Showing posts with label ग़िला शिक़वा वक़्त ग़वाह इंतज़ार वज़ह ज़ख्म दवा ख़्वाहिशें ख़मोशी ख़ामोशी शायरी. Show all posts
Showing posts with label ग़िला शिक़वा वक़्त ग़वाह इंतज़ार वज़ह ज़ख्म दवा ख़्वाहिशें ख़मोशी ख़ामोशी शायरी. Show all posts

27 May 2026

10866 - 10870 दिल मोहब्बत प्यार याद अरमान बातें सिलसिला ग़िला शिक़वा ख़मोशी ख़ामोशी शायरी

 
10866
क़ैसी हैं ये मोहब्बत,
क़ैसा ये प्यार हैं…
एक़ तरफ़ हैं ख़ामोशी,
एक़ तरफ़ इंतज़ार हैं ll

10867
ज़ो सुनता हूँ,
सुनता हूँ, मैं अपनी ख़मोशीसे…
ज़ो क़हती हैं,
क़हती हैं, मुझसे मिरी ख़ामोशी…!

10868
ख़ामोशीमें छिपी बातें,
दिलक़े अरमान बताती हैं l
ज़ब क़ोई नहीं बोलता,
तब भी ख़्वाहिशें ज़ग़ाती हैं !!

10869
न क़ोई शिक़वा,
न क़ोई ग़िला हैं अब…
बस तेरी यादमें,
ख़ामोशीक़ा सिलसिला हैं अब !

10870
वक़्त ग़वाह हैं क़ि,
ख़ामोशी क़भी बेवज़ह नहीं होती…
क़ुछ ज़ख्म ही ऐसे होते हैं,
ज़िनक़ी दवा नहीं होती !