11521
ज़मानेक़े अंदाज़ बदले ग़ए,
नया राग़ हैं साज़ बदले ग़ए…!
अल्लामा इक़बाल
11522
सदियोंसे ज़मानेक़ा,
ये अंदाज़ रहा हैं…
सायाभी ज़ुदा हो ग़या,
ज़ब वक़्त पड़ा हैं ll
ज़मील मुरस्सापुरी
11523
अंदाज़-ए-ज़माना क़हता हैं,
फ़िर मौज़-ए-हवा रुख़ बदलेग़ी l
अँग़ारोंसे ग़ुलशन फ़ूटेग़ा,
शबनमसे शरारे निक़लेंग़े ll
अलीम मसरूर
अंदाज़-ए-ज़माना क़हता हैं,
फ़िर मौज़-ए-हवा रुख़ बदलेग़ी l
अँग़ारोंसे ग़ुलशन फ़ूटेग़ा,
शबनमसे शरारे निक़लेंग़े ll
अलीम मसरूर
11524
झूठक़ा अंदाज़ ज़मानेक़ो भाता हैं,
सच क़हाँ क़िसीक़ो नज़र आता हैं…?
11525
बहुत अपना अंदाज़ था ला-उबाली ;
क़भी थे ज़लाली, क़भी थे ज़माली ll
आबिदुल्लाह ग़ाज़ी
बहुत अपना अंदाज़ था ला-उबाली ;
क़भी थे ज़लाली, क़भी थे ज़माली ll
आबिदुल्लाह ग़ाज़ी