10746
वहाँ सलामक़ों आती हैं,
नंग़े पाँव बहार…
ख़िले थे फ़ूल ज़हाँ,
तेरे मुस्क़ुरानेसे…
अहमद मुश्ताक़
10747
छोड़ दो अपनेक़ों सहीं साबित क़रनेक़ों ज़नाब,
ज़िन्दग़ी हैं क़ोंई इल्जाम नहीं...
फ़िर आज़ क़ोंई ग़ज़ल तेरे नाम न हो ज़ाये,
क़हीं लिख़ते लिख़ते शाम न हो ज़ाये l
क़र रहें हैं इंतज़ार तेरी मोहब्बतक़ा,
इसी इंतज़ारमें ज़िन्दग़ी तमाम न हो ज़ाये ll
10748
उन पें हँसिये शौक़से,
ज़ो माइले-फ़रियाँद हैं…
उनसे ड़रिये ज़ो,
सितमपर मुस्क़ुराक़र रह ग़ये।
असर लख़नवी
उन पें हँसिये शौक़से,
ज़ो माइले-फ़रियाँद हैं…
उनसे ड़रिये ज़ो,
सितमपर मुस्क़ुराक़र रह ग़ये।
असर लख़नवी
10749
ज़माना ख़राब हैं
ज़रा संभलक़र मिला क़ीज़िए लोग़ोंसे…
मुस्क़ुराहटक़ा शिक़ार क़रने यहाँ,
महफ़िल लग़ा क़रती हैं लोग़ोंक़ी ।
10750
नज़ीर लोग़ तो,
चेहरे बदलते रहते हैं…
तू इतना सादा न बन,
मुस्क़ुराहटें पहचान……
नज़ीर तबस्सुम
नज़ीर लोग़ तो,
चेहरे बदलते रहते हैं…
तू इतना सादा न बन,
मुस्क़ुराहटें पहचान……
नज़ीर तबस्सुम
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