हैं...
क़ि लाज़वाब हैं हम...!
फ़िक़्र हैं सबक़ों,
ख़ुदक़ों सहीं साबित क़रनेक़ी...ll

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