11576
महफ़िलमें मुस्क़ुराना मेरा मिज़ाज़ बन ग़या,
तन्हाईमें रोना भी एक़ राज़ बन ग़या,
दिलक़े ज़ख्मक़ो चेहरेसे ज़ाहिर न होने दिया,
यही ज़िन्दग़ीमें मेरे ज़ीनेक़ा अंदाज़ बन ग़या…
11577
इक़ लहज़ा बहे आँसू,
इक़ लहज़ा हँसी आई…
सीख़े हैं नए दिलने,
अंदाज़-ए-शक़ेबाई…
सूफ़ी ग़ुलाम मुस्ताफ़ा तबस्सुम
11578
फ़िर इसी अंदाज़से,
नज़रें मिलाते ज़ाइए…
देख़ने वालोंक़ी नज़रें,
आज़माते ज़ाइए……
माहिरुल क़ादरी
फ़िर इसी अंदाज़से,
नज़रें मिलाते ज़ाइए…
देख़ने वालोंक़ी नज़रें,
आज़माते ज़ाइए……
माहिरुल क़ादरी
11579
हम ख़ूब हैं वाक़िफ़,
तिरे अंदाज़-ए-क़मरसे…
ये तार निक़लता हैं,
क़ोई दिलक़े ग़ुहरसे…ll
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
11580
कैसे अंदाज़-ए-शौक़में,
क़ह दिया तुमने अलविदा…
जैसे सदियोंसे तेरे दिलपर,
कोई बोझ थे हम……
कैसे अंदाज़-ए-शौक़में,
क़ह दिया तुमने अलविदा…
जैसे सदियोंसे तेरे दिलपर,
कोई बोझ थे हम……