10901
निग़ह-ए-यार,
ख़ुद तड़प उठती…
शर्त-ए-अव्वल,
ख़राब होना था……
ज़िग़र मुरादाबादी
10902
मेरी फ़रियादसे वो तड़प ज़ाएँग़े,
मेरे दिलक़ो मलाल इसक़ा होग़ा…?
मग़र क़्या ये क़म हैं क़ि,
वो बे-नक़ाब आएँग़े…
मरनेवालेक़ा अरमाँ,
निक़ल ज़ाएग़ा……
अनवर मिर्ज़ापुरी
10903
तड़प बिज़लीसे पाई,
हूरसे पाक़ीज़ग़ी पाई……
हरारत ली,
नफ़स-हा-ए-मसीह-ए-इब्न-ए-मरयमसे !
अल्लामा इक़बाल
तड़प बिज़लीसे पाई,
हूरसे पाक़ीज़ग़ी पाई……
हरारत ली,
नफ़स-हा-ए-मसीह-ए-इब्न-ए-मरयमसे !
अल्लामा इक़बाल
10904
क़भी हमभी तड़पमें बिज़ली थे,
अब तो क़रवटभी ली नहीं ज़ाती…
ज़लील मानिक़पूरी
10905
ये ज़मीं क़िस क़दर सज़ाई ग़ई,
ज़िंदग़ीक़ी तड़प बढ़ाई ग़ई……
साहिर लुधियानवी
ये ज़मीं क़िस क़दर सज़ाई ग़ई,
ज़िंदग़ीक़ी तड़प बढ़ाई ग़ई……
साहिर लुधियानवी
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