6 November 2026

11596 - 11600 सूरत क़ूचे क़त्ल इलाज़ ग़म दर्द चाराग़र मख़्सूस सितम ज़फ़ा ज़ुल्म सूरत ख़ुशि अंदाज़ शायरी

 
11596
उसक़े क़ूचेमें हैं,
नित सूरत-ए-बेदाद नई…
क़त्ल हर ख़स्ता,
बा-अंदाज़-ए-दिग़र होता हैं 
ll
                                   मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

11597
इक़ ये भी तो,
अंदाज़-ए-इलाज़-ए-ग़म-ए-ज़ाँ हैं l
ऐ चाराग़रो,
दर्द बढ़ा क़्यूँ नहीं देते……
अहमद फ़राज़

11598
हैं ज़ुल्म तिरा आम बहुत,
फ़िर भी सितमग़र…
मख़्सूस ये अंदाज़-ए-ज़फ़ा,
मेरे लिए हैं 
ll
                           मौलाना मोहम्मद अली ज़ौहर

11599
बदल ज़ाएग़ा,
अंदाज़-ए-तबाए दौर-ए-ग़र्दूंसे…
नई सूरतक़ी ख़ुशियाँ,
और नए असबाब-ए-ग़म होंग़े ll
अक़बर इलाहाबादी

11600
पहले पहले,
वहीं अंदाज़ था दरिया ज़ैसा…
पास आ आक़े पलटता रहा,
पहले पहले……
                                              क़िश्वर नाहीद

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