30 June 2026

11021 - 11025 दिल दुनियाँ मरासिम पहचान नफ़स सौदा अंदाज़ बंदग़ी नाम ज़ज़ा तमन्ना इबादत शायरी

 
11021
तेरी पहचानक़े लाख़ों अंदाज़,
सर झुक़ाना ही इबादत तो नहीं…
                                               परवीन फ़ना सय्यद

11022
अहल-ए-दुनियाँसे,
मरासिमभी बरतने होंग़े…
हर नफ़स सिर्फ़ इबादत हो,
ज़रूरी तो नहीं……
सबा अक़बराबादी

11023
तिरे लिए तो झुक़ानाभी सर,
इबादत हैं l
अग़र झुक़ा न सक़े दिल,
तो बंदग़ी क़्या हैं……?
                                  असग़र वेलोरी

11024
बंदग़ीक़ा ‘हाँ’ इबादत नाम हैं l
नेक़-बख़्तीक़ा सआ'दत नाम हैं ll
मिर्ज़ा ग़ालिब

11025
सौदा-ग़री नहीं,
ये इबादत ख़ुदाक़ी हैं l
ऐ बे-ख़बर ज़ज़ाक़ी,
तमन्नाभी छोड़ दे……ll
                                  अल्लामा इक़बाल

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