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29 June 2026

10836 - 10340 मोहब्बत इश्क़ दिल दस्त-ए-दुआ शिक़ायत फ़र्ज़ निभा उम्र ख़िदमत फ़र्क़ छीन ज़रिया इबादत शायरी

 
10836
मोहब्बत हैं 'रसा' मेरी इबादत,
ये मेरा दिल मेरा दस्त-ए-दुआ हैं…
                                                        रसा चुग़ताई

10837
वो और होंगे ज़िन्हें,
शिक़ायत हैं रबसे…
हमें तो उनक़े इश्क़क़ी,
इबादतसे मोहब्बत हैं…!

10838
एक़क़े घरक़ी ख़िदमत क़ी,
और एक़क़े दिलसे मोहब्बत क़ी l
दोनों फ़र्ज़ निभाक़र,
उसने सारी उम्र इबादत क़ी ll
                                               ज़ेहरा निग़ाह

10839
तुमसे नहीं तेरे अंदर बैठे ख़ुदासे,
मोहब्बत हैं मुझे…
तू तो बस एक़ ज़रिया हैं,
मेरी इबादतक़ा……

10840
मोहब्बत और इबादतमें,
फ़र्क़ तो हैं ना…
सो छीन ली हैं,
तिरी यारी मोहब्बतने……
                                     इफ़्तिख़ार मुग़ल