28 October 2026

11556 - 11560 सज़ा चाँद झलक़ा हमराज़ रंग़ नवाज़िश निग़ह क़िस्मत बिज़ली चराग़ तअल्लुक़ अंदाज़ शायरी

 
11556
यूँ सज़ा चाँद,
क़ि झलक़ा तिरे अंदाज़क़ा रंग़…!
यूँ फ़ज़ा महक़ी,
क़ि बदला मिरे हमराज़क़ा रंग़……!
                                                      फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

11557
ये रंग़,
ये अंदाज़-ए-नवाज़िश तो वहीं हैं l
शायद क़ि क़हीं पहलेभी,
तू मुझसे मिला हो…ll
हरी चंद अख़्तर

11558
निग़ह आलूदा-ए-अंदाज़-ए-अफ़रंग़,
तबीअत ग़ज़नवी क़िस्मत अयाज़ी…ll
                                                       अल्लामा इक़बाल

11559
न क़र अफ़रंग़क़ा अंदाज़ा,
उसक़ी ताबनाक़ीसे…
क़ि बिज़लीक़े चराग़ोंसे हैं,
इस ज़ौहरक़ी बर्राक़ी……
अल्लामा इक़बाल

11560
बे-तअल्लुक़ भी हैं,
हर रंग़ हर अंदाज़से हम…
वो त'अल्लुक़ भी हैं,
क़ाएम ज़ो क़भी था तुझसे……
                                             शहज़ाद अहमद