4 August 2026

11166 - 11170 प्यार मेहरबाँ नज़र शुक़्रिया तोहफ़ा फ़ैसला फ़ासला लहर आधा आँख़ रुख़सत ज़ुदाई शायरी


11166
उस मेहरबाँ नज़रक़ी,
इनायतक़ा शुक़्रिया l
तोहफ़ा दिया हैं,
हमक़ो ज़ुदाईक़ा ll

11167
तुझसे ज़ुदा न होंगे,
ये सोचा था उम्रभर l
ये फ़ैसला तिरा था,
जो ये फ़ासला हुआ ll
रुबीना अया

11168
उदासीक़ी लहरोंमें,
बहता रहता हूँ l
तेरी ज़ुदाईमें,
ख़ोता रहता हूँ ll

11169
तो क़्या सचमुच,
ज़ुदाई मुझसे क़र ली…
तो ख़ुद अपनेक़ो,
आधा क़र लिया क़्या…?
ज़ौन एलिया

11170
ज़ुदाईक़ा हमें क़्या,
वो हसते हसते सह्य लेंग़े… 
आँख़ोमें उनक़े प्यार दिख़ाई दे,
तो मानेसे रुख़सत क़र लेंग़े !

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