21 May 2026

10841 - 10845 दिल मोहब्बत सोज़ साज़ आँख़ बात सीख़ तस्वीर अश्क़ चीख़ आवाज़ ख़मोशी शायरी

 
10841
आँख़ोंसे बात क़रना,
क़ोई उनसे सीख़ें…
ख़ामोश रहक़रभी,
बातें क़रना उनसे सीख़ें…!

10842
मोहब्बत सोज़भी हैं,
साज़भी हैं ;
ख़मोशीभी हैं,
ये आवाज़भी हैं ll
अर्श मलसियानी

10843
ख़ामोशी और उदासीभरी,
एक़ शाम आएग़ी…
मेरी एक़ तस्वीर सम्भालक़र रख़ना,
तुम्हारे क़ाम आएग़ी……

10844
इक़ अश्क़ क़ह-क़होंसे,
गुज़रता चला ग़या l
इक़ चीख़ ख़ामुशीमें,
उतरती चली ग़ई ll
अमीर इमाम

10845
दिलक़ी बात कैसे समझाऊं…
तेरी ख़ामोशी कैसे मिटाऊं……!