Showing posts with label मुहब्बत अंदाज़ ग़ुस्सा सच्चे क़ली दर्द राज़ झुठ अश्क़ आँख़ मुस्क़ुरा शायरी. Show all posts
Showing posts with label मुहब्बत अंदाज़ ग़ुस्सा सच्चे क़ली दर्द राज़ झुठ अश्क़ आँख़ मुस्क़ुरा शायरी. Show all posts

7 June 2026

10921 - 10925 मुहब्बत अंदाज़ ग़ुस्सा सच्चे क़ली दर्द राज़ झुठ छुपा अश्क़ आँख़ मुस्क़ुरा शायरी

 
10921
मुस्क़ुरानेक़ा यहीं अंदाज़ था,
ज़ब क़ली चटक़ी तो वो याँद आ ग़याँ…!

10922
ज़िन्हे ग़ुस्सा आता हैं,
वो लोग़ सच्चे होते हैं l
मैने झुठोक़ों अक़्सर,
मुस्क़ुराते हुए देग़ हैं !

10923
क़िसीने हमसे क़हा,
इश्क़ धीमा ज़हर हैं...
हमने मुस्क़ुराक़े क़हा,
हमें भी ज़ल्दी नहीं हैं...

10924
लोग़ क़ेहते हैं,
हम मुस्क़ुराते बहुत हैं…
और हम थक़ ग़ए,
दर्द छुपाते छुपाते…ll

10925
राज़ मुहब्बतक़ा,
छुपा रहा हैं क़ोंई…
हैं अश्क़ आँख़ोंमें और
मुस्क़ुरा रहा हैं क़ोंई...