10761
लबोंक़ों रख़ना चाहते हैं ख़ामोश,
पर दिल क़हनेक़ो बेक़रार हैं l
मोहब्बत हैं तुमसे,
हाँ, मोहब्बत बेशुमार हैं ll
10765
लब-ए-ख़ामोशक़ा,
सारे ज़हाँमें बोलबाला हैं,
वहीं महफ़ूज़ हैं यहाँ,
ज़िसक़ी ज़ुबांपें ताला हैं....
लब-ए-ख़ामोशक़ा,
सारे ज़हाँमें बोलबाला हैं,
वहीं महफ़ूज़ हैं यहाँ,
ज़िसक़ी ज़ुबांपें ताला हैं....
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