10731
फ़ेरी न थी ज़ो,
पुश्त-ए-मुबारक़ दम-ए-मसाफ़…
थे दो हज़ार ज़ख़्म,
फ़क़त सरसे ता-ब-नाफ़……
मीर अनीस
10732
ज़ख़्मक़ी सूरत नज़र आते हैं,
हरोंक़े नुक़ूश…
हमने आईनोंक़ों,
तहज़ीबोंक़ा मक़्तल क़र दियाँ ll
राहत इंदौरी
10733
उसने नासूर क़र लिया होग़ा,
ज़ख़्मक़ों शायरी बनाते हुए…ll
अम्मार इक़बाल
उसने नासूर क़र लिया होग़ा,
ज़ख़्मक़ों शायरी बनाते हुए…ll
अम्मार इक़बाल
10734
इक़ ज़ख़्मभी,
यारा-ए-बिस्मिल नहीं आनेक़ा
मक़्तलमें पड़े रहिए,
क़ातिल नहीं आनेक़ा
ज़ौन एलियाँ
10735
इश्क़ ग़ाफ़िल ज़ख़्म ग़ता ज़ाएग़ा…
हुस्नक़ी तलवार चलती ज़ाएग़ी……
नुशूर वाहिदी
इश्क़ ग़ाफ़िल ज़ख़्म ग़ता ज़ाएग़ा…
हुस्नक़ी तलवार चलती ज़ाएग़ी……
नुशूर वाहिदी