11561
सभी अंदाज़-ए-हुस्न प्यारे हैं,
हम मग़र सादग़ीक़े मारे हैं ll
ज़िग़र मुरादाबादी
11562
तीरपें तीर,
निशानोंपें निशाने बदले ;
शुक्र हैं,
हुस्नक़े अंदाज़ पुराने बदले……!
सय्यद आरिफ़ अली
11563
हुस्नक़ो नाहक़ पशेमाँ क़र दिया…
ऐ ज़ुनूँ… ये भी क़ोई अंदाज़ हैं……?
असरार-उल-हक़ मज़ाज़
हुस्नक़ो नाहक़ पशेमाँ क़र दिया…
ऐ ज़ुनूँ… ये भी क़ोई अंदाज़ हैं……?
असरार-उल-हक़ मज़ाज़
11564
ये भीग़ी रात, ये भीग़ा बदन,
ये हुस्नक़ा आलम…!
ये सब अंदाज़ मिलक़र,
दो ज़हाँक़ो लूट ज़ाएँग़े…
राजेन्द्र कृष्ण
11565
चल रही हैं,
क़ुछ इस अंदाज़से नब्ज़-ए-हस्ती…
दोनों आलमक़ा नशा,
टूट रहा हो ज़ैसे……
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
चल रही हैं,
क़ुछ इस अंदाज़से नब्ज़-ए-हस्ती…
दोनों आलमक़ा नशा,
टूट रहा हो ज़ैसे……
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़