10861
अज़ीब शोर मचाने लग़े हैं,
सन्नाटे ये…
क़िस तरहक़ी ख़मोशी,
हर इक़ सदामें हैं……
आसिम वास्ती
10682
इज़हारपें भारी हैं,
ख़मोशीक़ा तक़ल्लुम l
हर्फ़ोंक़ी ज़बां और हैं,
आँख़ोंक़ी ज़बां और…ll
हनीफ़ अख़ग़र
10683
ख़मोशीमें हर बात बन ज़ाए हैं;
ज़ो बोले हैं दीवाना क़हलाए हैं ll
क़लीम आज़िज़
ख़मोशीमें हर बात बन ज़ाए हैं;
ज़ो बोले हैं दीवाना क़हलाए हैं ll
क़लीम आज़िज़
10684
एक़ दिन मेरी ख़ामुशीने मुझे,
लफ़्ज़क़ी ओटसे इशारा क़ियाँ !
अंज़ुम सलीमी
10685
याँर सब ज़म्अ हुए,
रातक़ी ख़ामोशीमें ;
क़ोई रोक़र तो क़ोई,
बाल बनाक़र आया ll
अहमद मुश्ताक़
याँर सब ज़म्अ हुए,
रातक़ी ख़ामोशीमें ;
क़ोई रोक़र तो क़ोई,
बाल बनाक़र आया ll
अहमद मुश्ताक़
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