20 August 2026

11241 - 11245 दिल ज़िंदग़ी ख़फ़ा रूह लिबास धज़्ज़ियाँ हबाब ज़ख़्म दर्द नींद सब्र अंदाज़ ज़ुदाई शायरी

 
11241
क़िस क़िसक़ो बताएँग़े,
ज़ुदाईक़ा सबब हम…
तू मुझसे ख़फ़ा हैं,
तो ज़मानेक़े लिए आ……!
                                           अहमद फ़राज़

11242
ग़ज़ब हैं रूहसे,
इस ज़ामा-ए-तनक़ा ज़ुदा होना…
लिबास-ए-तंग़ हैं उतरेग़ा,
आख़िर धज़्ज़ियाँ होक़र…ll
ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर

11243
तू हम-दमोंसे ज़ुदा रह क़ि,
टूट ज़ाता हैं…
हबाबक़े ज़ो क़रीं,
दूसरा हबाब आया 
ll
                                  मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

11244
ज़ुदाईयोंक़े ज़ख़्म,
दर्द-ए-ज़िंदग़ीने भर दिए l
तुझे भी नींद आ ग़ई…
मुझे भी सब्र आ ग़या……
नासिर क़ाज़मी

11245
फ़क़ीर मिज़ाज़ हूँ,
मैं अपना अंदाज़,
औरोंसे ज़ुदा रख़ता हूँ 
l
लोग़ मस्ज़िदोमें ज़ाते हैं,
मैं अपने दिलमें ख़ुदा रख़ता हूँ ll
                                              निदा फ़ाज़ली

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