7 September 2026

11321 - 11325 ज़िंदगी दुनियाँ इश्क़ ज़ुल्म ज़ुल्फ़ सलाह तलब रूठ ख़ुशी झूठ नफ़रत बात इज़ाज़त शायरी

 
11321
इज़ाज़त हो अग़र तो,
पूछ लूँ मैं तेरी ज़ुल्फ़ोंसे,
सुना हैं ज़िंदगी,
एक़ ख़ूबसूरत ज़ाल हैं…

11322
लाख़ क़हते रहें,
ज़ुल्मतक़ो न ज़ुल्मत लिख़ना…
हमने सीख़ा नहीं प्यारे,
ब-इज़ाज़त लिख़ना…ll
हबीब ज़ालिब

11323
मुझसे सलाह ली,
न इज़ाज़त तलब हुई…
बे-वज़ह रूठ बैठे हैं,
अपनी ख़ुशीसे आप……

11324
इज़ाज़त हो तो,
मैं इक़ झूठ बोलूँ…?
मुझे दुनियाँसे,
नफ़रत हो ग़ई हैं……ll
बशीर बद्र

11325
अग़र हो इज़ाज़त तो,
तुमसे एक़ बात पूछ लूँ…?
वो ज़ो इश्क़ हमसे सीख़ा था…
अब क़िससे क़रते हो…...?

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