9 September 2026

11331 - 11335 बात दिल दर्द सज़्दा पासबाँ आस्ताँ दफ़्न ज़न्नत यार क़ूच मदफ़न परवाना सदक़ा इबादत ख़्वाहिश इज़ाज़त शायरी

 
11331
वो आए हैं ज़रा मैं बात क़र लूँ…
इज़ाज़त ऐ दिल-ए-दर्द-आश्ना दे ll
                                                    मुज़तर ख़ैराबादी

11332
मिली सज़्दाक़ी इज़ाज़त,
ज़ूँही पासबाँसे पहले…
मुझे मिल ग़ई ख़ुदाई,
तेरे आस्ताँसे पहले……!
अफ़क़र मोहानी

11333
अब इज़ाज़त दफ़्नक़ी हो ज़ाए,
तो ज़न्नत मिले ;
यारक़े क़ूचेमें हमने,
ज़ा-ए-मदफ़नक़ी तलाश ll
                                             अक़बर वारसी मेरठी

11334
ग़र इज़ाज़त हो तो,
परवानाक़ी तरह ;
सदक़ा होनेक़ो तुम्हारे,
आइए……
मीर मोहम्मद बेदार

11335
एक़ ख़्वाहिश पूरी हो,
इबादतक़े बगैर…
वो आक़र ग़ले लग़ा ले,
मेरी इज़ाज़तक़े बगैर……!

No comments:

Post a Comment