12 September 2026

11346 - 11350 दिल धड़क़न प्यार मोहब्बत याद आरज़ू हाल मदहोश ग़ुज़र होश ग़ले हसरत फ़ना याद कब्ज़ा इज़ाज़त शायरी

 
11346
तुम्हारी यादमें,
ज़ीनेक़ी आरज़ू हैं अभी…
कुछ अपना हाल सँभालूँ,
अग़र इज़ाज़त हो……!
                                      ज़ौन एलिया 

11347
छुपा लूँ तुझक़ों अपनी बाहोंमें इस तरह,
क़ि हवाभी ग़ुज़रनेक़ी इज़ाज़त मांग़े,
मदहोश हो ज़ाऊँ तेरे प्यारमें इस तरह,
क़ि होशभी आनेक़ी इज़ाज़त मांग़े।

11348
तुमक़ो ग़ले लग़ा लूँ मैं,
इतनीसी इज़ाज़त दे दो हमें...
तुम्हे अपने दिलक़ी धड़क़न सुनानेक़ी,
हसरत हैं मेरी...

11349
फ़ना होनेक़ी,
इज़ाज़त ली नहीं ज़ाती,
ये मोहब्बत हैं ज़नाब…
पूछक़े क़ी नहीं ज़ाती...

11340
तेरी यादोंने कर लिया हैं,
मेरे दिलो-दिमागपें कब्ज़ा,
अब किसी गमको,
अंदर आनेक़ी इज़ाज़त ही नहीं !

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