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19 June 2026

10966 - 10970 दिल दुनियाँ क़म्बख़्त शक़ हक़ गुस्सा ज़िक़्र बात फ़िक़्र शायरी

 
10966
क़भी आओ बैठते हैं, 
बतलाते हैं,
दुनियाँक़ी फ़िक़्र छोड़, 
दिलक़ी सुनाते हैं ll

10967
ज़िक़्र तो छोड़ दिया मैने उसक़ा,
लेक़िन क़म्बख़्त फ़िक़्र नहीं ज़ाती……

10968
तुम्हारी फ़िक़्र हैं मुझे,
इसमे क़ोई शक़ नहीं l
तुम्हे क़ोई और देख़े,
क़िसीक़ो ये हक़ नहीं ll

10969
मेरे इस दिलक़ो तुमही रख़ लो,
बड़ी फ़िक़्र रहती हैं इसे, तुम्हारी…

10970
गुस्सा इतना हैं क़ि तुमसे,
क़भी बात भी ना क़रूँ…
फ़िरभी दिलमें तेरी फ़िक़्र, 
ख़ुदसे ज़्यादा हैं ll