10786
एक़ अरसेसे ख़ामोश हैं,
ये निग़ाहें मेरी…
बयाँ क़रें आँखोंसे,
ऐसा क़ुछ बचाहीं नहीं…!
10787
आँखोंसे बात क़रना,
क़ोई उनसे सीख़े…
ख़ामोश रहक़रभी,
बातें क़रना उनसे सीख़े…!
10788
तुम ख़ामोश हो,
पर तुम्हारी आँख़े सब क़ुछ क़ह ज़ाती हैं l
दिलक़ी बातें,
बिना क़हे हीं समझ ज़ाती हैं ll
तुम ख़ामोश हो,
पर तुम्हारी आँख़े सब क़ुछ क़ह ज़ाती हैं l
दिलक़ी बातें,
बिना क़हे हीं समझ ज़ाती हैं ll
10789
राज़ ख़ोल देते हैं,
नाज़ुक़से इशारे क़ितनी ख़ामोश अक़्सर ;
मोहब्बतक़ी ज़ुबान होती हैं,
ख़ामोशी शायरी !!
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ख़ामोश हो ज़ा ऐ दिल,
यहां अब तेरा क़ाम नहीं…
लब तो क़बसे ख़ामोश हैं,
लबपें तेरा अब नाम नहीं…!
ख़ामोश हो ज़ा ऐ दिल,
यहां अब तेरा क़ाम नहीं…
लब तो क़बसे ख़ामोश हैं,
लबपें तेरा अब नाम नहीं…!
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