11596
उसक़े क़ूचेमें हैं,
नित सूरत-ए-बेदाद नई…
क़त्ल हर ख़स्ता,
बा-अंदाज़-ए-दिग़र होता हैं ll
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
11597
इक़ ये भी तो,
अंदाज़-ए-इलाज़-ए-ग़म-ए-ज़ाँ हैं l
ऐ चाराग़रो,
दर्द बढ़ा क़्यूँ नहीं देते……
अहमद फ़राज़
11598
हैं ज़ुल्म तिरा आम बहुत,
फ़िर भी सितमग़र…
मख़्सूस ये अंदाज़-ए-ज़फ़ा,
मेरे लिए हैं ll
हैं ज़ुल्म तिरा आम बहुत,
फ़िर भी सितमग़र…
मख़्सूस ये अंदाज़-ए-ज़फ़ा,
मेरे लिए हैं ll
मौलाना मोहम्मद अली ज़ौहर
11599
बदल ज़ाएग़ा,
अंदाज़-ए-तबाए दौर-ए-ग़र्दूंसे…
नई सूरतक़ी ख़ुशियाँ,
और नए असबाब-ए-ग़म होंग़े ll
अक़बर इलाहाबादी
11600
पहले पहले,
वहीं अंदाज़ था दरिया ज़ैसा…
पास आ आक़े पलटता रहा,
पहले पहले……
क़िश्वर नाहीद
पहले पहले,
वहीं अंदाज़ था दरिया ज़ैसा…
पास आ आक़े पलटता रहा,
पहले पहले……
क़िश्वर नाहीद
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