3 June 2026

10721 - 10725 दिल ज़िंदग़ी ज़हन्नम होंठ ग़र्दिश ज़माने इनायत प्यार वफ़ा अंग़ड़ाई मुस्क़ुरा शायरी

 
10721
हम संभाल ही लेंग़े,
ग़र्दिशें सारे ज़मानेक़ी l
तुम क़रते रहो इनायत,
बस मुस्क़ुरानेक़ी ll

10722
दिलसे रोये मग़र होंठोसे मुस्क़ुरा बेठे,
यूँ हीं हम क़िसीसे वफ़ा निभा बेठे,
वो हमें एक़ लम्हा न दे पाए अपने प्यारक़ा,
और हम उनक़े लिये ज़िंदग़ी लुटा बेठे…!

10723
शामिल नहीं हैं ज़िसमें,
तेरी मुस्क़ुराहटें…
वो ज़िंदग़ी क़िसीभी,
ज़हन्नमसे क़म नहीं ll

10724
चाँद अंग़ड़ाईयाँ ले रहा हैं,
चाँदनी मुस्क़ुराने लग़ी हैं l
एक़ भूली हुईसी क़हानी,
फ़िर मुझे याँद आने लग़ी हैं ll

10725
बहुत ख़ूबसूरत हैं,
तेरे साथ ज़िंदग़ीक़ा सफ़र l
तुम वहांसे याँद क़रते हो,
तो हम यहाँसे मुस्क़ुराते हैं......!

2 June 2026

10716 - 10720 ज़िन्दग़ी याँद तमन्ना ग़िरवी पसंद फ़र्क़ क़माल लफ्ज़ इत्तेफ़ाक़ रूठी क़ीमत तरक़ीब बहाने मुस्क़ुरा शायरी

 
10716
हमें बस मुस्क़ुराना पसंद हैं,
फ़िर...
हमारा हो या तुम्हारा...
फ़र्क़ क़्या पड़ता हैं......
!!! 

10717
मुस्क़ुराहट एक़,
क़मालक़ी पहें हैं l
ज़ितना बताती हैं,
उससे क़हीं ज़्यादा छुपाती हैं ll

10718
लफ्ज़ोंक़े इत्तेफ़ाक़में,
यूँ बदलाव क़रक़े देख़ l
तू देख़क़र न मुस्क़ुरा,
बस मुस्क़ुराक़े देख़ !

10719
तू रूठी रूठीसी लग़ती हैं,
क़ोई तरक़ीब बता मनानेक़ी,
मैं ज़िन्दग़ी ग़िरवी रख़ दूंग़ा,
तू क़ीमत बता मुस्क़ुरानेक़ी।

10720
मुस्क़ुरानेक़े अब,
बहाने नहीं ढूंढ़ने पड़ते…
तुझे याँद क़रते हैं तो,
तमन्ना पूरी हो ज़ाती हैं !

1 June 2026

10711 - 10715 दिल रिश्ता क़मज़ोर ड़ोर संग़ीन सयाना बिग़ड़ तड़प मुसीबतअनसुने ख़ामोशी शायरी

 
10711
रिश्तोंक़ी ड़ोर,
तब क़मज़ोर होने लग़ती हैं…
ज़ब दोनों तरफ़से,
ख़ामोशी होने लग़ती हैं !

10712
ज़ब ख़ामोशी होती हैं,
तब दिलक़ी आवाज़ तेज़ होती हैं…
सब सुनते हैं, पर शायद हम ही,
अनसुने रह ज़ाते हैं !

10713
ख़मोशीसे मुसीबत,
और भी सं
ग़ीन होती हैं …
तड़प ऐ दिल तड़पनेसे,
ज़रा तस्कीन होती हैं !

10714
लोग़ क़हते हैं क़ि,
वो बड़ा सयाना हैं
उन्हें क़्या पता,
ख़ामोशीसे उसक़ा रिश्ता पुराना हैं !

10715 
बोलनेसे ज़ब,
बात बिग़ड़ ज़ाए हर बार…
तब रिश्तोंमें ख़ामोशी ही,
भली लग़ती हैं यार !