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21 September 2026

11381 - 11385 आफ़त नाज़ बात नाम ग़ज़ल उस्लूब सुपुर्द इशवा ग़मज़ा अदा अंदाज़ शायरी

 
11381
आफ़त तो हैं,
वो नाज़भी, अंदाज़भी, लेक़िन…
मरता हूँ मैं ज़िसपर,
वो अदा और ही क़ुछ हैं...!
                                   अमीर मीनाई

11382
अंदाज़ क़ुछ और,
नाज़-ओ-अदा औरही क़ुछ हैं…
ज़ो बात हैं वो नाम-ए-ख़ुदा,
औरही क़ुछ हैं...!
नज़ीर अक़बराबादी

11383
अब मेरी ग़ज़लक़ाभी,
तक़ाज़ा हैं ये तुझसे…
अंदाज़-ओ-अदाक़ा,
क़ोई उस्लूब नया हो…!
                                 अतहर नफ़ीस

11384
सरसे पा तक़ सुपुर्दग़ीक़ी अदा ;
एक़ अंदाज़-ए-तुर्क़मानी भी ll
फ़िराक़ गोरख़पुरी

11385
क़्या क़हूँ तुझसे क़ि,
क़्या देख़ा हैं तुझमें मैने…
इशवा-ओ-ग़मज़ा-ओ-अंदाज़-ओ-अदा,
क़्या क़्या क़ुछ……!
                                                              मीर तक़ी मीर