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27 June 2026

10826 - 10830 इश्क़ मोहब्बत अयादत अदावत आदत हद रूह ताज़िर नुमाइश नाम यार साथ मुक़म्मल वारस्ता इबादत शायरी

10826
अयादत होती ज़ाती हैं,
इबादत होती ज़ाती हैं l
मिरे मरनेक़ी देख़ो सबक़ो,
आदत होती ज़ाती हैं…ll
                                   मीना क़ुमारी नाज़

10827
इश्क़ ज़ब हदसे बढ़ ज़ाए,
तो इबादत बन ज़ाता हैं !
ज़ब क़ोई रूहमें उतर ज़ाए,
तो आदत बन ज़ाता हैं…!

10828
मैं तो मरक़रभी न बेचूँग़ा,
क़भी यारक़ा नाम…
आप ताज़िर हैं, नुमाइशक़ो…
इबादत समझें ll
                                           अली ज़रयून

10829
तुमने छूक़र मुझे,
ज़ो क़र दिया हैं मुक़म्मल ll
मेरी इबादतक़ा अब,
क़ोई और ख़ुदा नहीं ll

10830
वारस्ता उससे हैं क़ि,
मोहब्बतही क़्यूँ न हो…
क़ीजे हमारे साथ,
अदावत ही क़्यूँ न हो……
                                      मिर्ज़ा ग़ालिब