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22 June 2026

10981 - 10985 दिल इश्क़ दुनियाँ हद क़ल आँख़ आँसू चेहरा प्यारा ख़्वाहिश क़यामत शब लुत्फ़ याद फ़िक़र फ़िक़्र शायरी

 
10981
टूटे दिलक़ी अपनी ना फ़िक़र,
पर उसक़ी फ़िक़र क़िये ज़ा रहा हूँ l
समझ नहीं आता क़ि ये इश्क़ हैं,
या क़ोई हद क़िये ज़ा रहा हूँ…?

10982
आज़ वही क़ल हैं,
ज़िस क़लक़ी फ़िक़्र,
तुम्हें क़ल थी ll

10983
मेरी आँख़ोंमें आँसू नहीं,
बस तुम्हारी फ़िक़्रक़ा पहरा हैं l
दुनियाँमें चाहे क़ोई भी हो,
मुझे सिर्फ़ तुम्हारा ही चेहरा प्यारा हैं

10984
मुझे मेरे क़ल क़ि फ़िक़्र तो,
आज़ भी नहीं हैं l
पर ख़्वाहिश तुझे पाने क़ि,
क़यामत तक़ रहेग़ी ll

10985
फ़िक़्र ये थी क़ि,
शब-ए-हिज़्र क़टेग़ी क़ैसे…?
लुत्फ़ ये हैं क़ि,
हमें याद न आया क़ोई ll