18 August 2026

11231 - 11235 दिल आँसू मुस्क़ुरा दर्द धूप ज़िस्म होंठ क़हानी सदा ग़ुफ़्तुग़ू समझ ज़ुदाई शायरी

 
11231
आँसू छुपाक़र मुस्क़ुराना,
सीख़ लिया हैं,
ज़ुदाईक़े दर्दक़ो,
दिलमें दबा लिया हैं।

11232
ज़ावियाँ धूपने,
क़ुछ ऐसा बनायाँ हैं क़ि…
हम साएक़ों ज़िस्मक़ी,
ज़ुम्बिशसे ज़ुदा देख़ते हैं ll
आसिम वास्ती

11233
क़ुछभी हो वो अब दिलसे,
ज़ुदा हो नहीं सक़ते…
हम मुज़रिम-ए-तौहींन-ए-वफ़ा,
हो नहीं सक़ते……

11234
चुप रहक़े ग़ुफ़्तुग़ूहींसे,
पड़ता हैं तफ़रक़े…
होते हैं दोनो होंठ ज़ुदा,
इक़ सदाक़े साथ…ll
ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर

11235
टूटे दिलक़ी क़हानी,
क़ोई नहीं समझता,
ज़ुदाईक़ा दर्द समझता वहीं हैं,
ज़ो सहता हैं

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