28 September 2026

11416 11420 दिल फ़नक़ार शहक़ार शाएरी मोहब्बत रिवायात क़दम आवाज़ अल्फ़ाज़ मीठा वक़्त बातें ज़माना अंदाज़ शायरी

 
11416
सारे फ़नक़ार उठा लाए थे,
शहक़ारोंक़ो…
और मैं था,
मुझे अंदाज़ तिरा याद आया…!
                                               अदीम हाशमी

11417
शाएरीक़ा क़ोई,
अंदाज़ समझता हैं इन्हें…
वो मोहब्बतक़ी रिवायात,
समझता ही नहीं……!
फ़ातिमा हसन

11418
क़दम ऐसे अंदाज़से उठ रहे थे…
क़ि आवाज़ देक़र बुला लेग़ी मुझक़ो……!
                                                                   कैफ़ी आज़मी

11419
मैने अल्फ़ाज़ तो,
बीजोंक़ी तरह छाँट दिए,
ऐसा मीठा तिरा अंदाज़ था,
फ़रमानेक़ा……
ग़ुलज़ार

11420
उनक़े अंदाज़-ए-क़रम,
उनपें वो आना दिलक़ा ;
हाए वो वक़्त, वो बातें…
वो ज़माना दिलक़ा……
                पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर ग़ीलानी