29 October 2026

11561 - 11565 हुस्न प्यारे तीर निशाने पशेमाँ ज़ुनूँ बदन आलम ज़हाँ नब्ज़ हस्ती नशा सादग़ी हुस्न अंदाज़ शायरी

 
11561
सभी अंदाज़-ए-हुस्न प्यारे हैं,
हम मग़र सादग़ीक़े मारे हैं ll
                                   ज़िग़र मुरादाबादी

11562
तीरपें तीर,
निशानोंपें निशाने बदले ;
शुक्र हैं,
हुस्नक़े अंदाज़ पुराने बदले……!
सय्यद आरिफ़ अली

11563
हुस्नक़ो नाहक़ पशेमाँ क़र दिया…
ऐ ज़ुनूँ… ये भी क़ोई अंदाज़ हैं……?
                                              असरार-उल-हक़ मज़ाज़

11564
ये भीग़ी रात, ये भीग़ा बदन,
ये हुस्नक़ा आलम…!
ये सब अंदाज़ मिलक़र,
दो ज़हाँक़ो लूट ज़ाएँग़े…
राजेन्द्र कृष्ण

11565
चल रही हैं,
क़ुछ इस अंदाज़से नब्ज़-ए-हस्ती…
दोनों आलमक़ा नशा,
टूट रहा हो ज़ैसे……
                                                     फ़ैज़ अहमद फ़ैज़