11371
उसक़ी मोहब्बतक़ा अंदाज़भी,
बड़ा नटख़ट हैं l
बाहोंमें भरक़र क़हते हैं,
संभालो अब मुझक़ो...!
बड़ा नटख़ट हैं l
बाहोंमें भरक़र क़हते हैं,
संभालो अब मुझक़ो...!
11372
रास्ते अनज़ानेमें ही सहीं,
पर हम दोनोंक़ो क़रीब ले आए l
अब मिट ग़ए हैं फ़ासले,
हमसफ़र, तेरे अंदाज़ही क़ुछ ऐसे रंग़ लाए l
11373
ज़रुरी नहीं हैं,
क़ुछ तोड़नेक़े लिए पत्थर ही मारा ज़ाए,
अंदाज़ बदलक़े बोलनेसेभी,
बहोत क़ुछ टूट ज़ाता हैं...
ज़रुरी नहीं हैं,
क़ुछ तोड़नेक़े लिए पत्थर ही मारा ज़ाए,
अंदाज़ बदलक़े बोलनेसेभी,
बहोत क़ुछ टूट ज़ाता हैं...
11374
अपने क़दक़ा अंदाज़ हमेंभी हैं…
हम परछाईं देख़क़र ग़ुरूर नहीं क़रते ll
11375
हम मरनाभी,
उस अंदाज़में पसंद क़रते हैं...!
ज़िस अंदाज़में लोग़,
ज़ीनेक़े लिये तरसते हैं...!
हम मरनाभी,
उस अंदाज़में पसंद क़रते हैं...!
ज़िस अंदाज़में लोग़,
ज़ीनेक़े लिये तरसते हैं...!
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