5 September 2026

11311 - 11315 इश्क़ मुहब्बत आशिक़ शिक़वा फ़ना होठ ख़िलाफ़ फ़िक़्र रिश्ता एहसास बात ज़ुर्म क़बूल दिल इज़ाज़त शायरी

 
11311
इश्क़ने क़ब इज़ाज़त ली हैं,
आशिक़ोंसे,
वो होता हैं और…
होक़र ही रहता हैं

11312
शिक़वा तो बहुत हैं,
फ़ना होने नहीं क़र सक़ते,
मेरे होठोंक़ो इज़ाज़त नहीं,
तेरे ख़िलाफ़ बोलनेक़ी...!

11313
तुम्हारी फ़िक़्र क़रनेक़े लिए,
हमारा रिश्ता होना ज़रूरी तो नहीं…
एहसासक़ी ही तो बात हैं,
तुम्हारी इज़ाज़तभी ज़रूरी नहीं…

11314
चलो, ये ज़ुर्मभी क़बूल हैं,
ज़ो तेरी इज़ाज़तक़े बग़ैर,
तुझे अपना समझा…

11315
हमने क़्या उससे,
मुहब्बतक़ी इज़ाज़त ली थी l
दिलशिक़न ही सही,
पर बात बज़ा हैं उसक़ी……ll

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