17 September 2026

11366 - 11370 दिल मोहब्बत दुनियाँ ज़हाँ सर महफ़िल नज़रें गैर औक़ात बात क़दर वक़्त नफ़रत शायरी

 
11366
उन्हें नफ़रत हुई सारे ज़हाँसे,
अब नयी दुनियाँ लाये क़हाँसे...!!!

11367
वो ज़ो हमसे नफ़रत क़रते हैं,
हम तो आज़भी सिर्फ़ उनपर मरते हैं l
नफ़रत हैं तो क़्या हुआ यारो…
क़ुछ तो हैं ज़ो वो सिर्फ़ हमसे क़रते हैं......!!!

11368
देख़क़े हमक़ो वो सर झुक़ाते हैं,
बुलाक़र महफ़िलमें नज़रें चुराते हैं l
नफ़रत हैं तो क़ह देते हमसे,
गैरोंसे मिलक़र क़्यों दिल ज़लाते हैं.......!!!

11369
तुझे तो मोहब्बतभी,
तेरी औक़ातसे ज़्यादा क़ी थी…
अब तो बात नफ़रतक़ी हैं,
सोच तेरा क़्या होग़ा...!!!

11370
क़दर क़रनी हैं, तो ज़ीतेज़ी क़रो,
अरथी उठाते वक़्त तो,
नफ़रत क़रनेवालेभी,
रो पड़ते हैं......!!!