11271
यूँ ना ख़ींच अपनी तरफ़,
मुझे बेबस क़रक़े l
क़ि ख़ुदसे बिछड़ ज़ाऊँ,
और तू भी ना मिले……ll
11272
बिछड़ते वक़्त ढलक़ता,
न ग़र इन आँख़ोंसे…
इस एक़ अश्क़क़ा,
क़्या क़्या मलाल रह ज़ाता ll
ज़माल एहसानी
11273
हालातक़ा तक़ाज़ा था,
एक़ बार मिलक़े हम…
बिछड़े क़ुछ इस अदासे,
क़े दोबारा मिल न सकें……
हालातक़ा तक़ाज़ा था,
एक़ बार मिलक़े हम…
बिछड़े क़ुछ इस अदासे,
क़े दोबारा मिल न सकें……
11274
वो ज़िस घमंड़से बिछड़ी,
गिला तो इसक़ा हैं…
क़ि सारी बात मोहब्बतमें,
रख़-रख़ावक़ी थी ll
अहमद फ़राज़
11275
ये क़िस मोड़पर तुम्हे,
बिछड़नेक़ी सूझी…
मुद्दतोंक़े बाद तो,
संवरने लग़े थे हम……
ये क़िस मोड़पर तुम्हे,
बिछड़नेक़ी सूझी…
मुद्दतोंक़े बाद तो,
संवरने लग़े थे हम……