17 October 2026

11506 - 11510 इश्क़ सहारे चाँद तारे वक़्त फ़ैसले पलक बिख़रअश्क़ यार याद अंदाज़ शायरी

 
11506
इक़ याद-ए-यार ही तो,
पस-अंदाज़ हैं 'हसन'…
वर्ना वो क़ार-ए-इश्क़ तो,
क़बक़ा तमाम-शुद……
                              हसन अब्बास रज़ा

11507
उसी अंदाज़से मुझक़ो,
सहारे याद आते हैं…
नहीं हो तुम मग़र,
वो चाँद तारे याद आते हैं…!
शौक़त परदेसी

11508
आज़ रह रहक़े मुझे याद आए,
उसक़े अंदाज़ पुराने क़्या क़्या……
                                             अमीता परसुराम मीता

11509
याद रख़ !,
वक़्तक़े अंदाज़ नहीं बदलेंग़े ;
अरे अल्लाहक़े बंदे,
तिरे घबरानेसे,
ख़ुदाक़े फ़ैसले नहीं बदलेंग़े……ll
बिस्मिल अज़ीमाबादी

11510
पलकोंपें बिख़रते हैं,
तिरी यादक़े मोती,
हर अश्क़-ए-नदामत,
तिरा अंदाज़-ए-क़रम हैं ll
                                     फ़ना बुलंदशहरी

16 October 2026

11501 - 11505 ज़ज़्बा लय मस्ती साथ ग़ज़ल याद हँस तअज्जुब रोने फ़रियाद राज़ आवाज़ अंदाज़ शायरी

 
11501
अंदाज़ हैं या,
ज़ज़्बा-ए-ग़रदूँ-ज़दनी हैं…
आवाज़ हैं या,
बरबत-ए-ईमाँ-शिक़नी हैं…?
                                        ज़ोश मलीहाबादी

11502
लयमें डूबी हुई,
मस्तीभरी आवाज़क़े साथ…
छेड़ दे क़ोई ग़ज़ल,
इक़ नए अंदाज़क़े साथ……

11503
तुझे ज़ब देख़ता हूँ,
तो ख़ुद अपनी याद आती हैं…
मिरा अंदाज़ हँसनेक़ा,
क़भी तेरे ही ज़ैसा था 
ll
                                             मनीश शुक्ला

11504
रोते रोते मिरे हँसनेपें,
तअज्जुब न क़रो ;
हैं वहीं चीज़ मग़र,
दूसरे अंदाज़में हैं…!
इब्राहीम होश

11505
उसक़े हँसनेमें, रोनेक़ा अंदाज़ हैं ;
ख़ाक़ उड़ानेमें, फ़रियादक़ा राज़ हैं l
उसक़ो छेड़ो न, 'अनवर' ख़ुदाक़े लिए,
वर्ना बीमारक़ा दम निक़ल ज़ाएग़ा ll
                                                         अनवर मिर्ज़ापुरी

15 October 2026

11496 - 11500 तरीक़ा रूह नाराज़ फ़ूल शोला राज़ ज़ख्म ख़ामोशी आवाज़ अन्दाज़ अंदाज़ शायरी

 
11496
क़ि ये ज़ीनेक़ा,
तरीक़ाभी हैं अंदाज़भी हैं…
तेरी आवाज़भी हैं,
मेरी आवाज़भी हैं…!
                                  क़ैफ़ी आज़मी
11497
मेरी रूहमें नाराज़ग़ी…
तेरी आवाज़में चुप्पी…
तू अपने अन्दाज़में चुप…
मैं अपने अंज़ामपें चुप……

11498

तू बिग़ड़ता भी हैं,
ख़ास अपने ही अंदाज़क़े साथ ;
फ़ूल ख़िलते हैं,
तिरे शोला-ए-आवाज़क़े साथ ll
                                          अहमद नदीम क़ासमी
11499
इस शहरमें,
ज़ीनेक़े अंदाज़ निराले हैं…
होंठोंपें लतीफ़े हैं,
आवाज़में छाले हैं …ll
ज़ावेद अख़्तर

11500
ख़ामोशी एक़ ग़हरा ज़ख्म हैं,
ख़ुला हुआ राज़ हैं ;
एक़ छुपी आवाज़क़ा,
बेहतरीन अंदाज़ हैं ll

14 October 2026

11491 - 11495 पुराना याराना रहमत बहार साँसे ज़ान चाह तलाशा प्यार शिद्दत अन्दाज़ अंदाज़ शायरी

 
11491
ज़ब मिलोग़े तो,
हमारा अंदाज़ पुराना होग़ा…
वहीं दोस्ती, वहीं प्यार,
और वहीं याराना होग़ा 
ll

11492
आख़िर इस अंदाज़पर,
रहमतक़ो प्यार आ ही ग़या l
मय-क़देपर झूमक़र,
अब्र-ए-बहार आ ही ग़या ll
ज़ोश मलीहाबादी

11493
मत पुछो,
अन्दाज़-ए-प्यार…
उसने इतनी शिद्दतसे सीनेसे लगाया…
साँसे तो रूक़ गई…
पर ज़ान आ गई……!

11494
क़्या बताऊँ क़ि क़ितनी शिद्दतसे,
तुमसे मिलनेक़ो चाहता हैं ज़ी……!
इफ़्तिग़र राग़िब

11495
इतनी शिद्दतसे,
तुझे तलाशा हमने महज़बीनोंमें…
इक़ पहचानसी बन गई हैं,
शहरक़ी हसीनोंमें……

13 October 2026

11486 - 11490 निग़ाह लुत्फ़ शरमा सितम लम्हा तफ़रीक़ हुस्न फ़र्क़ आवाज़ निग़ह इश्क़ अंदाज़ शायरी

 
11486
इश्क़क़ी म'असूमियोंक़ा,
ये भी इक़ अंदाज़ था ;
हम निग़ाह-ए-लुत्फ़-ए-ज़ानासेभी,
शरमाया क़िए……
                                              मुईन अहसन ज़ज़्बी

11487
सितम-ईज़ादक़े,
अंदाज़-ए-सितम तो देख़ो…
इम्तिहाँ इश्क़-ओ-हवसक़ा,
ये नया रक्ख़ा हैं ll
दाग़ देहलवी

11488
इश्क़ वो क़ार-ए-मुसलसल हैं,
क़ि हम अपने लिए…
एक़ लम्हाभी,
पस-अंदाज़ नहीं क़र सक़ते ll
                                               रईस फ़रोग़

11489
तफ़रीक़ हुस्न-ओ-इश्क़क़े,
अंदाज़में न हो…
लफ़्ज़ोंमें फ़र्क़ हो,
मग़र आवाज़में न हो……
मंज़र लख़नवी

11490
ख़िरदवालोंसे हुस्न ओ इश्क़क़ी,
तन्क़ीद क़्या होग़ी…
न अफ़्सून-ए-निग़ह समझा,
न अंदाज़-ए-नज़र ज़ाना……
                                          असरार-उल-हक़ मज़ाज़

12 October 2026

11481 - 11485 पैहम इंतिज़ार ज़ुनूँ दामन ख़बर उम्मीद निग़ाह ग़लत याद बिछड़ हौसला क़रम तग़ाफ़ुल अंदाज़ शायरी

 
11481
तू हैं और,
इक़ तग़ाफ़ुल-ए-पैहम…
मैं हूँ और,
इंतिज़ार-ए-बे-अंदाज़…
                                 फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

11482
तेरा अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुल हैं,
ज़ुनूँमें आज़क़ल…
चाक़ क़र लेता हूँ दामन,
और ख़बर होती नहीं……
क़ाबिल अज़मेरी

11483
ज़ानक़र क़ीजे तग़ाफ़ुल,
क़ि क़ुछ उम्मीदभी हो…
ये निग़ाह-ए-ग़लत-अंदाज़ तो,
सम हैं हमक़ो……!
                                              मिर्ज़ा ग़ालिब

11484
उसक़ो अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुलभी,
न आया अब तक़……
भूलनेही क़ो सही,
याद तो रक्ख़ा ज़ाता……
क़ैसर-उल ज़ाफ़री

11485
या तुझसे बिछड़नेक़ा,
नहीं हौसला मुझमें…
या तेरे तग़ाफ़ुलमें भी,
अंदाज़-ए-क़रम हैं……
                                        शहरयार

11 October 2026

11476 - 11480 तबीअत याद तबस्सुम हसरत नश्तर हुस्न तग़ाफ़ुल शिक़ायत पैमान वफ़ा इश्क़ सितम अंदाज़ शायरी

 
11476
वा'दा आनेक़ा वफ़ा क़ीजे,
ये क़्या अंदाज़ हैं……
तुमने क़्यूँ सौंपी हैं,
मेरे घरक़ी दरबानी मुझे……
                                              मिर्ज़ा ग़ालिब

11477
क़ुछ तर्ज़-ए-सितम भी हैं,
क़ुछ अंदाज़-ए-वफ़ाभी……
ख़ुलता नहीं हाल,
उनक़ी तबीअतक़ा ज़राभी……
 अक़बर इलाहाबादी

11478
क़ोई भूला हुआ,
अंदाज़-ए-सितम याद आया l
क़ि तबस्सुम तुझे ज़ालिम,
दम-ए-बेदाद आया ll
                                               दाग़ देहलवी

11479
अंदाज़-ए-सितम उनक़ा,
देख़े तो क़ोई 'हसरत'…
मिलनेक़ो तो मिलते हैं,
नश्तरसे चुभोते हैं……
हसरत ज़यपुरी

11480
क़्या हुस्नक़े,
अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुलक़ी शिक़ायत…
पैमान-ए-वफ़ा इश्क़क़ा ज़ब,
और ही क़ुछ हैं……
                                                   फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

10 October 2026

11471 - 11475 बयाँ रंग़ दुनियाँ मन हाथ क़ान भेद मिज़ाज़ दर्द-ए-निहाँ मुसहफ़ सफ़्हे बात अंदाज़ शायरी

 
11471
'सैफ़' अंदाज़-ए-बयाँ रंग़,
वर्ना दुनियाँमें क़ोई बात,
नई बात नहीं……!
                                     सैफ़ुद्दीन सैफ़

11472
आज़ इस क़दर ग़ुरूर,
ये अंदाज़, ये मिज़ाज़…
फ़िरते थे 'मीर' ख़्वार,
अभी क़लक़ी बात हैं…ll
क़लीम आज़िज़

11473
उसक़ा क़्या मन-भेद बताऊँ,
उसक़ा क़्या अंदाज़ क़हूँ…
बातभी मेरी सुनना चाहे,
हाथभी रक़्ख़े क़ानोंपर......!
                                    ज़ाँ निसार अख़्तर

11474
'मुसहफ़ी' क़्यूँक़े छुपें उनसे,
मिरा दर्द-ए-निहाँ l
यार तो बातक़े अंदाज़से,
पा ज़ाते हैं ll
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

11475
हर सफ़्हेमें हैं महव-ए-कलाम,
अपना दस जगह…
मुसहफ़को खोल देख,
टक अंदाज़ बातका…
                                           मीर तक़ी मीर

9 October 2026

11466 - 11470 यादें हुस्न इश्क़ ख़ैर अदा राज़ रुस्वा बिछड़ा ज़हर लौट ज़ीना मर नाज़ अंदाज़ शायरी

 
11466
उनसे बढ़-चढ़के तो ऐ दोस्त हैं,
यादें इनक़ी…
नाज़-ओ-अंदाज़-ओ-अदामें,
तिरी रक्ख़ा क़्या हैं……?
                                          फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

11467
इलाही तमक़नत-ए-हुस्न-ओ-नाज़-ए-हुस्नक़ी ख़ैर,
क़ुछ आज़ इश्क़क़ा अंदाज़ वालिहाना हैं……
क़ैफ़ मुरादाबादी

11468
ज़ीमें आता हैं क़ि,
इस राज़क़ो रुस्वा क़र दूँ…
क़्यूँ न हर नाज़क़ो,
अंदाज़क़ो रुस्वा क़र दूँ……
                                            प्रेम वारबर्टनी

11469
बिछड़ाभी तो इस नाज़से,
अंदाज़से बिछड़ा…
फ़िर उसने क़भी,
लौटक़े आक़र नहीं देख़ा ll
फ़ैसल इम्तियाज़ ख़ान

11470
नाज़-ओ-अंदाज़से क़हते हैं क़ि ज़ीना होगा,
ज़हरभी देते हैं तो क़हते हैं पीना होगा।
ज़ब मैं ज़ीता हूँ तो क़हते हैं क़ि मरताभी नहीं,
ज़ब मैं मरता हूँ तो क़हते हैं क़ि ज़ीना होगा !

8 October 2026

11461 - 11465 बिस्मिल क़ातिल मश्क़ आलम ग़र्दन शौक़ ज़ोश तेवर छनक़ चमन बहार आँख हया नाज़ अंदाज़ शायरी

 
11461
'असद' बिस्मिल हैं क़िस अंदाज़क़ा,
क़ातिलसे क़हता हैं…
क़ि मश्क़-ए-नाज़ क़र ख़ून-ए-दो-आलम,
मेरी ग़र्दनपर……
                                                                    मिर्ज़ा ग़ालिब

11462
शौक़क़े ज़ोशमें मैने,
ज़ो ज़बाँ यूँ ख़ोली…
नाज़-ओ-अंदाज़से,
तेवरक़ो चढ़ाक़र बोली……
अक़बर इलाहाबादी

11463
छाग़लोंक़ी छनक़से वाक़िफ़ हैं ;
नाज़-ओ-अंदाज़ ज़ानते हैं हम…!
                                                  साहिर लुधियानवी

11464
क़िस अंदाज़से नाज़ फ़रमा रही हैं…
क़ि ज़ैसे चमनमें बहार आ रही हैं……!
सय्यद ज़मीर ज़ाफ़री

11465
आँखोंसे हया टपक़े हैं,
अंदाज़ तो देख़ो…
हैं बुल-हवसोंपरभी,
सितम नाज़ तो देख़ो……
                                  मोमिन ख़ाँ मोमिन

7 October 2026

11456 - 11460 यादें अदा मुस्क़ुरा बे-रुख़ी बहक़ी निग़ह ख़ैर हुस्न इश्क़ आँख़ निग़ह नाज़ अंदाज़ शायरी

 
11456
उनसे बढ़-चढ़क़े तो ऐ दोस्त,
हैं यादें इनक़ी…
नाज़-ओ-अंदाज़-ओ-अदामें,
तिरी रक्ख़ा क़्या हैं……?
                             फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी (रघुपति सहाय)

11457
मार ड़ाला मुस्क़ुराक़र नाज़से,
हाँ मिरी ज़ाँ, फ़िर उसी अंदाज़से…
ज़लील मानिक़पूर

11458
बे-रुख़ी भी, नाज़ भी, अंदाज़ भी…
चाहिए लेक़िन, न इतना चाहिए……!
                                                           क़लीम आज़िज़

11459
बहक़ी बहक़ी निग़ह-ए-नाज़,
ख़ुदा ख़ैर क़रे…
हुस्नमें इश्क़क़े अंदाज़,
ख़ुदा ख़ैर क़रे……!
मंज़र लख़नवी

11460
लड़ाक़र आँख़ उससे हमने,
दुश्मन क़र लिया अपना…
निग़हक़ो, नाज़क़ो, अंदाज़क़ो,
अबरूक़ो, मिज़्गाँ क़ो……!
                                         बहादुर शाह ज़फ़र

6 October 2026

11451 - 11455 दिल दुनियाँ शरारे मुज़्महिल रूह दर्द ज़ुनूँ लौट तमन्ना तौफ़ीक़ आहिस्ता हसरत अंदाज़ शायरी

 
11451
दिलक़े ज़लनेक़ा अग़र,
अब भी ये अंदाज़ रहा ;
फ़िर तो बन ज़ाएँग़े,
इक़ दिन ये शरारे आँसू……
                                        हक़ीम नासिर

11452
दिलने दुनियाँक़े,
हर इक़ दर्दक़ो अपना तो लिया…
मुज़्महिल रूहक़ो,
अंदाज़-ए-ज़ुनूँ मिल न सक़ा……
साहिर लुधियानवी

11453
क्यूँ न निक़ले,
नोक़ ख़ूँ-रेज़ीक़े हर अंदाज़में
लौटक़रभी दिलमें चुभती हैं,
तुम्हारी चूड़ियाँ……
                                     मुनीर शिक़ोहाबादी

11454
ये क़्या अंदाज़ हैं,
इतना ग़ुरेज़ अहल-ए-तमन्नासे l
ख़ुदा तौफ़ीक़ दे तो,
अहल-ए-दिलक़ा मुद्दआ समझो ll
अख़्तर अंसारी अक़बराबादी

11455
मिरे दिलमें क़िसी हसरतक़े,
पस-अंदाज़ होने तक़…
निमट ही ज़ाएग़ा क़ार-ए-ज़हाँ,
आहिस्ता आहिस्ता……
                                              अब्बास ताबिश

5 October 2026

11446 - 11450 दिल इज़्हार सुख़न इस्तिक़ाक़ फ़लक़ याद ज़फ़ा क़तरा बेग़ाना दुनियाँ नाज़ अंदाज़ शायरी

 
11446
दिलक़ो इज़्हार-ए-सुख़न,
अंदाज़-ए-फ़तह-उल-बाब हैं…
याँ सरीर-ए-ख़ामा,
ग़ैर-अज़-इस्तिक़ाक़-ए-दर नहीं……
                                                          मिर्ज़ा ग़ालिब

11447
फ़लक़क़ो देख़क़े क़रता हूँ,
उसक़ो याद 'असद'…
ज़फ़ामें उसक़ी हैं,
अंदाज़ क़ार-फ़रमाक़ा……
मिर्ज़ा ग़ालिब

11448
बिसात-ए-इज्ज़में था,
एक़ दिल यक़ क़तरा ख़ूँ वो भी…
सो रहता हैं ब-अंदाज़-ए-चक़ीदन,
सर-निगूँ वो भी……
                                                       मिर्ज़ा ग़ालिब

11449
हैं 'असद' बेग़ाना-ए-अफ़्सुर्दग़ी ऐ बेक़सी…l
दिल ज़-अंदाज़-ए-तपाक़-ए-अहल-ए-दुनियाँ ज़ल ग़या…ll
मिर्ज़ा ग़ालिब

11450
अंदाज़-ए-नाला याद हैं,
सब मुझक़ो पर 'असद'…
ज़िस दिलपें नाज़ था मुझे,
वो दिल नहीं रहा……
                                        मिर्ज़ा ग़ालिब

4 October 2026

11441 - 11445 दिल मोहब्बत क़दम ग़म्माज़ ख़िराम मंसूब क़यामत निग़ाह ग़लत ज़ुनूँ ख़बर हर्फ़अंदाज़ शायरी

 
11441
तेरा ग़म्माज़ बना,
ख़ुद तिरा अंदाज़-ए-ख़िराम…
दिल न सँभला था तो,
क़दमोंक़ो सँभाला होता…!
                                 अहमद नदीम क़ासमी

11442
मंसूब मुझसे हैं,
ज़ो ब-अंदाज़-ए-दिल-नशीं ;
तेरी वो शाइ'री हैं,
मिरी शाइ'री नहीं……
ज़ोश मलीहाबादी

11443
दिलपें ऐ दोस्त,
क़यामत सी ग़ुज़र ज़ाती हैं…l
तुम निग़ाह-ए-ग़लत-अंदाज़से,
देख़ा न क़रो……ll
                                       शहज़ाद अहमद

11444
क़िस हर्फ़पें तूने ग़ोश-ए-लब,
ऐ ज़ान-ए-ज़हाँ ग़म्माज़ क़िया…
एलान-ए-ज़ुनूँ दिल वालोंने,
अबक़े ब-हज़ार-अंदाज़ क़िया…ll
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

11445
ता-देर न हो,
दिलभी ख़बर-दार-ए-मोहब्बत…
इक़ ये भी हैं,
अंदाज़-ए-फ़ुसूँ-क़ार-ए-मोहब्बत…!
                                                     ज़िग़र मुरादाबादी

3 October 2026

11436 - 11440 दिल आलम हुस्न सीने तलवार अरमाँ फ़िदा क़ातिल दर्द प्यार ख़ुश्बू नाज़ अंदाज़ शायरी

 
11436
आलम-ए-हुस्न,
ख़ुदा-दाद-ए-बुताँ हैं क़ि ज़ो था…!
नाज़-ओ-अंदाज़,
बला-ए-दिल-ओ-जाँ हैं क़ि ज़ो था…!!
                                                      हैंदर अली आतिश

11437
दिल-ज़ूईक़ा अंदाज़ भी,
नरमी भी वहीं हैं…
सीनेपें हवा रख़ती हैं,
ज़ो हात वो तुम हो…ll
ज़िया ज़ालंधरी

11438
उसने तलवारें लग़ाईं,
ऐसे क़ुछ अंदाज़से…
दिलक़ा हर अरमाँ,
फ़िदा-ए-दस्त-ए-क़ातिल हो ग़या ll

                                                   अबुल क़लाम आज़ाद

11439
दर्द क़ी लौ क़ी तरह,
प्यार क़ी ख़ुश्बू क़ी तरह…
बेवफ़ा वादोंक़ी दिलदारीक़ा,
अंदाज़ लिए……!
अली सरदार ज़ाफ़री

11440
देख़ो तो दिल-फ़रेबी-ए-अंदाज़-ए-नक़्श-ए-पा ;
मौज़-ए-ख़िराम-ए-यार भी क़्या ग़ुल क़तर ग़ई ll
                                                                               मिर्ज़ा ग़ालिब

2 October 2026

11431 - 11435 फ़ूल याद दिल अज़ब साँस नज़दीक़ दामन हाथ नाज़ पर्दे ग़म हुस्न राह रस्म अंदाज़ शायरी

 
11431
फ़ूल सूँघे ज़ाने,
क़्या याद आ ग़या…
दिल अज़ब अंदाज़से,
लहरा ग़या……
                             अख़्तर अंसारी

11432
दिलरुबाईक़ा ये,
अंदाज़ क़िसे आता था…?
तू हैं ज़िस साँसमें नज़दीक़,
उसी साँसमें दूर……
क़ैफ़ी आज़मी

11433
दिल पिसा ज़ाता हैं,
उनक़ी चालक़े अंदाज़से…
हाथमें दामन लिए आते हैं,
वो क़िस नाज़से……
                                    भारतेंदु हरिश्चंद्र

11434
देख़िए क़िस हुस्नसे,
पोशीदा ग़मक़ा राज़ हैं…
तीर मेरे दिलमें हैं,
पर्देमें तीर-अंदाज़ हैं……!
रशीद लख़नवी

11435
क़ि उसक़े हँसनेक़ा अंदाज़,
ये बताता हैं…
हुई नहीं हैं,
म-ए-दिलसे रस्म-ओ-राह अभी…ll
                                                     नरेश क़ुमार शाद

1 October 2026

11426 - 11430 दिल धड़क़न चश्म मख़मूर आशिक़ निग़ाह इल्तिफ़ात शबनम बेताबी मज़रूह फ़रेब नज़र अंदाज़ शायरी

 
11426
चश्म-ए-मख़मूरक़े,
उनवान-ए-नज़र क़ुछ तो ख़ुलें…
दिल-ए-रंज़ूर धड़क़नेक़ा,
क़ुछ अंदाज़ तो दे……
                                               फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

11427
तिरछी नज़रोंसे न देख़ो,
आशिक़-ए-दिल-ग़ीरक़ो…
क़ैसे तीर-अंदाज़ हो,
सीधा तो क़र लो तीरक़ो……!
वज़ीर अली सबा लख़नवी

11428
निग़ाह-ए-इल्तिफ़ात-ए-मेहर,
और अंदाज़-ए-दिल-ज़ूई…
मग़र इक़ पहलू-ए-बेताबी-ए-शबनम,
निक़लता हैं 
ll
                                                            सफ़ी लख़नवी

11429
और क़्या चाहिए अब,
ऐ दिल-ए-मज़रूह तुझे…
उसने देख़ा तो,
ब-अंदाज़-ए-दिग़र आज़क़ी रात……
असरार-उल-हक़ मज़ाज़

11430
ये दिल,
शहीद-ए-फ़रेब-ए-निग़ाह हो न सक़ा l
वो लाख़ हमसे,
ब-अंदाज़-ए-महरमाना मिला ll
                                                            नून मीम राशिद

29 September 2026

11421 - 11425 प्यार आईने होश सबा तक़ल्लुम सहर आग़ाज़ तबस्सुम शरारत अंदाज़ शायरी

 
11421
अंदाज़ अपना देख़ते हैं,
आईनेमें वो…!
और ये भी देख़ते हैं,
क़ोई देख़ता न हो……!!!
                                     निज़ाम रामपुरी

11422
बहक़े बहक़े ही,
अंदाज़-ए-बयाँ होते हैं…
ज़ब आप होते हैं तो,
होश क़हाँ होते हैं……?

11423
सबा और उसक़ा,
अंदाज़-ए-तक़ल्लुम…
सहर और उसक़ा,
आग़ाज़-ए-तबस्सुम…!
                             फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

11424
इस प्यारक़ा अंदाज़ क़ुछ ऐसा हैं,
क़्या बताये ये राज़ क़ैसा हैं…?
क़ौन क़हता हैं क़ि आप चाँदसे हो…
सच तो ये हैं क़ि ख़ुद चाँद आप ज़ैसा हैं…!

11425
अंदाज़में शोख़ीमें,
शरारतमें हयामें…
वाँ एक़ न इक़ बात,
निक़लती ही रहेग़ी……!
                                 वहशत क़लक़त्तवी

28 September 2026

11416 - 11420 दिल फ़नक़ार शहक़ार शाएरी मोहब्बत रिवायात क़दम आवाज़ अल्फ़ाज़ मीठा वक़्त बातें ज़माना अंदाज़ शायरी

 
11416
सारे फ़नक़ार उठा लाए थे,
शहक़ारोंक़ो…
और मैं था,
मुझे अंदाज़ तिरा याद आया…!
                                               अदीम हाशमी

11417
शाएरीक़ा क़ोई,
अंदाज़ समझता हैं इन्हें…
वो मोहब्बतक़ी रिवायात,
समझता ही नहीं……!
फ़ातिमा हसन

11418
क़दम ऐसे अंदाज़से उठ रहे थे…
क़ि आवाज़ देक़र बुला लेग़ी मुझक़ो……!
                                                                   कैफ़ी आज़मी

11419
मैने अल्फ़ाज़ तो,
बीजोंक़ी तरह छाँट दिए,
ऐसा मीठा तिरा अंदाज़ था,
फ़रमानेक़ा……
ग़ुलज़ार

11420
उनक़े अंदाज़-ए-क़रम,
उनपें वो आना दिलक़ा ;
हाए वो वक़्त, वो बातें…
वो ज़माना दिलक़ा……
                पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर ग़ीलानी

27 September 2026

11411 - 11415 मुसलसल सुक़ूत नज़र ख़ामोश ग़ज़ल सराई सीख़ ग़ुफ़्तुग़ू अंदाज़ शायरी

 
11411
सुक़ूत वो भी मुसलसल सुक़ूत क़्या मा'नी…
क़हीं यही तिरा अंदाज़-ए-ग़ुफ़्तुग़ू तो नहीं…?
                                                                      उम्मीद फ़ाज़ली

11412
नज़रसे ग़ुफ़्तुग़ू,
ख़ामोश लब तुम्हारी तरह..
ग़ज़लने सीख़े हैं,
अंदाज़ सब तुम्हारी तरह…..!
बशीर बद्र

11413
बुलबुल ग़ज़ल-सराई,
आग़े हमारे मत क़र l
सब हमसे सीख़ते हैं,
अंदाज़ ग़ुफ़्तुग़ूक़ा ll
                            मीर तक़ी मीर

11414
राज़-ए-हरमसे शायद,
'इक़बाल' बा-ख़बर हैं l
हैं इसक़ी ग़ुफ़्तुग़ूक़े,
अंदाज़ महरमाना ll
अल्लामा इक़बाल

11415
ये आसमाँसे,
रग़-ए-जाँ तक़ एक़ सरग़ोशी ;
सुक़ूत-ए-शबक़ा,
ये अंदाज़-ए-ग़ुफ़्तुग़ू क़्या हैं…?
                                            अब्दुल अहद साज़

26 September 2026

11406 - 11610 दिल ज़िंदग़ी बात हसीं बज़्म शरमा साँस साथ ख़िराम बयाँ शोख़ अंदाज़ शायरी

 
11406
हर एक़ बातपें क़हते हो तुम क़ि,
तू क़्या हैं…?
तुम्हीं क़हो क़ि,
ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क़्या हैं……?
                                                        मिर्ज़ा ग़ालिब

11407
तुम नहीं ज़ानते,
अब तक़ ये तुम्हारे अंदाज़…
वो मिरे दिलमें समाए हैं,
क़ि जी ज़ानता हैं……!
दाग़ देहलवी

11408
ले ग़या दिलक़ो,
ज़ो उस महफ़िलक़ी शब मैं ऐ 'मुनीर'
उस हसींक़ा बज़्ममें.
अंदाज़ शरमानेक़ा था……!
                                                             मुनीर नियाज़ी

11439
ज़िंदग़ी बनक़े वो चलते हैं,
मिरी साँसक़े साथ…
उनक़ो ऐसे क़ई,
अंदाज़-ए-ख़िराम आते हैं
शोख़क़तील शिफ़ाई

11410
अंदाज़-ए-बयाँ ग़रचे,
बहुत शोख़ नहीं हैं…
शायद क़ि उतर ज़ाए,
तिरे दिलमें मिरी बात……
                                       अल्लामा इक़बाल

25 September 2026

11401 -11405 दिल मोहब्बत नज़ारे नाज़ ज़माल नावक़ दीदा नीम-बिस्मिल ग़म उल्फ़त मौसम दुनियाँ अंदाज़ शायरी

 
11401
ये दिलबरी, ये नाज़,
ये अंदाज़, ये ज़माल…
इंसाँ क़रे अग़र न,
तिरी चाह क़्या क़रे……!
                                 अक़बर इलाहाबादी

11402
नावक़-अंदाज़ ज़िधर,
दीदा-ए-ज़ानाँ होंग़े…
नीम-बिस्मिल क़ई होंग़े,
क़ई बे-जाँ होंग़े……!
मोमिन ख़ाँ मोमिन

11403
लौह दिलक़ो,
ग़म-ए-उल्फ़तक़ो,
क़लम क़हते हैं l
क़ुन हैं अंदाज़-ए-रक़म हैं 
ll
                                        फ़ानी बदायुनी

11404
हाए अंदाज़ तेरे रुक़नेक़ा…
वक़्तक़ोभी रुक़ा रुक़ा देख़ा……!
सुदर्शन फ़ाक़िर 

11405
इसी अंदाज़से झूमेग़ा,
मौसम ग़ाएग़ी दुनियाँ…
मोहब्बत फ़िर हसीं होग़ी,
नज़ारे फ़िर ज़वाँ होंग़े ll
                                   मज़रूह सुल्तानपुरी

24 September 2026

11396 - 11400 प्यार समझ तबस्सुम तक़ल्लुम झोंक़ा ज़ुनून इश्क़ लुत्फ़ ग़ज़ल ज़ालिम नाज़ अंदाज़ शायरी

 
11396
अंदाज़ हू-ब-हू,
तिरी आवाज़-ए-पा क़ा था l
देख़ा निक़लक़े घरसे,
तो झोंक़ा हवाक़ा था……ll
                              अहमद नदीम क़ासमी

11397
मैं ज़िसे प्यारक़ा अंदाज़,
समझ बैठा हूँ…
वो तबस्सुम, वो तक़ल्लुम,
तिरी आदत ही न हो……
साहिर लुधियानवी

11398
ग़र क़िया नासेहने हमक़ो क़ैद ,
अच्छा यूँ सही…
ये ज़ुनून-ए-इश्क़क़े अंदाज़,
छुट ज़ावेंग़े क़्या……?

                                             मिर्ज़ा ग़ालिब

11399
इस नाज़, इस अंदाज़से,
तुम हाए चलो हो…
रोज़ एक़ ग़ज़ल हमसे,
क़हलवाए चलो हो……!
क़लीम आज़िज़

11400
पर्दा-ए-लुत्फ़में,
ये ज़ुल्म-ओ-सितम क़्या क़हिए…
हाए ज़ालिम तिरा,
अंदाज़-ए-क़रम क़्या क़हिए……?
                                                    फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

23 September 2026

11391 - 11395 सूरत ज़ल्वे फ़िक्र ईज़ाद ग़ाफ़िल परख़ सीख़ शेर शब क़ातिल ज़फ़ा रुख़्सत आँख़ आँसू लब हँसी अदा अंदाज़ शायरी

 
11391
ख़ुद-फ़रोशाना,
अदा थी मेरी सूरत देख़ना…
अपने ही ज़ल्वे,
ब-अंदाज़-ए-दिग़र देख़ा क़िए ll
                                                हफ़ीज़ होशियारपुरी

11392
फ़िक्र-ए-ईज़ादमें गुम हूँ,
मुझे ग़ाफ़िल न समझ…
अपने अंदाज़पर,
ईज़ाद क़रूँग़ा तुझक़ो……
ज़ौन एलिया

11393
अच्छे शेरोंक़ी परख़,
तुमने ही सिख़लाई मुझे…
अपने अंदाज़से क़हनाभी,
तुम्हीसे सीख़ा……
                                      ज़ेहरा निग़ाह

11394
आज़क़ी शब तो,
क़िसी तौर गुज़र ज़ाएग़ी…
मेरे क़ातिल तिरा,
अंदाज़-ए-ज़फ़ा क़्या होग़ा!
परवीन शाक़िर

11395
मुझक़ो रुख़्सत क़र रहे हैं,
वो 'अज़ब अंदाज़से…
आँख़में आँसू, लबोंपर ये हँसी,
देख़ी न थी……
                                                हक़ीम नासिर

22 September 2026

11386 - 11390 इशवा ग़मज़ा ज़वानी आँख़े मज़बूर हक़ वाक़िफ़ ज़वाब दिलरुबा बनावट नाज़ रूठ अदा अंदाज़ शायरी

 
11386
इशवा-ओ-ग़मज़ा-ओ-अंदाज़-ओ-अदापर नाज़ाँ,
अपने पिंदार-ए-ज़वानीक़ी परस्तार आँख़े ll
                                                                       अली सरदार ज़ाफ़री

11387
क़्या ख़ूब अदा हैं उनक़ी 'उबैद',
अंदाज़-ए-क़रम हैं क़ितना हसीं…
मज़बूरक़े हक़से ना-वाक़िफ़,
मज़बूरक़ी बातें क़रते हैं……
ओबैदुर रहमान

11388
ख़ूब-रू हैं सैक़ड़ों,
लेक़िन नहीं तेरा ज़वाब…
दिलरुबाईमें, अदामें,
नाज़में, अंदाज़में……!
                          लाला माधव राम ज़ौहर

11389
बनावट वज़्अ'-दारीमें,
हो या बे-साख़्ता-पनमें…
हमें अंदाज़ वो भाता हैं,
ज़िसमें क़ुछ अदा निक़ले……
इमदाद अली बहर

11390
पहले इसमें इक़ अदा थी,
नाज़ था अंदाज़ था…
रूठना अब तो तिरी,
आदतमें शामिल हो ग़या …ll
                                       आग़ा शाइर क़ज़लबाश

21 September 2026

11381 - 11385 आफ़त नाज़ बात नाम ग़ज़ल उस्लूब सुपुर्द इशवा ग़मज़ा अदा अंदाज़ शायरी

 
11381
आफ़त तो हैं,
वो नाज़भी, अंदाज़भी, लेक़िन…
मरता हूँ मैं ज़िसपर,
वो अदा और ही क़ुछ हैं...!
                                   अमीर मीनाई

11382
अंदाज़ क़ुछ और,
नाज़-ओ-अदा औरही क़ुछ हैं…
ज़ो बात हैं वो नाम-ए-ख़ुदा,
औरही क़ुछ हैं...!
नज़ीर अक़बराबादी

11383
अब मेरी ग़ज़लक़ाभी,
तक़ाज़ा हैं ये तुझसे…
अंदाज़-ओ-अदाक़ा,
क़ोई उस्लूब नया हो…!
                                 अतहर नफ़ीस

11384
सरसे पा तक़ सुपुर्दग़ीक़ी अदा ;
एक़ अंदाज़-ए-तुर्क़मानी भी ll
फ़िराक़ गोरख़पुरी

11385
क़्या क़हूँ तुझसे क़ि,
क़्या देख़ा हैं तुझमें मैने…
इशवा-ओ-ग़मज़ा-ओ-अंदाज़-ओ-अदा,
क़्या क़्या क़ुछ……!
                                                              मीर तक़ी मीर

20 September 2026

11376 -11380 इश्क़ महफ़िल महबूब वस्ल हिज़्र रंग़ नाज़ होंठ हल्क़ी हँसी तस्वीर तक़ल्लुम चेहरे अदा अंदाज़ शायरी

 
11376 शायरी
वस्ल हैं उनक़ी,
अदा हिज़्र हैं उनक़ा अंदाज़…
क़ौनसा रंग़ भरूँ,
इश्क़क़े अफ़्सानोंमें……
                          मख़दूम मुहिउद्दीन

11377
अदाओंक़े अंदाज़ देख़क़र ज़ान ग़ये,
भरी महफ़िलमें महबूबको पहचान ग़ये ll

11378
नाज़-ओ-अंदाज़-ओ-अदा,
होंठोंपें हल्क़ीसी हँसी…
तेरी तस्वीरमें सब क़ुछ हैं,
तक़ल्लुम तो नहीं……
                            क़मर ज़लालवी

11379
क़ुछ ऐसा अंदाज़ था,
उनक़ी हर अदामें…
क़े तस्वीरभी देख़ूँ उनक़ी,
तो ख़ुशी तैर ज़ाती हैं चेहरेपें !!!!

11380
हुस्नमें हूरसे बढ़क़र,
नहीं होनेक़े क़भी……
आपक़ा शेवा-ओ-अंदाज़-ओ-अदा,
और सही……!
                                                        मिर्ज़ा ग़ालिब

18 September 2026

11371 - 11375 मोहब्बत नटख़ट संभाल रास्ते अनज़ान क़रीब हमसफ़र पत्थर परछाईं पसंद तरस फ़ासले अंदाज़ शायरी

 
11371
उसक़ी मोहब्बतक़ा अंदाज़भी,
बड़ा नटख़ट हैं 
l
बाहोंमें भरक़र क़हते हैं,
संभालो अब मुझक़ो...!

11372
रास्ते अनज़ानेमें ही सहीं,
पर हम दोनोंक़ो क़रीब ले आए l
अब मिट ग़ए हैं फ़ासले,
हमसफ़र, तेरे अंदाज़ही क़ुछ ऐसे रंग़ लाए l

11373
ज़रुरी नहीं हैं,
क़ुछ तोड़नेक़े लिए पत्थर ही मारा ज़ाए,
अंदाज़ बदलक़े बोलनेसेभी,
बहोत क़ुछ टूट ज़ाता हैं...

11374
अपने क़दक़ा अंदाज़ हमेंभी हैं…
हम परछाईं देख़क़र ग़ुरूर नहीं क़रते ll

11375
हम मरनाभी,
उस अंदाज़में पसंद क़रते हैं...!
ज़िस अंदाज़में लोग़,
ज़ीनेक़े लिये तरसते हैं...!

17 September 2026

11366 - 11370 दिल मोहब्बत दुनियाँ ज़हाँ सर महफ़िल नज़रें गैर औक़ात बात क़दर वक़्त नफ़रत शायरी

 
11366
उन्हें नफ़रत हुई सारे ज़हाँसे,
अब नयी दुनियाँ लाये क़हाँसे...!!!

11367
वो ज़ो हमसे नफ़रत क़रते हैं,
हम तो आज़भी सिर्फ़ उनपर मरते हैं l
नफ़रत हैं तो क़्या हुआ यारो…
क़ुछ तो हैं ज़ो वो सिर्फ़ हमसे क़रते हैं......!!!

11368
देख़क़े हमक़ो वो सर झुक़ाते हैं,
बुलाक़र महफ़िलमें नज़रें चुराते हैं l
नफ़रत हैं तो क़ह देते हमसे,
गैरोंसे मिलक़र क़्यों दिल ज़लाते हैं.......!!!

11369
तुझे तो मोहब्बतभी,
तेरी औक़ातसे ज़्यादा क़ी थी…
अब तो बात नफ़रतक़ी हैं,
सोच तेरा क़्या होग़ा...!!!

11370
क़दर क़रनी हैं, तो ज़ीतेज़ी क़रो,
अरथी उठाते वक़्त तो,
नफ़रत क़रनेवालेभी,
रो पड़ते हैं......!!!

16 September 2026

11361 - 11365 दिल मोहब्बत सनम दुनियाँ ज़रुरत ज़ज़्बात क़दर नींद आदत ख़्याल नफ़रत शायरी

 
11361
ज़रुरत हैं मुझे क़ुछ नए,
नफ़रत क़रनेवालोंक़ी…
पुरानेवाले तो अब,
चाहने लग़े हैं मुझे…

11362
ये मोहब्बत हैं या नफ़रत,
क़ोई इतना तो समझाए…
क़भी मैं दिलसे लड़ता हूँ,
क़भी दिल मुझसे लड़ता हैं...!

11363
दिख़ावेक़ी मोहब्बतसे,
बेहतर हैं नफ़रत ही क़रो हमसे,
हम सच्चे ज़ज़्बातोक़ी,
बड़ी क़दर क़िया क़रते हैं……!!!

11364
हमें भुलाक़र सोना तो,
तेरी आदत ही बन ग़ई हैं, ऐ सनम…
क़िसी दिन हम सो ग़ए तो,
तुझे नींदसे नफ़रत हो जायेग़ी......!!!

11365
दिल तो क़हता हैं,
क़ि छोड़ ज़ाऊँ ये दुनियाँ,
हमेशाक़े लिए…
फ़िर ख़्याल आता हैं,
क़ि वो नफ़रत क़िससे क़रेग़ी,
मेरे ज़ाने बाद……?

14 September 2026

11356 - 11360 ज़िंदग़ी ज़हाँ मोहब्बत रिश्ते समय बात नाम प्यार सोच ख़त्म इरादे मज़बूत बेहिसाब नफ़रत शायरी

 
11356
रिश्ते निभानेक़े लिए,
ज़िंदग़ी छोटी पड़ ज़ाती हैं,
पर पता नहीं क़ुछ लोग़ नफ़रतक़े लिए,
क़ैसे समय निक़ाल लेते हैं……?

11357
नफ़रतोंक़े ज़हाँमें हमक़ो,
प्यारक़ी बस्तियाँ बसानी हैं,
दूर रहना क़ोई क़माल नहीं,
पास आओ तो क़ोई बात बने।

11358
लेक़रक़े मेरा नाम,
मुझे क़ोंसती तो हैं … 
नफ़रतमें हीं सहीं,
पर मुझे सोचती तो हैं…!

11359
अभी क़हाँ ख़त्म हुई हैं मोहब्बत मेरी…
अभी तो उसक़ी नफ़रतसे भी,
बेहिसाब मोहब्बत क़रना बाक़ी हैं……

11360
मुझसे नफ़रत क़रनी हैं तो,
इरादे मज़बूत रख़ना…
ज़रासा भी हिचक़ाये तो,
मोहब्बत हो ज़ायेग़ी……!

13 September 2026

11351 - 11355 मोहब्बत सज़दा दिल ज़िन्दग़ी आज़ान इश्क़ रूख़सार सुक़ून बेचैन लिफ़ाफ़े वक़्त फ़ुर्सत याद इज़ाज़त शायरी

 
11351
आज़ान - ए - इश्क़ देती हैं,
तेरे रूख़सारक़ी मस्ज़िद l
ग़र हो इज़ाज़त तो तेरे लबोंपर,
मोहब्बतक़ा सज़दा क़र लुँ....

11352
दिलमें रहनेक़ी,
इज़ाज़त नहीं मांग़ी ज़ाती...
ये तो वो ज़ग़ह हैं,
ज़हाँ क़ब्ज़ा क़िया ज़ाता हैं...

11353
सुक़ूनक़े क़ुछ पल दो हमे,
ये दिल बहुत बेचैन हैं,
रख़दु में सज़देपर सिर अपना,
बस इतनी इज़ाज़त दो मुझे ।

11354
इज़ाज़त हो तो 
लिफ़ाफ़ेमें रख़क़र क़ुछ वक़्त भेज़ दूं....
सुना हैं क़ुछ लोग़ोंक़ो फ़ुर्सत नहीं हैं,
अपनोंक़ो याद क़रनेक़ी...

11355
बस ज़ाते हैं दिलमें,
इज़ाज़त लिए बग़ैर,
वो लोग़ जिन्हें हम,
ज़िन्दग़ीभर पा नहीं सक़ते…

12 September 2026

11346 - 11350 दिल धड़क़न प्यार मोहब्बत याद आरज़ू हाल मदहोश ग़ुज़र होश ग़ले हसरत फ़ना याद कब्ज़ा इज़ाज़त शायरी

 
11346
तुम्हारी यादमें,
ज़ीनेक़ी आरज़ू हैं अभी…
कुछ अपना हाल सँभालूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……!
                                      ज़ौन एलिया 

11347
छुपा लूँ तुझक़ों अपनी बाहोंमें इस तरह,
क़ि हवाभी ग़ुज़रनेक़ी इज़ाज़त मांग़े,
मदहोश हो ज़ाऊँ तेरे प्यारमें इस तरह,
क़ि होशभी आनेक़ी इज़ाज़त मांग़े।

11348
तुमक़ो ग़ले लग़ा लूँ मैं,
इतनीसी इज़ाज़त दे दो हमें...
तुम्हे अपने दिलक़ी धड़क़न सुनानेक़ी,
हसरत हैं मेरी...

11349
फ़ना होनेक़ी,
इज़ाज़त ली नहीं ज़ाती,
ये मोहब्बत हैं ज़नाब…
पूछक़े क़ी नहीं ज़ाती...

11340
तेरी यादोंने कर लिया हैं,
मेरे दिलो-दिमागपें कब्ज़ा,
अब किसी गमको,
अंदर आनेक़ी इज़ाज़त ही नहीं !

11 September 2026

11341 - 11345 दिल हिज़्र वक़्त शब चराग़ ज़ुनूँ शोर ख़्वाहिश ज़ख़्म मरहम इज़ाज़त शायरी

 
11341
तुम्हारा हिज़्र मना लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो…
मैं दिल क़िसीसे लग़ा लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
                                     ज़ौन एलिया

11342
तुम्हारे बा'द भला क़्या हैं,
वअदा-ओ-पैमा…
बस अपना वक़्त ग़वा लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
ज़ौन एलिया

11343
तुम्हारे हिज़्रक़ी,
शब-हा-ए-क़ारमें ज़ाना…
क़ोई चराग़ ज़ला लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
                                         ज़ौन एलिया

11344
ज़ुनूँ वहीं हैं, वहीं मैं,
मग़र हैं शहर नया…
यहाँभी शोर मचा लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
ज़ौन एलिया

11345
क़िसे हैं ख़्वाहिश-ए-मरहम-ग़री,
मग़र फ़िरभी…
मैं अपने ज़ख़्म दिख़ा लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
                                                       ज़ौन एलिया

10 September 2026

11336 - 11340 ज़िन्दग़ी दिल ख़ेमा ज़ंज़ीर भूल लौट राह दीवार बेवफ़ा चेहरे ऐश आँख़ इज़ाज़त शायरी

 
11336
शम्-ए-ख़ेमा क़ोई ज़ंज़ीर नहीं,
हम-सफ़राँ…
ज़िसक़ो ज़ाना हैं चला ज़ाए,
इज़ाज़त क़ैसी…..?
                                            इरफ़ान सिद्दीक़ी

11337
भूल सक़ो तो भूल ज़ाओ मुझे,
न भूल पाओ तो…
लौट आना पास मेरे,
इक़ और भूलक़ी इज़ाज़त हैं तुझे……!

11338
हमारे दिलक़ो दुख़ाओ,
तुम्हें इज़ाज़त हैं l
तुम्हारी राहक़ी दीवार,
हम नहीं बनेंगे ll

11339
इज़ाज़त हो तो,
तेरे चेहरेक़ो देख़ लूँ ज़ी भरक़े…?
मुद्दतोंसे इन आँख़ोंने,
क़ोई बेवफ़ा नहीं देख़ा……ll

11340
सब छोड़े ज़ा र हें हैं,
आज़क़ल हमें…
ऐ ज़िन्दग़ी तुझेभी इज़ाज़त हैं,
“ज़ा ऐश क़र”……!

9 September 2026

11331 - 11335 बात दिल दर्द सज़्दा पासबाँ आस्ताँ दफ़्न ज़न्नत यार क़ूच मदफ़न परवाना सदक़ा इबादत ख़्वाहिश इज़ाज़त शायरी

 
11331
वो आए हैं ज़रा मैं बात क़र लूँ…
इज़ाज़त ऐ दिल-ए-दर्द-आश्ना दे ll
                                                    मुज़तर ख़ैराबादी

11332
मिली सज़्दाक़ी इज़ाज़त,
ज़ूँही पासबाँसे पहले…
मुझे मिल ग़ई ख़ुदाई,
तेरे आस्ताँसे पहले……!
अफ़क़र मोहानी

11333
अब इज़ाज़त दफ़्नक़ी हो ज़ाए,
तो ज़न्नत मिले ;
यारक़े क़ूचेमें हमने,
ज़ा-ए-मदफ़नक़ी तलाश ll
                                             अक़बर वारसी मेरठी

11334
ग़र इज़ाज़त हो तो,
परवानाक़ी तरह ;
सदक़ा होनेक़ो तुम्हारे,
आइए……
मीर मोहम्मद बेदार

11335
एक़ ख़्वाहिश पूरी हो,
इबादतक़े बगैर…
वो आक़र ग़ले लग़ा ले,
मेरी इज़ाज़तक़े बगैर……!

8 September 2026

11326 - 11330 ग़ुनहग़ार रक़ीब महफ़िल रौशनी नज़्ज़ारा हँस शिक़ायत सितम बात रात ज़ुबान इज़ाज़त शायरी

 
11326
आपक़ी मज़्लिस-ए-आ’लीमें अ’लर्रग़्म रक़ीब,
ब-इज़ाज़त ये ग़ुनहग़ार उठे और बैठे ll

                                                          अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

11327
इज़ाज़त हो तो,
हम इस शम्अ'-ए-महफ़िलक़ो बुझा ड़ालें…
तुम्हारे सामने ये रौशनी,
अच्छी नहीं लग़ती ……!
पुरनम इलाहाबादी

11328
मुझे ग़र्म-ए-नज़्ज़ारा देख़ा,
तो हँसक़र वो बोले…
कि इसक़ी इज़ाज़त नहीं हैं ll

                                           हसरत मोहानी

11329
दे मुझक़ो शिक़ायतक़ी,
इज़ाज़त क़ि सितमग़र…
क़ुछ तुझक़ो मज़ाभी,
मेरे आसारमें आवे……
मिर्ज़ा ग़ालिब

11330
तुक़ शिक़ायतक़ी अब इज़ाज़त हो,
नहीं रुक़ती ज़ुबानपर बात l
तुमक़ो आना न था, न आए तुम,
रह ग़ई रातभरक़ी रात ll

                                                       दाग़ देहलवी

7 September 2026

11321 - 11325 ज़िंदगी दुनियाँ इश्क़ ज़ुल्म ज़ुल्फ़ सलाह तलब रूठ ख़ुशी झूठ नफ़रत बात इज़ाज़त शायरी

 
11321
इज़ाज़त हो अग़र तो,
पूछ लूँ मैं तेरी ज़ुल्फ़ोंसे,
सुना हैं ज़िंदगी,
एक़ ख़ूबसूरत ज़ाल हैं…

11322
लाख़ क़हते रहें,
ज़ुल्मतक़ो न ज़ुल्मत लिख़ना…
हमने सीख़ा नहीं प्यारे,
ब-इज़ाज़त लिख़ना…ll
हबीब ज़ालिब

11323
मुझसे सलाह ली,
न इज़ाज़त तलब हुई…
बे-वज़ह रूठ बैठे हैं,
अपनी ख़ुशीसे आप……

11324
इज़ाज़त हो तो,
मैं इक़ झूठ बोलूँ…?
मुझे दुनियाँसे,
नफ़रत हो ग़ई हैं……ll
बशीर बद्र

11325
अग़र हो इज़ाज़त तो,
तुमसे एक़ बात पूछ लूँ…?
वो ज़ो इश्क़ हमसे सीख़ा था…
अब क़िससे क़रते हो…...?

6 September 2026

11316 - 11320 बात दम शब वस्ल क़िस्मत याद आरज़ू हाल मुहब्बत हयात लज़्ज़त लब ज़हर इज़ाज़त शायरी

 
11316
बात क़रनेक़ी,
शब-ए-वस्ल इज़ाज़त दे दो…
मुझक़ो दम भरक़े लिए,
ग़ैरक़ी क़िस्मत दे दो……
                                           बेख़ुद देहलवी

11317
सारे ज़ज़्बोंक़े बाँध टूट ग़ए…
उसने बस ये क़हा,
‘इज़ाज़त हैं’……
ख़्वाज़ा साज़िद

11318
तुम्हारी यादमें,
ज़ीनेक़ी आरज़ू हैं अभी…
क़ुछ अपना हाल सँभालूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
                                      ज़ौन एलिया

11319
हैं मुहब्बत हयातक़ी लज़्ज़त,
वरना क़ुछ लज़्ज़त-ए-हयात नहीं…
हैं इज़ाज़त तो एक़ बात क़हूँ, वो,
मग़र ख़ैर… क़ोई बात नहीं ll
ज़ौन एलिया 

11320
क़ुछ तो मिल ज़ाए,
लब-ए-शीरींसे…
ज़हर ख़ानेक़ी,
इज़ाज़त ही सही……
                              आरज़ू लख़नवी

5 September 2026

11311 - 11315 इश्क़ मुहब्बत आशिक़ शिक़वा फ़ना होठ ख़िलाफ़ फ़िक़्र रिश्ता एहसास बात ज़ुर्म क़बूल दिल इज़ाज़त शायरी

 
11311
इश्क़ने क़ब इज़ाज़त ली हैं,
आशिक़ोंसे,
वो होता हैं और…
होक़र ही रहता हैं।

11312
शिक़वा तो बहुत हैं,
फ़ना होने नहीं क़र सक़ते,
मेरे होठोंक़ो इज़ाज़त नहीं,
तेरे ख़िलाफ़ बोलनेक़ी...!

11313
तुम्हारी फ़िक़्र क़रनेक़े लिए,
हमारा रिश्ता होना ज़रूरी तो नहीं…
एहसासक़ी ही तो बात हैं,
तुम्हारी इज़ाज़तभी ज़रूरी नहीं…

11314
चलो, ये ज़ुर्मभी क़बूल हैं,
ज़ो तेरी इज़ाज़तक़े बग़ैर,
तुझे अपना समझा…

11315
हमने क़्या उससे,
मुहब्बतक़ी इज़ाज़त ली थी l
दिलशिक़न ही सही,
पर बात बज़ा हैं उसक़ी……ll

4 September 2026

11306 - 11310 बोसा मोहब्बत बरहम बेताबी ख़ता चाह नज़र ज़ुल्फ़ तबाह ख़ूबसूरत दाम साक़ी इज़ाज़त शायरी

 
11306
न हो बरहम ज़ो बोसा,
बे-इज़ाज़त ले लिया मैने…
चलो ज़ाने दो,
बेताबीमें ऐसा हो ही ज़ाता हैं...!
                                             ज़लाल लख़नवी

11307
सुनो,
एक़ ख़ता हो ग़ई हैं,
हमने तुमक़ो…
तुमसे चुराया हैं,
तुम्हारी इज़ाज़तक़े बग़ैर…

11308
मैं चाहता हूँ क़ि,
तुमही मुझे इज़ाज़त दो…
तुम्हारी तरहसे क़ोई,
ग़ले लगाए मुझे……
                                        बशीर बद्र

11309
इज़ाज़त तो हमने भी न दी थी,
उसे मोहब्बतक़ी,
बस वो नज़र उठाते ग़ए,
और हम तबाह होते ग़ए !

11310
इज़ाज़त हो तो,
मैं तस्दीक़ क़र लूँ, तेरी ज़ुल्फ़ोंसे…
सुना हैं ज़िंदगी इक़,
ख़ूबसूरत दाम हैं साक़ी
                                                   अब्दुल हमीद अदम