1 July 2026

10846 - 10850 दौड़ दिल पत्ती क़ुबूल इल्तिज़ा सितारे ज़ुहद तक़्वा हक़्क़ मय-क़शी आदत क़ाम इबादत शायरी


10846

ऐ ख़ुदा,
मेरी रग़ोंमें दौड़ ज़ा l
शाख़-ए-दिलपर,
इक़ हरी पत्ती निक़ाल !
                               फ़रहत एहसास

10847
क़ुबूल इस बारग़हमें,
इल्तिज़ा क़ोई नहीं होती…
इलाही या मुझीक़ो,
इल्तिज़ा क़रना नहीं आता ll
चराग़ हसन हसरत

10848
सितारे तोड़ लिए हमने,
ज़ुहद-ओ-तक़्वाक़े…l
मग़र ज़ो हक़्क़-ए-इबादत था,
वो अदा न हुआ……ll
                                           क़लीम अहमदाबादी

10849
क़भी अल्लाह-मियाँ पूछेंग़े,
तब उनक़ो बताएँग़े…
क़िसीक़ो क़्यूँ बताएँ हम,
इबादत क़्यूँ नहीं क़रते……l
फ़रहत एहसास

10850
न मयक़शी न इबादत,
हमारी आदत हैं l
क़ि सामने क़ोई क़ाम आ ग़या,
तो क़र लेना……ll
                                                 नातिक़ गुलावठी

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