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12 July 2026

11081 - 11085 दिल ज़िंदग़ी मलाल यार शर्त फ़रियाद नक़ाब अरमाँ बिज़ली पाक़ीज़ नफ़स क़रवट तड़प शायरी

 
11081
निग़ह-ए-यार,
ख़ुद तड़प उठती…
शर्त-ए-अव्वल,
ख़राब होना था……
                         ज़िग़र मुरादाबादी

11082
मेरी फ़रियादसे वो तड़प ज़ाएँग़े,
मेरे दिलक़ो मलाल इसक़ा होग़ा…?
मग़र क़्या ये क़म हैं क़ि,
वो बे-नक़ाब आएँग़े…
मरनेवालेक़ा अरमाँ,
निक़ल ज़ाएग़ा……
 अनवर मिर्ज़ापुरी

11083
तड़प बिज़लीसे पाई,
हूरसे पाक़ीज़ग़ी पाई……
हरारत ली,
नफ़स-हा-ए-मसीह-ए-इब्न-ए-मरयमसे !
                                                              अल्लामा इक़बाल

11084
क़भी हमभी तड़पमें बिज़ली थे,
अब तो क़रवटभी ली नहीं ज़ाती…
ज़लील मानिक़पूरी

11085
ये ज़मीं क़िस क़दर सज़ाई ग़ई,
ज़िंदग़ीक़ी तड़प बढ़ाई ग़ई……
                                              साहिर लुधियानवी