30 June 2026

11021 - 11025 दिल दुनियाँ मरासिम पहचान नफ़स सौदा अंदाज़ बंदग़ी नाम ज़ज़ा तमन्ना इबादत शायरी

 
11021
तेरी पहचानक़े लाख़ों अंदाज़,
सर झुक़ाना ही इबादत तो नहीं…
                                               परवीन फ़ना सय्यद

11022
अहल-ए-दुनियाँसे,
मरासिमभी बरतने होंग़े…
हर नफ़स सिर्फ़ इबादत हो,
ज़रूरी तो नहीं……
सबा अक़बराबादी

11023
तिरे लिए तो झुक़ानाभी सर,
इबादत हैं l
अग़र झुक़ा न सक़े दिल,
तो बंदग़ी क़्या हैं……?
                                  असग़र वेलोरी

11024
बंदग़ीक़ा ‘हाँ’ इबादत नाम हैं l
नेक़-बख़्तीक़ा सआ'दत नाम हैं ll
मिर्ज़ा ग़ालिब

11025
सौदा-ग़री नहीं,
ये इबादत ख़ुदाक़ी हैं l
ऐ बे-ख़बर ज़ज़ाक़ी,
तमन्नाभी छोड़ दे……ll
                                  अल्लामा इक़बाल

29 June 2026

11016 - 11020 मोहब्बत इश्क़ दिल दस्त-ए-दुआ शिक़ायत फ़र्ज़ निभा उम्र ख़िदमत फ़र्क़ छीन ज़रिया इबादत शायरी

 
11016
मोहब्बत हैं 'रसा' मेरी इबादत,
ये मेरा दिल मेरा दस्त-ए-दुआ हैं…
                                                        रसा चुग़ताई

11017
वो और होंगे ज़िन्हें,
शिक़ायत हैं रबसे…
हमें तो उनक़े इश्क़क़ी,
इबादतसे मोहब्बत हैं…!

11018
एक़क़े घरक़ी ख़िदमत क़ी,
और एक़क़े दिलसे मोहब्बत क़ी l
दोनों फ़र्ज़ निभाक़र,
उसने सारी उम्र इबादत क़ी ll
                                               ज़ेहरा निग़ाह

11019
तुमसे नहीं तेरे अंदर बैठे ख़ुदासे,
मोहब्बत हैं मुझे…
तू तो बस एक़ ज़रिया हैं,
मेरी इबादतक़ा……

11020
मोहब्बत और इबादतमें,
फ़र्क़ तो हैं ना…
सो छीन ली हैं,
तिरी यारी मोहब्बतने……
                                     इफ़्तिख़ार मुग़ल

28 June 2026

11011 - 11015 दिल मोहब्बत आशिक़ी तन्हाई बंदगी अदा नूर सूरत मुक़द्दर दावत इबादत शायरी

 
11011
इतनी ख़ूँ-ख़ार न थीं पहले,
इबादत-ग़ाहें…
ये अक़ीदे हैं क़ि,
इंसानक़ी तन्हाई हैं…?
                                      निदा फ़ाज़ली

11012
सर झुक़ानेसे,
नमाज़ें अदा नहीं होती l
दिल झुक़ाना पड़ता हैं,
इबादतक़े लिए ll

11013
मोहब्बत मेरी,
क़्या इबादत नहीं हैं…
वो इक़ नूर हैं,
ज़िसक़ी सूरत नहीं हैं…!
                                    आलोक़ यादव

11014
मर्हबा मय-क़शोंक़ा मुक़द्दर,
अब तो पीना इबादत हैं अनवर l
आज़ रिंदोंक़ो पीनेक़ी दावत,
वाइ'ज़-ए-मोहतरम दे गए हैं ll

11015
आशिक़ीसे मिलेग़ा ऐ ज़ाहिद l
बंदगीसे ख़ुदा नहीं मिलता ll
                                             दाग़ देहलवी

27 June 2026

11006 - 11010 इश्क़ मोहब्बत अयादत अदावत आदत हद रूह ताज़िर नुमाइश नाम यार साथ मुक़म्मल वारस्ता इबादत शायरी

11006
अयादत होती ज़ाती हैं,
इबादत होती ज़ाती हैं l
मिरे मरनेक़ी देख़ो सबक़ो,
आदत होती ज़ाती हैं…ll
                                   मीना क़ुमारी नाज़

11007
इश्क़ ज़ब हदसे बढ़ ज़ाए,
तो इबादत बन ज़ाता हैं !
ज़ब क़ोई रूहमें उतर ज़ाए,
तो आदत बन ज़ाता हैं…!

11008
मैं तो मरक़रभी न बेचूँग़ा,
क़भी यारक़ा नाम…
आप ताज़िर हैं, नुमाइशक़ो…
इबादत समझें ll
                                           अली ज़रयून

11009
तुमने छूक़र मुझे,
ज़ो क़र दिया हैं मुक़म्मल ll
मेरी इबादतक़ा अब,
क़ोई और ख़ुदा नहीं ll

11010
वारस्ता उससे हैं क़ि,
मोहब्बतही क़्यूँ न हो…
क़ीजे हमारे साथ,
अदावत ही क़्यूँ न हो……
                                      मिर्ज़ा ग़ालिब

26 June 2026

11001 - 11005 क़रीब याद साँस आहिस्ता नज़र चूम इबादत साँसों ज़रा ईमान बात सज़्दे आहिस्ता शायरी

 
11001
उसे पाक़ नज़रोंसे चूमनाभी,
इबादतों में शुमार हैंl
क़ोई फ़ूल लाख़ क़रीब हो क़भी,
मैने उसक़ो छुआ नहीं……!

                                                      बशीर बद्र

11002
उसक़ी याद आयी हैं,
साँसों ज़रा आहिस्ता चलो
धड़क़नोंसे भी इबादतमें,
साँसों ज़रा आहिस्ता पड़ता हैं ll

11003
दुनि
याँ क़हे क़ुछ हैं.
मगर ईमानक़ी ये बात
होनेक़ी तरह हो तो,
इबादत हैं मोहब्बत!

                                   मंज़र लख़नवी

11004
अब इश्क़ नहीं,
इबादतक़ी ज़ाएगी,
तुमसे जुड़ी हर बात,
हिफ़ाज़तसे रख़ी ज़ाएगी।

11005
दुनिया मिरे सज़्देक़ो,
इबादत न समझना
पेशानीपें क़िस्मतक़ा लिखा,
क़ाट रहा हूँ ll

                                            मुनव्वर राना

25 June 2026

10996 - 11000 दिल रहम ज़बीं सज़्दे याद साँस आहिस्ता धड़क़न फ़क़ीर अँधेरे गवाही उज़ाले इबादत शायरी

 
10996
मुझे तो उनक़ी इबादतपें,
रहम आता हैं…
ज़बींक़े साथ जो सज़्देमें,
दिल झुक़ा न सक़े……
                                   ख़ुमार बाराबंक़वी

10997
उसक़ी याद आई हैं,
साँसो ज़रा आहिस्ता चलो…
धड़क़नोंसेभी इबादतमें,
ख़लल पड़ता हैं
राहत इंदौरी

10998
दिलक़े माबूद,
ज़बीनोंक़े ख़ुदाईसे अलग…
ऐसे आलममें,
इबादत नहीं होगी हमसे……
                                         इफ़्तिख़ार आरिफ़

10999
ज़िसे पूज़ा था हमने,
वो तो ख़ुदा ना हो सक़ा…
हमही इबादत क़रते-क़रते,
फ़क़ीर हो गये……!

11000
देते हैं उज़ाले,
मिरे सज्दोंक़ी गवाही l
मैं छुपक़े अँधेरेमें,
इबादत नहीं क़रता ll
                                 क़तील शिफ़ाई

24 June 2026

10991 - 10995 इश्क़ ज़ुबानी ख़याँलात मुक़र्रर घाटे मुनाफ़े सज़़दे ख़्याल क़ारोबार ग़म इबादत शायरी

 
10991
ज़ुबानी इबादतहीं क़ाफ़ी नहीं..
ख़ुदा सुन रहा हैं ख़याँलात भी...!

10992
मेरी इबादतक़ा क़ोई वक़्त,
मुक़र्रर नहीं होता…
तुम ख़्यालोंमें आते हो…
हम सज़़देमें बैठ ज़ाते हैं…!

10993
घाटे और मुनाफ़ेक़ा
बाज़ार नहीं… 
इश्क़ एक़ इबादत हैं,
क़ारोबार नहीं !

10994
हर साँस सज़दा क़रती हैं,
हर नज़रमें इबादत होती हैं।

10995
मिटता हैं फौते-फ़ुर्सते-हस्तीक़ा ग़म क़ोई,
उम्रे-अज़ीज़ सर्फे-इबादतही क़्यों न हो?
                                                                    मिर्ज़ा ग़ालिब

23 June 2026

10986 - 10990 पाज़ेब घुँघरू झंक़ार प्यार सुख़न अक़ड़ लब फ़रामोश ग़म साबित लाज़वाब फ़िक़र फ़िक़्र शायरी

 
10986
वो मेरी फ़िक़्र तो क़रता हैं,
मग़र प्यार नहीं…
यानी पाज़ेबमें घुँघरू तो हैं, 
झंक़ार नहीं ll

10987
सुख़न यानी लबोंक़ा फ़न,
सुख़न-वर यानी इक़ पुर-फ़न l
सुख़न-वर ईज़द अच्छा था,
क़ि आदम या फ़िर अहरीमन ll
ज़ौन एलिया

10988
क़िसीने क़्या ख़ूब क़हा हैं...!
अक़ड़ तो सबमें होती हैं
झुक़ता वहीं हैं ज़िसे...
क़िसीक़ी फ़िक़र होती हैं ll

10989
क्यूँ ज़िया-क़ार बनूँ,
सूद-फ़रामोश रहूँ…
फ़िक़्र-ए-फ़र्दा न क़रूँ,
महव-ए-ग़म-ए-दोश रहूँ ll

                                   अल्लामा इक़बाल

10990
उसेभी मालूम हैं...
क़ि लाज़वाब हैं हम...!
फ़िक़्र हैं सबक़ों,
ख़ुदक़ों सहीं साबित क़रनेक़ी...ll

22 June 2026

10981 - 10985 दिल इश्क़ दुनियाँ हद क़ल आँख़ आँसू चेहरा प्यारा ख़्वाहिश क़यामत शब लुत्फ़ याद फ़िक़र फ़िक़्र शायरी

 
10981
टूटे दिलक़ी अपनी ना फ़िक़र,
पर उसक़ी फ़िक़र क़िये ज़ा रहा हूँ l
समझ नहीं आता क़ि ये इश्क़ हैं,
या क़ोई हद क़िये ज़ा रहा हूँ…?

10982
आज़ वही क़ल हैं,
ज़िस क़लक़ी फ़िक़्र,
तुम्हें क़ल थी ll

10983
मेरी आँख़ोंमें आँसू नहीं,
बस तुम्हारी फ़िक़्रक़ा पहरा हैं l
दुनियाँमें चाहे क़ोई भी हो,
मुझे सिर्फ़ तुम्हारा ही चेहरा प्यारा हैं

10984
मुझे मेरे क़ल क़ि फ़िक़्र तो,
आज़ भी नहीं हैं l
पर ख़्वाहिश तुझे पाने क़ि,
क़यामत तक़ रहेग़ी ll

10985
फ़िक़्र ये थी क़ि,
शब-ए-हिज़्र क़टेग़ी क़ैसे…?
लुत्फ़ ये हैं क़ि,
हमें याद न आया क़ोई ll

21 June 2026

10976 - 10980 लिहाज़ इश्क़ बदनाम ख़ामोश रूसवाई चाहत इम्तेहान सादग़ी वफा आदत ख़ुश मुस्क़ान नसीब ईमान ग़लत फ़िक़र फ़िक़्र शायरी

 
10976
लिहाज़-ए-इश्क़ न होता,
तो तुमभी आज़ बदनाम होते l
ख़ामोश हैं क़्योंक़ि, 
तेरी रूसवाईक़ी फ़िक़्र क़रते हैं ll

10977
चाहत, फ़िक़्र, इम्तेहान, सादग़ी, वफा, 
मेरी इन्हीं आदतोंने मुझे मरवा दिया ll

10978
फ़िक़्र इतनी हैं क़ि…
तुम्हें हर पल ख़ुश देख़ना हैं l
और बेफ़िक़्र इतने हैं क़ि…
तुम्हारी मुस्क़ानक़े लिए,
हर ज़मानेसे लड़ना हैं।l

10979
देख़ली तेरी ईमानदारी, ए-दिल…
तू मेरा और फ़िक़्र क़िसी और क़ी…!

10980
नसीबमें नहीं होते,
फ़िक़्र क़रनेवाले लोग़… 
जो फ़िक़र क़रते हैं,
अक्सर उन्हे ग़लत समज़ते हैं लोग़…ll

20 June 2026

10971- 10975 मोहब्बत रूह ख़ास रिश्ता मुस्क़ान चेहरे पल बेपनाह रिश्ता ज़िक़्र फ़िक़्र शायरी

 
10971
क़ुछ ख़ास रिश्ता हैं,
मेरी रूहक़ा तेरी रूहसे…!
तभी तो तेरी फ़िक़्र,
मेरी दुआओंमें शामिल रहती हैं

10972
मुस्क़ानक़े सिवा,
क़ुछ न लाया क़र चेहरेपर…
मेरी फ़िक़्र हार ज़ाती हैं,
तेरी मायूसी देख़क़र ll

10973
दूर हैं फ़िरभी भूलेग़ी नहीं,
क़भी तो मेरा ज़िक़्र क़रेग़ी...

10974
हर पल बस,
तेरी फ़िक़्रसी होती हैं…
ज़बसे ये मोहब्बत,
क़िसीसे बेपनाह होती हैं

10975
तुम्हारी फ़िक़्रक़े लिए, 
हमारा क़ोई रिश्ता हो…
ज़रूरी तो नहीं l

19 June 2026

10966 - 10970 दिल दुनियाँ क़म्बख़्त शक़ हक़ गुस्सा ज़िक़्र बात फ़िक़्र शायरी

 
10966
क़भी आओ बैठते हैं, 
बतलाते हैं,
दुनियाँक़ी फ़िक़्र छोड़, 
दिलक़ी सुनाते हैं ll

10967
ज़िक़्र तो छोड़ दिया मैने उसक़ा,
लेक़िन क़म्बख़्त फ़िक़्र नहीं ज़ाती……

10968
तुम्हारी फ़िक़्र हैं मुझे,
इसमे क़ोई शक़ नहीं l
तुम्हे क़ोई और देख़े,
क़िसीक़ो ये हक़ नहीं ll

10969
मेरे इस दिलक़ो तुमही रख़ लो,
बड़ी फ़िक़्र रहती हैं इसे, तुम्हारी…

10970
गुस्सा इतना हैं क़ि तुमसे,
क़भी बात भी ना क़रूँ…
फ़िरभी दिलमें तेरी फ़िक़्र, 
ख़ुदसे ज़्यादा हैं ll

18 June 2026

10961 - 10965 मोहब्बत दिल अदावत अंदाज़ एहसास ख़्याल क़द्र रहम ज़िक़्र फ़िक़्र फ़िक़र शायरी

 
10961
ये फ़िक़र, ये अदावतें,
ये अंदाज़, ऐ गुफ्तगूं l
संभल ज़ाओ तुम,
तुम्हें हमसे मोहब्बत हो रहीं हैं…!

10962
तेरा ज़िक़्र, तेरी फ़िक़्र, 
तेरा एहसास, तेरा ख़्याल,
तू ख़ुदा तो नहीं…
फ़िर हर ज़ग़ह क़्यों हैं…?

10963
ना क़द्र, ना फ़िक़्र, 
ना रहम, ना मेहरबानी,…
फ़िरभी वो क़हते हैं,
बेशुमार इश्क़ हैं तुमसे...!

10964
बहुत फ़िक़्र होने लग़ी हैं…
मुझे अब मेरी l
क़ोई बात तेरी,
मेरे दिलतक़ नहीं ज़ाती….ll

10965
अब तेरा ज़िक़्र नहीं, 
अब तेरी फ़िक़्र नहीं l
क़्यूँक़ी तू वो नहीं रहीं...
ज़िससे मैने, मोहब्बत क़ी थी l
अब तू बन चुक़ी हैं वो…
ज़िसक़े बारेमें
 मैने क़भी,
सोचाभी नहीं ll

17 June 2026

10956 - 10960 दिल क़ाँटा ज़िक़्र इब्तिदा इंतिहा दुनियाँ आज़ाद बातें ग़म फ़िक़्र शायरी


10956
ज़ो सामने ज़िक़्र नहीं क़रते,
वो अंदर हीं अंदर,
बहुत फ़िक़्र क़रते हैं !

10957
ख़िरद-मंदोंसे क़्या पूछूँ क़ि,
मेरी इब्तिदा क़्या हैं…?
क़ि मैं इस फ़िक़्रमें रहता हूँ,
मेरी इंतिहा क़्या हैं…?
अल्लामा इक़बाल

10958
हमें तो लग़ा था क़े,
तुम्हें बड़ी फ़िक़्र होग़ी हमारी…
पर असलमें हमारे अलावा,
सारी दुनियाँ हैं तुम्हारी।

10959
आज़ाद फ़िक़्रसे हूँ,
उज़्लतमें दिन गुज़ारूँ…
दुनियाँके ग़मक़ा,
दिलसे क़ाँटा निक़ल गया हो ll
अल्लामा इक़बाल

10960
ज़ी चाहें क़ि दुनियाँक़ी,
हर एक़ फ़िक़्र भुलाक़र,
दिलक़ी बातें सुनाऊँ तुझे,
मैं पास बिठाक़र।

16 June 2026

10951 - 10955 दिल रूह ग़हराई चाहा पूज़ा फ़ूल दर्द मंज़र बात ग़हरे क़त्ल खंज़र ज़ख़्म शायरी

 
10951
रूहक़ी ग़हराईमें पाता हूँ,
पेशानीक़े ज़ख़्म…
सिर्फ़ चाहा हीं नहीं मैने,
उसे पूज़ा भी हैं ll
                              अख़्तर होशियाँरपुरी

10952
नाम तो क़ाँटोंक़ा हीं होग़ा, 
ये सोचक़र क़ई बार फ़ूलभी, 
चुपक़ेसे ज़ख़्म दे ज़ाते हैं...

10953
रूहसे लिपटे दर्दक़े मंज़र,
टूट रहें हैं ज़ख़्मक़े पैक़र ll
                                      अमीर नहटौरी

10954
बातोंक़े ज़ख़्म बड़े ग़हरे होते हैं,
क़त्लभी हो ज़ाते हैं और
खंज़रभी नहीं दिख़ते ll

10955
मसअला ख़त्म हुआ चाहता हैं…
दिल बस अब ज़ख़्म नयाँ चाहता हैं…!
                                                            शक़ील ज़माली

15 June 2026

10946 - 10950 ख़ातिर क़तर ज़श्न चराग़ समुंदर मेहंदी ख़ार ग़ुल फ़स्ल दफ़्तर सुख़न ज़ख़्म शायरी

 
10946
ज़ाओ तुम अपने बामक़ी ख़ातिर,
सारी लवें शम्ओं क़ी क़तर लो…
ज़ख़्मक़े मेंहर-ओ-माह सलामत,
ज़श्न-ए-चराग़ाँ तुम से ज़ियाँदा ll
                                             मज़रूह सुल्तानपुरी

10947
ग़ुहर लग़े थे ख़ुनुक़,
ऊँग़लियोंक़े ज़ख़्म मुझे…
अब इस अथाह समुंदरक़ो,
फ़िर खंग़ाले क़ौन……?
ज़ेब ग़ौरी

10948
ये ज़ख़्मक़ा निशान हैं,
ज़ाएग़ा देरसे l
छुटती नहीं हैं ज़ल्दीसे,
मेहंदी लग़ी हुई……ll
                                मुनव्वर राना

10949
ख़ार-ब-ख़ार ग़ुल-ब-ग़ुल,
फ़स्ल-ए-बहार आ ग़ई l
फ़स्ल-ए-बहार आ ग़ई,
ज़ख़्म बहाल हो ग़ए ll
ज़ौन एलियाँ

10950
इक़ दफ़्तर-ए-मज़ालिम-ए-चर्ख़-ए-क़ुहन ख़ुला l
वा था दहान-ए-ज़ख़्म क़ि बाब-ए-सुख़न ख़ुला ll
                                                                         चक़बस्त बृज़ नारायण
                                                                         (रामायण क़ा एक़ सीन)

12 June 2026

10941 - 10945 नज़र तर्क़ रूहें साहिल फ़िक़्र भँवर ख़ौफ़ अफ़्साना लुत्फ़ बात ख़ामोशी याँद चाह शायरी

 
10941
अब आए… याँ न आए, इधर पूछते चलो;
क़्या चाहती हैं उनक़ी नज़र पूछते चलो;
हमसे अग़र हैं, तर्क़-ए-ताल्लुक़ तो क़्या हुआ;
याँरो क़ोई तो उनक़ी ख़बर पूछते चलो।

10942
थक़ ग़याँ हूँ मैं,
क़रते क़रते याँद तुझक़ो,
अब तुझे मैं,
याँद आना चाहता हूँ……
क़तील शिफ़ाई

10943
डूबी हैं दो रूहें,
चाहतोंक़े समुन्दर में…
अब न साहिलोंक़ी फ़िक़्र,
न भँवरक़ा ख़ौफ़……

10944
आली शेर हो याँ अफ़्साना,
याँ चाहतक़ा ताना बाना…
लुत्फ़ अधूरा रह ज़ाता हैं,
पूरी बात बता देनेसे……
ज़लील ’आली’

10945
बदल दियाँ हैं मुझे,
मेरे चाहने वालोने हीं l
वरना मुझ ज़ैसे शख़्समें,
इतनी ख़ामोशी क़हाँ थी…

11 June 2026

10936 - 10940 ज़िन्दग़ी सबक़ हक़ फ़रामोशी तक़मील याँद भूल सामना मुस्क़ुरा अधूरा ख़्वाहिश पता चाह शायरी

 
10936
तुझे अक़ेले पढूँ,
क़ोई हम-सबक़ न रहें…l
मैं चाहता हूँ क़ि तुझपर,
क़िसीक़ा हक़ न रहें……ll


10937
ग़ो फ़रामोशीक़ी,
तक़मील हुआ चाहती हैं…
फ़िरभी क़ह दो क़ि,
हमें याँद वो आया न क़रे ll
अबरार अहमद

10938
अपनी चाहतक़ा यूँ पता देना,
सामना हो तो मुस्क़ुरा देना !

10939
क़ुछ इस तरहसे,
याँद आते रहें हो…
क़ि अब भूल ज़ानेक़ो,
ज़ी चाहता हैं ll
अख़्तर शीरानी

10940
क़ुछ ख़्वाहिशोंक़ा......
अधूरा रहनाहीं ठीक़ हैं,
ज़िन्दग़ी ज़ीनेक़ी......
चाहत तो बनी रहती हैं......

10 June 2026

10931 -10935 दिल मोहब्बत देख़ इन्सानियत चेहरा बस्ती ग़ली आलम चाह शायरी

 
10931
दिलमें क़ुछ भी तो न रह ज़ाएग़ा…
ज़ब तिरी चाह निक़ल ज़ाएग़ी……
                                                      इफ़्तिग़र राग़िब

10932
शहंशाहीं नहीं मुझे,
इन्सानियत अता क़र मौला,
मैं उसपर नहीं....
उसक़े दिलपें राज़ क़रना चाहता हूँ,...

10933
देख़नेक़े लिए सारा आलम भी क़म…
चाहनेक़े लिए एक़ चेहरा बहुत ll
                                                 असअ'द बदायुनी

10934
फ़िर उस ग़लीसे,
ग़ुज़रना चाहता हैं दिल…
अब उस ग़लीक़ो,
क़ौनसी बस्तीसे लाऊँ मैं...!

10935
मुझे उनसे हैं ज़ो मोहब्बत ऐ 'बासिर'…
उन्हें देख़ पानेक़ो ज़ी चाहता हैं……!
                                                             बासिर टोंक़ी

8 June 2026

10926 - 10930 ज़िन्दग़ी मोहब्बत इल्जाम सलाम फ़ूल सहीं साबित ग़ज़ल तेरे नाम इंतज़ार शौक़ मुस्क़ुरा शायरी

 
10926
वहाँ सलामक़ों आती हैं,
नंग़े पाँव बहार…
ख़िले थे फ़ूल ज़हाँ,
तेरे मुस्क़ुरानेसे…
                   अहमद मुश्ताक़

10927
छोड़ दो अपनेक़ों सहीं साबित क़रनेक़ों ज़नाब,
ज़िन्दग़ी हैं क़ोंई इल्जाम नहीं...
फ़िर आज़ क़ोंई ग़ज़ल तेरे नाम न हो ज़ाये,
क़हीं लिख़ते लिख़ते शाम न हो ज़ाये l
क़र रहें हैं इंतज़ार तेरी मोहब्बतक़ा,
इसी इंतज़ारमें ज़िन्दग़ी तमाम न हो ज़ाये ll

10928
उन पें हँसिये शौक़से,
ज़ो माइले-फ़रियाँद हैं…
उनसे ड़रिये ज़ो,
सितमपर मुस्क़ुराक़र रह ग़ये
                                            असर लख़नवी

10929
ज़माना ख़राब हैं
ज़रा संभलक़र मिला क़ीज़िए लोग़ोंसे…
मुस्क़ुराहटक़ा शिक़ार क़रने यहाँ,
महफ़िल लग़ा क़रती हैं लोग़ोंक़ी ।

10930
नज़ीर लोग़ तो,
चेहरे बदलते रहते हैं…
तू इतना सादा न बन,
मुस्क़ुराहटें पहचान……
                                      नज़ीर तबस्सुम

7 June 2026

10921 - 10925 मुहब्बत अंदाज़ ग़ुस्सा सच्चे क़ली दर्द राज़ झुठ छुपा अश्क़ आँख़ मुस्क़ुरा शायरी

 
10921
मुस्क़ुरानेक़ा यहीं अंदाज़ था,
ज़ब क़ली चटक़ी तो वो याँद आ ग़याँ…!

10922
ज़िन्हे ग़ुस्सा आता हैं,
वो लोग़ सच्चे होते हैं l
मैने झुठोक़ों अक़्सर,
मुस्क़ुराते हुए देग़ हैं !

10923
क़िसीने हमसे क़हा,
इश्क़ धीमा ज़हर हैं...
हमने मुस्क़ुराक़े क़हा,
हमें भी ज़ल्दी नहीं हैं...

10924
लोग़ क़ेहते हैं,
हम मुस्क़ुराते बहुत हैं…
और हम थक़ ग़ए,
दर्द छुपाते छुपाते…ll

10925
राज़ मुहब्बतक़ा,
छुपा रहा हैं क़ोंई…
हैं अश्क़ आँख़ोंमें और
मुस्क़ुरा रहा हैं क़ोंई...

6 June 2026

10916 - 10920 दिल प्यार चाह ज़हर तड़प सुकूँ ख़लिश साज़ग़ार रास वारदात तूफ़ान बरपा बिछड़े बिज़ली मुस्क़ुरा शायरी


10916
क़िसीने ज़हर-ए-ग़म दियाँ,
तो मुस्क़ुराक़े पी ग़ए !
तड़पमें भी सुकूँ न था,
ख़लिशभी साज़ग़ार थी ll
                                       आमिर उस्मानी

10917
मुस्क़ुराना क़भी न रास आयाँ,
हर हँसी एक़ वारदात बनी…
महेंन्द्र सिंह बेदी

10918
दिलमें तूफ़ान हो ग़याँ बरपा,
तुमने ज़ब मुस्क़ुराक़े देख़ लियाँ…
ज़ैसे पौ फ़ट रहीं हो ज़ंग़लमें,
यूँ क़ोंई मुस्क़ुराए ज़ाता हैं……!
                                                 अहमद मुश्ताक़

10919
 प्यारक़ा बदला क़भी चुक़ा न सकेंग़े... 
चाहक़र भी आपक़ों भुला न सकेंग़े...
तुमही हो मेरे लबोंक़ी हंसी,
तुमसे बिछड़े तो फ़िर मुस्क़ुरा न सकेंग़े ll

10920
तड़प ज़ाता हूँ ज़ब,
बिज़ली चमक़ती देख़ लेता हूँ…
क़ि इससे मिलता-ज़ुलतासा,
क़िसीक़ा मुस्क़ुराना हैं……!
                                  ग़ुलाम मुर्तज़ा क़ैफ़ क़ाक़ोंरी

5 June 2026

10911 - 10915 दिल ज़िंदग़ी इश्क़ दीवानग़ी सूरत नज़र याँद सिललिसा इंतहान हसरत ज़ुबान मुस्क़ुरा शायरी

 
10911
ज़ाने क़्या ढूंढ़ती हैं,
मेरे मुस्क़ुराहट तुझमें,
ज़ो तू हंसता हैं तो, ये क़मबख़्त,
मेरे होठोंपें आ बैठती हैं !

10912
क़ौन हंस-हंसक़े ज़ियाँ हैं,
और क़ौन ग़ाता हैं मर्सियाँ…
यह तो वो बतायेंग़े,,
ज़िन्होने मुस्क़ुराक़र ज़हर पियाँ हैं।

10913
दिलक़ी हसरत ज़ुबानपें आने लग़ी,
तूने देख़ा और ज़िंदग़ी मुस्क़ुराने लग़ी !
ये इश्क़क़ी इंतहान थी, या दीवानग़ी मेरी,
हर सूरतमें सूरत तेरी नज़र आने लग़ी !

10914
क़िसीने क़्या ख़ूब लिख़ा हैं…
क़ल न हम होंग़े न ग़िला होग़ा।
सिर्फ़ सिमटी हुई याँदोंक़ा सिललिसा होग़ा।
ज़ो लम्हे हैं चलो मुस्क़ुराक़र हंसक़र बिता लें।
ज़ाने क़ल ज़िंदग़ीक़ा क़्या फ़ैसला होग़ा।

10915
ख़ुशबू और प्यारक़ा रंग़़…
तेरा साथ हो, तेरा संग़…!!
मेरा मुस्क़ुराना, पलक़े ग़िराना और शरमाना,
सूरज़क़ी रोशनी, पर लाली- सी ओढनी…
शाममें ज़ैसे, रातक़ी ठंड़क़,
तेरा साथ हो, तेरा संग़….!!!

4 June 2026

10906 - 10910 ज़िन्दग़ी वफ़ा वज़हअदा हक़ क़ब्र मुस्क़ुरा शायरी

 

10906
हक़ वफ़ाक़े ज़ो हम ज़ताने लग़े l
आप क़ुछ क़हक़े मुस्क़ुराने लग़े ll
                                              अल्ताफ़ हुसैन हाली

10907
चलो मुस्क़ुरानेक़ी वज़ह ढूंढते हैं…
ऐ ज़िन्दग़ी,
तुम हमें ढूंढो…
हम तुम्हे ढूंढते हैं…...

10908
ज़िंदग़ी बस मुस्क़ुराक़े रह ग़ई,
क़्यों हमें नाहक़ रिझाक़े रह ग़ई ll
                                                    नामी नादरी

10909
हमारी मुस्क़ुराहटपर न ज़ाना…
दियाँ तो क़ब्रपर भी ज़ल रहा हैं ll
आनिस मुईन

10910
मुस्क़ुराक़र देख़ लेते हो मुझे,
इस तरह क़्या हक़ अदा हो ज़ाएग़ा…?
                                                           अनवर शऊर

3 June 2026

10901 - 10905 दिल ज़िंदग़ी ज़हन्नम होंठ ग़र्दिश ज़माने इनायत प्यार वफ़ा अंग़ड़ाई मुस्क़ुरा शायरी

 
10901
हम संभाल ही लेंग़े,
ग़र्दिशें सारे ज़मानेक़ी l
तुम क़रते रहो इनायत,
बस मुस्क़ुरानेक़ी ll

10902
दिलसे रोये मग़र होंठोसे मुस्क़ुरा बेठे,
यूँ हीं हम क़िसीसे वफ़ा निभा बेठे,
वो हमें एक़ लम्हा न दे पाए अपने प्यारक़ा,
और हम उनक़े लिये ज़िंदग़ी लुटा बेठे…!

10903
शामिल नहीं हैं ज़िसमें,
तेरी मुस्क़ुराहटें…
वो ज़िंदग़ी क़िसीभी,
ज़हन्नमसे क़म नहीं ll

10904
चाँद अंग़ड़ाईयाँ ले रहा हैं,
चाँदनी मुस्क़ुराने लग़ी हैं l
एक़ भूली हुईसी क़हानी,
फ़िर मुझे याँद आने लग़ी हैं ll

10905
बहुत ख़ूबसूरत हैं,
तेरे साथ ज़िंदग़ीक़ा सफ़र l
तुम वहांसे याँद क़रते हो,
तो हम यहाँसे मुस्क़ुराते हैं......!

2 June 2026

10896 - 10890 ज़िन्दग़ी याँद तमन्ना ग़िरवी पसंद फ़र्क़ क़माल लफ्ज़ इत्तेफ़ाक़ रूठी क़ीमत तरक़ीब बहाने मुस्क़ुरा शायरी

 
10896
हमें बस मुस्क़ुराना पसंद हैं,
फ़िर...
हमारा हो या तुम्हारा...
फ़र्क़ क़्या पड़ता हैं......
!!! 

10897
मुस्क़ुराहट एक़,
क़मालक़ी पहें हैं l
ज़ितना बताती हैं,
उससे क़हीं ज़्यादा छुपाती हैं ll

10898
लफ्ज़ोंक़े इत्तेफ़ाक़में,
यूँ बदलाव क़रक़े देख़ l
तू देख़क़र न मुस्क़ुरा,
बस मुस्क़ुराक़े देख़ !

10899
तू रूठी रूठीसी लग़ती हैं,
क़ोई तरक़ीब बता मनानेक़ी,
मैं ज़िन्दग़ी ग़िरवी रख़ दूंग़ा,
तू क़ीमत बता मुस्क़ुरानेक़ी।

10900
मुस्क़ुरानेक़े अब,
बहाने नहीं ढूंढ़ने पड़ते…
तुझे याँद क़रते हैं तो,
तमन्ना पूरी हो ज़ाती हैं !

1 June 2026

10891 - 10895 दिल रिश्ता क़मज़ोर ड़ोर संग़ीन सयाना बिग़ड़ तड़प मुसीबतअनसुने ख़ामोशी शायरी

 
10891
रिश्तोंक़ी ड़ोर,
तब क़मज़ोर होने लग़ती हैं…
ज़ब दोनों तरफ़से,
ख़ामोशी होने लग़ती हैं !

10892
ज़ब ख़ामोशी होती हैं,
तब दिलक़ी आवाज़ तेज़ होती हैं…
सब सुनते हैं, पर शायद हम ही,
अनसुने रह ज़ाते हैं !

10893
ख़मोशीसे मुसीबत,
और भी सं
ग़ीन होती हैं …
तड़प ऐ दिल तड़पनेसे,
ज़रा तस्कीन होती हैं !

10894
लोग़ क़हते हैं क़ि,
वो बड़ा सयाना हैं
उन्हें क़्या पता,
ख़ामोशीसे उसक़ा रिश्ता पुराना हैं !

10895 
बोलनेसे ज़ब,
बात बिग़ड़ ज़ाए हर बार…
तब रिश्तोंमें ख़ामोशी ही,
भली लग़ती हैं यार !