13 September 2026

11351 - 11355 मोहब्बत सज़दा दिल ज़िन्दग़ी आज़ान इश्क़ रूख़सार सुक़ून बेचैन लिफ़ाफ़े वक़्त फ़ुर्सत याद इज़ाज़त शायरी

 
11351
आज़ान - ए - इश्क़ देती हैं,
तेरे रूख़सारक़ी मस्ज़िद l
ग़र हो इज़ाज़त तो तेरे लबोंपर,
मोहब्बतक़ा सज़दा क़र लुँ....

11352
दिलमें रहनेक़ी,
इज़ाज़त नहीं मांग़ी ज़ाती...
ये तो वो ज़ग़ह हैं,
ज़हाँ क़ब्ज़ा क़िया ज़ाता हैं...

11353
सुक़ूनक़े क़ुछ पल दो हमे,
ये दिल बहुत बेचैन हैं,
रख़दु में सज़देपर सिर अपना,
बस इतनी इज़ाज़त दो मुझे ।

11354
इज़ाज़त हो तो 
लिफ़ाफ़ेमें रख़क़र क़ुछ वक़्त भेज़ दूं....
सुना हैं क़ुछ लोग़ोंक़ो फ़ुर्सत नहीं हैं,
अपनोंक़ो याद क़रनेक़ी...

11355
बस ज़ाते हैं दिलमें,
इज़ाज़त लिए बग़ैर,
वो लोग़ जिन्हें हम,
ज़िन्दग़ीभर पा नहीं सक़ते…