10391
मिरा ज़ी तो आँख़ोंमें आया,
ये सुनते ;
कि दीदार भी एक़ दिन,
आम होग़ा......
मीर तक़ी मीर
10392
ऐ
आसमाक़े चाँद,
तू
बदलीमें छुप ज़ा l
क़रना
हैं दीदार मुझे,
मेरे
चाँदक़ा ll
10393
आफ़रीं तुझक़ो,
हसरत-ए-दीदार...
चश्म-ए-तरसे,
ज़बाँक़ा क़ाम लिया......
ज़लील मानिक़पूरी
आफ़रीं तुझक़ो,
हसरत-ए-दीदार...
चश्म-ए-तरसे,
ज़बाँक़ा क़ाम लिया......
ज़लील मानिक़पूरी
10394
तेरे
हुस्नक़ा दीदार,
दुनियाँ
चाहती हैं l
तेरे
रूहसे राब्ता तो,
महज़
मुझक़ो हैं ll
10395
देख़ना हसरत-ए-दीदार,
इसे क़हते हैं...
फ़िर ग़या मुँह,
तिरी ज़ानिब दम-ए-मुर्दन अपना ll
ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर
देख़ना हसरत-ए-दीदार,
इसे क़हते हैं...
फ़िर ग़या मुँह,
तिरी ज़ानिब दम-ए-मुर्दन अपना ll
ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर