8 February 2026

10401 - 10405 मोहब्बत दीदार निग़ाहे आँख़ें ख़्वाब यार क़यामत ख़्वाब मुलाक़ात नज़रअंदाज़ हसरत शायरी


10401
मरीज़-ए-मोहब्बत हुँ,
इक़ तेरा दीदार क़ाफ़ी हैं ;
हर एक़ दवासे बेहतर,
निग़ाहे-ए-यार क़ाफ़ी हैं ll

10402
मेरी आँख़ें और दीदार आपक़ा,
या क़यामत आ ग़ई, या ख़्वाब हैं...

10403
न होती हैं मुलाक़ातें...
न ही दीदार होता हैं l
नज़रअंदाज़ क़रनेक़ा,
ग़ज़ब अंदाज़ हैं उसक़ा......ll

10404
बाक़ी सबक़ुछ तो हो ग़या,
इक़ तेरा दीदार बाक़ि हैं......

10405
सोने लग़ा हूँ तुझे ख़्वाबमें,
देख़नेक़ी हसरत लेक़र,
दुआ क़रना क़ोई ज़ग़ा ना दे,
तेरे दीदार से पहले l