11381
आफ़त तो हैं,
वो नाज़भी, अंदाज़भी, लेक़िन…
मरता हूँ मैं ज़िसपर,
वो अदा और ही क़ुछ हैं...!
अमीर मीनाई
11382
अंदाज़ क़ुछ और,
नाज़-ओ-अदा औरही क़ुछ हैं…
ज़ो बात हैं वो नाम-ए-ख़ुदा,
औरही क़ुछ हैं...!
नज़ीर अक़बराबादी
11383
अब मेरी ग़ज़लक़ाभी,
तक़ाज़ा हैं ये तुझसे…
अंदाज़-ओ-अदाक़ा,
क़ोई उस्लूब नया हो…!
अतहर नफ़ीस
अब मेरी ग़ज़लक़ाभी,
तक़ाज़ा हैं ये तुझसे…
अंदाज़-ओ-अदाक़ा,
क़ोई उस्लूब नया हो…!
अतहर नफ़ीस
11384
सरसे पा तक़ सुपुर्दग़ीक़ी अदा ;
एक़ अंदाज़-ए-तुर्क़मानी भी ll
फ़िराक़ गोरख़पुरी
11385
क़्या क़हूँ तुझसे क़ि,
क़्या देख़ा हैं तुझमें मैने…
इशवा-ओ-ग़मज़ा-ओ-अंदाज़-ओ-अदा,
क़्या क़्या क़ुछ……!
मीर तक़ी मीर
क़्या क़हूँ तुझसे क़ि,
क़्या देख़ा हैं तुझमें मैने…
इशवा-ओ-ग़मज़ा-ओ-अंदाज़-ओ-अदा,
क़्या क़्या क़ुछ……!
मीर तक़ी मीर
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