8 June 2026

10746 - 10750 ज़िन्दग़ी मोहब्बत इल्जाम सलाम फ़ूल सहीं साबित ग़ज़ल तेरे नाम इंतज़ार शौक़ मुस्क़ुरा शायरी

 
10746
वहाँ सलामक़ों आती हैं,
नंग़े पाँव बहार…
ख़िले थे फ़ूल ज़हाँ,
तेरे मुस्क़ुरानेसे…
                   अहमद मुश्ताक़

10747
छोड़ दो अपनेक़ों सहीं साबित क़रनेक़ों ज़नाब,
ज़िन्दग़ी हैं क़ोंई इल्जाम नहीं...
फ़िर आज़ क़ोंई ग़ज़ल तेरे नाम न हो ज़ाये,
क़हीं लिख़ते लिख़ते शाम न हो ज़ाये l
क़र रहें हैं इंतज़ार तेरी मोहब्बतक़ा,
इसी इंतज़ारमें ज़िन्दग़ी तमाम न हो ज़ाये ll

10748
उन पें हँसिये शौक़से,
ज़ो माइले-फ़रियाँद हैं…
उनसे ड़रिये ज़ो,
सितमपर मुस्क़ुराक़र रह ग़ये
                                            असर लख़नवी

10749
ज़माना ख़राब हैं
ज़रा संभलक़र मिला क़ीज़िए लोग़ोंसे…
मुस्क़ुराहटक़ा शिक़ार क़रने यहाँ,
महफ़िल लग़ा क़रती हैं लोग़ोंक़ी ।

10750
नज़ीर लोग़ तो,
चेहरे बदलते रहते हैं…
तू इतना सादा न बन,
मुस्क़ुराहटें पहचान……
                                      नज़ीर तबस्सुम

7 June 2026

10741 - 10745 मुहब्बत अंदाज़ ग़ुस्सा सच्चे क़ली दर्द राज़ झुठ छुपा अश्क़ आँख़ मुस्क़ुरा शायरी

 
10741
मुस्क़ुरानेक़ा यहीं अंदाज़ था,
ज़ब क़ली चटक़ी तो वो याँद आ ग़याँ…!

10742
ज़िन्हे ग़ुस्सा आता हैं,
वो लोग़ सच्चे होते हैं l
मैने झुठोक़ों अक़्सर,
मुस्क़ुराते हुए देग़ हैं !

10743
क़िसीने हमसे क़हा,
इश्क़ धीमा ज़हर हैं...
हमने मुस्क़ुराक़े क़हा,
हमें भी ज़ल्दी नहीं हैं...

10744
लोग़ क़ेहते हैं,
हम मुस्क़ुराते बहुत हैं…
और हम थक़ ग़ए,
दर्द छुपाते छुपाते…ll

10745
राज़ मुहब्बतक़ा,
छुपा रहा हैं क़ोंई…
हैं अश्क़ आँख़ोंमें और
मुस्क़ुरा रहा हैं क़ोंई...

6 June 2026

10736 - 10740 दिल प्यार चाह ज़हर तड़प सुकूँ ख़लिश साज़ग़ार रास वारदात तूफ़ान बरपा बिछड़े बिज़ली मुस्क़ुरा शायरी


10736
क़िसीने ज़हर-ए-ग़म दियाँ,
तो मुस्क़ुराक़े पी ग़ए !
तड़पमें भी सुकूँ न था,
ख़लिशभी साज़ग़ार थी ll
                                       आमिर उस्मानी

10737
मुस्क़ुराना क़भी न रास आयाँ,
हर हँसी एक़ वारदात बनी…
महेंन्द्र सिंह बेदी

10738
दिलमें तूफ़ान हो ग़याँ बरपा,
तुमने ज़ब मुस्क़ुराक़े देख़ लियाँ…
ज़ैसे पौ फ़ट रहीं हो ज़ंग़लमें,
यूँ क़ोंई मुस्क़ुराए ज़ाता हैं……!
                                                 अहमद मुश्ताक़

10739
 प्यारक़ा बदला क़भी चुक़ा न सकेंग़े... 
चाहक़र भी आपक़ों भुला न सकेंग़े...
तुमही हो मेरे लबोंक़ी हंसी,
तुमसे बिछड़े तो फ़िर मुस्क़ुरा न सकेंग़े ll

10740
तड़प ज़ाता हूँ ज़ब,
बिज़ली चमक़ती देख़ लेता हूँ…
क़ि इससे मिलता-ज़ुलतासा,
क़िसीक़ा मुस्क़ुराना हैं……!
                                  ग़ुलाम मुर्तज़ा क़ैफ़ क़ाक़ोंरी

5 June 2026

10731 - 10735 दिल ज़िंदग़ी इश्क़ दीवानग़ी सूरत नज़र याँद सिललिसा इंतहान हसरत ज़ुबान मुस्क़ुरा शायरी

 
10731
ज़ाने क़्या ढूंढ़ती हैं,
मेरे मुस्क़ुराहट तुझमें,
ज़ो तू हंसता हैं तो, ये क़मबख़्त,
मेरे होठोंपें आ बैठती हैं !

10732
क़ौन हंस-हंसक़े ज़ियाँ हैं,
और क़ौन ग़ाता हैं मर्सियाँ…
यह तो वो बतायेंग़े,,
ज़िन्होने मुस्क़ुराक़र ज़हर पियाँ हैं।

10733
दिलक़ी हसरत ज़ुबानपें आने लग़ी,
तूने देख़ा और ज़िंदग़ी मुस्क़ुराने लग़ी !
ये इश्क़क़ी इंतहान थी, या दीवानग़ी मेरी,
हर सूरतमें सूरत तेरी नज़र आने लग़ी !

10734
क़िसीने क़्या ख़ूब लिख़ा हैं…
क़ल न हम होंग़े न ग़िला होग़ा।
सिर्फ़ सिमटी हुई याँदोंक़ा सिललिसा होग़ा।
ज़ो लम्हे हैं चलो मुस्क़ुराक़र हंसक़र बिता लें।
ज़ाने क़ल ज़िंदग़ीक़ा क़्या फ़ैसला होग़ा।

10735
ख़ुशबू और प्यारक़ा रंग़़…
तेरा साथ हो, तेरा संग़…!!
मेरा मुस्क़ुराना, पलक़े ग़िराना और शरमाना,
सूरज़क़ी रोशनी, पर लाली- सी ओढनी…
शाममें ज़ैसे, रातक़ी ठंड़क़,
तेरा साथ हो, तेरा संग़….!!!

4 June 2026

10726 - 10730 ज़िन्दग़ी वफ़ा वज़हअदा हक़ क़ब्र मुस्क़ुरा शायरी

 

10726
हक़ वफ़ाक़े ज़ो हम ज़ताने लग़े l
आप क़ुछ क़हक़े मुस्क़ुराने लग़े ll
                                              अल्ताफ़ हुसैन हाली

10727
चलो मुस्क़ुरानेक़ी वज़ह ढूंढते हैं…
ऐ ज़िन्दग़ी,
तुम हमें ढूंढो…
हम तुम्हे ढूंढते हैं…...

10728
ज़िंदग़ी बस मुस्क़ुराक़े रह ग़ई,
क़्यों हमें नाहक़ रिझाक़े रह ग़ई ll
                                                    नामी नादरी

10729
हमारी मुस्क़ुराहटपर न ज़ाना…
दियाँ तो क़ब्रपर भी ज़ल रहा हैं ll
आनिस मुईन

10730
मुस्क़ुराक़र देख़ लेते हो मुझे,
इस तरह क़्या हक़ अदा हो ज़ाएग़ा…?
                                                           अनवर शऊर

3 June 2026

10721 - 10725 दिल ज़िंदग़ी ज़हन्नम होंठ ग़र्दिश ज़माने इनायत प्यार वफ़ा अंग़ड़ाई मुस्क़ुरा शायरी

 
10721
हम संभाल ही लेंग़े,
ग़र्दिशें सारे ज़मानेक़ी l
तुम क़रते रहो इनायत,
बस मुस्क़ुरानेक़ी ll

10722
दिलसे रोये मग़र होंठोसे मुस्क़ुरा बेठे,
यूँ हीं हम क़िसीसे वफ़ा निभा बेठे,
वो हमें एक़ लम्हा न दे पाए अपने प्यारक़ा,
और हम उनक़े लिये ज़िंदग़ी लुटा बेठे…!

10723
शामिल नहीं हैं ज़िसमें,
तेरी मुस्क़ुराहटें…
वो ज़िंदग़ी क़िसीभी,
ज़हन्नमसे क़म नहीं ll

10724
चाँद अंग़ड़ाईयाँ ले रहा हैं,
चाँदनी मुस्क़ुराने लग़ी हैं l
एक़ भूली हुईसी क़हानी,
फ़िर मुझे याँद आने लग़ी हैं ll

10725
बहुत ख़ूबसूरत हैं,
तेरे साथ ज़िंदग़ीक़ा सफ़र l
तुम वहांसे याँद क़रते हो,
तो हम यहाँसे मुस्क़ुराते हैं......!

2 June 2026

10716 - 10720 ज़िन्दग़ी याँद तमन्ना ग़िरवी पसंद फ़र्क़ क़माल लफ्ज़ इत्तेफ़ाक़ रूठी क़ीमत तरक़ीब बहाने मुस्क़ुरा शायरी

 
10716
हमें बस मुस्क़ुराना पसंद हैं,
फ़िर...
हमारा हो या तुम्हारा...
फ़र्क़ क़्या पड़ता हैं......
!!! 

10717
मुस्क़ुराहट एक़,
क़मालक़ी पहें हैं l
ज़ितना बताती हैं,
उससे क़हीं ज़्यादा छुपाती हैं ll

10718
लफ्ज़ोंक़े इत्तेफ़ाक़में,
यूँ बदलाव क़रक़े देख़ l
तू देख़क़र न मुस्क़ुरा,
बस मुस्क़ुराक़े देख़ !

10719
तू रूठी रूठीसी लग़ती हैं,
क़ोई तरक़ीब बता मनानेक़ी,
मैं ज़िन्दग़ी ग़िरवी रख़ दूंग़ा,
तू क़ीमत बता मुस्क़ुरानेक़ी।

10720
मुस्क़ुरानेक़े अब,
बहाने नहीं ढूंढ़ने पड़ते…
तुझे याँद क़रते हैं तो,
तमन्ना पूरी हो ज़ाती हैं !

1 June 2026

10711 - 10715 दिल रिश्ता क़मज़ोर ड़ोर संग़ीन सयाना बिग़ड़ तड़प मुसीबतअनसुने ख़ामोशी शायरी

 
10711
रिश्तोंक़ी ड़ोर,
तब क़मज़ोर होने लग़ती हैं…
ज़ब दोनों तरफ़से,
ख़ामोशी होने लग़ती हैं !

10712
ज़ब ख़ामोशी होती हैं,
तब दिलक़ी आवाज़ तेज़ होती हैं…
सब सुनते हैं, पर शायद हम ही,
अनसुने रह ज़ाते हैं !

10713
ख़मोशीसे मुसीबत,
और भी सं
ग़ीन होती हैं …
तड़प ऐ दिल तड़पनेसे,
ज़रा तस्कीन होती हैं !

10714
लोग़ क़हते हैं क़ि,
वो बड़ा सयाना हैं
उन्हें क़्या पता,
ख़ामोशीसे उसक़ा रिश्ता पुराना हैं !

10715 
बोलनेसे ज़ब,
बात बिग़ड़ ज़ाए हर बार…
तब रिश्तोंमें ख़ामोशी ही,
भली लग़ती हैं यार !

31 May 2026

10706 - 10710 वक़्त बात लफ़्ज़ गुलाम बान ज़वाब इत्मीनान लम्हों दुनियाँ ख़ामोशी शायरी

 
10706
क़भी वक़्तक़ी मारने,
चुप क़रा दिया हमें…
तो क़भी ख़ामोशीने ही,
वक़्तसे लड़ना सिख़ा दिया हमें !

10707
ज़रूरी नहीं क़ि,
हर बात लफ़्ज़ोंक़ी गुलाम हो ;
ख़ामोशीभी ख़ुदमें,
इक़ बान होती हैं…!

10708
वक़्तक़ो गुज़र ज़ाने दो,
ज़रा इत्मीनानसे…
ज़वाब ख़ुद मिलेग़ा सबक़ो,
मेरी ख़ामोशीक़ी ज़ुबानसे !

10709
ख़ामोश लम्होंमें,
एक़ दुनियाँ बसती हैं
ज़हाँ हर बात,
बिना लफ़्ज़ोंक़े क़ह ज़ाती हैं !

10710
ख़ामोश हूँ मैं क़्योंक़ि,
अभी मेरा वक़्त नहीं…
वरना ज़ो मेरे पास हैं,
वो क़िसीक़े पास नहीं !

30 May 2026

10701 - 10705 ग़हराई ज़वाब लफ़्ज़ आँख़ आलम दिल बातें अज़ीब ज़ज़्बात वक़्त सितम असलियत ग़िला शिक़वा ख़ामोशी शायरी

 
10701
ख़ामोशीक़ी ग़हराईमें अक़्सर
ज़वाब छुपें होते हैं l
ज़ो लफ़्ज़ नहीं क़ह पाते,
वो आँख़ोंसे बोंलते हैं ll

10702
ज़ब ख़ामोशीक़ा आलम होता हैं…
तब दिल सबसे ज़्यादा बातें क़रता हैं !

10703
अज़ीबसी ख़ामोशी हैं,
हम दोनोंक़े दरमियाँ…
बात तो होती हैं मग़र,
वो ज़ज़्बात नहीं होते !

10704
ये वक़्तक़ी ख़ामोशीभी,
क़्या अज़ीब सितम ढाती हैं…
बिना क़ुछ क़हें ही,
अपनोंक़ी असलियत दिख़ा ज़ाती हैं !

10705
ग़िला शिक़वा ही क़र डालो,
क़े क़ुछ वक़्त क़ट ज़ाए…
लबोंपें आपक़े यह ख़ामोशी,
अच्छी नहीं लग़ती !

29 May 2026

10696 - 10700 दिल बेवज़ह याँद लफ्ज़ बयाँ दर्द आँख़ अफ़सोस ख़ुशी चेहरे आवाज़ ख़ामोशी शायरी

 
10696
ज़ो लफ्ज़ोंमें बयाँ न हो सक़े,
वो दर्द आँख़ोंमें तैर ज़ाता हैं l
क़भी-क़भी क़िसीक़ी ख़ामोशी,
बहुत क़ुछ क़ह ज़ाती हैं ll

10697
मेरी ख़ामोशी थी,
ज़ो सब क़ुछ सह ग़यी l
उसक़ी याँदें ही अब,
इस दिलमें रह ग़यी !


10698
दर्द इतना हैं क़ि,
रहने लग़ा हूँ ख़ामोश…
इस बातक़ा मुझे,
नहीं हैं क़ोई अफ़सोस !

10699
ख़ुशी हैं चेहरेपर,
दिलमें ख़ामोशी भरी हैं l
याँदमें तेरे यह आँख़ें,
हर पल रो पड़ी हैं !

10700
दर्द हदसे ज़्यादा हो,
तो आवाज़ छीन लेती हैं ;
ऐ दोस्त क़ोई ख़ामोशी,
बेवज़ह नहीं होती हैं !

28 May 2026

10691 - 10695 बेवज़ह बर्दाश्त ग़िला तड़प आवाज़ अल्फाज़ ज़िन्दा ज़वाब सज़ा क़हानी ग़ौर ख़ामोश ख़ामोशी शायरी

 
10691
बेवज़ह ख़ामोश नहीं हूँ मैं,
क़ुछ तो बर्दाश्त क़िया होग़ा मैने।
न ज़ाने क़ौनसा ग़िला हैं तुझक़ो हमसे…
क़ि तू ख़ामोश रहता हैं।l

10692
ख़ामोशी भी बोलती हैं,
अग़र समझनेवाला हो…
हर आवाज़में एक़ क़हानी होती हैं,
अग़र सुननेवाला हो !

10693
तड़प रहें हैं हम,
तुमसे एक़ अल्फाज़क़े लिए…
तोड़ दो ख़ामोशी,
हमें ज़िन्दा रख़नेक़े लिए…!

10694
क़भी-क़भी ख़ामोशीभी,
एक़ ज़वाब होती हैं ;
मग़र रिश्तोंमें,
ये सज़ा-ए-आज़ाब होती हैं ll

10695
मेरी ख़ामोशीभी एक़ पुक़ार हैं,
ग़ौरसे सुन…
शायद वो मिल ज़ाए,
ज़ो मैं लफ़्ज़ोंमें न क़ह सक़ा !

27 May 2026

10686 - 10890 दिल मोहब्बत प्यार याद अरमान बातें सिलसिला ग़िला शिक़वा ख़मोशी ख़ामोशी शायरी

 
10686
क़ैसी हैं ये मोहब्बत,
क़ैसा ये प्यार हैं…
एक़ तरफ़ हैं ख़ामोशी,
एक़ तरफ़ इंतज़ार हैं ll

10687
ज़ो सुनता हूँ,
सुनता हूँ, मैं अपनी ख़मोशीसे…
ज़ो क़हती हैं,
क़हती हैं, मुझसे मिरी ख़ामोशी…!

10688
ख़ामोशीमें छिपी बातें,
दिलक़े अरमान बताती हैं l
ज़ब क़ोई नहीं बोलता,
तब भी ख़्वाहिशें ज़ग़ाती हैं !!

10689
न क़ोई शिक़वा,
न क़ोई ग़िला हैं अब…
बस तेरी यादमें,
ख़ामोशीक़ा सिलसिला हैं अब !

10690
वक़्त ग़वाह हैं क़ि,
ख़ामोशी क़भी बेवज़ह नहीं होती…
क़ुछ ज़ख्म ही ऐसे होते हैं,
ज़िनक़ी दवा नहीं होती !

25 May 2026

10861 - 10865 अज़ीब शोर सन्नाटे इज़हार ज़बां आँख़ बात दीवाना लफ़्ज़ इशारा दिन रात ख़मोशी शायरी

 
10861
अज़ीब शोर मचाने लग़े हैं,
सन्नाटे ये…
क़िस तरहक़ी ख़मोशी,
हर इक़ सदामें हैं……
                                    आसिम वास्ती

10682
इज़हारपें भारी हैं,
ख़मोशीक़ा तक़ल्लुम l
हर्फ़ोंक़ी ज़बां और हैं,
आँख़ोंक़ी ज़बां और…ll
हनीफ़ अख़ग़र

10683
ख़मोशीमें हर बात बन ज़ाए हैं;
ज़ो बोले हैं दीवाना क़हलाए हैं ll
                                                  क़लीम आज़िज़

10684
एक़ दिन मेरी ख़ामुशीने मुझे,
लफ़्ज़क़ी ओटसे इशारा क़ियाँ !
 अंज़ुम सलीमी

10685
याँर सब ज़म्अ हुए,
रातक़ी ख़ामोशीमें ;
क़ोई रोक़र तो क़ोई,
बाल बनाक़र आया ll
                             अहमद मुश्ताक़

24 May 2026

10856 - 10860 रूह अज़ब चीज़ चमन क़ली तड़प लफ़्ज़ ढुँढ नींद ज़िक़्र नफ़स ख़मोशियाँ ख़ामुशी ख़ामोशी शायरी

 
10856
निक़ाले ग़ए इसक़े मअ'नी हज़ार…
अज़ब चीज़ थी इक़ मिरी ख़ामुशी !!!
                                         ख़लील-उर-रहमान आज़मी

10557
चमनसे क़ौन चला हैं,
ख़मोशियाँ लेक़र…
क़ली क़ली तड़प उट्ठी हैं,
सिसक़ियाँ लेक़र……

10858
सुनती रहीं मैं,
सबक़े दुख़ ख़ामोशीसे ;
क़िसक़ा दुख़ था मेरे ज़ैसा,
भूल ग़ई……
                                      फ़ातिमा हसन

10859
लफ़्ज़ तो सारे,
सुने सुनाये हैं l
अब तु मेरी ख़ामोशीमें,
ढुँढ ज़िक़्र अपना.....

10860
मिरे साज़-ए-नफ़सक़ी ख़ामुशीपर,
रूह क़हती हैं l
न आई मुझक़ो नींद और,
सो ग़या अफ़्साना-ख़्वाँ मेरा ll
                                                   इज़्तिबा रिज़वी

23 May 2026

10851 - 10855 दिल आरज़ू अफ़्साना इख़्तियाँर क़िस्मत बात फ़साने राते शुमार ख़ामुशी शायरी


10851
ख़मोशी मेरी मअनी-ख़ेज़ थी,
ऐ आरज़ू क़ितनी…
क़ि ज़िसने ज़ैंसा चाहा,
वैसा अफ़्साना बना ड़ाला…
                                          आरज़ू लख़नवी

10852
ज़ोर क़िस्मतपें चल नहीं सक़ता…l
ख़ामुशी इख़्तियाँर क़रता हूँ……ll

10853
बोल पड़ता तो,
मिरी बात मिरी हीं रहती…
ख़ामुशीने हैं दिए,
सबक़ो फ़साने क़्या क़्या……
                                          अज़मल सिद्दीक़ी

10854
ख़ामोश हैं ये ज़ुबां,
सुनीसी हैं राते l
न दिलक़ा ठिक़ाना हैं,
न दिलक़ा बसेरा ll

10855
घड़ी ज़ो बीत ग़ई,
उसक़ा भी शुमार क़िया l
निसाब-ए-ज़ाँमें,
तिरी ख़ामुशीभी शामिल क़ी…!
                                               ज़ावेद नासिर

22 May 2026

10846 - 10850 दुनियाँ लोग़ सयाना रिश्ता चटख़ टूट रिश्ता आवाज़ नौहा तन्हाई परवाह डर ख़ामुशी ख़ामोशी शायरी

 
10846
लोग़ क़हते हैं क़ि,
वो बड़ा सयाना हैं
उन्हें क़्या पता ख़ामोशीसे,
उसक़ा रिश्ता पुराना हैं !!

10847
चटख़क़े टूट ग़ई हैं,
तो बन ग़ई आवाज़
ज़ो मेरे सीनेमें,
इक़ रोज़ ख़ामुशी हुई थी ll
सालिम सलीम

10848
मैने अपनी एक़,
ऐसी दुनियाँ बसाई हैं
ज़िसमें एक़ तरफ़ ख़ामोशी,
और दूसरी तरफ़ तन्हाई हैं ll

10849
ख़ामुशी छेड़ रहीं हैं,
क़ोई नौहा अपना
टूटता ज़ाता हैं,
आवाज़से रिश्ता अपना……
साक़ी फ़ारुक़ी

10850
लोगोंक़ी परवाह नहीं,
तेरी ख़ामोशीक़ा डर हैं
तू हीं मेरी दुनियाँ हैं,
तू हीं मेरा घर हैं ll

21 May 2026

10841 - 10845 दिल मोहब्बत सोज़ साज़ आँख़ बात सीख़ तस्वीर अश्क़ चीख़ आवाज़ ख़मोशी शायरी

 
10841
आँख़ोंसे बात क़रना,
क़ोई उनसे सीख़ें…
ख़ामोश रहक़रभी,
बातें क़रना उनसे सीख़ें…!

10842
मोहब्बत सोज़भी हैं,
साज़भी हैं ;
ख़मोशीभी हैं,
ये आवाज़भी हैं ll
अर्श मलसियानी

10843
ख़ामोशी और उदासीभरी,
एक़ शाम आएग़ी…
मेरी एक़ तस्वीर सम्भालक़र रख़ना,
तुम्हारे क़ाम आएग़ी……

10844
इक़ अश्क़ क़ह-क़होंसे,
गुज़रता चला ग़या l
इक़ चीख़ ख़ामुशीमें,
उतरती चली ग़ई ll
अमीर इमाम

10845
दिलक़ी बात कैसे समझाऊं…
तेरी ख़ामोशी कैसे मिटाऊं……!

20 May 2026

10836 - 10840 दिल बेपनाह प्यार जंग़ ज़ीत ग़लत मतलब बात इख़्तियार ज़िन्दग़ी ज़माना दर्द बेक़रार ज़बान शौक़ ख़ामोशी शायरी

 
10836
सोचा था क़ी ख़ामोश रहक़र,
हर जंग़ ज़ीत लेंग़े…
क़्या पता था क़ी लोग़ उसक़ाभी,
ग़लत मतलब निक़ाल लेंग़े……

10837
ख़ामोशीक़ा हासिलभी,
इक़ लम्बीसी ख़ामोशी थी l
उनक़ी बात सुनीभी हमने,
अपनी बात सुनाई भी……ll
गुलज़ार

10838
ख़ामोशीक़ो इख़्तियार क़र लेना,
अपने दिलक़ो थोड़ा बेक़रार क़र लेना…
ज़िन्दग़ीक़ा असली दर्द लेना हो तो,
बस क़िसीसे बेपनाह प्यार क़र लेना……!

10839
ख़ुली ज़बान तो,
ज़र्फ़ उनक़ा हो ग़या ज़ाहिर…
हज़ार भेद छुपा रक़्ख़े थे,
ख़मोशीमें……
अनवर सदीद

10840
मेरी ख़ामोशी देख़क़र,
मुझसे ये ज़माना बोला क़ि;
तेरी संज़ीदग़ी बताती हैं,
तुझे हँसनेक़ा 
शौक़ था क़भी…

19 May 2026

10831 - 10835 मोहब्बत इज़हार बदनाम नज़र क़ान क़ाग़ज़ ख़्याल अफ़सोस रुला ग़हरी ज़हरी ख़ामोशी शायरी


10831
अच्छा क़रते हैं वो लोग़,
ज़ो मोहब्बतक़ा इज़हार नहीं क़रते l
ख़ामोशीसे मर ज़ाते हैं मग़र,
क़िसीक़ो बदनाम नहीं क़रते ll

10832
तुम्हारे ख़तमें नज़र आई,
इतनी ख़ामोशी…
क़ि मुझक़ो रख़ने पड़े,
अपने क़ान क़ाग़ज़पर…!
यासिर ख़ान इनाम

10833
तुमसे ज़्यादा,
तुम्हारे ख़्यालोंने सताया हैं…
बातोंक़ा अफ़सोस नहीं,
तेरी ख़ामोशीने रुलाया हैं……!

10834
बहुत ग़हरी हैं,
उसक़ी ख़ामुशीभी…
मैं अपने क़दक़ो,
छोटा पा रहीं हूँ……
फ़ातिमा हसन

10835
ज़रा ख़्याल क़िज़िए,
मर न ज़ाऊँ क़हीं…
बहुत ज़हरीली हैं तेरी ख़ामोशी,
मैं पी न ज़ाऊँ क़हीं !

18 May 2026

10826 - 10830 दिल बात इल्म हंग़ामा इब्तिदा इंतिहा रूठ फ़र्क़ रंग़ तस्वीर क़िरदार ख़ामोशी शायरी


10826
उसक़ी ख़ामोशीमें क़ुछ बात हैं,
दिलमें बहुत आवाज़ हैं l
बाहरसे चुप हैं वो पर,
दिलमें छुपी क़ोई बात हैं !

10827
इल्मक़ी इब्तिदा हैं हंग़ामा l
इल्मक़ी इंतिहा हैं ख़ामोशी ll
फ़िरदौस ग़यावी

10828
मेरे रूठ ज़ानेसे अब,
उनक़ो क़ोई फ़र्क़ नहीं पड़ता…
बेचैन क़र देती थी क़भी,
ज़िसक़ो ख़ामोशी मेरी !

10829
रंग़ दरक़ार थे हमक़ो,
तिरी ख़ामोशीक़े…
एक़ आवाज़क़ी तस्वीर,
बनानी थी हमें……
 नाज़िर वहीद

10830
ख़ामोशीमें आवाज़क़ा,
क़िरदार क़ोई हैं……
ज़ो बोलता रहता हैं,
लग़ातार क़ोई हैं……!
 

17 May 2026

10821 - 10825 दिल मोहब्बत इश्क़ बात अदा रस्म हंग़ामा तमन्ना मिज़ाज़ बज़्म वफ़ा लब ख़ामोशी शायरी


10821
उसने क़ुछ क़हाभी नहीं,
और मेरी बात हो ग़ई…
बड़ी अच्छी तरहसे उसक़ी,
ख़ामोशीसे मुलाक़ात हो ग़ई !

10822
ख़मोशीसे अदा हो रस्म-ए-दूरी,
क़ोई हंग़ामा बरपा क़्यूँ क़रें हम ll
ज़ौन एलिया

10823
अग़र मोहब्बत नहीं थी तो फक़त,
एक़ बार बताया तो होता…
ये क़म्बख़त दिल तुम्हारी ख़ामोशीक़ो,
इश्क़ समझ बैठा !!

10824
हम न मानेंग़े ख़मोशी हैं,
तमन्नाक़ा मिज़ाज़…
हाँ भरी बज़्ममें वो,
बोल न पाई होग़ी……
क़ालीदास गुप्ता रज़ा

10825
उसने क़ुछ इस तरहसे,
क़ी बेवफ़ाई…
मेरे लबोंक़ो ख़ामोशीही,
रास आई !

16 May 2026

10816 - 10820 हाल दिल शोर क़ाएनात शब रौशन तराना चीख़ चीज़ लब ख़ामुशी ख़ामोशी शायरी


10816
शोर ज़ितना हैं क़ाएनातमें शोर,
मेरे अंदरक़ी ख़ामुशीसे हुआ ll
                                            क़ाशिफ़ हुसैन ग़ाएर

10817
शब-ए-हिज़्रां बुझा बैठी हूँ मैं,
सारे सितारेपर…
क़ोई फ़ानूस रौशन हैं,
ख़मोशीसे मेरे अंदर !

10818
मिरी प्यासक़ा तराना,
यूँ समझ न आ सक़ेग़ा l
मुझे आज़ सुनक़े देख़ो,
मिरी ख़ामोशीसे आग़े ll
                                     नीना सहर

10819 
ख़ामोशीसे ज़ब,
तुम भर ज़ाओग़े…
चीख़ लेना थोड़ा,
वरना मर ज़ाओग़े !

10820
हम लबोंसे क़ह न पाए उनसे,
हाल-ए-दिल क़भी…
और वो समझे नहीं,
ये ख़ामुशी क़्या चीज़ हैं ll
                                            निदा फ़ाज़ली

15 May 2026

10811 - 10815 दिल प्यार चेहरे फ़रेब नज़र दर्द आदत ग़ज़ल नज़्म आहिस्ते जु़बां इज़हार मोहब्बत ख़ामोश शायरी

 
10811
मेरे दिलक़ो अक्सर छू लेते हैं,
ख़ामोश चेहरे…
हंसते हुए चेहरोंमें,
मुझे फ़रेब नज़र आता हैं l

10812
अब तो आदतसी हो ग़ई हैं,
ख़ामोश रहनेक़ी…
क़भी दर्दसे, क़भी लोग़ोंसे,
क़भी ख़ुदसे!

10813 
मैं क़ोई ख़ामोशसी ग़ज़ल ज़ैसा हूँ,
या हूँ क़ोई नज़्म ज़ैसा धीमेंसे गुनगुनाता हुआ…
तभी तो वो भी मुझे पढ़ते हैं,
आहिस्ते आहिस्तेसे ll

10814
प्यारमें बहुत क़ुछ,
सहना पड़ता हैं…
क़भी-क़भी,
ख़ामोश रहना पड़ता हैं !

10815
जु़बां ख़ामोश मग़र,
नज़रोंमें उज़ाला देख़ा l
उसक़ा इज़हार-ए-मोहब्बतभी,
निराला देख़ा ll

14 May 2026

10806 - 10810 दिल पन्ना मुद्दत बिख़र सिमट तन्हाई ख़त क़हानी हादसे बात यक़ीनन ख़ामोश शायरी

 
10806
मुद्दतसे बिख़रा हूँ,
सिमटनेमें देर लग़ेग़ी…
ख़ामोश तन्हाईसे निपटनेमें देर लग़ेग़ी…
तेरे ख़तक़े हर सफ़हेक़ो,
पढ़ रहा हूँ मैं,
हर पन्ना पलटनेमें यक़ीनन देर लग़ेग़ी।

10807
अधूरी क़हानीपर,
ख़ामोश होठोंक़ा पहरा हैं l
चोट रूहक़ी हैं,
इसलिए दर्द ज़रा ग़हरा हैं !

10808
बिख़रे हैं अश्क़ क़ोई साज़ नहीं देता,
ख़ामोश हैं सब क़ोई आवाज़ नहीं देता l
क़लक़े वादे सब क़रते हैं,
मग़र क़्यूँ क़ोई साथ, आज़ नहीं देता ।

10809
हूँ अग़र ख़ामोश तो ये न समझ,
क़ि मुझे बोलना नहीं आता…
रुला तो मैं भी सक़ता था,
पर मुझे क़िसीक़ा,
दिल तोड़ना नहीं आता।

10810
क़ुछ हादसे इंसानक़ो,
इतना ख़ामोश क़र देते हैं क़ि…
ज़रूरी बात क़हनेक़ो भी,
दिल नहीं क़रता……

13 May 2026

10801 - 10805 ज़िंदग़ी बहाने बात वक़्त हालात महफ़िल रौनक़ सवाल दर्द उदास मुस्क़ुरा ख़ामोश शायरी


10801
झूठक़ी ज़ीत उसी वक़्त,
तय हो ज़ाती हैं,
ज़ब सच्चाई ज़ाननेवाला इंसान,
ख़ामोश रह ज़ाता हैं।

10802
हालातोंने क़र दिया,
हमें ख़ामोश… वरना,
हमारे रहते हर महफ़िलमें,
रौनक़ रहती थी……!

10803
उससे फ़िर उसक़ा रब,
फ़रामोश हो ग़या…
जो वक़्तक़े सवालपर,
ख़ामोश हो ग़या।

10804
क़ुछ दर्द ख़ामोश क़र देते हैं,
वरना मुस्क़ुराना क़ौन नहीं चाहता...?

10805
उदास हैं मेरी ज़िंदग़ीक़े सारे लम्हे,
एक़ तेरे ख़ामोश हो ज़ानेसे…
हो सक़े तो बात क़र लेना,
क़भी क़िसी बहानेसे…...!

12 May 2026

10796 - 10800 दोशीज़ा गुज़र ग़हरा समुंदर रात सुनसान अज़नबी वक़्त मज़ार ज़फ़ा याद ख़ामोश शायरी

 
10796
छेड़क़र ज़ैसे गुज़र ज़ाती हैं,
दोशीज़ा हवा l
देरसे ख़ामोश हैं,
ग़हरा समुंदर और मैं ll
                                          ज़ेब ग़ौरी

10797
रात सुनसान हैं,
ग़ली ख़ामोश…
फ़िर रहा हैं,
इक़ अज़नबी ख़ामोश…
नासिर ज़ैद

10798 
क़ुछ क़हनेक़ा वक़्त नहीं ये,
क़ुछ न क़हो ख़ामोश रहो l
ऐ लोग़ो ख़ामोश रहो,
हाँ ऐ लोग़ो ख़ामोश रहो ll
                                           इब्न-ए- इंशा

10799 
सबने देख़ा और,
सब ख़ामोश थे l
एक़ सूफ़ीक़ा मज़ार,
उड़ता हुआ ll
ख़ुर्शीद तलब

10800 

देख़ोग़े तो आएगी,
तुम्हें अपनी ज़फ़ा याद…
ख़ामोश ज़िसे पाओग़े,
ख़ामोश न होग़ा……
                                अंज़ुम रूमानी

11 May 2026

10791 - 10795 दिल मन राज़ बातें बेहतर वक़्त ख़िलाफ़ छीन नसीब महफ़िल तेवर ख़ामोश शायरी

 
10791
हमेशा ख़ामोश रहनेक़ा,
राज़ यहीं हैं,
क़ुछ बातें दिलमें ही,
बेहतर रहती हैं…!

10792
क़ैसे क़ह दूँ मैं सपनोंक़ो,
ज़ीनेक़ी ख़्वाहिश नहीं l
हाँ मैं ख़ामोश रहती हूँ,
पर मन हीं मन बोलती हूँ !

10793
वक़्त तुम्हारे ख़िलाफ़ हो,
तो ख़ामोश हो ज़ाना…
क़ोई छीन नहीं सक़ता,
ज़ो तेरे नसीबमें हैं पाना !

10794
तुम ख़ामोश हो,
पर तुम्हारा दिल बोल रहा हैं ll
तुम्हारे ख़ामोश होनेक़ा,
हर राज़ ख़ोल रहा हैं !

10795
सर-ए-महफ़िलमें,
क़्यूँ ख़ामोश रह क़र…
सभी लोग़ोंक़े,
तेवर देख़ता हूँ ll
             अभिषेक़ क़ुमार अम्बर

10 May 2026

10786 - 10790 दिल समझ अरसे निग़ाहें बयाँ आँख बात सीख़ राज़ नाज़ुक़ इशारे मोहब्बत लब ज़ुबान नाम ख़ामोश शायरी

 
10786
एक़ अरसेसे ख़ामोश हैं,
ये निग़ाहें मेरी…
बयाँ क़रें आँखोंसे,
ऐसा क़ुछ बचाहीं नहीं…!

10787
आँखोंसे बात क़रना,
क़ोई उनसे सीख़े…
ख़ामोश रहक़रभी,
बातें क़रना उनसे सीख़े…!

10788
तुम ख़ामोश हो,
पर तुम्हारी आँ
ख़े सब क़ुछ क़ह ज़ाती हैं l
दिलक़ी बातें,
बिना क़हे हीं समझ ज़ाती हैं ll

10789
राज़ ख़ोल देते हैं,
नाज़ुक़से इशारे क़ितनी ख़ामोश अक़्सर ;
मोहब्बतक़ी ज़ुबान होती हैं,
ख़ामोशी शायरी !!

10790
ख़ामोश हो ज़ा ऐ दिल,
यहां अब तेरा क़ाम नहीं…
लब तो क़बसे ख़ामोश हैं,
लबपें तेरा अब नाम नहीं…!

9 May 2026

10781 - 10785 मोहब्बत प्यार ज़ुबान शुरूआत आँख़ बात बोल अंदर बाहर शोर निग़ाहें ख़्याल ख़ामोश शायरी

 
10781
जब ख़ामोश आँख़ोंसे,
बात होती हैं l
ऐसे ही मोहब्बतक़ी,
शुरूआत होती हैं !!

10782
प्यारक़ी ज़ुबान,
ख़ामोश होती हैं…
फ़िरभी सब क़ुछ,
बोल देती हैं…!

10783
मेरे ख़्यालोंमें वो रहती हैं,
मुझे अपना वो क़हती हैं l
फ़िरभी क़भी-क़भी,
वो ख़ामोश रहती हैं…!

10784
उनक़ी निग़ाहें,
बहुत क़ुछ क़हती हैं…
पर ज़ुबां अक़्सर,
ख़ामोश रहती हैं...!

10785
जब क़ोई बाहरसे,
ख़ामोश होता हैं…
तो उसक़े अंदर,
बहुत ज्यादा शोर होता हैं ll

8 May 2026

10776 - 10780 बेपनाह प्यार ज़ीवन ख़फ़ा फ़ासला ज़ुदा रूठ नाम साथ साँसें बात चुप समझ ख़ामोश शायरी

 
10776
हम तो यूँ ही ख़ामोश थे,
पर तुम ख़फ़ा मान बैठे l
हमें फ़ासला नहीं दिख़ता,
और तुम ज़ुदा मान बैठे ll

10777
वो हैं ख़ामोश तो यूँ लग़ता हैं,
हमसे रब रूठ ग़या हो ज़ैसे…

10778
मैने क़ुछ पल,
ख़ामोश रहक़र देख़ा हैं…
मेरा नाम तक़ भूल ग़ए,
मेरे साथ चलनेवाले…

10779
बेपनाह प्यार हैं तुमसे,
ज़ीवन निसार हैं तुमपे ;
ख़ामोश न रहो तुम,
ये साँसें चलती हैं तुमसे…!

10780 
मेरे ख़ामोश होनेक़ा मतलब,
ये नहीं क़ि क़ुछ नहीं हैं...
अक़्सर क़ुछ बातोंक़ो,
चुप रहक़र समझना होता हैं ll 

7 May 2026

10771 - 10775 दिल धड़क़ दिन बेज़ार शहर खुश उदास चीख अज़ीब अक़ेला टूट राते बातें चुप ख़ामोश शायरी

 
10771
क़ुछ दिनोंसे,
बेज़ार होते ज़ा रहा हूँ मैं…
यार बहुत हुआ,
अब ख़ामोश होने ज़ा रहा हूँ !!

10772
ख़ामोश शहरक़ी,
चीखती राते;
सब चुप हैं पर,
क़हनेक़ो हैं क़ई बातें !

10773
दिलक़ी धड़क़ने,
हमेशा क़ुछ-न-क़ुछ क़हती हैं…
क़ोई सुने, या न सुने,
ये ख़ामोश नहीं रहती हैं !

10774
अज़ीब हैं मेरा अक़ेलापन,
ना खुश हूँ, ना उदास हूँ…
बस अक़ेला हूँ,
और ख़ामोश हूँ…!!!

10775
ज़ब इंसान अंदरसे,
टूट ज़ाता हैं,
तो अक्सर बाहरसे,
ख़ामोश हो ज़ाता हैं।

6 May 2026

10766 - 10770 आईना उमंग़ शबाब ग़ुनाह ग़ौर शोर सदा ज़ज़्बा क़बा ग़ुनग़ुना भुला याद ख़ामोश शायरी

 
10766
आईना ये तो बताता हैं,
क़ि मैं क़्या हूँ मग़र
आईना इसपें हैं ख़ामोश,
क़ि क़्या हैं मुझमें……

10767
ख़ामोश हो ग़ई,
ज़ो उमंग़ें शबाबक़ी…
फ़िर ज़ुरअत-ए-ग़ुनाह न क़ी,
हमभी चुप रहें……
हफ़ीज़ ज़ालंधरी

10768
ग़ौरसे सुनेग़ा,
तो एक़ शोर सुनाई देग़ा…
ख़ामोश ज़ुबांसे,
क़ुछ और सुनाई देग़ा !!

10769
बहुत ख़ामोश रहक़र,
ज़ो सदाएँ मुझक़ों देता था…
बड़े सुंदरसे ज़ज़्बोंक़ी,
क़बाएँ मुझक़ों देता था……!
आशिर वक़ील राव

10770 
क़भी ख़ामोश बैठोग़े,
क़भी क़ुछ ग़ुनग़ुनाओग़े l
हम उतना याद आयेंग़े,
ज़ितना तुम हमें भुलाओग़े !!

5 May 2026

10761 - 10765 दिल मोहब्बत महफ़िल परवाना ज़बाँ इज़हार इरादा तेवर महफ़ूज़ लब ख़ामोश शायरी

 
10761
लबोंक़ों रख़ना चाहते हैं ख़ामोश,
पर दिल क़हनेक़ो बेक़रार हैं l
मोहब्बत हैं तुमसे,
हाँ, मोहब्बत बेशुमार हैं ll

10762
ज़ाने क़्या महफ़िल--परवानामें,
देग़ उसने l
फ़िर ज़बाँ ख़ुल सक़ी,
शम्अ ज़ो ख़ामोश हुई ll
अलीम मसरूर

10763
क़ोई हंग़ामा--हयात नहीं,
रात ख़ामोश हैं सहर ख़ामोश ll

                                          वाहिद प्रेमी

10764
इज़हार--मुद्दआक़ा,
इरादा था आज़ क़ुछ
तेवर तुम्हारे देख़क़े,
ख़ामोश हो ग़या……
शाद अज़ीमाबादी

10765
लब--ख़ामोशक़ा,
सारे ज़हाँमें बोलबाला हैं,
वहीं महफ़ूज़ हैं यहाँ,
ज़िसक़ी ज़ुबांपें ताला हैं....

4 May 2026

10756 - 10560 माथे अज़ीज़ रुस्वाइ अग़्यार ग़िला रफ़ूग़र याँर हाथ सिले शहर पत्थर ज़ज़्बात ज़ख़्म शायरी


10756
शहज़ादी तिरे माथेपर,
ये ज़ख़्म रहेंग़ा…l
लेक़िन इसक़ों चूमनेवाला,
फ़िर नहीं होग़ा……ll
                                       सरवत हुसैन

10757
वो बाम ओ दर वो लोग़,
वो रुस्वाइयोंक़े ज़ख़्म…
हैं सबक़े सब अज़ीज़,
ज़ुदा उस ग़लीमें चल……
हबीब ज़ालिब

10778
हमक़ों अग़्यारक़ा ग़िला क़्या हैं…
ज़ख़्म ग़एँ हैं हमने याँरोंसे……!
                                          साहिर होशियाँरपुरी

10759
अभीसे मेरे रफ़ूग़रक़े,
हाथ थक़ने लग़े…
अभी तो चाक़ मिरे ज़ख़्मक़े,
सिलेभी नहीं……
परवीन शाक़िर

10760
आख़िरी बार मिलो,
हैं शहरमें क़हत पत्थरोंक़ा l
ज़ज़्बातक़े ज़ख़्म,
ग़ रहा हूँ…ll
                                      क़तील शिफ़ाई

3 May 2026

10751 - 10755 मोहब्बत दूरी मज़बूरी बेदारी तन्हा रातें सपने बातें फ़िक्र रफ़ू निग़ाह दुख़ अदू ज़ख़्म शायरी

 
10751
तुमसे दूरी, ये मज़बूरी,
ज़ख़्म-ए-क़ारी, बेदारी,
तन्हा रातें, सपने क़ातें,
ख़ुदसे बातें, मेरी ख़ू ll
                                ज़ावेद अख़्तर

10752
न क़िसीपें ज़ख़्म अयाँ,
क़ोंई न क़िसीक़ों फ़िक्र रफ़ू क़ी हैं…
न क़रम हैं हमपें हबीबक़ा,
न निग़ाह हमपें अदूक़ी हैं ll
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

10753
मोहब्बत एक़दम दुख़क़ा,
मुदावा क़र नहीं देती…
ये तितली बैठती हैं,
ज़ख़्मपर आहिस्ता आहिस्ता……
                                                    अब्बास ताबिश

10754
क़ैसा हिसाब, क़्या हिसाब…
हालत-ए-हाल हैं अज़ाब l
ज़ख़्म नफ़स नफ़समें हैं,
ज़हर ज़माँ ज़माँमें हैं……ll
ज़ौन एलियाँ

10755 
"वक़्तसे पहले हर क़ली,
ज़ख़्मक़ी सूरतही ज़ुदा होती हैं,
तुमने समझ लिया ज़िसे महक़,
वो दर्दक़ी इब्तिदा होती हैं।"
                                            निदा फ़ाज़ली

2 May 2026

10746 - 10750 बख़्श दुहाई तीर ख़याल ख़्याल शख़्स छुपा नज़र शिक़वा नादान ज़ाइक़े ज़बाँ ऊँग़लि पत्थर नाम ज़ख़्म शायरी

 
10746
तेरे ज़ानेसे यहाँ,
क़ुछ नहीं बदला…
मसलन, तेरा बख़्शा हुआ,
हर ज़ख़्म हरा हैं मुझमें……!
                                        इरफ़ान सत्तार

10747
ज़ख़्म हो तो क़ोंई दुहाई दे,
तीर हो तो क़ोंई उठा ले ज़ाए ll
रसा चुग़ताई

10748
हैं ज़ो पुर-ख़ूँ तुम्हारा,
अक़्स-ए-ख़याल ख़्याल…
ज़ख़्म आए,
क़हाँ क़हाँ ज़ानाँ……
                                      ज़ौन एलियाँ

10749
उसक़े ज़ख़्म छुपाक़र रख़िए,
ख़ुद उस शख़्सक़ी नज़रोंसे…
उससे क़ैसा शिक़वा क़ीज़े,
वो तो अभी नादान हुआ……ll
मोहसिन नक़वी

10750
चलो छोड़ो, वो सारे ज़ाइक़े,
मेरी ज़बाँपर ज़ख़्म बनक़र ज़म ग़ए होंग़े…
तुम्हारी ऊँग़लियोंक़ी नरम पोरें,
पत्थरोंपर नाम लिख़ती थीं मिरा……
                                                               मोहसिन नक़वी

1 May 2026

10741 - 10745 ज़ादा ख़ुर्रम सब्ज़ा ज़ावेदाना मुस्कुरा हौसला आज़मा आग़ महबूब नश्तर सुब्ह शह्र साँप तहख़ाने ज़ख़्म शायरी


10741
क़हाँ अब ज़ादा-ए-ख़ुर्रममें,
सर-सब्ज़ाना ज़ाना हैं l
क़हूँ तो क़्या क़हूँ
मेरा ये ज़ख़्म-ए-ज़ावेदाना हैं!

                                                 ज़ौन एलियाँ

10742
ज़ख़्म ग़ते हैं,
और मुस्कुराते हैं हम l
हौसला अपना,
ख़ुद आज़माते हैं हम ll
ए ज़ी ज़ोश

10743
आग़ही ज़ख़्म-ए-नज़ारा,
न बनी थी ज़ब तक़
मैने हर शख़्सक़ो,
महबूब-ए-नज़र ज़ाना था

                                         नसीर तुराबी

10744
क़हाँ ज़ाओग़े और क़ुछ देर ठहर ज़ाओ,
क़ि फ़िर नश्तर-ए-सुब्ह
ज़ख़्मक़ी तरह हर इक़,
आँख़क़ो बेदार क़रे ll
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

10745
शह्रमें क़रता था,
ज़ो साँपक़े क़ाटेक़ा इलाज़ …
उसक़े तहख़ानेसे,
साँपोंक़े ठिक़ाने निक़ले ……

                                         शक़ील आज़मी

30 April 2026

10736 - 10740 तीर सितम सीने ज़िग़र इंसाफ़ तलब ज़ब्त हँसी भूल मुंदमिल दरीचा लश्क़र ज़ख़्म शायरी


10736
क़्या तीर-ए-सितम,
उसक़े सीनेमें भी टूटे थे…
ज़िस ज़ख़्मक़ों चीरूँ हूँ,
पैक़ान निक़लते हैं……
                                       मीर तक़ी मीर

10737
हर ज़ख़्म-ए-ज़िग़र,
दावर-ए-महशरसे हमारा…
इंसाफ़-तलब हैं,
तिरी बेदाद-ग़रीक़ा……
मीर तक़ी मीर

10738
ज़ब्त क़रक़े,
हँसीक़ों भूल ग़या…
मैं तो उस ज़ख़्महीक़ो,
भूल ग़याँ……
                             ज़ौन एलियाँ

10739
ज़ख़्म सब मुंदमिल हो ग़ए…
इक़ दरीचा ख़ुला रह ग़याँ……
अज़मल सिराज़

10740
हमेंशा ज़ख़्म पहुँचे हैं मुझीक़ों,
हमेंशा मैं पस-ए-लश्क़र रहा हूँ ll
                                                   ज़ौन एलियाँ

29 April 2026

10731 - 10735 इश्क़ ग़ाफ़िल हुस्न तलवार फ़ेरी पुश्त मुबारक़ दम मसाफ़ हज़ार सूरत नज़र आईना तहज़ीब मक़्तल बिस्मिल क़ातिल नासूर ज़ख़्म शायरी

 
10731
फ़ेरी न थी ज़ो,
पुश्त-ए-मुबारक़ दम-ए-मसाफ़…
थे दो हज़ार ज़ख़्म,
फ़क़त सरसे ता-ब-नाफ़……
                                                      मीर अनीस

10732
ज़ख़्मक़ी सूरत नज़र आते हैं,
हरोंक़े नुक़ूश…
हमने आईनोंक़ों,
तहज़ीबोंक़ा मक़्तल क़र दियाँ ll
राहत इंदौरी

10733
उसने नासूर क़र लिया होग़ा,
ज़ख़्मक़ों शायरी बनाते हुए…ll
                                              अम्मार इक़बाल

10734 
इक़ ज़ख़्मभी,
यारा-ए-बिस्मिल नहीं आनेक़ा
मक़्तलमें पड़े रहिए,
क़ातिल नहीं आनेक़ा
ज़ौन एलियाँ

10735
इश्क़ ग़ाफ़िल ज़ख़्म ग़ता ज़ाएग़ा…
हुस्नक़ी तलवार चलती ज़ाएग़ी……
                                                           नुशूर वाहिदी

28 April 2026

10726 - 10730 ग़ुज़र क़ाफ़िले बहार रंग़ चेहरे महक़ आन ज़ुदाई नस वस्ल हिज़्र ज़ख़्म शायरी

 
10726
इस तरफ़से ग़ुज़रे थे,
क़ाफ़िले बहारोंक़े…
आज़ तक़ सुलग़ते हैं,
ज़ख़्म रहग़ुज़ारोंक़े
                   साहिर लुधियाँनवी

10727
क़ोंई रंग़ तो दो,
मिरे चेहरेक़ो…
फ़िर ज़ख़्म अग़र,
महक़ाओ तो क़्या……?
उबैदुल्लाह अलीम महक़

10728
हर आन इक़ ज़ुदाई हैं,
ख़ुद अपने आपसे,
हर आनक़ा हैं ज़ख़्म,
ज़ो हर आन ग़इए……
                                  ज़ौन एलियाँ

10729
सौ ज़ख़्म थे नस नसमें,
घायल थे रग़-ओ-रेशा…
अहमद फ़राज़

10730
एक़ मलालक़ी ग़र्द समेटे,
मैने ख़ुदक़ों पार क़िया…
क़ैसे क़ैसे वस्ल ग़ुज़ारे,
हिज़्रक़ा ज़ख़्म छुपानेमें……
                                        अज़्म बहज़ाद

27 April 2026

10721 - 10725 दीवान हुनर क़ातिल रस्म फ़ूल ग़ैर बात आज़मा ज़बाँ रूह हवस सिलसिला ज़हर ज़ख़्म शायरी


10721
अपने दीवानक़ों,
ग़लियोंमें लिए फ़िरता हूँ;
हैं क़ोंई ज़ो,
हुनर-ए-ज़ख़्म-नुमाई ले ले…
                                           अहमद फ़राज़


10722
ज़ब लग़ें ज़ख़्म तो,
क़ातिलक़ों दुआ दी ज़ाए…
हैं यहीं रस्म तो,
ये रस्म उठा दी ज़ाए ll
ज़ाँ निसार अख़्तर

10723
लोग़ क़ाँटोंसे बचक़े चलते हैं,
हमने फ़ूलोंसे ज़ख़्म ख़ाए हैं l
तुम तो ग़ैरोंक़ी बात क़रते हो,
हमने अपने भी आज़माए हैं ll
                                              अहमद फ़राज़

10724
चलो क़ि आज़,
सभी पाएमाल रूहोंसे…
क़हें क़ि अपने,
हर इक़ ज़ख़्मक़ों ज़बाँ क़र लें ll
साहिर लुधियाँनवी

10725
अब क़ौन ज़ख़्म ओ ज़हरसे,
रक़्ख़ेग़ा सिलसिला…l
ज़ीनेक़ी अब हवस हैं,
हमें हम तो मर ग़ए……ll
 

26 April 2026

10716 - 10720 दिलरेश समझ ग़म नाख़ुन भारत दाग़ तन लब दहान बात दोस्त याँर भर ज़ख़्म शायरी

 
10716
दोस्त ग़म-ख़्वारीमें,
मेरी सई फ़रमावेंग़े क़्या…
ज़ख़्मक़े भरते तलक़,
नाख़ुन न बढ़ ज़ावेंग़े क़्या……?
                                                  मिर्ज़ा ग़ालिब

10717
ऐ नए दोस्त,
मैं समझूँग़ा तुझे भी अपना…
पहले माज़ीक़ा,
क़ोई ज़ख़्म तो भर ज़ाने दे…
नज़ीर बाक़री

10718
ज़ो ज़ख़्म तनपें हैं,
भारतक़े उसक़ो भरना हैं…
ज़ो दाग़ माथेपें भारतक़े हैं,
मिटाना हैं……!
                                          ज़ावेद अख़्तर

10719
एक़ मैं दिलरेश हूँ,
वैसा ही दोस्त…
ज़ख़्म क़ितनोंक़े सुना हैं,
भर चले……
ख़्वाज़ा मीर दर्द

10720
हमारे लब न सही,
वो दहान-ए-ज़ख़्म सही…
वहीं पहुँचती हैं याँरो,
क़हींसे बात चले……
                                 मज़रूह सुल्तानपुरी

25 April 2026

10711 - 10715 वस्ल वक़्त इलाज़ हिज़्र नींद सब्र दिन ग़ुज़र सरक़ार हाल उम्मीद घर भर ज़ख़्म शायरी


10711
भर डाला उन्हेंभी,
मिरी बेदार नज़रने…
ज़ो ज़ख़्म क़िसी तौरभी,
भरनेक़े नहीं थे…
                           ज़क़रिय़ा शाज़

10712
ये हिज़्र हैं तो इसक़ा,
फ़क़त वस्ल हैं इलाज़…
हमने ये ज़ख़्म-ए-वक़्तक़ो,
भरने नहीं दियाँ……
अदीम हाशमी

10713
आ ग़ई नींद उसे,
भूलभी ज़ाएग़ा 'असीर'
आ ग़याँ सब्र मुझे,
ज़ख़्मभी भर ज़ाएँग़े…
                                 राम नाथ असीर

10714
दिन ग़ुज़र ज़ाएँग़े सरक़ार,
क़ोई बात नहीं;
ज़ख़्म भर ज़ाएँग़े,
सरक़ार क़ोई बात नहीं ll
अब्दुल हमीद अदम

10715
उसक़ा ज़ो हाल हैं वही ज़ाने;
अपना तो ज़ख़्म भर ग़याँ क़बक़ा… 
ज़ख़्म-ए-उम्मीद भर ग़याँ क़बक़ा……
क़ैस तो अपने घर ग़याँ क़बक़ा………

                                                  ज़ौन एलियाँ

23 April 2026

10706 - 10710 मुट्ठि एहसान हाल मरहम तरफ़दार तलबगार शहर छिड़क़ नमक़ ज़ख़्म शायरी

 
10706
मुट्ठियोमें लिए फ़िरते हैं,
नमक़ आज़क़े लोग़…
अपने ज़ख़्मोंक़ो,
क़िसी हाल दिख़ाया न क़रो……

10707
एहसान क़िसीक़ा वो रख़ते नहीं...
मेरा भी लौटा दियाँ...
ज़ितना ख़ायाँ था नमक़ मेरा,
मेरे हीं ज़ख़्मोंपर लग़ा दियाँ......

10708
मरहमक़े नहीं हैं ये,
तरफ़-दार नमक़क़े…
निक़ले हैं मिरे ज़ख़्म,
तलबगार नमक़क़े…!

10709
क़हाँ ज़ख़्म ख़ोल बैठा पग़ले,
ये नमक़क़ा शहर हैं ......!

10710
क़ोई छिड़क़ता हैं,
ज़ख़्मोंपर नमक़ l
क़ोई उनका,
मरहम बन ज़ाता हैं ll

22 April 2026

10701 - 10705 शोर नासेह मज़ा दयार इश्क़ महक़ दुआँ क़ैफ़ियत छिड़क़ पराया ड़र मुट्ठि नमक़ ज़ख़्म शायरी

 
10701
शोर-ए-पंद-ए-नासेहने,
ज़ख़्मपर नमक़ छिड़क़ा
आपसे क़ोई पूछे,
तुमने क़्या मज़ा पायाँ…?
                                        मिर्ज़ा ग़ालिब

10702
हम अपने ज़ख़्मोंपें,
रख़लें नमक़ ज़रूरी हैं…
दयार-ए-इश्क़में,
उनक़ी महक़ ज़रूरी हैं ...!

10703
अपना ज़ख़्म मत दिख़ाना,
क़भी क़िसी सफ़्फ़ाक़क़ो…
दुआँ न पड़ता क़ैफ़ियत क़ी,
ज़ख़्मोंपर नमक़ छिड़क़ता वो…

                               अनुराधा लख़ेपुरिया 'शाक्य'

10704
नमक़ ज़ख़्मोंपें,
रक्ख़ा हैं क़िसीने;
बनाया फ़िर,
पराया हैं क़िसीने…

10705
ड़र रहा था क़ि,
क़हीं ज़ख़्म न भर ज़ाएँ मिरे…
और तू मुट्ठियाँ भर भरक़े,
नमक़ लाई थी……
                                         तहज़ीब हाफ़ी