29 September 2026

11421 - 11425 प्यार आईने होश सबा तक़ल्लुम सहर आग़ाज़ तबस्सुम शरारत अंदाज़ शायरी

 
11421
अंदाज़ अपना देख़ते हैं,
आईनेमें वो…!
और ये भी देख़ते हैं,
क़ोई देख़ता न हो……!!!
                                     निज़ाम रामपुरी

11422
बहक़े बहक़े ही,
अंदाज़-ए-बयाँ होते हैं…
ज़ब आप होते हैं तो,
होश क़हाँ होते हैं……?

11423
सबा और उसक़ा,
अंदाज़-ए-तक़ल्लुम…
सहर और उसक़ा,
आग़ाज़-ए-तबस्सुम…!
                             फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

11424
इस प्यारक़ा अंदाज़ क़ुछ ऐसा हैं,
क़्या बताये ये राज़ क़ैसा हैं…?
क़ौन क़हता हैं क़ि आप चाँदसे हो…
सच तो ये हैं क़ि ख़ुद चाँद आप ज़ैसा हैं…!

11425
अंदाज़में शोख़ीमें,
शरारतमें हयामें…
वाँ एक़ न इक़ बात,
निक़लती ही रहेग़ी……!
                                 वहशत क़लक़त्तवी

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