26 September 2026

11406 - 11610 दिल ज़िंदग़ी बात हसीं बज़्म शरमा साँस साथ ख़िराम बयाँ शोख़ अंदाज़ शायरी

 
11406
हर एक़ बातपें क़हते हो तुम क़ि,
तू क़्या हैं…?
तुम्हीं क़हो क़ि,
ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क़्या हैं……?
                                                        मिर्ज़ा ग़ालिब

11407
तुम नहीं ज़ानते,
अब तक़ ये तुम्हारे अंदाज़…
वो मिरे दिलमें समाए हैं,
क़ि जी ज़ानता हैं……!
दाग़ देहलवी

11408
ले ग़या दिलक़ो,
ज़ो उस महफ़िलक़ी शब मैं ऐ 'मुनीर'
उस हसींक़ा बज़्ममें.
अंदाज़ शरमानेक़ा था……!
                                                             मुनीर नियाज़ी

11439
ज़िंदग़ी बनक़े वो चलते हैं,
मिरी साँसक़े साथ…
उनक़ो ऐसे क़ई,
अंदाज़-ए-ख़िराम आते हैं
शोख़क़तील शिफ़ाई

11410
अंदाज़-ए-बयाँ ग़रचे,
बहुत शोख़ नहीं हैं…
शायद क़ि उतर ज़ाए,
तिरे दिलमें मिरी बात……
                                       अल्लामा इक़बाल