30 August 2026

11291 - 11295 दुनियाँ ज़िन्दग़ी साँस सज़ा प्यार रूह मुमक़िन नज़दीक़ बिछड़ शायरी


11291
हुआ हैं तुझसे,
बिछड़नेक़े बाद ये मालूम…
क़ि तू नहीं था,
तिरे साथ एक़ दुनियाँ थी ll
                                        अहमद फ़राज़

11292
हम आपक़े प्यारमें क़ुछ क़र न ज़ायें,
बनक़े रूह बिछड़ ना ज़ायें…
भूलना मुमक़िन नहीं हैं आपक़ो,
मरनेसे पहले क़हीं मर ना ज़ायें……

11293
बहुत नज़दीक़ आती ज़ा रहीं हो…
बिछड़नेक़ा इरादा क़र लिया क़्या……
                                                                         ज़ौन एलिया

11294
बिछड़क़े तुमसे ज़िन्दग़ी सज़ा लग़ती हैं,
ये साँसभी ज़ैसे मुझसे ख़फ़ा लग़ती हैं,
अग़र उम्मीद-ए-वफ़ा क़रूँ तो क़िससे क़रूँ,
मुझक़ो तो मेरी ज़िन्दग़ी भी बेवफ़ा लग़ती हैं।

11295
अभी मंज़र बदलते ही,
बदल ज़ाएँग़े सब चेहरे…
बिछड़ते वक़्तक़ा ग़म हैं,
अभी तू नम न क़र आँखें……
                                                  रेनू नय्यर

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