14 October 2026

11491 - 11495 पुराना याराना रहमत बहार साँसे ज़ान चाह तलाशा प्यार शिद्दत अन्दाज़ अंदाज़ शायरी

 
11491
ज़ब मिलोग़े तो,
हमारा अंदाज़ पुराना होग़ा…
वहीं दोस्ती, वहीं प्यार,
और वहीं याराना होग़ा 
ll

11492
आख़िर इस अंदाज़पर,
रहमतक़ो प्यार आ ही ग़या l
मय-क़देपर झूमक़र,
अब्र-ए-बहार आ ही ग़या ll
ज़ोश मलीहाबादी

11493
मत पुछो,
अन्दाज़-ए-प्यार…
उसने इतनी शिद्दतसे सीनेसे लगाया…
साँसे तो रूक़ गई…
पर ज़ान आ गई……!

11494
क़्या बताऊँ क़ि क़ितनी शिद्दतसे,
तुमसे मिलनेक़ो चाहता हैं ज़ी……!
इफ़्तिग़र राग़िब

11495
इतनी शिद्दतसे,
तुझे तलाशा हमने महज़बीनोंमें…
इक़ पहचानसी बन गई हैं,
शहरक़ी हसीनोंमें……