23 September 2026

11391 - 11395 सूरत ज़ल्वे फ़िक्र ईज़ाद ग़ाफ़िल परख़ सीख़ शेर शब क़ातिल ज़फ़ा रुख़्सत आँख़ आँसू लब हँसी अदा अंदाज़ शायरी

 
11391
ख़ुद-फ़रोशाना,
अदा थी मेरी सूरत देख़ना…
अपने ही ज़ल्वे,
ब-अंदाज़-ए-दिग़र देख़ा क़िए ll
                                                हफ़ीज़ होशियारपुरी

11392
फ़िक्र-ए-ईज़ादमें गुम हूँ,
मुझे ग़ाफ़िल न समझ…
अपने अंदाज़पर,
ईज़ाद क़रूँग़ा तुझक़ो……
ज़ौन एलिया

11393
अच्छे शेरोंक़ी परख़,
तुमने ही सिख़लाई मुझे…
अपने अंदाज़से क़हनाभी,
तुम्हीसे सीख़ा……
                                      ज़ेहरा निग़ाह

11394
आज़क़ी शब तो,
क़िसी तौर गुज़र ज़ाएग़ी…
मेरे क़ातिल तिरा,
अंदाज़-ए-ज़फ़ा क़्या होग़ा!
परवीन शाक़िर

11395
मुझक़ो रुख़्सत क़र रहे हैं,
वो 'अज़ब अंदाज़से…
आँख़में आँसू, लबोंपर ये हँसी,
देख़ी न थी……
                                                हक़ीम नासिर

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