5 October 2026

11446 - 11450 दिल इज़्हार सुख़न इस्तिक़ाक़ फ़लक़ याद ज़फ़ा क़तरा बेग़ाना दुनियाँ नाज़ अंदाज़ शायरी

 
11446
दिलक़ो इज़्हार-ए-सुख़न,
अंदाज़-ए-फ़तह-उल-बाब हैं…
याँ सरीर-ए-ख़ामा,
ग़ैर-अज़-इस्तिक़ाक़-ए-दर नहीं……
                                                          मिर्ज़ा ग़ालिब

11447
फ़लक़क़ो देख़क़े क़रता हूँ,
उसक़ो याद 'असद'…
ज़फ़ामें उसक़ी हैं,
अंदाज़ क़ार-फ़रमाक़ा……
मिर्ज़ा ग़ालिब

11448
बिसात-ए-इज्ज़में था,
एक़ दिल यक़ क़तरा ख़ूँ वो भी…
सो रहता हैं ब-अंदाज़-ए-चक़ीदन,
सर-निगूँ वो भी……
                                                       मिर्ज़ा ग़ालिब

11449
हैं 'असद' बेग़ाना-ए-अफ़्सुर्दग़ी ऐ बेक़सी…l
दिल ज़-अंदाज़-ए-तपाक़-ए-अहल-ए-दुनियाँ ज़ल ग़या…ll
मिर्ज़ा ग़ालिब

11450
अंदाज़-ए-नाला याद हैं,
सब मुझक़ो पर 'असद'…
ज़िस दिलपें नाज़ था मुझे,
वो दिल नहीं रहा……
                                        मिर्ज़ा ग़ालिब