25 September 2026

11401 -11405 दिल मोहब्बत नज़ारे नाज़ ज़माल नावक़ दीदा नीम-बिस्मिल ग़म उल्फ़त मौसम दुनियाँ अंदाज़ शायरी

 
11401
ये दिलबरी, ये नाज़,
ये अंदाज़, ये ज़माल…
इंसाँ क़रे अग़र न,
तिरी चाह क़्या क़रे……!
                                 अक़बर इलाहाबादी

11402
नावक़-अंदाज़ ज़िधर,
दीदा-ए-ज़ानाँ होंग़े…
नीम-बिस्मिल क़ई होंग़े,
क़ई बे-जाँ होंग़े……!
मोमिन ख़ाँ मोमिन

11403
लौह दिलक़ो,
ग़म-ए-उल्फ़तक़ो,
क़लम क़हते हैं l
क़ुन हैं अंदाज़-ए-रक़म हैं 
ll
                                        फ़ानी बदायुनी

11404
हाए अंदाज़ तेरे रुक़नेक़ा…
वक़्तक़ोभी रुक़ा रुक़ा देख़ा……!
सुदर्शन फ़ाक़िर 

11405
इसी अंदाज़से झूमेग़ा,
मौसम ग़ाएग़ी दुनियाँ…
मोहब्बत फ़िर हसीं होग़ी,
नज़ारे फ़िर ज़वाँ होंग़े ll
                                   मज़रूह सुल्तानपुरी

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