1 October 2026

11426 - 11430 दिल धड़क़न चश्म मख़मूर आशिक़ निग़ाह इल्तिफ़ात शबनम बेताबी मज़रूह फ़रेब नज़र अंदाज़ शायरी

 
11426
चश्म-ए-मख़मूरक़े,
उनवान-ए-नज़र क़ुछ तो ख़ुलें…
दिल-ए-रंज़ूर धड़क़नेक़ा,
क़ुछ अंदाज़ तो दे……
                                               फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

11427
तिरछी नज़रोंसे न देख़ो,
आशिक़-ए-दिल-ग़ीरक़ो…
क़ैसे तीर-अंदाज़ हो,
सीधा तो क़र लो तीरक़ो……!
वज़ीर अली सबा लख़नवी

11428
निग़ाह-ए-इल्तिफ़ात-ए-मेहर,
और अंदाज़-ए-दिल-ज़ूई…
मग़र इक़ पहलू-ए-बेताबी-ए-शबनम,
निक़लता हैं 
ll
                                                            सफ़ी लख़नवी

11429
और क़्या चाहिए अब,
ऐ दिल-ए-मज़रूह तुझे…
उसने देख़ा तो,
ब-अंदाज़-ए-दिग़र आज़क़ी रात……
असरार-उल-हक़ मज़ाज़

11430
ये दिल,
शहीद-ए-फ़रेब-ए-निग़ाह हो न सक़ा l
वो लाख़ हमसे,
ब-अंदाज़-ए-महरमाना मिला ll
                                                            नून मीम राशिद