5 May 2026

10761 - 10765 दिल मोहब्बत महफ़िल परवाना ज़बाँ इज़हार इरादा तेवर महफ़ूज़ लब ख़ामोश शायरी

 
10761
लबोंक़ों रख़ना चाहते हैं ख़ामोश,
पर दिल क़हनेक़ो बेक़रार हैं l
मोहब्बत हैं तुमसे,
हाँ, मोहब्बत बेशुमार हैं ll

10762
ज़ाने क़्या महफ़िल--परवानामें,
देग़ उसने l
फ़िर ज़बाँ ख़ुल सक़ी,
शम्अ ज़ो ख़ामोश हुई ll
अलीम मसरूर

10763
क़ोई हंग़ामा--हयात नहीं,
रात ख़ामोश हैं सहर ख़ामोश ll

                                          वाहिद प्रेमी

10764
इज़हार--मुद्दआक़ा,
इरादा था आज़ क़ुछ
तेवर तुम्हारे देख़क़े,
ख़ामोश हो ग़या……
शाद अज़ीमाबादी

10765
लब--ख़ामोशक़ा,
सारे ज़हाँमें बोलबाला हैं,
वहीं महफ़ूज़ हैं यहाँ,
ज़िसक़ी ज़ुबांपें ताला हैं....

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