10796
लिहाज़-ए-इश्क़ न होता,
तो तुमभी आज़ बदनाम होते l
ख़ामोश हैं क़्योंक़ि,
तेरी रूसवाईक़ी फ़िक़्र क़रते हैं ll
10797
चाहत, फ़िक़्र, इम्तेहान, सादग़ी, वफा,
मेरी इन्हीं आदतोंने मुझे मरवा दिया ll
10798
फ़िक़्र इतनी हैं क़ि…
तुम्हें हर पल ख़ुश देख़ना हैं l
और बेफ़िक़्र इतने हैं क़ि…
तुम्हारी मुस्क़ानक़े लिए,
हर ज़मानेसे लड़ना हैं।l
फ़िक़्र इतनी हैं क़ि…
तुम्हें हर पल ख़ुश देख़ना हैं l
और बेफ़िक़्र इतने हैं क़ि…
तुम्हारी मुस्क़ानक़े लिए,
हर ज़मानेसे लड़ना हैं।l
10799
देख़ली तेरी ईमानदारी, ए-दिल…
तू मेरा और फ़िक़्र क़िसी और क़ी…!
10800
नसीबमें नहीं होते,
फ़िक़्र क़रनेवाले लोग़…
जो फ़िक़र क़रते हैं,
अक्सर उन्हे ग़लत समज़ते हैं लोग़…ll
नसीबमें नहीं होते,
फ़िक़्र क़रनेवाले लोग़…
जो फ़िक़र क़रते हैं,
अक्सर उन्हे ग़लत समज़ते हैं लोग़…ll