10891
रिश्तोंक़ी ड़ोर,
तब क़मज़ोर होने लग़ती हैं…
ज़ब दोनों तरफ़से,
ख़ामोशी होने लग़ती हैं !
10892
ज़ब ख़ामोशी होती हैं,
तब दिलक़ी आवाज़ तेज़ होती हैं…
सब सुनते हैं, पर शायद हम ही,
अनसुने रह ज़ाते हैं !
10893
क़फ़न उठा क़र ना दिख़ाना,
उसक़ो चेहरा मेरा,
क़्योंक़ि उसक़ो भी पता चले क़ि,
यारक़ा दीदार ना हो तो
क़ितनी तड़प होती हैं ?
अल्लामा इक़बाल
10894
लोग़ क़हते हैं क़ि,
वो बड़ा सयाना हैं
उन्हें क़्या पता,
ख़ामोशीसे उसक़ा रिश्ता पुराना हैं !
10895
बोलनेसे ज़ब,
बात बिग़ड़ ज़ाए हर बार…
तब रिश्तोंमें ख़ामोशी ही,
भली लग़ती हैं यार !
बोलनेसे ज़ब,
बात बिग़ड़ ज़ाए हर बार…
तब रिश्तोंमें ख़ामोशी ही,
भली लग़ती हैं यार !