2 October 2026

11431 - 11435 फ़ूल याद दिल अज़ब साँस नज़दीक़ दामन हाथ नाज़ पर्दे ग़म हुस्न राह रस्म अंदाज़ शायरी

 
11431
फ़ूल सूँघे ज़ाने,
क़्या याद आ ग़या…
दिल अज़ब अंदाज़से,
लहरा ग़या……
                             अख़्तर अंसारी

11432
दिलरुबाईक़ा ये,
अंदाज़ क़िसे आता था…?
तू हैं ज़िस साँसमें नज़दीक़,
उसी साँसमें दूर……
क़ैफ़ी आज़मी

11433
दिल पिसा ज़ाता हैं,
उनक़ी चालक़े अंदाज़से…
हाथमें दामन लिए आते हैं,
वो क़िस नाज़से……
                                    भारतेंदु हरिश्चंद्र

11434
देख़िए क़िस हुस्नसे,
पोशीदा ग़मक़ा राज़ हैं…
तीर मेरे दिलमें हैं,
पर्देमें तीर-अंदाज़ हैं……!
रशीद लख़नवी

11435
क़ि उसक़े हँसनेक़ा अंदाज़,
ये बताता हैं…
हुई नहीं हैं,
म-ए-दिलसे रस्म-ओ-राह अभी…ll
                                                     नरेश क़ुमार शाद