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4 June 2026

10726 - 10730 ज़िन्दग़ी वफ़ा वज़हअदा हक़ क़ब्र मुस्क़ुरा शायरी

 

10726
हक़ वफ़ाक़े ज़ो हम ज़ताने लग़े l
आप क़ुछ क़हक़े मुस्क़ुराने लग़े ll
                                              अल्ताफ़ हुसैन हाली

10727
चलो मुस्क़ुरानेक़ी वज़ह ढूंढते हैं…
ऐ ज़िन्दग़ी,
तुम हमें ढूंढो…
हम तुम्हे ढूंढते हैं…...

10728
ज़िंदग़ी बस मुस्क़ुराक़े रह ग़ई,
क़्यों हमें नाहक़ रिझाक़े रह ग़ई ll
                                                    नामी नादरी

10729
हमारी मुस्क़ुराहटपर न ज़ाना…
दियाँ तो क़ब्रपर भी ज़ल रहा हैं ll
आनिस मुईन

10730
मुस्क़ुराक़र देख़ लेते हो मुझे,
इस तरह क़्या हक़ अदा हो ज़ाएग़ा…?
                                                           अनवर शऊर