18 July 2026

11096 - 11100 ज़िंदग़ी इश्क़ क़ातिल घुटन उदासी अश्क़ रुस्वाई क़हानी रस्म ज़ालिम अदा इज़ाज़त फ़रियाद तड़प शायरी

 
11096
घुटन तड़पन उदासी,
अश्क़ रुस्वाई अक़ेलापन…
बग़ैर इनक़े अधूरी इश्क़क़ी,
हर इक़ क़हानी हैं……
नीरज़ ग़ोस्वामी

11097
नया बिस्मिल हूँ मैं,
वाक़िफ़ नहीं रस्म-ए-शहादतसे…
बता दे तू ही ऐ ज़ालिम,
तड़पनेक़ी अदा क़्या हैं
चक़बस्त बृज़ नारायण

11098
सिख़लाई फ़रिश्तोंक़ों,
आदमक़ी तड़प उसने…
आदमक़ो सिख़ाता हैं,
आदाब-ए-ख़ुदावंदी……
                                  अल्लामा इक़बाल

11099
ये सच हैं चंद लम्होंक़े लिए,
बिस्मिल तड़पता हैं l
फ़िर इसक़े बअ'द,
सारी ज़िंदग़ी क़ातिल तड़पता हैं…ll
ख़ुशबीर सिंह शाद

11100
न तड़पनेक़ी इज़ाज़त हैं,
न फ़रियादक़ी हैं…
घुटक़े मर ज़ाऊँ, ये मर्ज़ी…
मिरे सय्यादक़ी हैं
                                        शाद लख़नवी

No comments:

Post a Comment