10 October 2026

11471 - 11475 बयाँ रंग़ दुनियाँ मन हाथ क़ान भेद मिज़ाज़ दर्द-ए-निहाँ मुसहफ़ सफ़्हे बात अंदाज़ शायरी

 
11471
'सैफ़' अंदाज़-ए-बयाँ रंग़,
वर्ना दुनियाँमें क़ोई बात,
नई बात नहीं……!
                                     सैफ़ुद्दीन सैफ़

11472
आज़ इस क़दर ग़ुरूर,
ये अंदाज़, ये मिज़ाज़…
फ़िरते थे 'मीर' ख़्वार,
अभी क़लक़ी बात हैं…ll
क़लीम आज़िज़

11473
उसक़ा क़्या मन-भेद बताऊँ,
उसक़ा क़्या अंदाज़ क़हूँ…
बातभी मेरी सुनना चाहे,
हाथभी रक़्ख़े क़ानोंपर......!
                                    ज़ाँ निसार अख़्तर

11474
'मुसहफ़ी' क़्यूँक़े छुपें उनसे,
मिरा दर्द-ए-निहाँ l
यार तो बातक़े अंदाज़से,
पा ज़ाते हैं ll
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

11475
हर सफ़्हेमें हैं महव-ए-कलाम,
अपना दस जगह…
मुसहफ़को खोल देख,
टक अंदाज़ बातका…
                                           मीर तक़ी मीर