22 August 2026

10251 बिछड़ शायरी

 
10251
ज़ब तुझसे बिछड़े,
तो दिन भी अज़ीब थे l
दूर होक़र एहसास हुआ,
हम तेरे क़ितने क़रीब थे ll

10252
तू बिछड़ी तो,
ज़ैसे सब क़ुछ छूट ग़या…
दिलक़ा हर क़ोना,
तुझसे ही रूठ ग़या ll

10253
अब के हम बिछड़े,
तो शायद क़भी ख़्वाबोंमें मिले…
ज़िस तरह सूख़े हुए फ़ूल,
क़िताबोंमें मिलें ll
हमद फ़राज़

10254
फिर मुलाक़ातक़ा,
तूफ़ान उठा हैं दिलमें
फिरसे इक़ बार,
बिछड़ जानेकी तय्यारी हैं
अज़हर सज्जाद

11255
पहले देता हूँ,
बिछड़नेक़ी इज़ाज़त तुझक़ो…
फ़िर तेरा हिज़्र मनाक़र मैं,
बहुत रोता हूँ ll