इक़ शक़्ल हमें फ़िर भाई हैं,
इक़ सूरत दिलमें समाई हैं l
हम आज़ बहुत सरशार सही,
पर अग़ला मोड़ ज़ुदाई हैं ll
अतहर नफ़ीस
11187
ज़ुदाईने सिख़ाया हैं,
तन्हा रहना क़्या हैं,
वरना पहले तो साथक़ा,
मतलबही क़ुछ और था।
11188
ज़ुदा क़िसीसे क़िसीक़ा,
ग़रज़ हबीब न हो…
ये दाग़ वो हैं क़ि,
दुश्मनक़ोभी नसीब न हो ll
नज़ीर अक़बराबादी
ज़ुदा क़िसीसे क़िसीक़ा,
ग़रज़ हबीब न हो…
ये दाग़ वो हैं क़ि,
दुश्मनक़ोभी नसीब न हो ll
नज़ीर अक़बराबादी
11189
अल्फ़ाज़ क़म पड़ ज़ाते हैं,
तुझे बतानेमें,
क़ितना मुश्क़िल हैं,
तेरी ज़ुदाई सहनेमें।
11190
तिरी तलाशमें निक़ले तो,
इतनी दूर ग़ए…
क़ि हमसे तय न हुए,
फ़ासले ज़ुदाईक़े ll
ज़ुनैद हज़ीं लारी
तिरी तलाशमें निक़ले तो,
इतनी दूर ग़ए…
क़ि हमसे तय न हुए,
फ़ासले ज़ुदाईक़े ll
ज़ुनैद हज़ीं लारी
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