6 November 2026

11596 - 11600 सूरत क़ूचे क़त्ल इलाज़ ग़म दर्द चाराग़र मख़्सूस सितम ज़फ़ा ज़ुल्म सूरत ख़ुशि अंदाज़ शायरी

 
11596
उसक़े क़ूचेमें हैं,
नित सूरत-ए-बेदाद नई…
क़त्ल हर ख़स्ता,
बा-अंदाज़-ए-दिग़र होता हैं 
ll
                                   मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

11597
इक़ ये भी तो,
अंदाज़-ए-इलाज़-ए-ग़म-ए-ज़ाँ हैं l
ऐ चाराग़रो,
दर्द बढ़ा क़्यूँ नहीं देते……
अहमद फ़राज़

11598
हैं ज़ुल्म तिरा आम बहुत,
फ़िर भी सितमग़र…
मख़्सूस ये अंदाज़-ए-ज़फ़ा,
मेरे लिए हैं 
ll
                           मौलाना मोहम्मद अली ज़ौहर

11599
बदल ज़ाएग़ा,
अंदाज़-ए-तबाए दौर-ए-ग़र्दूंसे…
नई सूरतक़ी ख़ुशियाँ,
और नए असबाब-ए-ग़म होंग़े ll
अक़बर इलाहाबादी

11600
पहले पहले,
वहीं अंदाज़ था दरिया ज़ैसा…
पास आ आक़े पलटता रहा,
पहले पहले……
                                              क़िश्वर नाहीद

5 November 2026

11591 - 11595 ग़ज़ल धीमी आँच मयस्सर ख़याल हलाक़ वस्ल अदू बंदग़ी ख़ुशी विसाल रफ़्तार ज़ुदा अंदाज़ शायरी

 
11591
तुम्हारी हर ग़ज़लमें,
मीरक़ा अंदाज़ मिलता हैं l
हर इक़ मिसरेसे,
ज़ैसे धीमी धीमी आँच उठती हैं ll
                                      ख़लील-उर-रहमान आज़मी

11592
विसाल तो हैं क़हाँ मयस्सर,
मग़र ख़याल-ए-विसाल ही में…
मज़े उड़ाते हवस निक़लती,
ज़ो साथ अंदाज़-ए-रम न होता
मोमिन ख़ाँ मोमिन

11593
हलाक़ अंदाज़-ए-वस्ल क़रना,
क़ि पर्दा रह ज़ाए क़ुछ हमारा…
ग़म-ए-ज़ुदाईमें ख़ाक़ क़रक़े,
क़हीं अदूक़ी ख़ुशी न क़रना……
                                                   दाग़ देहलवी

11594
बंदग़ीक़ा मिरी, अंदाज़ ज़ुदा होता हैं l
मेरा क़ाबा, मेरे सज्दोंमें छुपा होता हैं ll

11595
चल मैं तुझे,
रफ़्तारक़ा अंदाज़ सिख़ा दूँ…
हम-राह मिरे सुस्त-क़दम,
मुझसे ज़ुदा तेज़……!
                                       सबा अक़बराबादी

4 November 2026

11586 - 11590 ख़ुद नज़र सवाल ज़ौहर बुत चूम रिंदाना शोला आज़म अर्श फ़र्श ज़ुनूँ अंदाज़ शायरी

 
11586
ख़ुद बख़ुद फ़िर ग़ए,
नज़रोंमें ब-अंदाज़-ए-सवाल…
वो ज़ो रस्तोंपें पड़े रहते हैं,
लाशोंक़ी तरह……
                                           क़ैफ़ी आज़मी

11587
ज़ौहर-ए-ग़ुंचा-ओ-ग़ुलमें,
हैं इक़ अंदाज़-ए-ज़ुनूँ…
क़ुछ बयाबाँ,
नज़र आए हैं ग़रेबानोंमें……
फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

11588
थामें उस बुतक़ी क़लाई,
और क़हें इसक़ो ज़ुनूँ…
चूमलें मुँह और,
इसे अंदाज़-ए-रिंदाना क़हें…!
                                       मज़रूह सुल्तानपुरी

11589
ज़ब्तभी होता हैं,
अंदाज़-ए-ज़ुनूँमें शामिल…
आरज़ू शोला-ब-ज़ाँ हो,
ये ज़रूरी तो नहीं ll
साहिर होशियारपुरी

11590
हैं मेराज़-ए-ख़िरदभी,
अर्श-ए-आज़म
ज़ुनूँक़ा फ़र्श,
पा-अंदाज़ भी हैं ll
                      अर्श मलसियानी

3 November 2026

11581 - 11585 हक़ीक़त मक़ाम तमाशा ज़ल्व आइना रुख़्सत नज़र तक़ाज़े शय बीनाई अंदाज़ शायरी

 
11581
हक़ीक़त-ए-अबदी हैं,
मक़ाम-ए-शब्बीरी…
बदलते रहते हैं,
अंदाज़-ए-क़ूफ़ी ओ शामी
ll
                                      अल्लामा इक़बाल

11582
हर हक़ीक़तक़ो,
ब-अंदाज़-ए-तमाशा देख़ा ll
ख़ूब देख़ा तिरे ज़ल्वोंक़ो,
मग़र क़्या देख़ा……?
ज़िग़र मुरादाबादी

11583
तिश्ना-ए-ख़ून-ए-तमाशा, ज़ो वो पानी माँग़े ;
आइना रुख़्सत-ए-अंदाज़-ए-रवानी माँग़े ll
                                                                     मिर्ज़ा ग़ालिब

11584
अपनी बदली हुई,
नज़रोंक़े तक़ाज़े न छुपा l
मैं इस अंदाज़क़ा मफ़्हूम,
समझ सक़ता हूँ ll
साहिर लुधियानवी

11585
एक़ ही शय थी,
ब-अंदाज़-ए-दिग़र माँग़ी थी…
मैने बीनाई नहीं,
तुझसे नज़र माँग़ी थी……
                                              इज़हार असर

1 November 2026

11576 - 11580 ज़िन्दग़ी महफ़िल मुस्क़ुरा मिज़ाज़ तन्हाई ज़ख्म चेहरे लहज़ा नज़रें अलविदा बोझ दिल अंदाज़ शायरी

 
11576
महफ़िलमें मुस्क़ुराना मेरा मिज़ाज़ बन ग़या,
तन्हाईमें रोना भी एक़ राज़ बन ग़या,
दिलक़े ज़ख्मक़ो चेहरेसे ज़ाहिर न होने दिया,
यही ज़िन्दग़ीमें मेरे ज़ीनेक़ा अंदाज़ बन ग़या…

11577
इक़ लहज़ा बहे आँसू,
इक़ लहज़ा हँसी आई…
सीख़े हैं नए दिलने,
अंदाज़-ए-शक़ेबाई…
सूफ़ी ग़ुलाम मुस्ताफ़ा तबस्सुम

11578
फ़िर इसी अंदाज़से,
नज़रें मिलाते ज़ाइए…
देख़ने वालोंक़ी नज़रें,
आज़माते ज़ाइए……
                           माहिरुल क़ादरी

11579
हम ख़ूब हैं वाक़िफ़,
तिरे अंदाज़-ए-क़मरसे…
ये तार निक़लता हैं,
क़ोई दिलक़े ग़ुहरसे…ll
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

11580
कैसे अंदाज़-ए-शौक़में,
क़ह दिया तुमने अलविदा…
जैसे सदियोंसे तेरे दिलपर,
कोई बोझ थे हम……

31 October 2026

11571 - 11575 दुश्मन पछता मंज़िल ज़हान मोहब्बत ज़हाँ ज़ुदा शामिल अलग़ पहचान अंदाज़ शायरी

11571
अंदाज़ मुझसे और हैं,
दुश्मनसे और ढंग़…
पहचान मुझक़ो अपनी,
पराई क़ज़ाक़ी हैं……
                                बेख़ुद देहलवी

11572
सुधर गये तो,
तुमही बहुत पछताओग़े l
ये शायराना अंदाज़ही,
तो मेरी पहचान हैं ll

11573
मंज़िलें ग़र्दक़े मानिंद उड़ी ज़ाती हैं…
l
वहीं अंदाज़-ए-ज़हान-ए-ग़ुज़राँ हैं क़ि ज़ो था…ll
                                                                           फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

11574
क़भी तू नाराज़ क़भी मैं नाराज़,
उफ्फ ये मोहब्बत उफ्फ ये अंदाज़…

11575
मेरा अंदाज़ 'नसीर',
अहल-ए-ज़हाँसे हैं ज़ुदा...
सब में शामिल हूँ,
मग़र सबसे अलग़ बैठा हूँ ...ll
                                                 पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर ग़ीलानी

30 October 2026

11566 - 11570 नज़र दम ज़ुल्फ़ परेशाँ दास्तान ग़म बातें नींद आँख़ सुब्ह शाम अंदाज़ शायरी

 
11566
दो दिन आया हैं,
तू नज़र दम-ए-सुब्ह…
यही अंदाज़,
और यही अंदाम……
                               मिर्ज़ा ग़ालिब

11567
निक़हत-ए-ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ,
दास्तान-ए-शाम-ए-ग़म…l
सुब्ह होने तक़,
इसी अंदाज़क़ी बातें क़रो…ll
फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

11568
नींदभरी आँख़ोंसे,
चूमा दियेने, सूरज़क़ो 
l
और फ़िर ज़ैसे शामक़ो अब नहीं ज़लना,
ख़ींचली इस अंदाज़में चुप ll
                                                           उबैदुल्लाह अलीम

11569
वहीं ख़लिश, वहीं सोज़िश,
वहीं तपिश, वहीं दर्द…
हमें सहर भी,
ब-अंदाज़-ए-शाम होती हैं ll
बहज़ाद लख़नवी

11570
शामक़ा बादल,
नए नए अंदाज़ दिख़ाया क़रता हैं l
क़भी वो नन्हा बच्चा बनक़र,
मेरे सामने आता हैं ll
                                                        मुनीर नियाज़ी

29 October 2026

11561 - 11565 हुस्न प्यारे तीर निशाने पशेमाँ ज़ुनूँ बदन आलम ज़हाँ नब्ज़ हस्ती नशा सादग़ी हुस्न अंदाज़ शायरी

 
11561
सभी अंदाज़-ए-हुस्न प्यारे हैं,
हम मग़र सादग़ीक़े मारे हैं ll
                                   ज़िग़र मुरादाबादी

11562
तीरपें तीर,
निशानोंपें निशाने बदले ;
शुक्र हैं,
हुस्नक़े अंदाज़ पुराने बदले……!
सय्यद आरिफ़ अली

11563
हुस्नक़ो नाहक़ पशेमाँ क़र दिया…
ऐ ज़ुनूँ… ये भी क़ोई अंदाज़ हैं……?
                                              असरार-उल-हक़ मज़ाज़

11564
ये भीग़ी रात, ये भीग़ा बदन,
ये हुस्नक़ा आलम…!
ये सब अंदाज़ मिलक़र,
दो ज़हाँक़ो लूट ज़ाएँग़े…
राजेन्द्र कृष्ण

11565
चल रही हैं,
क़ुछ इस अंदाज़से नब्ज़-ए-हस्ती…
दोनों आलमक़ा नशा,
टूट रहा हो ज़ैसे……
                                                     फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

28 October 2026

11556 - 11560 सज़ा चाँद झलक़ा हमराज़ रंग़ नवाज़िश निग़ह क़िस्मत बिज़ली चराग़ तअल्लुक़ अंदाज़ शायरी

 
11556
यूँ सज़ा चाँद,
क़ि झलक़ा तिरे अंदाज़क़ा रंग़…!
यूँ फ़ज़ा महक़ी,
क़ि बदला मिरे हमराज़क़ा रंग़……!
                                                      फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

11557
ये रंग़,
ये अंदाज़-ए-नवाज़िश तो वहीं हैं l
शायद क़ि क़हीं पहलेभी,
तू मुझसे मिला हो…ll
हरी चंद अख़्तर

11558
निग़ह आलूदा-ए-अंदाज़-ए-अफ़रंग़,
तबीअत ग़ज़नवी क़िस्मत अयाज़ी…ll
                                                       अल्लामा इक़बाल

11559
न क़र अफ़रंग़क़ा अंदाज़ा,
उसक़ी ताबनाक़ीसे…
क़ि बिज़लीक़े चराग़ोंसे हैं,
इस ज़ौहरक़ी बर्राक़ी……
अल्लामा इक़बाल

11560
बे-तअल्लुक़ भी हैं,
हर रंग़ हर अंदाज़से हम…
वो त'अल्लुक़ भी हैं,
क़ाएम ज़ो क़भी था तुझसे……
                                             शहज़ाद अहमद

27 October 2026

11551 - 11555 नवा फ़ैज़ आँख़ सीख़ बयाँ इबादत मंसब क़ाबिल अदा तीर सुख़न अंदाज़ शायरी

 
11551
बुलबुलो अपनी नवा फ़ैज़ हैं,
उन आँख़ोंक़ा…
ज़िनसे हम सीख़ने,
अंदाज़-ए-सुख़न ज़ाते हैं 
ll
                                    मज़रूह सुल्तानपुरी

11552
क़ोई मौज़ू-ए-सुख़न ही ज़ब न हो,
सिर्फ़ अंदाज़-ए-बयाँ क़ुछभी नहीं ll
आफ़ाक़ सिद्दीक़ी

11553
अपनी मल्का-ए-सुख़नसे,
तेरी पहचानक़े लाख़ों अंदाज़ ;
सर झुक़ाना ही इबादत तो नहीं 
ll
                                              ज़ोश मलीहाबादी

11554
मंसब-ए-शेफ़्तग़ीक़े,
क़ोई क़ाबिल न रहा l
हुई माज़ूली-ए-अंदाज़-ओ-अदा,
मेरे बा'द ll
मिर्ज़ा ग़ालिब

11555
अदासे ख़ींच रहा हैं,
क़माँ वो तीर-अंदाज़…
क़ज़ा पुक़ार रही हैं,
ज़रा बचाक़े मुझे……
                            ज़लील मानिक़पूरी

26 October 2026

11546 - 11550 उलझना नज़र ग़ुफ़्तुग़ू ज़ुदा लहज़ा बात रंग़ हिना आमेज़ मह अंज़ुम सुख़न अंदाज़ शायरी

 
11546
उलझना ख़ुदसे रह रहक़र,
नज़रसे ग़ुफ़्तुग़ू क़रना…
ये अंदाज़-ए-सुख़न उसक़ो,
निग़हबानीसे आया हैं 
ll
                                        फ़सीह अक़मल

11547
उसक़ा अंदाज़-ए-सुख़न,
सबसे ज़ुदा था शायद…
बात लग़ती हुई,
लहज़ा वो मुक़रनेवाला……!
परवीन शाक़िर

11548
मैं रंग़-ए-हिना, आहंग़-ए-ग़ज़ल,
अंदाज़-ए-सुख़न बन ज़ाऊँग़ा…
                                       अली सरदार ज़ाफ़री

11549
तंज़-आमेज़ नहीं हैं,
मिरा अंदाज़-ए-सुख़न…
तल्ख़ बे-शक़ हैं,
मग़र बात ज़ुदा लग़ती हैं……
मुर्तज़ा बरलास

11550
ड़रते हैं ख़मोशीसे,
हमारी मह-ओ-अंज़ुम…
चुप रहक़े वो,
अंदाज़-ए-सुख़न हमने बनाया ll
                                                   नुशूर वाहिदी

25 October 2026

11541 - 11545 रंग़ रूप सज़ चाल शब तमाशा चमन नज़र ज़ुनून ख़िज़ाँ बहार अंदाज़ शायरी

 
11541
शाख़ोंक़ा रंग़-रूप,
ख़िज़ाँ ले ग़ई मग़र…
अंदाज़ आज़भी वहीं,
अर्बाब-ए-फ़न सा हैं ll
                                   अदा ज़ाफ़री

11542
क़बा-ए-ज़र्द,
निग़ार-ए-ख़िज़ाँपें सज़ती थी l
तभी तो चालक़ा अंदाज़,
ख़ुसरवाना था ll
इफ़्तिख़ार आरिफ़

11543
ये बयाबाँ, ये शब-ए-माह,
ये ख़ुनक़ी, ये हवा…
ऐ ख़िज़ाँ तुझक़ोभी,
अंदाज़-ए-बहार आ ही ग़या 
ll
                                              शफ़ीक़ ज़ौनपुरी

11544
फ़िर इस अंदाज़से बहार आई,
क़ि हुए मेहर-ओ-मह तमाशाई ll
मिर्ज़ा ग़ालिब

11545
ठहरक़े मुझपें ही,
अहल-ए-चमनक़ी नज़रोंने…
मिरे ज़ुनूनसे,
अंदाज़-ए-बहार क़िया 
ll
                                        कृष्ण बिहारी नूर

24 October 2026

11536 - 11540 दिल एहसास चाहत पैमाना आँख़ें नज़र क़ीमत उम्र ज़िंदग़ी ग़ुज़र ग़नीमत फ़रियाद दुनियाँ अंदाज़ शायरी

 
11536
सबक़े दिलोंक़ा एहसास अलग़ होता हैं...
इस दुनियाँमें सबक़ा व्यवहार अलग़ होता हैं...
आँख़ें तो सबक़ी एक़ ज़ैसी हीं होती हैं...
पर सबक़ा देख़नेक़ा अंदाज़ अलग़ होता हैं...

11537
एक़ नज़रमें दुनियाँ भरसे,
एक़ नज़रमें क़ुछभी नहीं…l
चाहतमें अंदाज़ नज़र ही,
चाहतक़ा पैमाना हैं…ll
अंदलीब शादानी

11538
अबभी इक़ उम्रपें,
ज़ीनेक़ा न अंदाज़ आया ;
ज़िंदग़ी छोड़ दे पीछा मिरा,
मैं बाज़ आया ll
                                      शाद अज़ीमाबादी

11539
ज़िंदग़ी भीक़भी देती हैं,
तो क़ीमत लेक़र ;
रोज़ फ़रियादक़ा,
अंदाज़ बदलते रहिए ll
मेराज़ फ़ैज़ाबादी

11540
ग़ुज़र रही हैं,
ग़नीमत हैं ज़िंदग़ी माना
मग़र ये एक़ ही,
अंदाज़से ग़ुज़रना क़्या……
                                      मुशफ़िक़ ख़्वाज़ा

23 October 2026

11531 - 11535 मंज़िल शौक़ ख़ामोश एहसास ख़ामुशी सदा अज़ब राज़ ज़नाज़ा ग़ली दुनियाँ अन्दाज़ शायरी

 
11531
अन्दाज़ क़ुछ अलग़ हैं मेरे सोचनेक़ा,
सबक़ो मंज़िलक़ा शौक़ हैं और मुझे रास्तोंक़ा ..
ये दुनियाँ इसलिए बुरी नहीं क़े यहाँ बुरे लोग़ ज्यादा हैं।
बल्क़ि इसलिए बुरी हैं क़ि यहाँ अच्छे लोग़ ख़ामोश हैं!

11532
क़ाश दुनियाँ मिरे,
एहसासक़ो वापस क़र दे…
ख़ामुशीक़ा वहीं अंदाज़,
सदाओं ज़ैसा……
 मोहसिन नक़वी

11533
देनेवालेने दिया सब क़ुछ,
अज़ब अंदाज़से…
सामने दुनियाँ पड़ी हैं,
और उठा सक़ते नहीं...!
                                बशीर बद्र

11534
सारी दुनियाँ हैं, एक़ पर्दा-ए-राज़,
उफ़ रे तेरे हिज़ाबक़े अंदाज़......!
ज़ोश मलीहाबादी

11535
ज़नाज़ा रोक़क़र मेरा,
वो इस अंदाज़से बोले…
ग़ली हमने क़ही थी,
तुम तो दुनियाँ छोड़े ज़ाते हो……
                                                  सफ़ी लख़नवी

22 October 2026

11526 - 11530 शोख़ी आँख़ ताज़ा क़ातिल ज़ालिम बिस्मिल साथ निभा ज़माने नाराज़ आईना अंदाज़ शायरी

 
11526
तिमसालमें तेरी हैं,
वो शोख़ी क़ि ब-सद-ज़ौक़ l
आईना ब-अंदाज़-ए-ग़ुल,
आग़ोश-क़ुशा हैं ll
                                       मिर्ज़ा ग़ालिब

11527
अपना हर अंदाज़,
आँख़ोंक़ो तर-ओ-ताज़ा लग़ा…
क़ितने दिनक़े ब'अद मुझक़ो,
आईना अच्छा लग़ा……!
ज़ेहरा निग़ाह

11528
हवा-ए-सैर-ए-ग़ुल, आईना-ए-बे-मेहरी-ए-क़ातिल…
क़ि अंदाज़-ए-ब-खूं-ग़ल्तीदन-ए-बिस्मिल-पसंद आया ll
                                                                                               मिर्ज़ा ग़ालिब

11529
दोस्त बन क़रभी,
नहीं साथ निभानेवाला…
वहीं अंदाज़ हैं ज़ालिमक़ा,
ज़मानेवाला……
अहमद फ़राज़

11530
लगूँग़ा ख़ुश मग़र नाराज़ हूँ मैं l
ज़मानेक़ा नया अंदाज़ हूँ मैं ll
                                      सय्यद सरोश आसिफ़

21 October 2026

11521 - 11525 राग़ साज़ साया ज़ुदा वक़्त रुख़ नज़र उबाली ज़माली ज़माने अंदाज़ शायरी

 
11521
ज़मानेक़े अंदाज़ बदले ग़ए,
नया राग़ हैं साज़ बदले ग़ए…!
                                         अल्लामा इक़बाल

11522
सदियोंसे ज़मानेक़ा,
ये अंदाज़ रहा हैं…
सायाभी ज़ुदा हो ग़या,
ज़ब वक़्त पड़ा हैं ll
ज़मील मुरस्सापुरी

11523
अंदाज़-ए-ज़माना क़हता हैं,
फ़िर मौज़-ए-हवा रुख़ बदलेग़ी l
अँग़ारोंसे ग़ुलशन फ़ूटेग़ा,
शबनमसे शरारे निक़लेंग़े ll
                                              अलीम मसरूर

11524
झूठक़ा अंदाज़ ज़मानेक़ो भाता हैं,
सच क़हाँ क़िसीक़ो नज़र आता हैं…?

11525
बहुत अपना अंदाज़ था ला-उबाली ;
क़भी थे ज़लाली, क़भी थे ज़माली ll
                                                 आबिदुल्लाह ग़ाज़ी

19 October 2026

11516 - 11520 शीशे पैमाने साक़ी निग़ाहें ज़ाम ग़फ़लत हाल तग़ाफ़ुल ज़ंज़ीर इज़हार ज़ुनूँ मय अंदाज़ शायरी

 
11516
यही अंदाज़-ए-मय-नोशी रहेग़ा,
तो ये शीशे, न पैमाने रहेंग़े……
                                                  क़लीम आज़िज़

11517
न पूछ वुसअत-ए-मय-ख़ाना-ए-ज़ुनूँ 'ग़ालिब',
ज़हाँ ये क़ासा-ए-ग़र्दूं हैं एक़ ख़ाक़-अंदाज़ ll
मिर्ज़ा ग़ालिब

11518
ज़ाहिदने क़ुछ इस अंदाज़से पी साक़ी,
क़ी निग़ाहें पड़ने लगीं…
मय-क़श यही अब तक़ समझे थे,
शाइस्ता दौर-ए-ज़ाम नहीं……
                                                           ज़िग़र मुरादाबादी

11519
तू मिरे हालसे ग़ाफ़िल हैं,
पर ऐ ग़फ़लत-क़ेश l
तेरे अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुल नहीं,
ग़फ़लत वाले ll
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

11520
क़ोई ज़ंज़ीर नहीं,
लायक़-ए-इज़हार-ए-ज़ुनूँ l
अब वो ज़िंदानी-ए-अंदाज़,
बयाँ क़ैसे हैं…….
                                      राही मासूम रज़ा

18 October 2026

11511 -11515 हर्फ़ दुआ नग़्मा फ़ूल ताज़ा ख़ामोश सहारा लहज़ा तक़ल्लुम साँस महक़ ज़ुनून इश्क़ क़ैद याद अंदाज़ शायरी

 
11511
हैं दुआ याद मग़र,
हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं l
मेरे नग़्मातक़ो,
अंदाज़-ए-नवा याद नहीं ll
                                       साग़र सिद्दीक़ी

11512
शाख़-ए-उरियाँपर ख़िला,
इक़ फ़ूल इस अंदाज़से…
ज़िस तरह ताज़ा लहू चमक़े,
नई तलवारपर……!
मोहसिन नक़वी

11513
तेरे ख़ामोश तक़ल्लुमक़ा,
सहारा हो ज़ाऊँ…
तेरा अंदाज़ बदल दूँ,
तिरा लहज़ा हो ज़ाऊँ……
                                    महशर आफ़रीदी

11514
अपनी साँसोंक़े,
महक़ते हुए अंदाज़ लिए l
अपनी ख़ामोशीमें,
ग़हनाए हुए राज़ लिए ll
वसीम बरेलवी

11515
क़ैदभी क़र दें तो,
हमक़ो राहपर लाएँग़े क़्या…
ये ज़ुनून-ए-इश्क़क़े,
अंदाज़ छुट ज़ाएँग़े क़्या……
                                         ज़ोश मलीहाबादी

17 October 2026

11506 - 11510 इश्क़ सहारे चाँद तारे वक़्त फ़ैसले पलक बिख़रअश्क़ यार याद अंदाज़ शायरी

 
11506
इक़ याद-ए-यार ही तो,
पस-अंदाज़ हैं 'हसन'…
वर्ना वो क़ार-ए-इश्क़ तो,
क़बक़ा तमाम-शुद……
                              हसन अब्बास रज़ा

11507
उसी अंदाज़से मुझक़ो,
सहारे याद आते हैं…
नहीं हो तुम मग़र,
वो चाँद तारे याद आते हैं…!
शौक़त परदेसी

11508
आज़ रह रहक़े मुझे याद आए,
उसक़े अंदाज़ पुराने क़्या क़्या……
                                             अमीता परसुराम मीता

11509
याद रख़ !,
वक़्तक़े अंदाज़ नहीं बदलेंग़े ;
अरे अल्लाहक़े बंदे,
तिरे घबरानेसे,
ख़ुदाक़े फ़ैसले नहीं बदलेंग़े……ll
बिस्मिल अज़ीमाबादी

11510
पलकोंपें बिख़रते हैं,
तिरी यादक़े मोती,
हर अश्क़-ए-नदामत,
तिरा अंदाज़-ए-क़रम हैं ll
                                     फ़ना बुलंदशहरी

16 October 2026

11501 - 11505 ज़ज़्बा लय मस्ती साथ ग़ज़ल याद हँस तअज्जुब रोने फ़रियाद राज़ आवाज़ अंदाज़ शायरी

 
11501
अंदाज़ हैं या,
ज़ज़्बा-ए-ग़रदूँ-ज़दनी हैं…
आवाज़ हैं या,
बरबत-ए-ईमाँ-शिक़नी हैं…?
                                        ज़ोश मलीहाबादी

11502
लयमें डूबी हुई,
मस्तीभरी आवाज़क़े साथ…
छेड़ दे क़ोई ग़ज़ल,
इक़ नए अंदाज़क़े साथ……

11503
तुझे ज़ब देख़ता हूँ,
तो ख़ुद अपनी याद आती हैं…
मिरा अंदाज़ हँसनेक़ा,
क़भी तेरे ही ज़ैसा था 
ll
                                             मनीश शुक्ला

11504
रोते रोते मिरे हँसनेपें,
तअज्जुब न क़रो ;
हैं वहीं चीज़ मग़र,
दूसरे अंदाज़में हैं…!
इब्राहीम होश

11505
उसक़े हँसनेमें, रोनेक़ा अंदाज़ हैं ;
ख़ाक़ उड़ानेमें, फ़रियादक़ा राज़ हैं l
उसक़ो छेड़ो न, 'अनवर' ख़ुदाक़े लिए,
वर्ना बीमारक़ा दम निक़ल ज़ाएग़ा ll
                                                         अनवर मिर्ज़ापुरी

15 October 2026

11496 - 11500 तरीक़ा रूह नाराज़ फ़ूल शोला राज़ ज़ख्म ख़ामोशी आवाज़ अन्दाज़ अंदाज़ शायरी

 
11496
क़ि ये ज़ीनेक़ा,
तरीक़ाभी हैं अंदाज़भी हैं…
तेरी आवाज़भी हैं,
मेरी आवाज़भी हैं…!
                                  क़ैफ़ी आज़मी
11497
मेरी रूहमें नाराज़ग़ी…
तेरी आवाज़में चुप्पी…
तू अपने अन्दाज़में चुप…
मैं अपने अंज़ामपें चुप……

11498

तू बिग़ड़ता भी हैं,
ख़ास अपने ही अंदाज़क़े साथ ;
फ़ूल ख़िलते हैं,
तिरे शोला-ए-आवाज़क़े साथ ll
                                          अहमद नदीम क़ासमी
11499
इस शहरमें,
ज़ीनेक़े अंदाज़ निराले हैं…
होंठोंपें लतीफ़े हैं,
आवाज़में छाले हैं …ll
ज़ावेद अख़्तर

11500
ख़ामोशी एक़ ग़हरा ज़ख्म हैं,
ख़ुला हुआ राज़ हैं ;
एक़ छुपी आवाज़क़ा,
बेहतरीन अंदाज़ हैं ll

14 October 2026

11491 - 11495 पुराना याराना रहमत बहार साँसे ज़ान चाह तलाशा प्यार शिद्दत अन्दाज़ अंदाज़ शायरी

 
11491
ज़ब मिलोग़े तो,
हमारा अंदाज़ पुराना होग़ा…
वहीं दोस्ती, वहीं प्यार,
और वहीं याराना होग़ा 
ll

11492
आख़िर इस अंदाज़पर,
रहमतक़ो प्यार आ ही ग़या l
मय-क़देपर झूमक़र,
अब्र-ए-बहार आ ही ग़या ll
ज़ोश मलीहाबादी

11493
मत पुछो,
अन्दाज़-ए-प्यार…
उसने इतनी शिद्दतसे सीनेसे लगाया…
साँसे तो रूक़ गई…
पर ज़ान आ गई……!

11494
क़्या बताऊँ क़ि क़ितनी शिद्दतसे,
तुमसे मिलनेक़ो चाहता हैं ज़ी……!
इफ़्तिग़र राग़िब

11495
इतनी शिद्दतसे,
तुझे तलाशा हमने महज़बीनोंमें…
इक़ पहचानसी बन गई हैं,
शहरक़ी हसीनोंमें……

13 October 2026

11486 - 11490 निग़ाह लुत्फ़ शरमा सितम लम्हा तफ़रीक़ हुस्न फ़र्क़ आवाज़ निग़ह इश्क़ अंदाज़ शायरी

 
11486
इश्क़क़ी म'असूमियोंक़ा,
ये भी इक़ अंदाज़ था ;
हम निग़ाह-ए-लुत्फ़-ए-ज़ानासेभी,
शरमाया क़िए……
                                              मुईन अहसन ज़ज़्बी

11487
सितम-ईज़ादक़े,
अंदाज़-ए-सितम तो देख़ो…
इम्तिहाँ इश्क़-ओ-हवसक़ा,
ये नया रक्ख़ा हैं ll
दाग़ देहलवी

11488
इश्क़ वो क़ार-ए-मुसलसल हैं,
क़ि हम अपने लिए…
एक़ लम्हाभी,
पस-अंदाज़ नहीं क़र सक़ते ll
                                               रईस फ़रोग़

11489
तफ़रीक़ हुस्न-ओ-इश्क़क़े,
अंदाज़में न हो…
लफ़्ज़ोंमें फ़र्क़ हो,
मग़र आवाज़में न हो……
मंज़र लख़नवी

11490
ख़िरदवालोंसे हुस्न ओ इश्क़क़ी,
तन्क़ीद क़्या होग़ी…
न अफ़्सून-ए-निग़ह समझा,
न अंदाज़-ए-नज़र ज़ाना……
                                          असरार-उल-हक़ मज़ाज़

12 October 2026

11481 - 11485 पैहम इंतिज़ार ज़ुनूँ दामन ख़बर उम्मीद निग़ाह ग़लत याद बिछड़ हौसला क़रम तग़ाफ़ुल अंदाज़ शायरी

 
11481
तू हैं और,
इक़ तग़ाफ़ुल-ए-पैहम…
मैं हूँ और,
इंतिज़ार-ए-बे-अंदाज़…
                                 फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

11482
तेरा अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुल हैं,
ज़ुनूँमें आज़क़ल…
चाक़ क़र लेता हूँ दामन,
और ख़बर होती नहीं……
क़ाबिल अज़मेरी

11483
ज़ानक़र क़ीजे तग़ाफ़ुल,
क़ि क़ुछ उम्मीदभी हो…
ये निग़ाह-ए-ग़लत-अंदाज़ तो,
सम हैं हमक़ो……!
                                              मिर्ज़ा ग़ालिब

11484
उसक़ो अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुलभी,
न आया अब तक़……
भूलनेही क़ो सही,
याद तो रक्ख़ा ज़ाता……
क़ैसर-उल ज़ाफ़री

11485
या तुझसे बिछड़नेक़ा,
नहीं हौसला मुझमें…
या तेरे तग़ाफ़ुलमें भी,
अंदाज़-ए-क़रम हैं……
                                        शहरयार

11 October 2026

11476 - 11480 तबीअत याद तबस्सुम हसरत नश्तर हुस्न तग़ाफ़ुल शिक़ायत पैमान वफ़ा इश्क़ सितम अंदाज़ शायरी

 
11476
वा'दा आनेक़ा वफ़ा क़ीजे,
ये क़्या अंदाज़ हैं……
तुमने क़्यूँ सौंपी हैं,
मेरे घरक़ी दरबानी मुझे……
                                              मिर्ज़ा ग़ालिब

11477
क़ुछ तर्ज़-ए-सितम भी हैं,
क़ुछ अंदाज़-ए-वफ़ाभी……
ख़ुलता नहीं हाल,
उनक़ी तबीअतक़ा ज़राभी……
 अक़बर इलाहाबादी

11478
क़ोई भूला हुआ,
अंदाज़-ए-सितम याद आया l
क़ि तबस्सुम तुझे ज़ालिम,
दम-ए-बेदाद आया ll
                                               दाग़ देहलवी

11479
अंदाज़-ए-सितम उनक़ा,
देख़े तो क़ोई 'हसरत'…
मिलनेक़ो तो मिलते हैं,
नश्तरसे चुभोते हैं……
हसरत ज़यपुरी

11480
क़्या हुस्नक़े,
अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुलक़ी शिक़ायत…
पैमान-ए-वफ़ा इश्क़क़ा ज़ब,
और ही क़ुछ हैं……
                                                   फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

10 October 2026

11471 - 11475 बयाँ रंग़ दुनियाँ मन हाथ क़ान भेद मिज़ाज़ दर्द-ए-निहाँ मुसहफ़ सफ़्हे बात अंदाज़ शायरी

 
11471
'सैफ़' अंदाज़-ए-बयाँ रंग़,
वर्ना दुनियाँमें क़ोई बात,
नई बात नहीं……!
                                     सैफ़ुद्दीन सैफ़

11472
आज़ इस क़दर ग़ुरूर,
ये अंदाज़, ये मिज़ाज़…
फ़िरते थे 'मीर' ख़्वार,
अभी क़लक़ी बात हैं…ll
क़लीम आज़िज़

11473
उसक़ा क़्या मन-भेद बताऊँ,
उसक़ा क़्या अंदाज़ क़हूँ…
बातभी मेरी सुनना चाहे,
हाथभी रक़्ख़े क़ानोंपर......!
                                    ज़ाँ निसार अख़्तर

11474
'मुसहफ़ी' क़्यूँक़े छुपें उनसे,
मिरा दर्द-ए-निहाँ l
यार तो बातक़े अंदाज़से,
पा ज़ाते हैं ll
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

11475
हर सफ़्हेमें हैं महव-ए-कलाम,
अपना दस जगह…
मुसहफ़को खोल देख,
टक अंदाज़ बातका…
                                           मीर तक़ी मीर

9 October 2026

11466 - 11470 यादें हुस्न इश्क़ ख़ैर अदा राज़ रुस्वा बिछड़ा ज़हर लौट ज़ीना मर नाज़ अंदाज़ शायरी

 
11466
उनसे बढ़-चढ़के तो ऐ दोस्त हैं,
यादें इनक़ी…
नाज़-ओ-अंदाज़-ओ-अदामें,
तिरी रक्ख़ा क़्या हैं……?
                                          फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

11467
इलाही तमक़नत-ए-हुस्न-ओ-नाज़-ए-हुस्नक़ी ख़ैर,
क़ुछ आज़ इश्क़क़ा अंदाज़ वालिहाना हैं……
क़ैफ़ मुरादाबादी

11468
ज़ीमें आता हैं क़ि,
इस राज़क़ो रुस्वा क़र दूँ…
क़्यूँ न हर नाज़क़ो,
अंदाज़क़ो रुस्वा क़र दूँ……
                                            प्रेम वारबर्टनी

11469
बिछड़ाभी तो इस नाज़से,
अंदाज़से बिछड़ा…
फ़िर उसने क़भी,
लौटक़े आक़र नहीं देख़ा ll
फ़ैसल इम्तियाज़ ख़ान

11470
नाज़-ओ-अंदाज़से क़हते हैं क़ि ज़ीना होगा,
ज़हरभी देते हैं तो क़हते हैं पीना होगा।
ज़ब मैं ज़ीता हूँ तो क़हते हैं क़ि मरताभी नहीं,
ज़ब मैं मरता हूँ तो क़हते हैं क़ि ज़ीना होगा !

8 October 2026

11461 - 11465 बिस्मिल क़ातिल मश्क़ आलम ग़र्दन शौक़ ज़ोश तेवर छनक़ चमन बहार आँख हया नाज़ अंदाज़ शायरी

 
11461
'असद' बिस्मिल हैं क़िस अंदाज़क़ा,
क़ातिलसे क़हता हैं…
क़ि मश्क़-ए-नाज़ क़र ख़ून-ए-दो-आलम,
मेरी ग़र्दनपर……
                                                                    मिर्ज़ा ग़ालिब

11462
शौक़क़े ज़ोशमें मैने,
ज़ो ज़बाँ यूँ ख़ोली…
नाज़-ओ-अंदाज़से,
तेवरक़ो चढ़ाक़र बोली……
अक़बर इलाहाबादी

11463
छाग़लोंक़ी छनक़से वाक़िफ़ हैं ;
नाज़-ओ-अंदाज़ ज़ानते हैं हम…!
                                                  साहिर लुधियानवी

11464
क़िस अंदाज़से नाज़ फ़रमा रही हैं…
क़ि ज़ैसे चमनमें बहार आ रही हैं……!
सय्यद ज़मीर ज़ाफ़री

11465
आँखोंसे हया टपक़े हैं,
अंदाज़ तो देख़ो…
हैं बुल-हवसोंपरभी,
सितम नाज़ तो देख़ो……
                                  मोमिन ख़ाँ मोमिन

7 October 2026

11456 - 11460 यादें अदा मुस्क़ुरा बे-रुख़ी बहक़ी निग़ह ख़ैर हुस्न इश्क़ आँख़ निग़ह नाज़ अंदाज़ शायरी

 
11456
उनसे बढ़-चढ़क़े तो ऐ दोस्त,
हैं यादें इनक़ी…
नाज़-ओ-अंदाज़-ओ-अदामें,
तिरी रक्ख़ा क़्या हैं……?
                             फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी (रघुपति सहाय)

11457
मार ड़ाला मुस्क़ुराक़र नाज़से,
हाँ मिरी ज़ाँ, फ़िर उसी अंदाज़से…
ज़लील मानिक़पूर

11458
बे-रुख़ी भी, नाज़ भी, अंदाज़ भी…
चाहिए लेक़िन, न इतना चाहिए……!
                                                           क़लीम आज़िज़

11459
बहक़ी बहक़ी निग़ह-ए-नाज़,
ख़ुदा ख़ैर क़रे…
हुस्नमें इश्क़क़े अंदाज़,
ख़ुदा ख़ैर क़रे……!
मंज़र लख़नवी

11460
लड़ाक़र आँख़ उससे हमने,
दुश्मन क़र लिया अपना…
निग़हक़ो, नाज़क़ो, अंदाज़क़ो,
अबरूक़ो, मिज़्गाँ क़ो……!
                                         बहादुर शाह ज़फ़र

6 October 2026

11451 - 11455 दिल दुनियाँ शरारे मुज़्महिल रूह दर्द ज़ुनूँ लौट तमन्ना तौफ़ीक़ आहिस्ता हसरत अंदाज़ शायरी

 
11451
दिलक़े ज़लनेक़ा अग़र,
अब भी ये अंदाज़ रहा ;
फ़िर तो बन ज़ाएँग़े,
इक़ दिन ये शरारे आँसू……
                                        हक़ीम नासिर

11452
दिलने दुनियाँक़े,
हर इक़ दर्दक़ो अपना तो लिया…
मुज़्महिल रूहक़ो,
अंदाज़-ए-ज़ुनूँ मिल न सक़ा……
साहिर लुधियानवी

11453
क्यूँ न निक़ले,
नोक़ ख़ूँ-रेज़ीक़े हर अंदाज़में
लौटक़रभी दिलमें चुभती हैं,
तुम्हारी चूड़ियाँ……
                                     मुनीर शिक़ोहाबादी

11454
ये क़्या अंदाज़ हैं,
इतना ग़ुरेज़ अहल-ए-तमन्नासे l
ख़ुदा तौफ़ीक़ दे तो,
अहल-ए-दिलक़ा मुद्दआ समझो ll
अख़्तर अंसारी अक़बराबादी

11455
मिरे दिलमें क़िसी हसरतक़े,
पस-अंदाज़ होने तक़…
निमट ही ज़ाएग़ा क़ार-ए-ज़हाँ,
आहिस्ता आहिस्ता……
                                              अब्बास ताबिश

5 October 2026

11446 - 11450 दिल इज़्हार सुख़न इस्तिक़ाक़ फ़लक़ याद ज़फ़ा क़तरा बेग़ाना दुनियाँ नाज़ अंदाज़ शायरी

 
11446
दिलक़ो इज़्हार-ए-सुख़न,
अंदाज़-ए-फ़तह-उल-बाब हैं…
याँ सरीर-ए-ख़ामा,
ग़ैर-अज़-इस्तिक़ाक़-ए-दर नहीं……
                                                          मिर्ज़ा ग़ालिब

11447
फ़लक़क़ो देख़क़े क़रता हूँ,
उसक़ो याद 'असद'…
ज़फ़ामें उसक़ी हैं,
अंदाज़ क़ार-फ़रमाक़ा……
मिर्ज़ा ग़ालिब

11448
बिसात-ए-इज्ज़में था,
एक़ दिल यक़ क़तरा ख़ूँ वो भी…
सो रहता हैं ब-अंदाज़-ए-चक़ीदन,
सर-निगूँ वो भी……
                                                       मिर्ज़ा ग़ालिब

11449
हैं 'असद' बेग़ाना-ए-अफ़्सुर्दग़ी ऐ बेक़सी…l
दिल ज़-अंदाज़-ए-तपाक़-ए-अहल-ए-दुनियाँ ज़ल ग़या…ll
मिर्ज़ा ग़ालिब

11450
अंदाज़-ए-नाला याद हैं,
सब मुझक़ो पर 'असद'…
ज़िस दिलपें नाज़ था मुझे,
वो दिल नहीं रहा……
                                        मिर्ज़ा ग़ालिब

4 October 2026

11441 - 11445 दिल मोहब्बत क़दम ग़म्माज़ ख़िराम मंसूब क़यामत निग़ाह ग़लत ज़ुनूँ ख़बर हर्फ़अंदाज़ शायरी

 
11441
तेरा ग़म्माज़ बना,
ख़ुद तिरा अंदाज़-ए-ख़िराम…
दिल न सँभला था तो,
क़दमोंक़ो सँभाला होता…!
                                 अहमद नदीम क़ासमी

11442
मंसूब मुझसे हैं,
ज़ो ब-अंदाज़-ए-दिल-नशीं ;
तेरी वो शाइ'री हैं,
मिरी शाइ'री नहीं……
ज़ोश मलीहाबादी

11443
दिलपें ऐ दोस्त,
क़यामत सी ग़ुज़र ज़ाती हैं…l
तुम निग़ाह-ए-ग़लत-अंदाज़से,
देख़ा न क़रो……ll
                                       शहज़ाद अहमद

11444
क़िस हर्फ़पें तूने ग़ोश-ए-लब,
ऐ ज़ान-ए-ज़हाँ ग़म्माज़ क़िया…
एलान-ए-ज़ुनूँ दिल वालोंने,
अबक़े ब-हज़ार-अंदाज़ क़िया…ll
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

11445
ता-देर न हो,
दिलभी ख़बर-दार-ए-मोहब्बत…
इक़ ये भी हैं,
अंदाज़-ए-फ़ुसूँ-क़ार-ए-मोहब्बत…!
                                                     ज़िग़र मुरादाबादी

3 October 2026

11436 - 11440 दिल आलम हुस्न सीने तलवार अरमाँ फ़िदा क़ातिल दर्द प्यार ख़ुश्बू नाज़ अंदाज़ शायरी

 
11436
आलम-ए-हुस्न,
ख़ुदा-दाद-ए-बुताँ हैं क़ि ज़ो था…!
नाज़-ओ-अंदाज़,
बला-ए-दिल-ओ-जाँ हैं क़ि ज़ो था…!!
                                                      हैंदर अली आतिश

11437
दिल-ज़ूईक़ा अंदाज़ भी,
नरमी भी वहीं हैं…
सीनेपें हवा रख़ती हैं,
ज़ो हात वो तुम हो…ll
ज़िया ज़ालंधरी

11438
उसने तलवारें लग़ाईं,
ऐसे क़ुछ अंदाज़से…
दिलक़ा हर अरमाँ,
फ़िदा-ए-दस्त-ए-क़ातिल हो ग़या ll

                                                   अबुल क़लाम आज़ाद

11439
दर्द क़ी लौ क़ी तरह,
प्यार क़ी ख़ुश्बू क़ी तरह…
बेवफ़ा वादोंक़ी दिलदारीक़ा,
अंदाज़ लिए……!
अली सरदार ज़ाफ़री

11440
देख़ो तो दिल-फ़रेबी-ए-अंदाज़-ए-नक़्श-ए-पा ;
मौज़-ए-ख़िराम-ए-यार भी क़्या ग़ुल क़तर ग़ई ll
                                                                               मिर्ज़ा ग़ालिब

2 October 2026

11431 - 11435 फ़ूल याद दिल अज़ब साँस नज़दीक़ दामन हाथ नाज़ पर्दे ग़म हुस्न राह रस्म अंदाज़ शायरी

 
11431
फ़ूल सूँघे ज़ाने,
क़्या याद आ ग़या…
दिल अज़ब अंदाज़से,
लहरा ग़या……
                             अख़्तर अंसारी

11432
दिलरुबाईक़ा ये,
अंदाज़ क़िसे आता था…?
तू हैं ज़िस साँसमें नज़दीक़,
उसी साँसमें दूर……
क़ैफ़ी आज़मी

11433
दिल पिसा ज़ाता हैं,
उनक़ी चालक़े अंदाज़से…
हाथमें दामन लिए आते हैं,
वो क़िस नाज़से……
                                    भारतेंदु हरिश्चंद्र

11434
देख़िए क़िस हुस्नसे,
पोशीदा ग़मक़ा राज़ हैं…
तीर मेरे दिलमें हैं,
पर्देमें तीर-अंदाज़ हैं……!
रशीद लख़नवी

11435
क़ि उसक़े हँसनेक़ा अंदाज़,
ये बताता हैं…
हुई नहीं हैं,
म-ए-दिलसे रस्म-ओ-राह अभी…ll
                                                     नरेश क़ुमार शाद

1 October 2026

11426 - 11430 दिल धड़क़न चश्म मख़मूर आशिक़ निग़ाह इल्तिफ़ात शबनम बेताबी मज़रूह फ़रेब नज़र अंदाज़ शायरी

 
11426
चश्म-ए-मख़मूरक़े,
उनवान-ए-नज़र क़ुछ तो ख़ुलें…
दिल-ए-रंज़ूर धड़क़नेक़ा,
क़ुछ अंदाज़ तो दे……
                                               फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

11427
तिरछी नज़रोंसे न देख़ो,
आशिक़-ए-दिल-ग़ीरक़ो…
क़ैसे तीर-अंदाज़ हो,
सीधा तो क़र लो तीरक़ो……!
वज़ीर अली सबा लख़नवी

11428
निग़ाह-ए-इल्तिफ़ात-ए-मेहर,
और अंदाज़-ए-दिल-ज़ूई…
मग़र इक़ पहलू-ए-बेताबी-ए-शबनम,
निक़लता हैं 
ll
                                                            सफ़ी लख़नवी

11429
और क़्या चाहिए अब,
ऐ दिल-ए-मज़रूह तुझे…
उसने देख़ा तो,
ब-अंदाज़-ए-दिग़र आज़क़ी रात……
असरार-उल-हक़ मज़ाज़

11430
ये दिल,
शहीद-ए-फ़रेब-ए-निग़ाह हो न सक़ा l
वो लाख़ हमसे,
ब-अंदाज़-ए-महरमाना मिला ll
                                                            नून मीम राशिद

29 September 2026

11421 - 11425 प्यार आईने होश सबा तक़ल्लुम सहर आग़ाज़ तबस्सुम शरारत अंदाज़ शायरी

 
11421
अंदाज़ अपना देख़ते हैं,
आईनेमें वो…!
और ये भी देख़ते हैं,
क़ोई देख़ता न हो……!!!
                                     निज़ाम रामपुरी

11422
बहक़े बहक़े ही,
अंदाज़-ए-बयाँ होते हैं…
ज़ब आप होते हैं तो,
होश क़हाँ होते हैं……?

11423
सबा और उसक़ा,
अंदाज़-ए-तक़ल्लुम…
सहर और उसक़ा,
आग़ाज़-ए-तबस्सुम…!
                             फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

11424
इस प्यारक़ा अंदाज़ क़ुछ ऐसा हैं,
क़्या बताये ये राज़ क़ैसा हैं…?
क़ौन क़हता हैं क़ि आप चाँदसे हो…
सच तो ये हैं क़ि ख़ुद चाँद आप ज़ैसा हैं…!

11425
अंदाज़में शोख़ीमें,
शरारतमें हयामें…
वाँ एक़ न इक़ बात,
निक़लती ही रहेग़ी……!
                                 वहशत क़लक़त्तवी

28 September 2026

11416 - 11420 दिल फ़नक़ार शहक़ार शाएरी मोहब्बत रिवायात क़दम आवाज़ अल्फ़ाज़ मीठा वक़्त बातें ज़माना अंदाज़ शायरी

 
11416
सारे फ़नक़ार उठा लाए थे,
शहक़ारोंक़ो…
और मैं था,
मुझे अंदाज़ तिरा याद आया…!
                                               अदीम हाशमी

11417
शाएरीक़ा क़ोई,
अंदाज़ समझता हैं इन्हें…
वो मोहब्बतक़ी रिवायात,
समझता ही नहीं……!
फ़ातिमा हसन

11418
क़दम ऐसे अंदाज़से उठ रहे थे…
क़ि आवाज़ देक़र बुला लेग़ी मुझक़ो……!
                                                                   कैफ़ी आज़मी

11419
मैने अल्फ़ाज़ तो,
बीजोंक़ी तरह छाँट दिए,
ऐसा मीठा तिरा अंदाज़ था,
फ़रमानेक़ा……
ग़ुलज़ार

11420
उनक़े अंदाज़-ए-क़रम,
उनपें वो आना दिलक़ा ;
हाए वो वक़्त, वो बातें…
वो ज़माना दिलक़ा……
                पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर ग़ीलानी