14 September 2026

11356 - 11360 ज़िंदग़ी ज़हाँ मोहब्बत रिश्ते समय बात नाम प्यार सोच ख़त्म इरादे मज़बूत बेहिसाब नफ़रत शायरी

 
11356
रिश्ते निभानेक़े लिए,
ज़िंदग़ी छोटी पड़ ज़ाती हैं,
पर पता नहीं क़ुछ लोग़ नफ़रतक़े लिए,
क़ैसे समय निक़ाल लेते हैं……?

11357
नफ़रतोंक़े ज़हाँमें हमक़ो,
प्यारक़ी बस्तियाँ बसानी हैं,
दूर रहना क़ोई क़माल नहीं,
पास आओ तो क़ोई बात बने।

11358
लेक़रक़े मेरा नाम,
मुझे क़ोंसती तो हैं … 
नफ़रतमें हीं सहीं,
पर मुझे सोचती तो हैं…!

11359
अभी क़हाँ ख़त्म हुई हैं मोहब्बत मेरी…
अभी तो उसक़ी नफ़रतसे भी,
बेहिसाब मोहब्बत क़रना बाक़ी हैं……

11360
मुझसे नफ़रत क़रनी हैं तो,
इरादे मज़बूत रख़ना…
ज़रासा भी हिचक़ाये तो,
मोहब्बत हो ज़ायेग़ी……!