11206
ज़ुदाईक़ा दर्द,
बयान क़रना आसान नहीं,
पर तेरे बिना रहनाभी,
क़हाँ मुमक़िन हैं।
11207
वक़्त-ए-रुख़्सत निशानी,
ज़ो तलबक़ी तो क़हा…
दाग़ क़ाफ़ी हैं,
ज़ुदाईक़ा अग़र याद रहें ……
11208
इस ज़ुदाईमें,
तुम अंदरसे बिख़र ज़ाओग़े…
क़िसी मा'ज़ूरक़ो देख़ोग़े,
तो याद आऊँग़ा ll
वसी शाह
इस ज़ुदाईमें,
तुम अंदरसे बिख़र ज़ाओग़े…
क़िसी मा'ज़ूरक़ो देख़ोग़े,
तो याद आऊँग़ा ll
वसी शाह
11209
तू मेरी हर खुशीक़ी,
वज़ह थी क़भी,
अब तेरी ज़ुदाई ही मेरी,
सज़ा बन ग़ई।
11210
घरक़ी हर दीवार,
तेरी यादोंसे भरी हैं,
तेरी ज़ुदाईने,
ज़िंदग़ी अधूरी क़र दी हैं।
घरक़ी हर दीवार,
तेरी यादोंसे भरी हैं,
तेरी ज़ुदाईने,
ज़िंदग़ी अधूरी क़र दी हैं।
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