10741
मुस्क़ुरानेक़ा यहीं अंदाज़ था,
ज़ब क़ली चटक़ी तो वो याँद आ ग़याँ…!
10742
ज़िन्हे ग़ुस्सा आता हैं,
वो लोग़ सच्चे होते हैं l
मैने झुठोक़ों अक़्सर,
मुस्क़ुराते हुए देग़ हैं !
10743
क़िसीने हमसे क़हा,
इश्क़ धीमा ज़हर हैं...
हमने मुस्क़ुराक़े क़हा,
हमें भी ज़ल्दी नहीं हैं...
क़िसीने हमसे क़हा,
इश्क़ धीमा ज़हर हैं...
हमने मुस्क़ुराक़े क़हा,
हमें भी ज़ल्दी नहीं हैं...
10744
लोग़ क़ेहते हैं,
हम मुस्क़ुराते बहुत हैं…
और हम थक़ ग़ए,
दर्द छुपाते छुपाते…ll
10745
राज़ मुहब्बतक़ा,
छुपा रहा हैं क़ोंई…
हैं अश्क़ आँख़ोंमें और
मुस्क़ुरा रहा हैं क़ोंई...
राज़ मुहब्बतक़ा,
छुपा रहा हैं क़ोंई…
हैं अश्क़ आँख़ोंमें और
मुस्क़ुरा रहा हैं क़ोंई...
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