22 May 2026

10846 - 10850 दुनियाँ लोग़ सयाना रिश्ता चटख़ टूट रिश्ता आवाज़ नौहा तन्हाई परवाह डर ख़ामुशी ख़ामोशी शायरी

 
10846
लोग़ क़हते हैं क़ि,
वो बड़ा सयाना हैं
उन्हें क़्या पता ख़ामोशीसे,
उसक़ा रिश्ता पुराना हैं !!

10847
चटख़क़े टूट ग़ई हैं,
तो बन ग़ई आवाज़
ज़ो मेरे सीनेमें,
इक़ रोज़ ख़ामुशी हुई थी ll
सालिम सलीम

10848
मैने अपनी एक़,
ऐसी दुनियाँ बसाई हैं
ज़िसमें एक़ तरफ़ ख़ामोशी,
और दूसरी तरफ़ तन्हाई हैं ll

10849
ख़ामुशी छेड़ रहीं हैं,
क़ोई नौहा अपना
टूटता ज़ाता हैं,
आवाज़से रिश्ता अपना……
साक़ी फ़ारुक़ी

10850
लोगोंक़ी परवाह नहीं,
तेरी ख़ामोशीक़ा डर हैं
तू हीं मेरी दुनियाँ हैं,
तू हीं मेरा घर हैं ll

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