11121
मेरी उम्मीदोंक़ा हासिल,
मिरी क़ाविशक़ा सिला…
एक़ बे-नाम,
ज़िय्यतक़े सिवा क़ुछभी नहीं……!
साहिर लुधियानवी
11122
मँज़िले बड़ी ज़िद्दी होती हैं,
हासिल क़हाँ नसीबसे होती हैं !
मग़र वहाँ तूफ़ानभी हार ज़ाते हैं,
ज़हाँ क़श्तियाँ ज़िदपर होती हैं !
11123
इमारत क़िया शिक़वा-ए-ख़ुसरवीभी हो,
तो क़्या हासिल…
न ज़ोर-ए-हैदरी तुझमें,
न इस्तिग़ना-ए-सलमानी ll
अल्लामा इक़बाल
11124
क़्या हासिल क़रोग़े,
उसे हासिल क़र,
ज़ो तुम्हें हासिल ही नहीं
क़रना चाहता।
11125
मेरी दरमाँदा ज़वानीक़ी तमन्नाओंक़े मुज़्महिल,
ख़्वाबक़ी ताबीर बता दे मुझक़ो,
तेरे दामनमें ग़ुलिस्तांभी हैं वीरानेभी,
मेरा हासिल मेरी तक़दीर बता दे मुझक़ो ।
साहिर लुधियानवी
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