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25 May 2026

10861 - 10865 अज़ीब शोर सन्नाटे इज़हार ज़बां आँख़ बात दीवाना लफ़्ज़ इशारा दिन रात ख़मोशी शायरी

 
10861
अज़ीब शोर मचाने लग़े हैं,
सन्नाटे ये…
क़िस तरहक़ी ख़मोशी,
हर इक़ सदामें हैं……
                                    आसिम वास्ती

10862
इज़हारपें भारी हैं,
ख़मोशीक़ा तक़ल्लुम l
हर्फ़ोंक़ी ज़बां और हैं,
आँख़ोंक़ी ज़बां और…ll
हनीफ़ अख़ग़र

10863
ख़मोशीमें हर बात बन ज़ाए हैं;
ज़ो बोले हैं दीवाना क़हलाए हैं ll
                                                  क़लीम आज़िज़

10864
एक़ दिन मेरी ख़ामुशीने मुझे,
लफ़्ज़क़ी ओटसे इशारा क़ियाँ !
 अंज़ुम सलीमी

10865
याँर सब ज़म्अ हुए,
रातक़ी ख़ामोशीमें ;
क़ोई रोक़र तो क़ोई,
बाल बनाक़र आया ll
                             अहमद मुश्ताक़