19 July 2026

11106 - 11110 दिल दुनियाँ ग़म याद क़लेज़ा आराम लब ग़ुल क़रार क़फ़न चेहरे तड़प शायरी

 
11106
फ़िर क़िसीक़ी यादने तड़पा दिया,
फ़िर क़लेज़ा थामक़र हम रह ग़ए…!
                                                               फ़ानी बदायुनी

11107
तड़प ऐ दिल तड़पनेसे,
ज़रा आराम आता हैं l
कि लबपर हर तड़पक़े साथ,
उनका नाम आता हैं...!!!

11108
ग़ुलोंक़े सायेमें अक़्सर ‘रियाँज़’ तड़पा हूँ,
क़रार कांटोपै क़ुछ ऐसा पा लिया मैने।
                                                             ‘रियाँज़’ श्यामनग़री


11109 
चूमक़र क़फ़नमें,
लिपटें मेरे चेहरेक़ो,
उसने तड़पक़े क़हा…
‘नए क़पड़े क़्या पहन लिए…
हमें देख़ते भी नहीं…...

11110
इक़ ऐसी बहिश्त आई,
वादीमें पहुँच ज़ाएँ l
ज़िसमें क़भी दुनियाँक़े ग़म,
दिलक़ो न तड़पाएँ ll
                            अख़्तर शीरानी

18 July 2026

11096 - 11100 ज़िंदग़ी इश्क़ क़ातिल घुटन उदासी अश्क़ रुस्वाई क़हानी रस्म ज़ालिम अदा इज़ाज़त फ़रियाद तड़प शायरी

 
11096
घुटन तड़पन उदासी,
अश्क़ रुस्वाई अक़ेलापन…
बग़ैर इनक़े अधूरी इश्क़क़ी,
हर इक़ क़हानी हैं……
नीरज़ ग़ोस्वामी

11097
नया बिस्मिल हूँ मैं,
वाक़िफ़ नहीं रस्म-ए-शहादतसे…
बता दे तू ही ऐ ज़ालिम,
तड़पनेक़ी अदा क़्या हैं
चक़बस्त बृज़ नारायण

11098
सिख़लाई फ़रिश्तोंक़ों,
आदमक़ी तड़प उसने…
आदमक़ो सिख़ाता हैं,
आदाब-ए-ख़ुदावंदी……
                                  अल्लामा इक़बाल

11099
ये सच हैं चंद लम्होंक़े लिए,
बिस्मिल तड़पता हैं l
फ़िर इसक़े बअ'द,
सारी ज़िंदग़ी क़ातिल तड़पता हैं…ll
ख़ुशबीर सिंह शाद

11100
न तड़पनेक़ी इज़ाज़त हैं,
न फ़रियादक़ी हैं…
घुटक़े मर ज़ाऊँ, ये मर्ज़ी…
मिरे सय्यादक़ी हैं
                                        शाद लख़नवी

17 July 2026

11091 -11095 दिल तसव्वुर नक़्शा चमन क़ली ख़मोशि निक़ाल क़रार सीने तौर मंज़िल शौक़ लग़न तड़पा शायरी

 
11091
रातभर उनक़ा तसव्वुर,
दिलक़ो तड़पाता रहा ;
एक़ नक़्शा सामने,
आता रहा, ज़ाता रहा

                                अख़्तर शीरानी

11092
चमनसे क़ौन चला हैं,
ख़मोशियाँ लेक़र
क़ली क़ली तड़प उट्ठी हैं ll
सिसक़ियाँ लेक़र

11093
तड़पने फड़क़नेक़ी तौफ़ीक़ दे,
दिल-ए-मुर्तज़ा सोज़-ए-सिद्दीक़ दे……

                                                       अल्लामा इक़बाल

11094
ख़टक़ रही हैं क़ोई,
शय निक़ाल दे क़ोई……
तड़प रहा हैं,
दिल-ए-बे-क़रार सीनेमें ll
मुबारक़ अज़ीमाबादी

11095
तड़पा हैं इसी तौरसे,
दिल उसक़ी लग़नमें l
ढूँड़ी हैं यूँही शौक़ने,
आसाइश-ए-मंज़िल ll

                           फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

16 July 2026

11086 - 11090 दिल मोहब्बत नावक़-ए-ज़फ़ा ग़म निग़ाह अंज़ाम क़िस्मत सुब्ह शाम सितम याद ग़ैर तड़प शायरी

 
11086
तड़प रहा हैं दिल,
इक़ नावक़-ए-ज़फ़ाक़े लिए…
उसी निग़ाहसे फ़िर देख़िए,
ख़ुदाक़े लिए……
                                  लाला माधव राम ज़ौहर

11087
तुम्हें दिललग़ी भूल ज़ानी पड़ेग़ी,
मोहब्बतक़ी राहोंमें आक़र…
तो देख़ो तड़पनेपें मेरे,
न फ़िर तुम हँसोग़े क़भी,
दिल क़िसीसे लग़ाक़र तो देख़ो ll
पुरनम इलाहाबादी

11088
क़भी तड़पा ग़या हैं दिल तिरा ग़म,
क़भी दिलक़ो सहारा दे ग़या हैं ll
                                                  फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

11089
मोहब्बत क़रनेवालोंक़ा,
यहीं अंज़ाम होता हैं l
तड़पना उनक़ी क़िस्मतमें तो,
सुब्ह-ओ-शाम होता हैं ll
राज़ा मेहदी अली ख़ाँ

11090
उनक़ो भूले हुए,
अपने ही सितम याद आए…
ज़ब क़िसी ग़ैरने तड़पाया,
तो हम याद आए……!
                                         सुदर्शन फ़ाक़िर

12 July 2026

11081 - 11085 दिल ज़िंदग़ी मलाल यार शर्त फ़रियाद नक़ाब अरमाँ बिज़ली पाक़ीज़ नफ़स क़रवट तड़प शायरी

 
11081
निग़ह-ए-यार,
ख़ुद तड़प उठती…
शर्त-ए-अव्वल,
ख़राब होना था……
                         ज़िग़र मुरादाबादी

11082
मेरी फ़रियादसे वो तड़प ज़ाएँग़े,
मेरे दिलक़ो मलाल इसक़ा होग़ा…?
मग़र क़्या ये क़म हैं क़ि,
वो बे-नक़ाब आएँग़े…
मरनेवालेक़ा अरमाँ,
निक़ल ज़ाएग़ा……
 अनवर मिर्ज़ापुरी

11083
तड़प बिज़लीसे पाई,
हूरसे पाक़ीज़ग़ी पाई……
हरारत ली,
नफ़स-हा-ए-मसीह-ए-इब्न-ए-मरयमसे !
                                                              अल्लामा इक़बाल

11084
क़भी हमभी तड़पमें बिज़ली थे,
अब तो क़रवटभी ली नहीं ज़ाती…
ज़लील मानिक़पूरी

11085
ये ज़मीं क़िस क़दर सज़ाई ग़ई,
ज़िंदग़ीक़ी तड़प बढ़ाई ग़ई……
                                              साहिर लुधियानवी

11 July 2026

11076 -11080 दिल बेक़रार ख़टक़ फ़ित्ना इख़्तियार चश्म-ए-निग़राँ ज़ल्वे अंज़ाम बेताब तड़प शायरी

 
11076
ख़टक़ रहीं हैं क़ोई,
शय निक़ाल दे क़ोई l
तड़प रहा हैं,
दिल-ए-बे-क़रार सीनेमें…ll
                                       मुबारक़ अज़ीमाबादी

11077
निक़ले मिरी बग़लसे,
वो ऐसे तड़पक़े साथ…
याँद आ ग़याँ मुझे,
वहीं बे-इख़्तियाँर दिल……
दाग़ देहलवी

11078
ज़ल्वे बेताब थे,
ज़ो पर्दा-ए-फ़ितरतमें 'ज़िग़र'…
ख़ुद तड़पक़र मिरी,
चश्म-ए-निग़राँ तक़ पहुँचे……
                                               ज़िग़र मुरादाबादी

11079
सितम तो ये हैं क़ि,
अंज़ाम बनक़े आए हैं…
हमारे दिलक़ी तड़प,
आज़ क़ुछ तो क़ाम आए……
तस्लीम फ़ाज़ली

11080
ज़हाँ भी था क़ोई फ़ित्ना,
तड़पक़े ज़ाग़ उठा…
तमाम होश थी,
मस्तीमें तेरी अंग़ड़ाई……!
                                       नासिर क़ाज़मी

10 July 2026

11071 - 11075 दिल दुनियाँ बंदिशें इश्क़ झलक़ शौक़ विसाल बिस्मिल आँख़े क़यामत दिन रात तड़प शायरी

 
11071
बंदिशें इश्क़में,
दुनियाँसे निराली देख़े…
दिल तड़प ज़ाए मग़र,
लब न हिलाए क़ोई……
                                     आले रज़ा रज़ा

11072
बस इक़ झलक़क़ो तड़प रहीं हैं,
रहीन-ए-शौक़-ए-विसाल आँख़े…!
असरा रिज़वी

11073
हर दम तड़पक़े,
लोटता फ़िरता हूँ ख़ाक़, पर…
ग़ोया बना हूँ,
ताइर-ए-बिस्मिल तिरे बग़ैर……
                                               नादिर शाहज़हाँ पुरी

11074
ज़ो क़यामतक़ा नहीं दिन,
वो मिरा दिन क़ैसा…
ज़ो तड़पक़र न क़टी हो,
वो मिरी रात नहीं……
मुबारक़ अज़ीमाबादी

11075
यूँ अचानक़ तिरी आवाज़ क़हींसे आई,
ज़ैसे पर्बतक़ा ज़िगर चीरक़े झरना 
फ़ूटे l
या ज़मीनोंक़ी मोहब्बतमें तड़पक़र नाग़ाह,
आसमानोंसे क़ोई शोख़ सितारा टूटे ll
                                                               साहिर लुधियानवी

9 July 2026

11066 - 11070 दिल ज़िंदग़ी दर्द उम्र दास्ताँ ख़त ज़बानी सुक़ून नज़र मौज़ बेचैन तड़प शायरी

 
11066
ज़िसने क़िसीक़ी,
दिल-दोज़ दास्ताँ ज़ो सुनी…
तो सुनक़े तड़प उठा हैं…ll
                                            ज़ावेद अख़्तर

11067
ख़तोंक़ो ख़ोलती,
दीमक़क़ा शुक़्रियाँ,
वर्ना, तड़प रहीं थी,
लिफ़ाफ़ोंमें बे-ज़बानी पड़ी…
अज़हर फ़राग़

11068
इक़ तड़प मौज़-ए-तह-नशीं क़ी तरह…
ज़िंदग़ीक़ी बिना-ए-मोहक़म हैं…ll
                                                           फ़िराक़ ग़ोरख़पुरी

11069
तिरी तड़पसे न तड़पा था,
मेरा दिल लेक़िन…
तिरे सुक़ूनसे,
बेचैन हो ग़या हूँ मैं…!
साहिर लुधियानवी

11070
ज़ो दिलक़ो दे ग़ई,
इक़ दर्द उम्र-भरक़े लिए…
तड़प रहा हूँ अभी तक़ मैं,
उस नज़रक़े लिए……
                                   मुनव्वर बदायुनी

8 July 2026

11061 - 11065 दिल क़रार मोहब्बत दीद आस राह ग़ुज़र नज़र क़रवटें तमन्ना ग़म साथ इलाज़ तड़प शायरी

 
11061
हमें ज़िनक़ी दीद क़ी,
आस थी वो मिले, तो राहमें यूँ मिले…
मैं नज़र उठाक़े तड़प ग़याँ,
वो नज़र उठाक़े ग़ुज़र ग़ए……
                                                  शक़ील बदायूनी

11062
तड़प तड़पक़े तमन्नामें,
क़रवटें बदलीं…
न पाया दिलने हमारे,
क़रार सारी रात……
इम्दाद इमाम असर

11063
न आया ग़मभी,
मोहब्बतमें साज़ग़ार मुझे…
वो ख़ुद तड़प ग़ए,
देख़ा ज़ो बे-क़रार मुझे……
                                             असद भोपाली

11064
तड़पक़े रूह ये क़हती हैं,
हिज़्र-ए-ज़ानाँमें…
क़ि तेरे साथ,
दिल-ए-बे-क़रार हमभी हैं…
अमीर मीनाई

11065
नहीं इलाज़-ए-ग़म-ए-हिज़्र-ए-याँर क़्या क़ीज़े…
तड़प रहा हैं दिल-ए-बे-क़रार क़ियाँ क़ीज़े……?
                                                                              ज़िग़र बरेलवी

7 July 2026

11056 - 11060 ज़िंदग़ी अंदाज़ वक़्त ख़ुशबू बिख़र ख़्वाहिश हासिल लहज़ा सँवर तक़ल्लुफ़ रिश्ते लम्हा शायरी

 
11056
लम्हा-दर-लम्हा,
ग़ुज़रता ही चला ज़ाता हैं…l
वक़्त ख़ुशबू हैं,
बिख़रता ही चला ज़ाता हैं…ll
                                   तनवीर अहमद अल्वी

11057
ये लम्हा लम्हा ज़िंदा रहनेक़ी,
ख़्वाहिशक़ा हासिल हैं l
क़ि लहज़ा लहज़ा अपनेआपहीमें,
मर रहा हूँ मैं……
मुशफ़िक़ ख़्वाज़ा

11058
लम्हा लम्हा रोज़,
सँवरनेवाली तू…
लम्हा लम्हा रोज़,
बिख़रनेवाला मैं……!
                     ज़ावेद अक़रम फ़ारूक़ी

11059
ये लम्हा लम्हा,
तक़ल्लुफ़क़े टूटते रिश्ते…
न इतने पास मिरे आ,
क़ि तू पुराना लग़े……
ज़ुबैर रिज़वी

11060
ज़िंदग़ी एक़ फ़न हैं,
लम्होंक़ो अपने अंदाज़से,
ग़ँवानेक़ा……
                                      ज़ौन एलिया

6 July 2026

11051 - 11055 दौलत ज़वानी क़हानी मुश्क़िल ख़ुशी याद मख़्सूस घर वीरान साफ़ ज़ज़्बा ग़म ख़ुशी लम्हे शायरी

 
11051
दौलत-ए-अहद-ए-ज़वानी हो ग़ए,
चंद लम्हे ज़ो क़हानी हो ग़ए…!
                                                  फ़रहत क़ानपुरी

11052
बड़ी मुश्क़िलोंसे क़ाटा,
बड़े क़र्बसे ग़ुज़ारा…
तेरे ब'अद क़ोई लम्हा,
ज़ो मिला क़भी ख़ुशीक़ा…!
एहसान दरबंग़ावी

11053
क़िसीक़ो याद क़रनेक़े,
नहीं मख़्सूस क़ुछ लम्हे…
क़ोई ज़ब याद आ ज़ाए,
तो फ़िर वो याद आता हैं…!
                                           नील अहमद

11054
क़ैसा लम्हा आन पड़ा हैं,
हँसता घर वीरान पड़ा हैं ll
बक़ा बलूच

11055
साफ़ ज़ज़्बोंक़े हवालेसे तो,
ग़म हैं लेक़िन…
एक़ लम्हेक़ी ख़ुशी,
एक़ सदी रहती हैं ll
                                       ज़फर इमाम

5 July 2026

11046 - 11050 दिल उम्र हसीन बेसब्र ज़रियाँ उलझने आलम बिख़र लिफ़ाफ़े लम्हे शायरी

 
11046
बड़े हसीन थे वो बेसब्र लम्हे,
ज़ो लिफ़ाफ़ेमें बंद थे...
ये फ़ोन क़्या चले साहिब…
बेसब्रीक़ा क़ोई ज़रियाँ न रहा....

11047
हवा शाख़ोंमें रुक़ने और,
उलझनेक़ो हैं,
इस लम्हे ग़ुज़रते बादलोंमें,
चाँद हाइल होनेवाला हैं ll
ज़फ़र इक़बाल

11048
एक़ लम्हेमें,
बिख़र ज़ाता हैं ताना-बाना…
और फ़िर,
उम्र ग़ुज़र ज़ाती हैं यक़ज़ाईमें……
                                                    अहमद मुश्ताक़

11049 
क़ितने आलम गुज़र गए मुझपर…
तुमक़ो सोचा था एक लम्हेक़ो……
नील अहमद

11050
एक लम्हेक़ो तुम मिले थे, मगर…
उम्रभर दिलक़ो हम मसलते रहें…
                                                      अर्श सिद्दीक़ी

4 July 2026

11041 - 11045 दुनियाँ आलम याँदें फ़ुरसत मसरूफ़ि शामिल बात हसरत वक़्त नाज़ुक़ पल क़रीब शामिल लम्हे शायरी

 
11041
मेरी मसरूफ़ियतक़े हर लम्हेमें शामिल हैं...
तुम्हारी याँदें,
सोचो... मेरी फ़ुरसतोंक़ा
आलम क़्या होग़ा ...!

11042
क़ुछ लम्हे
तुझसे बात क़रनेक़ी हसरत हैं ! बस,
मैने क़ब क़हा...
अपना सारा वक़्त मुझे दे दो...!

11043
समेट लो इन नाज़ुक़ पलोंक़ो,
न ज़ाने ये लम्हे क़ल हो न हो
हो भी ये लम्हें तो क़्या मालुम
शामिल उन पलोंमें हम हो न हो ll

11044
वो वक़्त, वो लम्हे, क़ुछ अज़ीब होंग़े,
दुनियाँमें हम ख़ुशनसीब होंग़े l
दूरसे ज़ब इतना याँद क़रते हैं आपक़ो,
क़्या होग़ा ज़ब आप हमारे क़रीब होंग़े.!

11045
तुम्हारे एक़ लम्हेपरभी,
मेरा हक़ नहीं
न ज़ाने तुम क़िस हक़से,
मेरे हर लम्हेमें शामिल हो!

3 July 2026

11036 - 11040 दिल ख़्वाहिश इक़बाल वज्ह क़ज़ा शब क़लीसा घर झूट मशहूर ख़्वाहिश ज़न्नत शोहरत इबादत शायरी


11036
सुना इक़बाल-ए-इस्याँ,,
ख़ल्वतोंमें वज्ह-ए-बख़्शिश हैं…
l
क़लीसाओंमें,
ये तर्ज़-ए-इबादत आम हैं, साक़ी ll
                                                         मानी नाग़पुरी

11037
छोड़क़र घरक़ो क़हीं ज़ानेसे,
घरमें रहनेक़ी इबादत थी बड़ी…
झूट मशहूर हुआ राज़ाक़ा सच,
क़ी संसारमें शोहरत ना हुई……!
निदा फ़ाज़ली

11038
नमाज़ इक़ भी हरगिज़ न उस ने क़ज़ा क़ी
शब ओ रोज़ क़रता इबादत ख़ुदाक़ी
                                                             राज़ा मेहदी अली ख़ाँ

11039
दिलमें हैं ख़्वाहिश-ए-हूर-ओ-ज़न्नत,
और ज़ाहिरमें शौक़-ए-इबादत l
बस हमें शैख़जी आप ज़ैसे,
अल्लाह-वालोंसे अल्लह बचाए ll

11040
फ़क़ीरोंक़ो इरफ़ान-ए-हस्ती न मिलता,
अता ज़ाहिदोंक़ो इबादत न होती ll
                                                                साग़र सिक़ी

2 July 2026

11031 - 11035 पत्थर छीन दुनियाँ ज़िंदग़ी ज़हर नागिन मयख़ाने साग़र ज़न्नत तमाम उम्र इबादत शायरी

 
11031
क़ोई ख़ुदा हो क़ि,
पत्थर ज़िसेभी हम चाहें…
तमाम उम्र,
उसीक़ी इबादतें क़रनी……
                                          अहमद फ़राज़

11032
रिया-क़ारीसे बचिए,
ये बहुत ज़हरीली नागिन हैं…
ये नागिन ज़िंदग़ीभरक़ी,
इबादत छीन लेती हैं …ll
आलम निज़ामी

11033
यहीं हैं इबादत,
यहीं दीन ओ ईमां…
क़ि क़ाम आए दुनियाँमें,
इंसांक़े इंसां……
                             अल्ताफ़ हुसैन हाली

11034
क़ाबेहीमें हर सज़्देक़ो,
क़हते हैं इबादत……
मयख़ानेमें हर ज़ामक़ो,
साग़र नहीं क़हते……!
बिस्मिल सईदी

11035
ज़न्नतक़े लिए शैख़,
ज़ो क़रता हैं इबादत
क़ी ग़ौर ज़ो ख़ातिरमें,
तो मज़दूरक़ी सूझी
                    नज़ीर अक़बराबादी

1 July 2026

11026 - 11030 दौड़ दिल पत्ती क़ुबूल इल्तिज़ा सितारे ज़ुहद तक़्वा हक़्क़ मय-क़शी आदत क़ाम इबादत शायरी


11026
ऐ ख़ुदा,
मेरी रग़ोंमें दौड़ ज़ा l
शाख़-ए-दिलपर,
इक़ हरी पत्ती निक़ाल !

                          फ़रहत एहसास
11027
क़ुबूल इस बारग़हमें,
इल्तिज़ा क़ोई नहीं होती…
इलाही या मुझीक़ो,
इल्तिज़ा क़रना नहीं आता ll
चराग़ हसन हसरत

11028
सितारे तोड़ लिए हमने,
ज़ुहद-ओ-तक़्वाक़े…l
मग़र ज़ो हक़्क़-ए-इबादत था,
वो अदा न हुआ……ll
                                           क़लीम अहमदाबादी

11029
क़भी अल्लाह-मियाँ पूछेंग़े,
तब उनक़ो बताएँग़े…
क़िसीक़ो क़्यूँ बताएँ हम,
इबादत क़्यूँ नहीं क़रते……l
फ़रहत एहसास

11030
न मयक़शी न इबादत,
हमारी आदत हैं l
क़ि सामने क़ोई क़ाम आ ग़या,
तो क़र लेना……ll
                                              नातिक़ गुलावठी

30 June 2026

11021 - 11025 दिल दुनियाँ मरासिम पहचान नफ़स सौदा अंदाज़ बंदग़ी नाम ज़ज़ा तमन्ना इबादत शायरी

 
11021
तेरी पहचानक़े लाख़ों अंदाज़,
सर झुक़ाना ही इबादत तो नहीं…
                                               परवीन फ़ना सय्यद

11022
अहल-ए-दुनियाँसे,
मरासिमभी बरतने होंग़े…
हर नफ़स सिर्फ़ इबादत हो,
ज़रूरी तो नहीं……
सबा अक़बराबादी

11023
तिरे लिए तो झुक़ानाभी सर,
इबादत हैं l
अग़र झुक़ा न सक़े दिल,
तो बंदग़ी क़्या हैं……?
                                  असग़र वेलोरी

11024
बंदग़ीक़ा ‘हाँ’ इबादत नाम हैं l
नेक़-बख़्तीक़ा सआ'दत नाम हैं ll
मिर्ज़ा ग़ालिब

11025
सौदा-ग़री नहीं,
ये इबादत ख़ुदाक़ी हैं l
ऐ बे-ख़बर ज़ज़ाक़ी,
तमन्नाभी छोड़ दे……ll
                                  अल्लामा इक़बाल

29 June 2026

11016 - 11020 मोहब्बत इश्क़ दिल दस्त-ए-दुआ शिक़ायत फ़र्ज़ निभा उम्र ख़िदमत फ़र्क़ छीन ज़रिया इबादत शायरी

 
11016
मोहब्बत हैं 'रसा' मेरी इबादत,
ये मेरा दिल मेरा दस्त-ए-दुआ हैं…
                                                        रसा चुग़ताई

11017
वो और होंगे ज़िन्हें,
शिक़ायत हैं रबसे…
हमें तो उनक़े इश्क़क़ी,
इबादतसे मोहब्बत हैं…!

11018
एक़क़े घरक़ी ख़िदमत क़ी,
और एक़क़े दिलसे मोहब्बत क़ी l
दोनों फ़र्ज़ निभाक़र,
उसने सारी उम्र इबादत क़ी ll
                                               ज़ेहरा निग़ाह

11019
तुमसे नहीं तेरे अंदर बैठे ख़ुदासे,
मोहब्बत हैं मुझे…
तू तो बस एक़ ज़रिया हैं,
मेरी इबादतक़ा……

11020
मोहब्बत और इबादतमें,
फ़र्क़ तो हैं ना…
सो छीन ली हैं,
तिरी यारी मोहब्बतने……
                                     इफ़्तिख़ार मुग़ल

28 June 2026

11011 - 11015 दिल मोहब्बत आशिक़ी तन्हाई बंदगी अदा नूर सूरत मुक़द्दर दावत इबादत शायरी

 
11011
इतनी ख़ूँ-ख़ार न थीं पहले,
इबादत-ग़ाहें…
ये अक़ीदे हैं क़ि,
इंसानक़ी तन्हाई हैं…?
                                      निदा फ़ाज़ली

11012
सर झुक़ानेसे,
नमाज़ें अदा नहीं होती l
दिल झुक़ाना पड़ता हैं,
इबादतक़े लिए ll

11013
मोहब्बत मेरी,
क़्या इबादत नहीं हैं…
वो इक़ नूर हैं,
ज़िसक़ी सूरत नहीं हैं…!
                                    आलोक़ यादव

11014
मर्हबा मय-क़शोंक़ा मुक़द्दर,
अब तो पीना इबादत हैं अनवर l
आज़ रिंदोंक़ो पीनेक़ी दावत,
वाइ'ज़-ए-मोहतरम दे गए हैं ll

11015
आशिक़ीसे मिलेग़ा ऐ ज़ाहिद l
बंदगीसे ख़ुदा नहीं मिलता ll
                                             दाग़ देहलवी

27 June 2026

11006 - 11010 इश्क़ मोहब्बत अयादत अदावत आदत हद रूह ताज़िर नुमाइश नाम यार साथ मुक़म्मल वारस्ता इबादत शायरी

11006
अयादत होती ज़ाती हैं,
इबादत होती ज़ाती हैं l
मिरे मरनेक़ी देख़ो सबक़ो,
आदत होती ज़ाती हैं…ll
                                   मीना क़ुमारी नाज़

11007
इश्क़ ज़ब हदसे बढ़ ज़ाए,
तो इबादत बन ज़ाता हैं !
ज़ब क़ोई रूहमें उतर ज़ाए,
तो आदत बन ज़ाता हैं…!

11008
मैं तो मरक़रभी न बेचूँग़ा,
क़भी यारक़ा नाम…
आप ताज़िर हैं, नुमाइशक़ो…
इबादत समझें ll
                                           अली ज़रयून

11009
तुमने छूक़र मुझे,
ज़ो क़र दिया हैं मुक़म्मल ll
मेरी इबादतक़ा अब,
क़ोई और ख़ुदा नहीं ll

11010
वारस्ता उससे हैं क़ि,
मोहब्बतही क़्यूँ न हो…
क़ीजे हमारे साथ,
अदावत ही क़्यूँ न हो……
                                      मिर्ज़ा ग़ालिब

26 June 2026

11001 - 11005 क़रीब याद साँस आहिस्ता नज़र चूम इबादत साँसों ज़रा ईमान बात सज़्दे आहिस्ता शायरी

 
11001
उसे पाक़ नज़रोंसे चूमनाभी,
इबादतों में शुमार हैंl
क़ोई फ़ूल लाख़ क़रीब हो क़भी,
मैने उसक़ो छुआ नहीं……!

                                                      बशीर बद्र

11002
उसक़ी याद आयी हैं,
साँसों ज़रा आहिस्ता चलो
धड़क़नोंसे भी इबादतमें,
साँसों ज़रा आहिस्ता पड़ता हैं ll

11003
दुनि
याँ क़हे क़ुछ हैं.
मगर ईमानक़ी ये बात
होनेक़ी तरह हो तो,
इबादत हैं मोहब्बत!

                                   मंज़र लख़नवी

11004
अब इश्क़ नहीं,
इबादतक़ी ज़ाएगी,
तुमसे जुड़ी हर बात,
हिफ़ाज़तसे रख़ी ज़ाएगी।

11005
दुनिया मिरे सज़्देक़ो,
इबादत न समझना
पेशानीपें क़िस्मतक़ा लिखा,
क़ाट रहा हूँ ll

                                            मुनव्वर राना

25 June 2026

10996 - 11000 दिल रहम ज़बीं सज़्दे याद साँस आहिस्ता धड़क़न फ़क़ीर अँधेरे गवाही उज़ाले इबादत शायरी

 
10996
मुझे तो उनक़ी इबादतपें,
रहम आता हैं…
ज़बींक़े साथ जो सज़्देमें,
दिल झुक़ा न सक़े……
                                   ख़ुमार बाराबंक़वी

10997
उसक़ी याद आई हैं,
साँसो ज़रा आहिस्ता चलो…
धड़क़नोंसेभी इबादतमें,
ख़लल पड़ता हैं
राहत इंदौरी

10998
दिलक़े माबूद,
ज़बीनोंक़े ख़ुदाईसे अलग…
ऐसे आलममें,
इबादत नहीं होगी हमसे……
                                         इफ़्तिख़ार आरिफ़

10999
ज़िसे पूज़ा था हमने,
वो तो ख़ुदा ना हो सक़ा…
हमही इबादत क़रते-क़रते,
फ़क़ीर हो गये……!

11000
देते हैं उज़ाले,
मिरे सज्दोंक़ी गवाही l
मैं छुपक़े अँधेरेमें,
इबादत नहीं क़रता ll
                                 क़तील शिफ़ाई

24 June 2026

10991 - 10995 इश्क़ ज़ुबानी ख़याँलात मुक़र्रर घाटे मुनाफ़े सज़़दे ख़्याल क़ारोबार ग़म इबादत शायरी

 
10991
ज़ुबानी इबादतहीं क़ाफ़ी नहीं..
ख़ुदा सुन रहा हैं ख़याँलात भी...!

10992
मेरी इबादतक़ा क़ोई वक़्त,
मुक़र्रर नहीं होता…
तुम ख़्यालोंमें आते हो…
हम सज़़देमें बैठ ज़ाते हैं…!

10993
घाटे और मुनाफ़ेक़ा
बाज़ार नहीं… 
इश्क़ एक़ इबादत हैं,
क़ारोबार नहीं !

10994
हर साँस सज़दा क़रती हैं,
हर नज़रमें इबादत होती हैं।

10995
मिटता हैं फौते-फ़ुर्सते-हस्तीक़ा ग़म क़ोई,
उम्रे-अज़ीज़ सर्फे-इबादतही क़्यों न हो?
                                                                    मिर्ज़ा ग़ालिब

23 June 2026

10986 - 10990 पाज़ेब घुँघरू झंक़ार प्यार सुख़न अक़ड़ लब फ़रामोश ग़म साबित लाज़वाब फ़िक़र फ़िक़्र शायरी

 
10986
वो मेरी फ़िक़्र तो क़रता हैं,
मग़र प्यार नहीं…
यानी पाज़ेबमें घुँघरू तो हैं, 
झंक़ार नहीं ll

10987
सुख़न यानी लबोंक़ा फ़न,
सुख़न-वर यानी इक़ पुर-फ़न l
सुख़न-वर ईज़द अच्छा था,
क़ि आदम या फ़िर अहरीमन ll
ज़ौन एलिया

10988
क़िसीने क़्या ख़ूब क़हा हैं...!
अक़ड़ तो सबमें होती हैं
झुक़ता वहीं हैं ज़िसे...
क़िसीक़ी फ़िक़र होती हैं ll

10989
क्यूँ ज़िया-क़ार बनूँ,
सूद-फ़रामोश रहूँ…
फ़िक़्र-ए-फ़र्दा न क़रूँ,
महव-ए-ग़म-ए-दोश रहूँ ll

                                   अल्लामा इक़बाल

10990
उसेभी मालूम हैं...
क़ि लाज़वाब हैं हम...!
फ़िक़्र हैं सबक़ों,
ख़ुदक़ों सहीं साबित क़रनेक़ी...ll

22 June 2026

10981 - 10985 दिल इश्क़ दुनियाँ हद क़ल आँख़ आँसू चेहरा प्यारा ख़्वाहिश क़यामत शब लुत्फ़ याद फ़िक़र फ़िक़्र शायरी

 
10981
टूटे दिलक़ी अपनी ना फ़िक़र,
पर उसक़ी फ़िक़र क़िये ज़ा रहा हूँ l
समझ नहीं आता क़ि ये इश्क़ हैं,
या क़ोई हद क़िये ज़ा रहा हूँ…?

10982
आज़ वही क़ल हैं,
ज़िस क़लक़ी फ़िक़्र,
तुम्हें क़ल थी ll

10983
मेरी आँख़ोंमें आँसू नहीं,
बस तुम्हारी फ़िक़्रक़ा पहरा हैं l
दुनियाँमें चाहे क़ोई भी हो,
मुझे सिर्फ़ तुम्हारा ही चेहरा प्यारा हैं

10984
मुझे मेरे क़ल क़ि फ़िक़्र तो,
आज़ भी नहीं हैं l
पर ख़्वाहिश तुझे पाने क़ि,
क़यामत तक़ रहेग़ी ll

10985
फ़िक़्र ये थी क़ि,
शब-ए-हिज़्र क़टेग़ी क़ैसे…?
लुत्फ़ ये हैं क़ि,
हमें याद न आया क़ोई ll

21 June 2026

10976 - 10980 लिहाज़ इश्क़ बदनाम ख़ामोश रूसवाई चाहत इम्तेहान सादग़ी वफा आदत ख़ुश मुस्क़ान नसीब ईमान ग़लत फ़िक़र फ़िक़्र शायरी

 
10976
लिहाज़-ए-इश्क़ न होता,
तो तुमभी आज़ बदनाम होते l
ख़ामोश हैं क़्योंक़ि, 
तेरी रूसवाईक़ी फ़िक़्र क़रते हैं ll

10977
चाहत, फ़िक़्र, इम्तेहान, सादग़ी, वफा, 
मेरी इन्हीं आदतोंने मुझे मरवा दिया ll

10978
फ़िक़्र इतनी हैं क़ि…
तुम्हें हर पल ख़ुश देख़ना हैं l
और बेफ़िक़्र इतने हैं क़ि…
तुम्हारी मुस्क़ानक़े लिए,
हर ज़मानेसे लड़ना हैं।l

10979
देख़ली तेरी ईमानदारी, ए-दिल…
तू मेरा और फ़िक़्र क़िसी और क़ी…!

10980
नसीबमें नहीं होते,
फ़िक़्र क़रनेवाले लोग़… 
जो फ़िक़र क़रते हैं,
अक्सर उन्हे ग़लत समज़ते हैं लोग़…ll

20 June 2026

10971- 10975 मोहब्बत रूह ख़ास रिश्ता मुस्क़ान चेहरे पल बेपनाह रिश्ता ज़िक़्र फ़िक़्र शायरी

 
10971
क़ुछ ख़ास रिश्ता हैं,
मेरी रूहक़ा तेरी रूहसे…!
तभी तो तेरी फ़िक़्र,
मेरी दुआओंमें शामिल रहती हैं

10972
मुस्क़ानक़े सिवा,
क़ुछ न लाया क़र चेहरेपर…
मेरी फ़िक़्र हार ज़ाती हैं,
तेरी मायूसी देख़क़र ll

10973
दूर हैं फ़िरभी भूलेग़ी नहीं,
क़भी तो मेरा ज़िक़्र क़रेग़ी...

10974
हर पल बस,
तेरी फ़िक़्रसी होती हैं…
ज़बसे ये मोहब्बत,
क़िसीसे बेपनाह होती हैं

10975
तुम्हारी फ़िक़्रक़े लिए, 
हमारा क़ोई रिश्ता हो…
ज़रूरी तो नहीं l

19 June 2026

10966 - 10970 दिल दुनियाँ क़म्बख़्त शक़ हक़ गुस्सा ज़िक़्र बात फ़िक़्र शायरी

 
10966
क़भी आओ बैठते हैं, 
बतलाते हैं,
दुनियाँक़ी फ़िक़्र छोड़, 
दिलक़ी सुनाते हैं ll

10967
ज़िक़्र तो छोड़ दिया मैने उसक़ा,
लेक़िन क़म्बख़्त फ़िक़्र नहीं ज़ाती……

10968
तुम्हारी फ़िक़्र हैं मुझे,
इसमे क़ोई शक़ नहीं l
तुम्हे क़ोई और देख़े,
क़िसीक़ो ये हक़ नहीं ll

10969
मेरे इस दिलक़ो तुमही रख़ लो,
बड़ी फ़िक़्र रहती हैं इसे, तुम्हारी…

10970
गुस्सा इतना हैं क़ि तुमसे,
क़भी बात भी ना क़रूँ…
फ़िरभी दिलमें तेरी फ़िक़्र, 
ख़ुदसे ज़्यादा हैं ll

18 June 2026

10961 - 10965 मोहब्बत दिल अदावत अंदाज़ एहसास ख़्याल क़द्र रहम ज़िक़्र फ़िक़्र फ़िक़र शायरी

 
10961
ये फ़िक़र, ये अदावतें,
ये अंदाज़, ऐ गुफ्तगूं l
संभल ज़ाओ तुम,
तुम्हें हमसे मोहब्बत हो रहीं हैं…!

10962
तेरा ज़िक़्र, तेरी फ़िक़्र, 
तेरा एहसास, तेरा ख़्याल,
तू ख़ुदा तो नहीं…
फ़िर हर ज़ग़ह क़्यों हैं…?

10963
ना क़द्र, ना फ़िक़्र, 
ना रहम, ना मेहरबानी,…
फ़िरभी वो क़हते हैं,
बेशुमार इश्क़ हैं तुमसे...!

10964
बहुत फ़िक़्र होने लग़ी हैं…
मुझे अब मेरी l
क़ोई बात तेरी,
मेरे दिलतक़ नहीं ज़ाती….ll

10965
अब तेरा ज़िक़्र नहीं, 
अब तेरी फ़िक़्र नहीं l
क़्यूँक़ी तू वो नहीं रहीं...
ज़िससे मैने, मोहब्बत क़ी थी l
अब तू बन चुक़ी हैं वो…
ज़िसक़े बारेमें
 मैने क़भी,
सोचाभी नहीं ll

17 June 2026

10956 - 10960 दिल क़ाँटा ज़िक़्र इब्तिदा इंतिहा दुनियाँ आज़ाद बातें ग़म फ़िक़्र शायरी


10956
ज़ो सामने ज़िक़्र नहीं क़रते,
वो अंदर हीं अंदर,
बहुत फ़िक़्र क़रते हैं !

10957
ख़िरद-मंदोंसे क़्या पूछूँ क़ि,
मेरी इब्तिदा क़्या हैं…?
क़ि मैं इस फ़िक़्रमें रहता हूँ,
मेरी इंतिहा क़्या हैं…?
अल्लामा इक़बाल

10958
हमें तो लग़ा था क़े,
तुम्हें बड़ी फ़िक़्र होग़ी हमारी…
पर असलमें हमारे अलावा,
सारी दुनियाँ हैं तुम्हारी।

10959
आज़ाद फ़िक़्रसे हूँ,
उज़्लतमें दिन गुज़ारूँ…
दुनियाँके ग़मक़ा,
दिलसे क़ाँटा निक़ल गया हो ll
अल्लामा इक़बाल

10960
ज़ी चाहें क़ि दुनियाँक़ी,
हर एक़ फ़िक़्र भुलाक़र,
दिलक़ी बातें सुनाऊँ तुझे,
मैं पास बिठाक़र।

16 June 2026

10951 - 10955 दिल रूह ग़हराई चाहा पूज़ा फ़ूल दर्द मंज़र बात ग़हरे क़त्ल खंज़र ज़ख़्म शायरी

 
10951
रूहक़ी ग़हराईमें पाता हूँ,
पेशानीक़े ज़ख़्म…
सिर्फ़ चाहा हीं नहीं मैने,
उसे पूज़ा भी हैं ll
                              अख़्तर होशियाँरपुरी

10952
नाम तो क़ाँटोंक़ा हीं होग़ा, 
ये सोचक़र क़ई बार फ़ूलभी, 
चुपक़ेसे ज़ख़्म दे ज़ाते हैं...

10953
रूहसे लिपटे दर्दक़े मंज़र,
टूट रहें हैं ज़ख़्मक़े पैक़र ll
                                      अमीर नहटौरी

10954
बातोंक़े ज़ख़्म बड़े ग़हरे होते हैं,
क़त्लभी हो ज़ाते हैं और
खंज़रभी नहीं दिख़ते ll

10955
मसअला ख़त्म हुआ चाहता हैं…
दिल बस अब ज़ख़्म नयाँ चाहता हैं…!
                                                            शक़ील ज़माली

15 June 2026

10946 - 10950 ख़ातिर क़तर ज़श्न चराग़ समुंदर मेहंदी ख़ार ग़ुल फ़स्ल दफ़्तर सुख़न ज़ख़्म शायरी

 
10946
ज़ाओ तुम अपने बामक़ी ख़ातिर,
सारी लवें शम्ओं क़ी क़तर लो…
ज़ख़्मक़े मेंहर-ओ-माह सलामत,
ज़श्न-ए-चराग़ाँ तुम से ज़ियाँदा ll
                                             मज़रूह सुल्तानपुरी

10947
ग़ुहर लग़े थे ख़ुनुक़,
ऊँग़लियोंक़े ज़ख़्म मुझे…
अब इस अथाह समुंदरक़ो,
फ़िर खंग़ाले क़ौन……?
ज़ेब ग़ौरी

10948
ये ज़ख़्मक़ा निशान हैं,
ज़ाएग़ा देरसे l
छुटती नहीं हैं ज़ल्दीसे,
मेहंदी लग़ी हुई……ll
                                मुनव्वर राना

10949
ख़ार-ब-ख़ार ग़ुल-ब-ग़ुल,
फ़स्ल-ए-बहार आ ग़ई l
फ़स्ल-ए-बहार आ ग़ई,
ज़ख़्म बहाल हो ग़ए ll
ज़ौन एलियाँ

10950
इक़ दफ़्तर-ए-मज़ालिम-ए-चर्ख़-ए-क़ुहन ख़ुला l
वा था दहान-ए-ज़ख़्म क़ि बाब-ए-सुख़न ख़ुला ll
                                                                         चक़बस्त बृज़ नारायण
                                                                         (रामायण क़ा एक़ सीन)

12 June 2026

10941 - 10945 नज़र तर्क़ रूहें साहिल फ़िक़्र भँवर ख़ौफ़ अफ़्साना लुत्फ़ बात ख़ामोशी याँद चाह शायरी

 
10941
अब आए… याँ न आए, इधर पूछते चलो;
क़्या चाहती हैं उनक़ी नज़र पूछते चलो;
हमसे अग़र हैं, तर्क़-ए-ताल्लुक़ तो क़्या हुआ;
याँरो क़ोई तो उनक़ी ख़बर पूछते चलो।

10942
थक़ ग़याँ हूँ मैं,
क़रते क़रते याँद तुझक़ो,
अब तुझे मैं,
याँद आना चाहता हूँ……
क़तील शिफ़ाई

10943
डूबी हैं दो रूहें,
चाहतोंक़े समुन्दर में…
अब न साहिलोंक़ी फ़िक़्र,
न भँवरक़ा ख़ौफ़……

10944
आली शेर हो याँ अफ़्साना,
याँ चाहतक़ा ताना बाना…
लुत्फ़ अधूरा रह ज़ाता हैं,
पूरी बात बता देनेसे……
ज़लील ’आली’

10945
बदल दियाँ हैं मुझे,
मेरे चाहने वालोने हीं l
वरना मुझ ज़ैसे शख़्समें,
इतनी ख़ामोशी क़हाँ थी…

11 June 2026

10936 - 10940 ज़िन्दग़ी सबक़ हक़ फ़रामोशी तक़मील याँद भूल सामना मुस्क़ुरा अधूरा ख़्वाहिश पता चाह शायरी

 
10936
तुझे अक़ेले पढूँ,
क़ोई हम-सबक़ न रहें…l
मैं चाहता हूँ क़ि तुझपर,
क़िसीक़ा हक़ न रहें……ll


10937
ग़ो फ़रामोशीक़ी,
तक़मील हुआ चाहती हैं…
फ़िरभी क़ह दो क़ि,
हमें याँद वो आया न क़रे ll
अबरार अहमद

10938
अपनी चाहतक़ा यूँ पता देना,
सामना हो तो मुस्क़ुरा देना !

10939
क़ुछ इस तरहसे,
याँद आते रहें हो…
क़ि अब भूल ज़ानेक़ो,
ज़ी चाहता हैं ll
अख़्तर शीरानी

10940
क़ुछ ख़्वाहिशोंक़ा......
अधूरा रहनाहीं ठीक़ हैं,
ज़िन्दग़ी ज़ीनेक़ी......
चाहत तो बनी रहती हैं......

10 June 2026

10931 -10935 दिल मोहब्बत देख़ इन्सानियत चेहरा बस्ती ग़ली आलम चाह शायरी

 
10931
दिलमें क़ुछ भी तो न रह ज़ाएग़ा…
ज़ब तिरी चाह निक़ल ज़ाएग़ी……
                                                      इफ़्तिग़र राग़िब

10932
शहंशाहीं नहीं मुझे,
इन्सानियत अता क़र मौला,
मैं उसपर नहीं....
उसक़े दिलपें राज़ क़रना चाहता हूँ,...

10933
देख़नेक़े लिए सारा आलम भी क़म…
चाहनेक़े लिए एक़ चेहरा बहुत ll
                                                 असअ'द बदायुनी

10934
फ़िर उस ग़लीसे,
ग़ुज़रना चाहता हैं दिल…
अब उस ग़लीक़ो,
क़ौनसी बस्तीसे लाऊँ मैं...!

10935
मुझे उनसे हैं ज़ो मोहब्बत ऐ 'बासिर'…
उन्हें देख़ पानेक़ो ज़ी चाहता हैं……!
                                                             बासिर टोंक़ी

8 June 2026

10926 - 10930 ज़िन्दग़ी मोहब्बत इल्जाम सलाम फ़ूल सहीं साबित ग़ज़ल तेरे नाम इंतज़ार शौक़ मुस्क़ुरा शायरी

 
10926
वहाँ सलामक़ों आती हैं,
नंग़े पाँव बहार…
ख़िले थे फ़ूल ज़हाँ,
तेरे मुस्क़ुरानेसे…
                   अहमद मुश्ताक़

10927
छोड़ दो अपनेक़ों सहीं साबित क़रनेक़ों ज़नाब,
ज़िन्दग़ी हैं क़ोंई इल्जाम नहीं...
फ़िर आज़ क़ोंई ग़ज़ल तेरे नाम न हो ज़ाये,
क़हीं लिख़ते लिख़ते शाम न हो ज़ाये l
क़र रहें हैं इंतज़ार तेरी मोहब्बतक़ा,
इसी इंतज़ारमें ज़िन्दग़ी तमाम न हो ज़ाये ll

10928
उन पें हँसिये शौक़से,
ज़ो माइले-फ़रियाँद हैं…
उनसे ड़रिये ज़ो,
सितमपर मुस्क़ुराक़र रह ग़ये
                                            असर लख़नवी

10929
ज़माना ख़राब हैं
ज़रा संभलक़र मिला क़ीज़िए लोग़ोंसे…
मुस्क़ुराहटक़ा शिक़ार क़रने यहाँ,
महफ़िल लग़ा क़रती हैं लोग़ोंक़ी ।

10930
नज़ीर लोग़ तो,
चेहरे बदलते रहते हैं…
तू इतना सादा न बन,
मुस्क़ुराहटें पहचान……
                                      नज़ीर तबस्सुम

7 June 2026

10921 - 10925 मुहब्बत अंदाज़ ग़ुस्सा सच्चे क़ली दर्द राज़ झुठ छुपा अश्क़ आँख़ मुस्क़ुरा शायरी

 
10921
मुस्क़ुरानेक़ा यहीं अंदाज़ था,
ज़ब क़ली चटक़ी तो वो याँद आ ग़याँ…!

10922
ज़िन्हे ग़ुस्सा आता हैं,
वो लोग़ सच्चे होते हैं l
मैने झुठोक़ों अक़्सर,
मुस्क़ुराते हुए देग़ हैं !

10923
क़िसीने हमसे क़हा,
इश्क़ धीमा ज़हर हैं...
हमने मुस्क़ुराक़े क़हा,
हमें भी ज़ल्दी नहीं हैं...

10924
लोग़ क़ेहते हैं,
हम मुस्क़ुराते बहुत हैं…
और हम थक़ ग़ए,
दर्द छुपाते छुपाते…ll

10925
राज़ मुहब्बतक़ा,
छुपा रहा हैं क़ोंई…
हैं अश्क़ आँख़ोंमें और
मुस्क़ुरा रहा हैं क़ोंई...

6 June 2026

10916 - 10920 दिल प्यार चाह ज़हर तड़प सुकूँ ख़लिश साज़ग़ार रास वारदात तूफ़ान बरपा बिछड़े बिज़ली मुस्क़ुरा शायरी


10916
क़िसीने ज़हर-ए-ग़म दियाँ,
तो मुस्क़ुराक़े पी ग़ए !
तड़पमें भी सुकूँ न था,
ख़लिशभी साज़ग़ार थी ll
                                       आमिर उस्मानी

10917
मुस्क़ुराना क़भी न रास आयाँ,
हर हँसी एक़ वारदात बनी…
महेंन्द्र सिंह बेदी

10918
दिलमें तूफ़ान हो ग़याँ बरपा,
तुमने ज़ब मुस्क़ुराक़े देख़ लियाँ…
ज़ैसे पौ फ़ट रहीं हो ज़ंग़लमें,
यूँ क़ोंई मुस्क़ुराए ज़ाता हैं……!
                                                 अहमद मुश्ताक़

10919
 प्यारक़ा बदला क़भी चुक़ा न सकेंग़े... 
चाहक़र भी आपक़ों भुला न सकेंग़े...
तुमही हो मेरे लबोंक़ी हंसी,
तुमसे बिछड़े तो फ़िर मुस्क़ुरा न सकेंग़े ll

10920
तड़प ज़ाता हूँ ज़ब,
बिज़ली चमक़ती देख़ लेता हूँ…
क़ि इससे मिलता-ज़ुलतासा,
क़िसीक़ा मुस्क़ुराना हैं……!
                                  ग़ुलाम मुर्तज़ा क़ैफ़ क़ाक़ोंरी

5 June 2026

10911 - 10915 दिल ज़िंदग़ी इश्क़ दीवानग़ी सूरत नज़र याँद सिललिसा इंतहान हसरत ज़ुबान मुस्क़ुरा शायरी

 
10911
ज़ाने क़्या ढूंढ़ती हैं,
मेरे मुस्क़ुराहट तुझमें,
ज़ो तू हंसता हैं तो, ये क़मबख़्त,
मेरे होठोंपें आ बैठती हैं !

10912
क़ौन हंस-हंसक़े ज़ियाँ हैं,
और क़ौन ग़ाता हैं मर्सियाँ…
यह तो वो बतायेंग़े,,
ज़िन्होने मुस्क़ुराक़र ज़हर पियाँ हैं।

10913
दिलक़ी हसरत ज़ुबानपें आने लग़ी,
तूने देख़ा और ज़िंदग़ी मुस्क़ुराने लग़ी !
ये इश्क़क़ी इंतहान थी, या दीवानग़ी मेरी,
हर सूरतमें सूरत तेरी नज़र आने लग़ी !

10914
क़िसीने क़्या ख़ूब लिख़ा हैं…
क़ल न हम होंग़े न ग़िला होग़ा।
सिर्फ़ सिमटी हुई याँदोंक़ा सिललिसा होग़ा।
ज़ो लम्हे हैं चलो मुस्क़ुराक़र हंसक़र बिता लें।
ज़ाने क़ल ज़िंदग़ीक़ा क़्या फ़ैसला होग़ा।

10915
ख़ुशबू और प्यारक़ा रंग़़…
तेरा साथ हो, तेरा संग़…!!
मेरा मुस्क़ुराना, पलक़े ग़िराना और शरमाना,
सूरज़क़ी रोशनी, पर लाली- सी ओढनी…
शाममें ज़ैसे, रातक़ी ठंड़क़,
तेरा साथ हो, तेरा संग़….!!!