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20 June 2026

10971- 10975 मोहब्बत रूह ख़ास रिश्ता मुस्क़ान चेहरे पल बेपनाह रिश्ता ज़िक़्र फ़िक़्र शायरी

 
10971
क़ुछ ख़ास रिश्ता हैं,
मेरी रूहक़ा तेरी रूहसे…!
तभी तो तेरी फ़िक़्र,
मेरी दुआओंमें शामिल रहती हैं

10972
मुस्क़ानक़े सिवा,
क़ुछ न लाया क़र चेहरेपर…
मेरी फ़िक़्र हार ज़ाती हैं,
तेरी मायूसी देख़क़र ll

10973
दूर हैं फ़िरभी भूलेग़ी नहीं,
क़भी तो मेरा ज़िक़्र क़रेग़ी...

10974
हर पल बस,
तेरी फ़िक़्रसी होती हैं…
ज़बसे ये मोहब्बत,
क़िसीसे बेपनाह होती हैं

10975
तुम्हारी फ़िक़्रक़े लिए, 
हमारा क़ोई रिश्ता हो…
ज़रूरी तो नहीं l