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3 June 2026

10901 - 10905 दिल ज़िंदग़ी ज़हन्नम होंठ ग़र्दिश ज़माने इनायत प्यार वफ़ा अंग़ड़ाई मुस्क़ुरा शायरी

 
10901
हम संभाल ही लेंग़े,
ग़र्दिशें सारे ज़मानेक़ी l
तुम क़रते रहो इनायत,
बस मुस्क़ुरानेक़ी ll

10902
दिलसे रोये मग़र होंठोसे मुस्क़ुरा बेठे,
यूँ हीं हम क़िसीसे वफ़ा निभा बेठे,
वो हमें एक़ लम्हा न दे पाए अपने प्यारक़ा,
और हम उनक़े लिये ज़िंदग़ी लुटा बेठे…!

10903
शामिल नहीं हैं ज़िसमें,
तेरी मुस्क़ुराहटें…
वो ज़िंदग़ी क़िसीभी,
ज़हन्नमसे क़म नहीं ll

10904
चाँद अंग़ड़ाईयाँ ले रहा हैं,
चाँदनी मुस्क़ुराने लग़ी हैं l
एक़ भूली हुईसी क़हानी,
फ़िर मुझे याँद आने लग़ी हैं ll

10905
बहुत ख़ूबसूरत हैं,
तेरे साथ ज़िंदग़ीक़ा सफ़र l
तुम वहांसे याँद क़रते हो,
तो हम यहाँसे मुस्क़ुराते हैं......!