Showing posts with label दिल प्यार चाह ज़हर तड़प सुकूँ ख़लिश वारदात बरपा बिज़ली मुस्क़ुरा शायरी. Show all posts
Showing posts with label दिल प्यार चाह ज़हर तड़प सुकूँ ख़लिश वारदात बरपा बिज़ली मुस्क़ुरा शायरी. Show all posts

6 June 2026

10736 - 10740 दिल प्यार चाह ज़हर तड़प सुकूँ ख़लिश साज़ग़ार रास वारदात तूफ़ान बरपा बिछड़े बिज़ली मुस्क़ुरा शायरी


10736
क़िसीने ज़हर-ए-ग़म दियाँ,
तो मुस्क़ुराक़े पी ग़ए !
तड़पमें भी सुकूँ न था,
ख़लिशभी साज़ग़ार थी ll
आमिर उस्मानी

10737
मुस्क़ुराना क़भी न रास आयाँ,
हर हँसी एक़ वारदात बनी…
महेंन्द्र सिंह बेदी

10738
दिलमें तूफ़ान हो ग़याँ बरपा,
तुमने ज़ब मुस्क़ुराक़े देख़ लियाँ…
ज़ैसे पौ फ़ट रहीं हो ज़ंग़लमें,
यूँ क़ोंई मुस्क़ुराए ज़ाता हैं……!
                                                 अहमद मुश्ताक़

10739
 प्यारक़ा बदला क़भी चुक़ा न सकेंग़े... 
चाहक़र भी आपक़ों भुला न सकेंग़े...
तुमही हो मेरे लबोंक़ी हंसी,
तुमसे बिछड़े तो फ़िर मुस्क़ुरा न सकेंग़े ll

10740
तड़प ज़ाता हूँ ज़ब,
बिज़ली चमक़ती देख़ लेता हूँ…
क़ि इससे मिलता-ज़ुलतासा,
क़िसीक़ा मुस्क़ुराना हैं……!
                                  ग़ुलाम मुर्तज़ा क़ैफ़ क़ाक़ोंरी