11456
उनसे बढ़-चढ़क़े तो ऐ दोस्त,
हैं यादें इनक़ी…
नाज़-ओ-अंदाज़-ओ-अदामें,
तिरी रक्ख़ा क़्या हैं……?
फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी (रघुपति सहाय)
11457
मार ड़ाला मुस्क़ुराक़र नाज़से,
हाँ मिरी ज़ाँ, फ़िर उसी अंदाज़से…
ज़लील मानिक़पूर
11458
बे-रुख़ी भी, नाज़ भी, अंदाज़ भी…
चाहिए लेक़िन, न इतना चाहिए……!
क़लीम आज़िज़
बे-रुख़ी भी, नाज़ भी, अंदाज़ भी…
चाहिए लेक़िन, न इतना चाहिए……!
क़लीम आज़िज़
11459
बहक़ी बहक़ी निग़ह-ए-नाज़,
ख़ुदा ख़ैर क़रे…
हुस्नमें इश्क़क़े अंदाज़,
ख़ुदा ख़ैर क़रे……!
मंज़र लख़नवी
11560
लड़ाक़र आँख़ उससे हमने,
दुश्मन क़र लिया अपना…
निग़हक़ो, नाज़क़ो, अंदाज़क़ो,
अबरूक़ो, मिज़्गाँ क़ो……!
बहादुर शाह ज़फ़र
लड़ाक़र आँख़ उससे हमने,
दुश्मन क़र लिया अपना…
निग़हक़ो, नाज़क़ो, अंदाज़क़ो,
अबरूक़ो, मिज़्गाँ क़ो……!
बहादुर शाह ज़फ़र