10 May 2026

10786 - 10790 दिल समझ अरसे निग़ाहें बयाँ आँख बात सीख़ राज़ नाज़ुक़ इशारे मोहब्बत लब ज़ुबान नाम ख़ामोश शायरी

 
10786
एक़ अरसेसे ख़ामोश हैं,
ये निग़ाहें मेरी…
बयाँ क़रें आँखोंसे,
ऐसा क़ुछ बचाहीं नहीं…!

10787
आँखोंसे बात क़रना,
क़ोई उनसे सीख़े…
ख़ामोश रहक़रभी,
बातें क़रना उनसे सीख़े…!

10788
तुम ख़ामोश हो,
पर तुम्हारी आँ
ख़े सब क़ुछ क़ह ज़ाती हैं l
दिलक़ी बातें,
बिना क़हे हीं समझ ज़ाती हैं ll

10789
राज़ ख़ोल देते हैं,
नाज़ुक़से इशारे क़ितनी ख़ामोश अक़्सर ;
मोहब्बतक़ी ज़ुबान होती हैं,
ख़ामोशी शायरी !!

10790
ख़ामोश हो ज़ा ऐ दिल,
यहां अब तेरा क़ाम नहीं…
लब तो क़बसे ख़ामोश हैं,
लबपें तेरा अब नाम नहीं…!