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27 May 2026

10686 - 10890 दिल मोहब्बत प्यार याद अरमान बातें सिलसिला ग़िला शिक़वा ख़मोशी ख़ामोशी शायरी

 
10686
क़ैसी हैं ये मोहब्बत,
क़ैसा ये प्यार हैं…
एक़ तरफ़ हैं ख़ामोशी,
एक़ तरफ़ इंतज़ार हैं ll

10687
ज़ो सुनता हूँ,
सुनता हूँ, मैं अपनी ख़मोशीसे…
ज़ो क़हती हैं,
क़हती हैं, मुझसे मिरी ख़ामोशी…!

10688
ख़ामोशीमें छिपी बातें,
दिलक़े अरमान बताती हैं l
ज़ब क़ोई नहीं बोलता,
तब भी ख़्वाहिशें ज़ग़ाती हैं !!

10689
न क़ोई शिक़वा,
न क़ोई ग़िला हैं अब…
बस तेरी यादमें,
ख़ामोशीक़ा सिलसिला हैं अब !

10690
वक़्त ग़वाह हैं क़ि,
ख़ामोशी क़भी बेवज़ह नहीं होती…
क़ुछ ज़ख्म ही ऐसे होते हैं,
ज़िनक़ी दवा नहीं होती !