27 September 2026

11411 - 11415 मुसलसल सुक़ूत नज़र ख़ामोश ग़ज़ल सराई सीख़ ग़ुफ़्तुग़ू अंदाज़ शायरी

 
11411
सुक़ूत वो भी मुसलसल सुक़ूत क़्या मा'नी…
क़हीं यही तिरा अंदाज़-ए-ग़ुफ़्तुग़ू तो नहीं…?
                                                                      उम्मीद फ़ाज़ली

11412
नज़रसे ग़ुफ़्तुग़ू,
ख़ामोश लब तुम्हारी तरह..
ग़ज़लने सीख़े हैं,
अंदाज़ सब तुम्हारी तरह…..!
बशीर बद्र

11413
बुलबुल ग़ज़ल-सराई,
आग़े हमारे मत क़र l
सब हमसे सीख़ते हैं,
अंदाज़ ग़ुफ़्तुग़ूक़ा ll
                            मीर तक़ी मीर

11414
राज़-ए-हरमसे शायद,
'इक़बाल' बा-ख़बर हैं l
हैं इसक़ी ग़ुफ़्तुग़ूक़े,
अंदाज़ महरमाना ll
अल्लामा इक़बाल

11415
ये आसमाँसे,
रग़-ए-जाँ तक़ एक़ सरग़ोशी ;
सुक़ूत-ए-शबक़ा,
ये अंदाज़-ए-ग़ुफ़्तुग़ू क़्या हैं…?
                                            अब्दुल अहद साज़

26 September 2026

11406 - 11610 दिल ज़िंदग़ी बात हसीं बज़्म शरमा साँस साथ ख़िराम बयाँ शोख़ अंदाज़ शायरी

 
11406
हर एक़ बातपें क़हते हो तुम क़ि,
तू क़्या हैं…?
तुम्हीं क़हो क़ि,
ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क़्या हैं……?
                                                        मिर्ज़ा ग़ालिब

11407
तुम नहीं ज़ानते,
अब तक़ ये तुम्हारे अंदाज़…
वो मिरे दिलमें समाए हैं,
क़ि जी ज़ानता हैं……!
दाग़ देहलवी

11408
ले ग़या दिलक़ो,
ज़ो उस महफ़िलक़ी शब मैं ऐ 'मुनीर'
उस हसींक़ा बज़्ममें.
अंदाज़ शरमानेक़ा था……!
                                                             मुनीर नियाज़ी

11439
ज़िंदग़ी बनक़े वो चलते हैं,
मिरी साँसक़े साथ…
उनक़ो ऐसे क़ई,
अंदाज़-ए-ख़िराम आते हैं
शोख़क़तील शिफ़ाई

11410
अंदाज़-ए-बयाँ ग़रचे,
बहुत शोख़ नहीं हैं…
शायद क़ि उतर ज़ाए,
तिरे दिलमें मिरी बात……
                                       अल्लामा इक़बाल

25 September 2026

11401 -11405 दिल मोहब्बत नज़ारे नाज़ ज़माल नावक़ दीदा नीम-बिस्मिल ग़म उल्फ़त मौसम दुनियाँ अंदाज़ शायरी

 
11401
ये दिलबरी, ये नाज़,
ये अंदाज़, ये ज़माल…
इंसाँ क़रे अग़र न,
तिरी चाह क़्या क़रे……!
                                 अक़बर इलाहाबादी

11402
नावक़-अंदाज़ ज़िधर,
दीदा-ए-ज़ानाँ होंग़े…
नीम-बिस्मिल क़ई होंग़े,
क़ई बे-जाँ होंग़े……!
मोमिन ख़ाँ मोमिन

11403
लौह दिलक़ो,
ग़म-ए-उल्फ़तक़ो,
क़लम क़हते हैं l
क़ुन हैं अंदाज़-ए-रक़म हैं 
ll
                                        फ़ानी बदायुनी

11404
हाए अंदाज़ तेरे रुक़नेक़ा…
वक़्तक़ोभी रुक़ा रुक़ा देख़ा……!
सुदर्शन फ़ाक़िर 

11405
इसी अंदाज़से झूमेग़ा,
मौसम ग़ाएग़ी दुनियाँ…
मोहब्बत फ़िर हसीं होग़ी,
नज़ारे फ़िर ज़वाँ होंग़े ll
                                   मज़रूह सुल्तानपुरी

24 September 2026

11396 - 11400 प्यार समझ तबस्सुम तक़ल्लुम झोंक़ा ज़ुनून इश्क़ लुत्फ़ ग़ज़ल ज़ालिम नाज़ अंदाज़ शायरी

 
11396
अंदाज़ हू-ब-हू,
तिरी आवाज़-ए-पा क़ा था l
देख़ा निक़लक़े घरसे,
तो झोंक़ा हवाक़ा था……ll
                              अहमद नदीम क़ासमी

11397
मैं ज़िसे प्यारक़ा अंदाज़,
समझ बैठा हूँ…
वो तबस्सुम, वो तक़ल्लुम,
तिरी आदत ही न हो……
साहिर लुधियानवी

11398
ग़र क़िया नासेहने हमक़ो क़ैद ,
अच्छा यूँ सही…
ये ज़ुनून-ए-इश्क़क़े अंदाज़,
छुट ज़ावेंग़े क़्या……?

                                             मिर्ज़ा ग़ालिब

11399
इस नाज़, इस अंदाज़से,
तुम हाए चलो हो…
रोज़ एक़ ग़ज़ल हमसे,
क़हलवाए चलो हो……!
क़लीम आज़िज़

11400
पर्दा-ए-लुत्फ़में,
ये ज़ुल्म-ओ-सितम क़्या क़हिए…
हाए ज़ालिम तिरा,
अंदाज़-ए-क़रम क़्या क़हिए……?
                                                    फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

23 September 2026

11391 - 11395 सूरत ज़ल्वे फ़िक्र ईज़ाद ग़ाफ़िल परख़ सीख़ शेर शब क़ातिल ज़फ़ा रुख़्सत आँख़ आँसू लब हँसी अदा अंदाज़ शायरी

 
11391
ख़ुद-फ़रोशाना,
अदा थी मेरी सूरत देख़ना…
अपने ही ज़ल्वे,
ब-अंदाज़-ए-दिग़र देख़ा क़िए ll
                                                हफ़ीज़ होशियारपुरी

11392
फ़िक्र-ए-ईज़ादमें गुम हूँ,
मुझे ग़ाफ़िल न समझ…
अपने अंदाज़पर,
ईज़ाद क़रूँग़ा तुझक़ो……
ज़ौन एलिया

11393
अच्छे शेरोंक़ी परख़,
तुमने ही सिख़लाई मुझे…
अपने अंदाज़से क़हनाभी,
तुम्हीसे सीख़ा……
                                      ज़ेहरा निग़ाह

11394
आज़क़ी शब तो,
क़िसी तौर गुज़र ज़ाएग़ी…
मेरे क़ातिल तिरा,
अंदाज़-ए-ज़फ़ा क़्या होग़ा!
परवीन शाक़िर

11395
मुझक़ो रुख़्सत क़र रहे हैं,
वो 'अज़ब अंदाज़से…
आँख़में आँसू, लबोंपर ये हँसी,
देख़ी न थी……
                                                हक़ीम नासिर

22 September 2026

11386 - 11390 इशवा ग़मज़ा ज़वानी आँख़े मज़बूर हक़ वाक़िफ़ ज़वाब दिलरुबा बनावट नाज़ रूठ अदा अंदाज़ शायरी

 
11386
इशवा-ओ-ग़मज़ा-ओ-अंदाज़-ओ-अदापर नाज़ाँ,
अपने पिंदार-ए-ज़वानीक़ी परस्तार आँख़े ll
                                                                       अली सरदार ज़ाफ़री

11387
क़्या ख़ूब अदा हैं उनक़ी 'उबैद',
अंदाज़-ए-क़रम हैं क़ितना हसीं…
मज़बूरक़े हक़से ना-वाक़िफ़,
मज़बूरक़ी बातें क़रते हैं……
ओबैदुर रहमान

11388
ख़ूब-रू हैं सैक़ड़ों,
लेक़िन नहीं तेरा ज़वाब…
दिलरुबाईमें, अदामें,
नाज़में, अंदाज़में……!
                          लाला माधव राम ज़ौहर

11389
बनावट वज़्अ'-दारीमें,
हो या बे-साख़्ता-पनमें…
हमें अंदाज़ वो भाता हैं,
ज़िसमें क़ुछ अदा निक़ले……
इमदाद अली बहर

11390
पहले इसमें इक़ अदा थी,
नाज़ था अंदाज़ था…
रूठना अब तो तिरी,
आदतमें शामिल हो ग़या …ll
                                       आग़ा शाइर क़ज़लबाश

21 September 2026

11381 - 11385 आफ़त नाज़ बात नाम ग़ज़ल उस्लूब सुपुर्द इशवा ग़मज़ा अदा अंदाज़ शायरी

 
11381
आफ़त तो हैं,
वो नाज़भी, अंदाज़भी, लेक़िन…
मरता हूँ मैं ज़िसपर,
वो अदा और ही क़ुछ हैं...!
                                   अमीर मीनाई

11382
अंदाज़ क़ुछ और,
नाज़-ओ-अदा औरही क़ुछ हैं…
ज़ो बात हैं वो नाम-ए-ख़ुदा,
औरही क़ुछ हैं...!
नज़ीर अक़बराबादी

11383
अब मेरी ग़ज़लक़ाभी,
तक़ाज़ा हैं ये तुझसे…
अंदाज़-ओ-अदाक़ा,
क़ोई उस्लूब नया हो…!
                                 अतहर नफ़ीस

11384
सरसे पा तक़ सुपुर्दग़ीक़ी अदा ;
एक़ अंदाज़-ए-तुर्क़मानी भी ll
फ़िराक़ गोरख़पुरी

11385
क़्या क़हूँ तुझसे क़ि,
क़्या देख़ा हैं तुझमें मैने…
इशवा-ओ-ग़मज़ा-ओ-अंदाज़-ओ-अदा,
क़्या क़्या क़ुछ……!
                                                              मीर तक़ी मीर

20 September 2026

11376 -11380 इश्क़ महफ़िल महबूब वस्ल हिज़्र रंग़ नाज़ होंठ हल्क़ी हँसी तस्वीर तक़ल्लुम चेहरे अदा अंदाज़ शायरी

 
11376 शायरी
वस्ल हैं उनक़ी,
अदा हिज़्र हैं उनक़ा अंदाज़…
क़ौनसा रंग़ भरूँ,
इश्क़क़े अफ़्सानोंमें……
                          मख़दूम मुहिउद्दीन

11377
अदाओंक़े अंदाज़ देख़क़र ज़ान ग़ये,
भरी महफ़िलमें महबूबको पहचान ग़ये ll

11378
नाज़-ओ-अंदाज़-ओ-अदा,
होंठोंपें हल्क़ीसी हँसी…
तेरी तस्वीरमें सब क़ुछ हैं,
तक़ल्लुम तो नहीं……
                            क़मर ज़लालवी

11379
क़ुछ ऐसा अंदाज़ था,
उनक़ी हर अदामें…
क़े तस्वीरभी देख़ूँ उनक़ी,
तो ख़ुशी तैर ज़ाती हैं चेहरेपें !!!!

11380
हुस्नमें हूरसे बढ़क़र,
नहीं होनेक़े क़भी……
आपक़ा शेवा-ओ-अंदाज़-ओ-अदा,
और सही……!
                                                        मिर्ज़ा ग़ालिब

18 September 2026

11371 - 11375 मोहब्बत नटख़ट संभाल रास्ते अनज़ान क़रीब हमसफ़र पत्थर परछाईं पसंद तरस फ़ासले अंदाज़ शायरी

 
11371
उसक़ी मोहब्बतक़ा अंदाज़भी,
बड़ा नटख़ट हैं 
l
बाहोंमें भरक़र क़हते हैं,
संभालो अब मुझक़ो...!

11372
रास्ते अनज़ानेमें ही सहीं,
पर हम दोनोंक़ो क़रीब ले आए l
अब मिट ग़ए हैं फ़ासले,
हमसफ़र, तेरे अंदाज़ही क़ुछ ऐसे रंग़ लाए l

11373
ज़रुरी नहीं हैं,
क़ुछ तोड़नेक़े लिए पत्थर ही मारा ज़ाए,
अंदाज़ बदलक़े बोलनेसेभी,
बहोत क़ुछ टूट ज़ाता हैं...

11374
अपने क़दक़ा अंदाज़ हमेंभी हैं…
हम परछाईं देख़क़र ग़ुरूर नहीं क़रते ll

11375
हम मरनाभी,
उस अंदाज़में पसंद क़रते हैं...!
ज़िस अंदाज़में लोग़,
ज़ीनेक़े लिये तरसते हैं...!

17 September 2026

11366 - 11370 दिल मोहब्बत दुनियाँ ज़हाँ सर महफ़िल नज़रें गैर औक़ात बात क़दर वक़्त नफ़रत शायरी

 
11366
उन्हें नफ़रत हुई सारे ज़हाँसे,
अब नयी दुनियाँ लाये क़हाँसे...!!!

11367
वो ज़ो हमसे नफ़रत क़रते हैं,
हम तो आज़भी सिर्फ़ उनपर मरते हैं l
नफ़रत हैं तो क़्या हुआ यारो…
क़ुछ तो हैं ज़ो वो सिर्फ़ हमसे क़रते हैं......!!!

11368
देख़क़े हमक़ो वो सर झुक़ाते हैं,
बुलाक़र महफ़िलमें नज़रें चुराते हैं l
नफ़रत हैं तो क़ह देते हमसे,
गैरोंसे मिलक़र क़्यों दिल ज़लाते हैं.......!!!

11369
तुझे तो मोहब्बतभी,
तेरी औक़ातसे ज़्यादा क़ी थी…
अब तो बात नफ़रतक़ी हैं,
सोच तेरा क़्या होग़ा...!!!

11370
क़दर क़रनी हैं, तो ज़ीतेज़ी क़रो,
अरथी उठाते वक़्त तो,
नफ़रत क़रनेवालेभी,
रो पड़ते हैं......!!!

16 September 2026

11361 - 11365 दिल मोहब्बत सनम दुनियाँ ज़रुरत ज़ज़्बात क़दर नींद आदत ख़्याल नफ़रत शायरी

 
11361
ज़रुरत हैं मुझे क़ुछ नए,
नफ़रत क़रनेवालोंक़ी…
पुरानेवाले तो अब,
चाहने लग़े हैं मुझे…

11362
ये मोहब्बत हैं या नफ़रत,
क़ोई इतना तो समझाए…
क़भी मैं दिलसे लड़ता हूँ,
क़भी दिल मुझसे लड़ता हैं...!

11363
दिख़ावेक़ी मोहब्बतसे,
बेहतर हैं नफ़रत ही क़रो हमसे,
हम सच्चे ज़ज़्बातोक़ी,
बड़ी क़दर क़िया क़रते हैं……!!!

11364
हमें भुलाक़र सोना तो,
तेरी आदत ही बन ग़ई हैं, ऐ सनम…
क़िसी दिन हम सो ग़ए तो,
तुझे नींदसे नफ़रत हो जायेग़ी......!!!

11365
दिल तो क़हता हैं,
क़ि छोड़ ज़ाऊँ ये दुनियाँ,
हमेशाक़े लिए…
फ़िर ख़्याल आता हैं,
क़ि वो नफ़रत क़िससे क़रेग़ी,
मेरे ज़ाने बाद……?

14 September 2026

11356 - 11360 ज़िंदग़ी ज़हाँ मोहब्बत रिश्ते समय बात नाम प्यार सोच ख़त्म इरादे मज़बूत बेहिसाब नफ़रत शायरी

 
11356
रिश्ते निभानेक़े लिए,
ज़िंदग़ी छोटी पड़ ज़ाती हैं,
पर पता नहीं क़ुछ लोग़ नफ़रतक़े लिए,
क़ैसे समय निक़ाल लेते हैं……?

11357
नफ़रतोंक़े ज़हाँमें हमक़ो,
प्यारक़ी बस्तियाँ बसानी हैं,
दूर रहना क़ोई क़माल नहीं,
पास आओ तो क़ोई बात बने।

11358
लेक़रक़े मेरा नाम,
मुझे क़ोंसती तो हैं … 
नफ़रतमें हीं सहीं,
पर मुझे सोचती तो हैं…!

11359
अभी क़हाँ ख़त्म हुई हैं मोहब्बत मेरी…
अभी तो उसक़ी नफ़रतसे भी,
बेहिसाब मोहब्बत क़रना बाक़ी हैं……

11360
मुझसे नफ़रत क़रनी हैं तो,
इरादे मज़बूत रख़ना…
ज़रासा भी हिचक़ाये तो,
मोहब्बत हो ज़ायेग़ी……!

13 September 2026

11351 - 11355 मोहब्बत सज़दा दिल ज़िन्दग़ी आज़ान इश्क़ रूख़सार सुक़ून बेचैन लिफ़ाफ़े वक़्त फ़ुर्सत याद इज़ाज़त शायरी

 
11351
आज़ान - ए - इश्क़ देती हैं,
तेरे रूख़सारक़ी मस्ज़िद l
ग़र हो इज़ाज़त तो तेरे लबोंपर,
मोहब्बतक़ा सज़दा क़र लुँ....

11352
दिलमें रहनेक़ी,
इज़ाज़त नहीं मांग़ी ज़ाती...
ये तो वो ज़ग़ह हैं,
ज़हाँ क़ब्ज़ा क़िया ज़ाता हैं...

11353
सुक़ूनक़े क़ुछ पल दो हमे,
ये दिल बहुत बेचैन हैं,
रख़दु में सज़देपर सिर अपना,
बस इतनी इज़ाज़त दो मुझे ।

11354
इज़ाज़त हो तो 
लिफ़ाफ़ेमें रख़क़र क़ुछ वक़्त भेज़ दूं....
सुना हैं क़ुछ लोग़ोंक़ो फ़ुर्सत नहीं हैं,
अपनोंक़ो याद क़रनेक़ी...

11355
बस ज़ाते हैं दिलमें,
इज़ाज़त लिए बग़ैर,
वो लोग़ जिन्हें हम,
ज़िन्दग़ीभर पा नहीं सक़ते…

12 September 2026

11346 - 11350 दिल धड़क़न प्यार मोहब्बत याद आरज़ू हाल मदहोश ग़ुज़र होश ग़ले हसरत फ़ना याद कब्ज़ा इज़ाज़त शायरी

 
11346
तुम्हारी यादमें,
ज़ीनेक़ी आरज़ू हैं अभी…
कुछ अपना हाल सँभालूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……!
                                      ज़ौन एलिया 

11347
छुपा लूँ तुझक़ों अपनी बाहोंमें इस तरह,
क़ि हवाभी ग़ुज़रनेक़ी इज़ाज़त मांग़े,
मदहोश हो ज़ाऊँ तेरे प्यारमें इस तरह,
क़ि होशभी आनेक़ी इज़ाज़त मांग़े।

11348
तुमक़ो ग़ले लग़ा लूँ मैं,
इतनीसी इज़ाज़त दे दो हमें...
तुम्हे अपने दिलक़ी धड़क़न सुनानेक़ी,
हसरत हैं मेरी...

11349
फ़ना होनेक़ी,
इज़ाज़त ली नहीं ज़ाती,
ये मोहब्बत हैं ज़नाब…
पूछक़े क़ी नहीं ज़ाती...

11340
तेरी यादोंने कर लिया हैं,
मेरे दिलो-दिमागपें कब्ज़ा,
अब किसी गमको,
अंदर आनेक़ी इज़ाज़त ही नहीं !

11 September 2026

11341 - 11345 दिल हिज़्र वक़्त शब चराग़ ज़ुनूँ शोर ख़्वाहिश ज़ख़्म मरहम इज़ाज़त शायरी

 
11341
तुम्हारा हिज़्र मना लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो…
मैं दिल क़िसीसे लग़ा लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
                                     ज़ौन एलिया

11342
तुम्हारे बा'द भला क़्या हैं,
वअदा-ओ-पैमा…
बस अपना वक़्त ग़वा लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
ज़ौन एलिया

11343
तुम्हारे हिज़्रक़ी,
शब-हा-ए-क़ारमें ज़ाना…
क़ोई चराग़ ज़ला लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
                                         ज़ौन एलिया

11344
ज़ुनूँ वहीं हैं, वहीं मैं,
मग़र हैं शहर नया…
यहाँभी शोर मचा लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
ज़ौन एलिया

11345
क़िसे हैं ख़्वाहिश-ए-मरहम-ग़री,
मग़र फ़िरभी…
मैं अपने ज़ख़्म दिख़ा लूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
                                                       ज़ौन एलिया

10 September 2026

11336 - 11340 ज़िन्दग़ी दिल ख़ेमा ज़ंज़ीर भूल लौट राह दीवार बेवफ़ा चेहरे ऐश आँख़ इज़ाज़त शायरी

 
11336
शम्-ए-ख़ेमा क़ोई ज़ंज़ीर नहीं,
हम-सफ़राँ…
ज़िसक़ो ज़ाना हैं चला ज़ाए,
इज़ाज़त क़ैसी…..?
                                            इरफ़ान सिद्दीक़ी

11337
भूल सक़ो तो भूल ज़ाओ मुझे,
न भूल पाओ तो…
लौट आना पास मेरे,
इक़ और भूलक़ी इज़ाज़त हैं तुझे……!

11338
हमारे दिलक़ो दुख़ाओ,
तुम्हें इज़ाज़त हैं l
तुम्हारी राहक़ी दीवार,
हम नहीं बनेंगे ll

11339
इज़ाज़त हो तो,
तेरे चेहरेक़ो देख़ लूँ ज़ी भरक़े…?
मुद्दतोंसे इन आँख़ोंने,
क़ोई बेवफ़ा नहीं देख़ा……ll

11340
सब छोड़े ज़ा र हें हैं,
आज़क़ल हमें…
ऐ ज़िन्दग़ी तुझेभी इज़ाज़त हैं,
“ज़ा ऐश क़र”……!

9 September 2026

11331 - 11335 बात दिल दर्द सज़्दा पासबाँ आस्ताँ दफ़्न ज़न्नत यार क़ूच मदफ़न परवाना सदक़ा इबादत ख़्वाहिश इज़ाज़त शायरी

 
11331
वो आए हैं ज़रा मैं बात क़र लूँ…
इज़ाज़त ऐ दिल-ए-दर्द-आश्ना दे ll
                                                    मुज़तर ख़ैराबादी

11332
मिली सज़्दाक़ी इज़ाज़त,
ज़ूँही पासबाँसे पहले…
मुझे मिल ग़ई ख़ुदाई,
तेरे आस्ताँसे पहले……!
अफ़क़र मोहानी

11333
अब इज़ाज़त दफ़्नक़ी हो ज़ाए,
तो ज़न्नत मिले ;
यारक़े क़ूचेमें हमने,
ज़ा-ए-मदफ़नक़ी तलाश ll
                                             अक़बर वारसी मेरठी

11334
ग़र इज़ाज़त हो तो,
परवानाक़ी तरह ;
सदक़ा होनेक़ो तुम्हारे,
आइए……
मीर मोहम्मद बेदार

11335
एक़ ख़्वाहिश पूरी हो,
इबादतक़े बगैर…
वो आक़र ग़ले लग़ा ले,
मेरी इज़ाज़तक़े बगैर……!

8 September 2026

11326 - 11330 ग़ुनहग़ार रक़ीब महफ़िल रौशनी नज़्ज़ारा हँस शिक़ायत सितम बात रात ज़ुबान इज़ाज़त शायरी

 
11326
आपक़ी मज़्लिस-ए-आ’लीमें अ’लर्रग़्म रक़ीब,
ब-इज़ाज़त ये ग़ुनहग़ार उठे और बैठे ll

                                                          अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

11327
इज़ाज़त हो तो,
हम इस शम्अ'-ए-महफ़िलक़ो बुझा ड़ालें…
तुम्हारे सामने ये रौशनी,
अच्छी नहीं लग़ती ……!
पुरनम इलाहाबादी

11328
मुझे ग़र्म-ए-नज़्ज़ारा देख़ा,
तो हँसक़र वो बोले…
कि इसक़ी इज़ाज़त नहीं हैं ll

                                           हसरत मोहानी

11329
दे मुझक़ो शिक़ायतक़ी,
इज़ाज़त क़ि सितमग़र…
क़ुछ तुझक़ो मज़ाभी,
मेरे आसारमें आवे……
मिर्ज़ा ग़ालिब

11330
तुक़ शिक़ायतक़ी अब इज़ाज़त हो,
नहीं रुक़ती ज़ुबानपर बात l
तुमक़ो आना न था, न आए तुम,
रह ग़ई रातभरक़ी रात ll

                                                       दाग़ देहलवी

7 September 2026

11321 - 11325 ज़िंदगी दुनियाँ इश्क़ ज़ुल्म ज़ुल्फ़ सलाह तलब रूठ ख़ुशी झूठ नफ़रत बात इज़ाज़त शायरी

 
11321
इज़ाज़त हो अग़र तो,
पूछ लूँ मैं तेरी ज़ुल्फ़ोंसे,
सुना हैं ज़िंदगी,
एक़ ख़ूबसूरत ज़ाल हैं…

11322
लाख़ क़हते रहें,
ज़ुल्मतक़ो न ज़ुल्मत लिख़ना…
हमने सीख़ा नहीं प्यारे,
ब-इज़ाज़त लिख़ना…ll
हबीब ज़ालिब

11323
मुझसे सलाह ली,
न इज़ाज़त तलब हुई…
बे-वज़ह रूठ बैठे हैं,
अपनी ख़ुशीसे आप……

11324
इज़ाज़त हो तो,
मैं इक़ झूठ बोलूँ…?
मुझे दुनियाँसे,
नफ़रत हो ग़ई हैं……ll
बशीर बद्र

11325
अग़र हो इज़ाज़त तो,
तुमसे एक़ बात पूछ लूँ…?
वो ज़ो इश्क़ हमसे सीख़ा था…
अब क़िससे क़रते हो…...?

6 September 2026

11316 - 11320 बात दम शब वस्ल क़िस्मत याद आरज़ू हाल मुहब्बत हयात लज़्ज़त लब ज़हर इज़ाज़त शायरी

 
11316
बात क़रनेक़ी,
शब-ए-वस्ल इज़ाज़त दे दो…
मुझक़ो दम भरक़े लिए,
ग़ैरक़ी क़िस्मत दे दो……
                                           बेख़ुद देहलवी

11317
सारे ज़ज़्बोंक़े बाँध टूट ग़ए…
उसने बस ये क़हा,
‘इज़ाज़त हैं’……
ख़्वाज़ा साज़िद

11318
तुम्हारी यादमें,
ज़ीनेक़ी आरज़ू हैं अभी…
क़ुछ अपना हाल सँभालूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……
                                      ज़ौन एलिया

11319
हैं मुहब्बत हयातक़ी लज़्ज़त,
वरना क़ुछ लज़्ज़त-ए-हयात नहीं…
हैं इज़ाज़त तो एक़ बात क़हूँ, वो,
मग़र ख़ैर… क़ोई बात नहीं ll
ज़ौन एलिया 

11320
क़ुछ तो मिल ज़ाए,
लब-ए-शीरींसे…
ज़हर ख़ानेक़ी,
इज़ाज़त ही सही……
                              आरज़ू लख़नवी

5 September 2026

11311 - 11315 इश्क़ मुहब्बत आशिक़ शिक़वा फ़ना होठ ख़िलाफ़ फ़िक़्र रिश्ता एहसास बात ज़ुर्म क़बूल दिल इज़ाज़त शायरी

 
11311
इश्क़ने क़ब इज़ाज़त ली हैं,
आशिक़ोंसे,
वो होता हैं और…
होक़र ही रहता हैं।

11312
शिक़वा तो बहुत हैं,
फ़ना होने नहीं क़र सक़ते,
मेरे होठोंक़ो इज़ाज़त नहीं,
तेरे ख़िलाफ़ बोलनेक़ी...!

11313
तुम्हारी फ़िक़्र क़रनेक़े लिए,
हमारा रिश्ता होना ज़रूरी तो नहीं…
एहसासक़ी ही तो बात हैं,
तुम्हारी इज़ाज़तभी ज़रूरी नहीं…

11314
चलो, ये ज़ुर्मभी क़बूल हैं,
ज़ो तेरी इज़ाज़तक़े बग़ैर,
तुझे अपना समझा…

11315
हमने क़्या उससे,
मुहब्बतक़ी इज़ाज़त ली थी l
दिलशिक़न ही सही,
पर बात बज़ा हैं उसक़ी……ll

4 September 2026

11306 - 11310 बोसा मोहब्बत बरहम बेताबी ख़ता चाह नज़र ज़ुल्फ़ तबाह ख़ूबसूरत दाम साक़ी इज़ाज़त शायरी

 
11306
न हो बरहम ज़ो बोसा,
बे-इज़ाज़त ले लिया मैने…
चलो ज़ाने दो,
बेताबीमें ऐसा हो ही ज़ाता हैं...!
                                             ज़लाल लख़नवी

11307
सुनो,
एक़ ख़ता हो ग़ई हैं,
हमने तुमक़ो…
तुमसे चुराया हैं,
तुम्हारी इज़ाज़तक़े बग़ैर…

11308
मैं चाहता हूँ क़ि,
तुमही मुझे इज़ाज़त दो…
तुम्हारी तरहसे क़ोई,
ग़ले लगाए मुझे……
                                        बशीर बद्र

11309
इज़ाज़त तो हमने भी न दी थी,
उसे मोहब्बतक़ी,
बस वो नज़र उठाते ग़ए,
और हम तबाह होते ग़ए !

11310
इज़ाज़त हो तो,
मैं तस्दीक़ क़र लूँ, तेरी ज़ुल्फ़ोंसे…
सुना हैं ज़िंदगी इक़,
ख़ूबसूरत दाम हैं साक़ी
                                                   अब्दुल हमीद अदम

3 September 2026

11301 - 11305 बेबस ख़ींच समय शाम ड़र बेवफ़ाई मीठी शहद इमली ख़ारा बिछड़ शायरी


11301
यूँ ना ख़ींच मुझे,
अपनी तरफ़ बेबस क़रक़े… 
ऐसा ना हो क़े, ख़ुदसेभी बिछड़ ज़ाऊं…
और तू भी ना मिले......

11302
यहीं मिलनेक़ा समयभी हैं,
बिछड़नेक़ा भी…
मुझक़ो लग़ता हैं बहुत अपनेसे ड़र,
शामक़े बाद……

11303
हाँ से ज़ी न लग़े,
तुम वहीं बिछड़ ज़ाना…
मग़र ख़ुदाक़े लिए,
बेवफ़ाई मत क़रना……

11304
तुमसे मिलक़र,
इमली मीठी लग़ती हैं l
तुमसे बिछड़क़र शहदभी,
ख़ारा लग़ता हैं ll
क़ैफ़ भोपाली

11305
अग़र वो बिछड़क़र,
ज़ी सक़ते हैं…
तो मरेंग़े हमभी नहीं…!

1 September 2026

11296 - 11300 दिल याँद ज़िंदग़ी सलीक़ा ख़बर शाम नग़्मा अंदाज़ हमसफ़र बिछड़ शायरी

 
11296
क़्या लिख़ूँ,
अपनी ज़िंदग़ीक़े बारेमें… 
वो लोग़ हीं बिछड़ ग़ए,
ज़ो ज़िंदग़ी हुआ क़रते थे......

11297
मुद्दतें हो ग़ईं,
बिछड़े हुए तुमसे लेक़िन…
आज़ तक़ दिलसे मिरे,
याँद तुम्हारी न ग़ई……
अख़्तर शीरानी

11298
ज़ो वो मिरे न रहें,
मैं भी क़ब क़िसीक़ा रहा…
बिछड़क़े उनसे,
सलीक़ा न ज़िंदग़ीक़ा रहा……

11299
तुझसे बिछड़ना,
क़ोई नया हादसा नहीं…
ऐसे हज़ारों क़िस्से,
हमारी ख़बरमें हैं……
आशुफ़्ता चंग़ेज़ी

11300
शाम आई तो बिछड़े हुए हमसफ़र,
आँसुओंसे इन आँख़ोंमें आने लग़े,
आँख़ें मंज़र हुई, क़ाम नग़्मा हुए,
घरक़े अंदाज़ हीं घरसे ज़ाते रहें।

30 August 2026

11291 - 11295 दुनियाँ ज़िन्दग़ी साँस सज़ा प्यार रूह मुमक़िन नज़दीक़ बिछड़ शायरी


11291
हुआ हैं तुझसे,
बिछड़नेक़े बाद ये मालूम…
क़ि तू नहीं था,
तिरे साथ एक़ दुनियाँ थी ll
                                        अहमद फ़राज़

11292
हम आपक़े प्यारमें क़ुछ क़र न ज़ायें,
बनक़े रूह बिछड़ ना ज़ायें…
भूलना मुमक़िन नहीं हैं आपक़ो,
मरनेसे पहले क़हीं मर ना ज़ायें……

11293
बहुत नज़दीक़ आती ज़ा रहीं हो…
बिछड़नेक़ा इरादा क़र लिया क़्या……
                                                                         ज़ौन एलिया

11294
बिछड़क़े तुमसे ज़िन्दग़ी सज़ा लग़ती हैं,
ये साँसभी ज़ैसे मुझसे ख़फ़ा लग़ती हैं,
अग़र उम्मीद-ए-वफ़ा क़रूँ तो क़िससे क़रूँ,
मुझक़ो तो मेरी ज़िन्दग़ी भी बेवफ़ा लग़ती हैं।

11295
अभी मंज़र बदलते ही,
बदल ज़ाएँग़े सब चेहरे…
बिछड़ते वक़्तक़ा ग़म हैं,
अभी तू नम न क़र आँखें……
                                                  रेनू नय्यर

29 August 2026

11286 - 11290 दिल एहसास ज़ीवन सपना ख़ुशी दर्द ग़म इम्कान ख़ुश बिछड़ शायरी

 
11286  
बिछड़नेक़ा दर्द क़ुछ यूँ मिला,
हर ख़ुशीमें भी अब ग़मसा ख़िला ll

11287
अबक़े 'वक़ार' ऐसे बिछड़े हैं…
मिलनेक़ा इम्कान नहीं हैं ll
वक़ार मानवी

11288
बिछड़ना सिर्फ़,
दूर होना नहीं होता,
ये वो एहसास हैं, ज़ो दिलमें,
हमेशाक़े लिए बस ज़ाता हैं।l

11289
उनसे 'शरर' क़ुछ ऐसे बिछड़े…
ज़ीवनक़ा हर सपना बिख़रा ll
शरर फ़तेह पुरी

11290
मुझसे बिछड़क़े रहना तुम्हे,
अच्छा लग़ता हैं ना,
तो ज़ाओ ख़ुश रहो,
मुझेभी तुम्हारी ख़ुशी,
अच्छी लग़ती हैं…!

28 August 2026

11281 - 11285 शज़र परिंदे मिलाप एहसास ख़ास मुक़म्मल पल टूट भुला हिस्स-ए-मिज़ाह बिछड़ शायरी

11281
बिछड़क़े तुझसे न देख़ा ग़या,
क़िसीक़ा मिलाप…
उड़ा दिए हैं परिंदे,
शज़रपें बैठे हुए……
                                          अदीम हाशमी

11282
तू बिछड़ा तो ये एहसास हुआ,
तेरा होना क़ितना ख़ास हुआ…!

11283
अभी बाक़ी हैं बिछड़ना उससे,
ना-मुक़म्मल ये क़हानी हैं अभी…
                                                    तारिक़ क़मर

11284
मैं हर उस पल टूटक़र,
बिछड़ ज़ाती हुँ l 
तेरा यूँ बिछड़ ज़ाना,
और फ़िर तेरा मुझे भुला देना ll

11285
उसक़ा बिछड़ना ले ग़या,
हिस्स-ए-मिज़ाह तक़…
हँसनेक़ी बात क़रता हूँ,
हँसता क़ोई नहीं……
                                      ओसामा ज़ुरै

27 August 2026

11276 - 11380 क़ातिब तक़दीर झग़ड़ साथ सवार रिश्ता तारा आसमान अज़ब हाल पराया शहर बिछड़ शायरी

 
11276
ज़िसक़ो मैं अपना बनाता हूँ,
बिछड़ ज़ाता हैं…
l
मेरी बनती ही नहीं,
क़ातिब-ए-तक़दीरक़े साथ…
ll
                                            शौक़त फ़हमी

11277
तुम्हारा तुम क़हक़र,
रोज़ झग़ड़ना मुझसे…
तुम्हारा आप क़हक़र,
बिछड़नेसे अच्छा था…!

11278
बिछड़क़े भी वो,
मिरे साथ ही रहा हरदम…
सफ़रक़े बादभी,
मैं सफ़रमें सवार रहा 
ll
                                   शक़ील आज़मी

11279
बहुत अच्छा चल रहा था,
यह रिश्ता हमारा…
बिछड़े इस रफ़्तारसे मानो,
मैं आसमान और
वो टूटता तारा हो ग़या…

11280
बिछड़क़े तुझसे,
अज़ब हाल हो ग़या मेरा l
तमाम शहर,
पराया दिख़ाई देता हैं ll

                                    मरग़ूब अली

26 August 2026

11271 - 11275 बेबस वक़्त आँख़ अश्क़ मलाल हालात तक़ाज़ा अदा घमंड़ गिला बात मोहब्बत संवर बिछड़ शायरी

 
11271
यूँ ना ख़ींच अपनी तरफ़,
मुझे बेबस क़रक़े l
क़ि ख़ुदसे बिछड़ ज़ाऊँ,
और तू भी ना मिले……ll

11272
बिछड़ते वक़्त ढलक़ता,
न ग़र इन आँख़ोंसे…
इस एक़ अश्क़क़ा,
क़्या क़्या मलाल रह ज़ाता ll
ज़माल एहसानी

11273
हालातक़ा तक़ाज़ा था,
एक़ बार मिलक़े हम…
बिछड़े क़ुछ इस अदासे,
क़े दोबारा मिल न सकें……

11274
वो ज़िस घमंड़से बिछड़ी,
गिला तो इसक़ा हैं…
क़ि सारी बात मोहब्बतमें,
रख़-रख़ावक़ी थी ll
अहमद फ़राज़

11275
ये क़िस मोड़पर तुम्हे,
बिछड़नेक़ी सूझी…
मुद्दतोंक़े बाद तो,
संवरने लग़े थे हम……

25 August 2026

11266 - 11270 दिल इत्तिफ़ाक़ नसीब क़रीब आसान पल दास्तान सोच क़हानी वक़्त साथ बिछड़ शायरी

 
11266
मिलना था इत्तिफ़ाक़,
बिछड़ना नसीब था…
वो उतनी दूर हो ग़यी,
ज़ितनी क़रीब थी ll
                             अंजुम रहबर

11267
मिलना आसान था,
बिछड़ना मुश्क़िल हैं…
तेरे बिना हर पल अब,
अधूरासा दिल हैं……

11268
उसक़े बारेमें,
बहुत सोचता हूँ…
मुझसे बिछड़ा,
तो क़िधर ज़ाएग़ा……
                          फ़रहत अब्बास शाह

11269
मैने तो समझा था,
क़े मिलक़र दास्तान पूरी हुई l
वो बिछड़क़र औरभी,
लम्बी क़हानी क़र ग़ए……ll

11270
ये बिछड़ते वक़्त,
क़हना चाहता था साहिबा ;
मैं तुम्हारे साथ,
रहना चाहता था साहिबा…
                                         हमज़ा हस्साम

24 August 2026

11261 - 11265 सोच साथ बिछड़ उम्र मलाल ख़्वाहिश उम्र मंज़ूर बिछड़ शायरी

 
11261
मुझसे बिछड़क़े,
तू भी तो रोएग़ा उम्रभर…
ये सोच ले क़ि,
मैं भी तिरीमें हूँ ll
                                      अहमद फ़राज़
                                                                                                                                                

11262
तू मेरे साथ नहीं हैं,
तो सोचता हूँ मैं…
क़ि अब तो तुझसे बिछड़नेक़ा,
क़ोईभी नहीं……
शाहिद क़माल

11263
क़ुछ दिन तो मलाल उसक़ा हक़ था,
बिछड़ा तो ख़याल उसक़ा हक़ था ll
                                                           क़िश्वर नाहीद

11264
तू पास नहीं,
फिरभी क़रीब लग़ता हैं;
ये बिछड़ना दिलक़ो,
अज़ीब लग़ता हैं ll

11265
क़ितना फ़ासला था, हमारे दरमियान...
उन्हें हमारा मिलना ज़रूरी नहीं था,
हमें तुम्हारा बिछड़ना मंज़ूर नहीं था ll

23 August 2026

11256 - 11260 दिल मुमक़िन ग़हराई ख़्वाब बात सोच अधूरा ज़वाब सूरत चेहरा मंज़िल ख़ामोश तन्हा याद ख़्याल शाम क़ाज़ल बिछड़ शायरी

 
11256
क़ैसे मुमक़िन हैं,
क़ि हम दोनों बिछड़ ज़ाएँगे…?
इतनी ग़हराईसे,
हर बातक़ो सोचा न क़रो…ll
                                            अज़ीज़ वारसी

11257
तू मिला थी ज़ैसे,
क़ोई ख़्वाब था…l
और बिछड़ना ज़ैसे,
अधूरा ज़वाब था …ll

11258
नहीं अब क़ोई ख़्वाब ऐसा,
तिरी सूरत ज़ो दिख़लाए…
बिछड़क़र तुझसे क़िस मंज़िलपर,
हम तन्हा चले आए……
                                       ख़लील-उर-रहमान आज़मी

11259
बिछड़क़र भी दिल तुझसे जुड़ा हैं l
हर ख़्यालमें तेरा ही चेहरा छुपा हैं ll

11260
याद हैं अबतक़,
तुझसे बिछड़नेक़ी वो अँधेरी शाम मुझे…
तू ख़ामोश ख़ड़ी थी लेक़िन,
बातें क़रता था क़ाज़ल……
                                                               नासिर क़ाज़मी

22 August 2026

10251 - 10255 एहसास अज़ीब क़रीब क़िताब फ़ूल ख़्वाब रूठ मुलाक़ात तूफ़ान इज़ाज़त हिज़्र बिछड़ शायरी

 
10251
ज़ब तुझसे बिछड़े,
तो दिन भी अज़ीब थे l
दूर होक़र एहसास हुआ,
हम तेरे क़ितने क़रीब थे ll

10252
अब के हम बिछड़े,
तो शायद क़भी ख़्वाबोंमें मिले…
ज़िस तरह सूख़े हुए फ़ूल,
क़िताबोंमें मिलें ll
अहमद फ़राज़


10253
तू बिछड़ी तो,
ज़ैसे सब क़ुछ छूट ग़या…
दिलक़ा हर क़ोना,
तुझसे ही रूठ ग़या ll

10254
फिर मुलाक़ातक़ा,
तूफ़ान उठा हैं दिलमें
फिरसे इक़ बार,
बिछड़ जानेकी तय्यारी हैं
अज़हर सज्जाद

11255
पहले देता हूँ,
बिछड़नेक़ी इज़ाज़त तुझक़ो…
फ़िर तेरा हिज़्र मनाक़र मैं,
बहुत रोता हूँ ll

21 August 2026

11246 - 11250 पल रिश्ते रफ़ू मिल बेनूर चिराग़़ उज़ाला ग़म क़म बिछड़ शायरी

 
11246
पलोंक़ी उधेड़ बुनमें,
ना ज़ाने क़ितने रिश्ते उधड़ ग़ए, 
मैं रफ़ू क़रता रहा,
ना ज़ाने फ़िरभी अपने क़्यों बिछड़ ग़ए।

11247
ख़ुदक़ों मुझमें,
छोड़ ग़ई हैं वो...
उसे तो ठीक़से,
बिछड़नाभी नहीं आता...

11248
एक़ तुमही न मिल सक़े,
वरना... मिलनेवाले तो…
बिछड़ बिछड़क़े मिले……

11249
बेनूरसी लग़ती हैं,
तुमसे बिछड़क़र ये रातें,
चिराग़़ तो ज़लते हैं,
मग़र उज़ाला नहीं क़रते।

11250
बिछड़क़र हमसे वो पूछते रहें,
‘क़ोई ग़म हैं क़्या…?’
हमने क़हा, ‘ज़ी रहें हैं हम’,
ये क़म हैं क़्या……?

20 August 2026

11241 - 11245 दिल ज़िंदग़ी ख़फ़ा रूह लिबास धज़्ज़ियाँ हबाब ज़ख़्म दर्द नींद सब्र अंदाज़ ज़ुदाई शायरी

 
11241
क़िस क़िसक़ो बताएँग़े,
ज़ुदाईक़ा सबब हम…
तू मुझसे ख़फ़ा हैं,
तो ज़मानेक़े लिए आ……!
                                           अहमद फ़राज़

11242
ग़ज़ब हैं रूहसे,
इस ज़ामा-ए-तनक़ा ज़ुदा होना…
लिबास-ए-तंग़ हैं उतरेग़ा,
आख़िर धज़्ज़ियाँ होक़र…ll
ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर

11243
तू हम-दमोंसे ज़ुदा रह क़ि,
टूट ज़ाता हैं…
हबाबक़े ज़ो क़रीं,
दूसरा हबाब आया 
ll
                                  मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

11244
ज़ुदाईयोंक़े ज़ख़्म,
दर्द-ए-ज़िंदग़ीने भर दिए l
तुझे भी नींद आ ग़ई…
मुझे भी सब्र आ ग़या……
नासिर क़ाज़मी

11245
फ़क़ीर मिज़ाज़ हूँ,
मैं अपना अंदाज़,
औरोंसे ज़ुदा रख़ता हूँ 
l
लोग़ मस्ज़िदोमें ज़ाते हैं,
मैं अपने दिलमें ख़ुदा रख़ता हूँ ll
                                              निदा फ़ाज़ली

19 August 2026

11236 - 11240 दिल मोहब्बत शिक़ायत भूल साथ हौसला सूरत आईना साँसे क़हानी सायाँ निशानी ज़ुदाई शायरी

 
11236
भूल ज़ानेक़ा हौसला ना हुआ;
दूर रहक़र भी वो ज़ुदा ना हुआ 
l
उनसे मिलक़र क़िसी औरसे क़्या मिलते;
क़ोई दूसरा उनक़े ज़ैसा ना हुआ 
ll


11237
ज़ुदाईक़ी रुतोंमें,
सूरतें धुँदलाने लग़ती हैं l
सो ऐसे मौसमोंमें,
आईना देख़ा नहीं क़रते ll
हसन अब्बास रज़ा

11238
ज़ुदा तो एक़ दिन साँसेभी होग़ी...
तो शिक़ायत सिर्फ़ मोहब्बतसे क़्यों…?

11239
सियह-बख़्तीमें,
क़ब क़ोई क़िसीक़ा साथ देता हैं l
क़ि तारीक़ीमें सायाँभी,
ज़ुदा रहता हैं इंसासे ll
इमाम बख़्श नासिख़ 

11240
हर लड़क़ीक़े दिलमें,
एक़ क़हानी होती हैं l
क़भी हंसी तो क़भी ज़ुदाईक़ी,
निशानी होती हैं 
ll

18 August 2026

11231 - 11235 दिल आँसू मुस्क़ुरा दर्द धूप ज़िस्म होंठ क़हानी सदा ग़ुफ़्तुग़ू समझ ज़ुदाई शायरी

 
11231
आँसू छुपाक़र मुस्क़ुराना,
सीख़ लिया हैं,
ज़ुदाईक़े दर्दक़ो,
दिलमें दबा लिया हैं।

11232
ज़ावियाँ धूपने,
क़ुछ ऐसा बनायाँ हैं क़ि…
हम साएक़ों ज़िस्मक़ी,
ज़ुम्बिशसे ज़ुदा देख़ते हैं ll
आसिम वास्ती

11233
क़ुछभी हो वो अब दिलसे,
ज़ुदा हो नहीं सक़ते…
हम मुज़रिम-ए-तौहींन-ए-वफ़ा,
हो नहीं सक़ते……

11234
चुप रहक़े ग़ुफ़्तुग़ूहींसे,
पड़ता हैं तफ़रक़े…
होते हैं दोनो होंठ ज़ुदा,
इक़ सदाक़े साथ…ll
ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर

11235
टूटे दिलक़ी क़हानी,
क़ोई नहीं समझता,
ज़ुदाईक़ा दर्द समझता वहीं हैं,
ज़ो सहता हैं।

17 August 2026

11226 -11230 दिल साथ पल पल सुनसान उदास शामें बिख़रा सनम दुनियाँ बिछड़ ज़िस्म तन्हाई ज़ुदाई शायरी

 
11226
साथ बिताए वो पल,
अब बस 
 पलहैं,
तेरी ज़ुदाईसे,
घरभी अब सुनसान हैं।

11227
उदास शामें ग़िनता हूँ,
तेरी तन्हाईमें l
दिल टूटक़र बिख़रा हैं,
तेरी ज़ुदाईमें ll

11228
तू मिला भी हैं... तू ज़ुदा भी हैं... तेरा क़्या क़हना...
तू सनम भी हैं... तू ख़ुदा भी हैं... तेरा क़्या क़हना…

11229
मेरी दुनियाँ तुझमेंहीं,
रूक़ी हैं क़हीं…
ज़ुदा तो हूँ पर,
बिछड़ न पायाँ क़भी……

11230
ज़िस दिनसे,
वो ज़ुदा हुआ हैं…
मैने,
ज़िस्म नहीं पहना हैं……ll

16 August 2026

11221 - 11225 प्यार मोहब्बत दिल वक़्त सफ़र सब्र एहसास ग़हरा इंतज़ार इज़हार आँसू उदास सुक़ून दास साँस ज़ुदाई शायरी

 
11221
बरसोंक़ी ज़ुदाई भी,
क़म नहीं क़र पायी मोहब्बत 
l
वक़्त ग़ुज़रा मग़र,
मोहब्बत आज़भी हैं ज़िंदा ll

11222
लंबे सफ़रक़ी ज़ुदाईने,
सिख़ाया सब्र क़रना l
पर मोहब्बतक़ा एहसास,
आज़ भी ताज़ा हैं ll

11223
जितनी लंबी ज़ुदाई,
उतना ग़हरा इंतज़ार 
l
शायद य हैं,
सच्चे प्यारक़ा असली इज़हार 
ll

11224
आँसू उदास बहते हैं,
तेरे नामसे l
ज़ुदाईने छीन लिया,
वो सुक़ून अरसेसे…ll

11225
दूरियाँ बढ़ीं तो बढ़ीं,
पर दिल तो अभी पास हैं l
तेरे बिना ये ज़िंदग़ी,
बस एक़ उदास साँस हैं ll

15 August 2026

11216 - 11220 ज़िंदग़ी उदास दर्द आँख क़हानी परछाई क़दम साथ ग़हरा सिलसिला तलाश सुक़ून आँसू ज़ुदाई शायरी

 
11216
दर्द छुपा हैं आँखोंमें, नमीसी रहती हैं 
l
ज़ुदाईने लिख़ी हैं, वो दर्द भरी क़हानी 
ll

11217
दर्दक़ी परछाई, हर क़दम हैं साथ l
ज़ुदाईने बना दी, ज़िंदग़ी उदास ll

111218
दर्दक़ी ग़हराईमें, डूबा रहता हूँ 
l
तेरी ज़ुदाईक़ा सिलसिला, सहता रहता हूँ 
ll

11219
आँख़े नम रहती हैं, तेरी तलाशमें l
ज़ुदाईने छीन लिया सुक़ून, तुम्हारी आसमें ll

11220
आँसू दर्द बनक़र, बहते रहते हैं 
l
ज़ुदाईक़ी रातें, ज़लती रहती हैं ll

14 August 2026

11211 -11215 बहला अदा दर्द क़िस्मत ख़ुशबू बर्बाद ग़म लम्हें यादें साँस ज़ुदाई शायरी

 
11211
न बहलावा न समझौता,
ज़ुदाईसी ज़ुदाई हैं…
'अदा' सोचो तो ख़ुशबूक़ा सफ़र,
आसाँ नहीं होता……
                                                  अदा ज़ाफ़री

11212
ज़ुदाईक़ा दर्द छुपा हैं,
दिलक़े क़ोनेमें…
हर साँसमें बसता,
वो तेरा होनेमें……

11213
मैने समझा था क़ि,
लौट आते हैं ज़ानेवाले ;
तूने ज़ाक़र तो,
ज़ुदाई मिरी क़िस्मत क़र दी ll
                                   अहमद नदीम क़ासमी

11214
दर्द बनक़र बसी हैं,
तेरी वो यादें…
ज़ुदाईक़े लम्हें,
दिलक़ो बर्बाद क़र देते हैं ll

11215
ग़म अज़ीज़ोंक़ा,
हसीनोंक़ी ज़ुदाई देख़ी…
देख़े दिख़लाए अभी,
ग़र्दिश-ए-दौराँ क़्या क़्या......
                                            अख़्तर शीरानी

13 August 2026

11206 - 11210 ज़िंदग़ी बयान आसान दर्द वक़्तनिशानी तलब दाग़ याद वज़ह सज़ा दीवार खुशी बिख़र ज़ुदाई शायरी

 
11206
ज़ुदाईक़ा दर्द,
बयान क़रना आसान नहीं,
पर तेरे बिना रहनाभी,
क़हाँ मुमक़िन हैं।

11207
वक़्त-ए-रुख़्सत निशानी,
ज़ो तलबक़ी तो क़हा…
दाग़ क़ाफ़ी हैं,
ज़ुदाईक़ा अग़र याद रहें ……

11208
इस ज़ुदाईमें,
तुम अंदरसे बिख़र ज़ाओग़े…
क़िसी मा'ज़ूरक़ो देख़ोग़े,
तो याद आऊँग़ा ll
                                           वसी शाह

11209
तू मेरी हर खुशीक़ी,
वज़ह थी क़भी,
अब तेरी ज़ुदाई ही मेरी,
सज़ा बन ग़ई।

11210
घरक़ी हर दीवार,
तेरी यादोंसे भरी हैं,
तेरी ज़ुदाईने,
ज़िंदग़ी अधूरी क़र दी हैं।

12 August 2026

11201 - 11205 दिल ज़िंदग़ी चुपक़े बात याद उदासी दर्द ख़ामोशी परेशान ख़्वाब प्यास ज़हर तलाश ज़ुदाई शायरी


11201
दिल रोता रहता हैं,
चुपक़ेसे हर रात…
ज़ुदाईक़ी उदासी,
बहुत ग़हरी बात  …!


11202
ज़िंदग़ी नाम हैं ज़ुदाईक़ा,
आप आए तो मुझक़ो याद आया…ll
नरेश क़ुमार शाद

11203
रातक़ी ख़ामोशीमें,
उदासी ग़हराती हैं l
दिलक़ो रुलाती हैं,
तेरी ज़ुदाई……ll

11204
अब ज़ुदाईक़े सफ़रक़ो,
मिरे आसान क़रो l
तुम मुझे ख़्वाबमें आक़र,
परेशान न क़रो……ll
मुनव्वर राना

11205
रातें दर्द बन ग़ई,
तेरी तलाशमें…
ज़ुदाईक़ा ये ज़हर,
दिलक़ी प्यास बुझा न पाया ll
 

11 August 2026

11196 - 11200 दिल दर्द साँसें आग़ रात नाम आँसू यादें उदास लम्हे परछाई तन्हाई ज़ुदाई शायरी

 
11196
दिल ज़लता रहता हैं, तेरी ज़ुदाईमें,
दर्दक़ी ये आग़, बुझती नहीं रातमें…

11197
तेरा नाम लेते ही, आँसू बह ज़ाते हैं,
ज़ुदाईक़ी तन्हाई, रातभर ज़ग़ाती हैं ll

11198
तेरी यादें सताती हैं, हर रातक़ो तन्हा क़र,
ज़ुदाईक़ा दर्द, दिलक़ो रुलाता हैं रातभर…

11199
तेरी यादें ग़ले लग़तीं हैं, रातक़ी तन्हाईमें,
दिलक़ो छूती हैं वो, ज़ुदाईक़ी परछाईमें ll

11200
साँसें थमसी ज़ातीं हैं, तेरी याद आते ही…
उदास लम्हे ग़िनता हूँ, रातभर ज़ाग़ते ज़ाग़ते…..

10 August 2026

11191 - 11195 ज़िंदग़ी नींद शब पल मुँह क़समें वादा सबक़ बहार आलम ख़िज़ाँ वस्ल फ़िक़्र ज़ुदाई शायरी

 
11191
थी वस्लमेंभी,
फ़िक़्र-ए-ज़ुदाई तमाम शब…
वो आए तो भी,
नींद न आई तमाम शब……
                                        मोमिन ख़ाँ मोमिन

11192
ग़ुज़रते पलोंने,
बहुत क़ुछ सिख़ा दिया,
ज़ुदाईभी ज़िंदग़ीक़ा,
एक़ सबक़ निक़ली।

11193
वस्लमें रंग़ उड़ ग़या मेरा,
क़्या ज़ुदाईक़ो मुँह दिख़ाऊँग़ा ll
                                                मीर तक़ी मीर

11194
साथ ज़ीने मरनेकी,
क़समें ख़ाई थीं हमने,
अब ज़ुदाईमेंभी,
वो वादा निभाना हैं हमने।

11195
मिरी बहारमें,
आलम ख़िज़ाँक़ा रहता हैं l
हुआ ज़ो वस्ल तो,
ख़टक़ा रहा ज़ुदाईक़ा ll
                                 ज़लील मानिक़पूरी

8 August 2026

11186 - 11190 दिल सूरत शक़्ल मोड़ तन्हा साथ मतलब दाग़ अल्फ़ाज़ मुश्क़िल तलाश फ़ासले ज़ुदाई शायरी

 11186
इक़ शक़्ल हमें फ़िर भाई हैं,
इक़ सूरत दिलमें समाई हैं l
हम आज़ बहुत सरशार सही,
पर अग़ला मोड़ ज़ुदाई हैं ll
                                          अतहर नफ़ीस

11187
ज़ुदाईने सिख़ाया हैं,
तन्हा रहना क़्या हैं,
वरना पहले तो साथक़ा,
मतलबही क़ुछ और था।

11188
ज़ुदा क़िसीसे क़िसीक़ा,
ग़रज़ हबीब न हो…
ये दाग़ वो हैं क़ि,
दुश्मनक़ोभी नसीब न हो ll
                                         नज़ीर अक़बराबादी

11189
अल्फ़ाज़ क़म पड़ ज़ाते हैं,
तुझे बतानेमें,
क़ितना मुश्क़िल हैं,
तेरी ज़ुदाई सहनेमें।

11190
तिरी तलाशमें निक़ले तो,
इतनी दूर ग़ए…
क़ि हमसे तय न हुए,
फ़ासले ज़ुदाईक़े ll
                                 ज़ुनैद हज़ीं लारी